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हरियाणा नहीं, रिरियाणा

क्या बंसी बजायी गई, भजन किये गए और देवी को प्रसन्न किया गया। आदमी चड्डी बनियान के बिना रह सकता है, बिजली के बिना नहीं। ससुर के नातियों ने हरियाणा का ‘ह’ हर लिया है और इसे ‘रिरियाणा’ बना दिया है। रिरियाना। हरियाणवियों को देखकर ‘रियानवियों’ की याद आती है। पानी के लिए रिरियाना। बिजली के लिए रिरियाना। और तो और ….. बहुओं के लिए रिरियाना। हाए हंत । हेए हे हे हे

मैं हरियाणा में तो पैदा नहीं हुआ, लेकिन मेरा ननिहाल हरियाणा में है। स्कूल के दिनों में गर्मियों की छुट्टियों में हर साल जगाधरी जाना होता था, जहां से हर दूसरे-तीसरे रोज मामा के साथ यमुनानगर जाता था और यमुना में नहाता था। साफ.-सुथरी सड़क, दोनों तरफ हरे-भरे पेड़, पक्षियों की चहचहाट। सुन्दर और शांत। इस सम्बन्ध के कारण यूपी के मुझ भैये को हरियाणा हमेशा अच्छा लगा है। जब हमारा यूपी विकास के मामले में ठीक तरह से जाग्रत भी नहीं हुआ था, तब हरियाणा में बंसीलाल की सरकार विकास का काम शुरू कर चुकी थी, गांव-गांव में ट्यूब वैल शुरू हो गए थे और बिजली पहुंच रही थी। इसलिए पिछले दिनों जब गुडग़ांव में एक फ्लैट लिया और देखा कि घंटों बिजली गायब रहती है, तो बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका लगा।

सोसायटी में बैकअप की व्यवस्था थी, इसलिए दिक्कत नहीं हुई। लेकिन जब सोसायटी का बिल आया तो सचमुच बिजली का झटका लगा। आठ हजार रूपये का बिल। मैं बार-बार देखता और झटका बार-बार लगता। बिल। झटका। झटका। बिल। हर झटके के बाद लगने वाले झटके की तीव्रता बढ़ जाती। रिटायर आदमी। श्क्या नंगी नहाएए क्या निचोड़ेश् की तर्ज पर इस मंहगाई के जमाने में क्या खाएं और क्या बचाएं। बिजली के बिल ने इतना गहरा असर डाला कि लगा मैं महीनों से बीमार हूं। न खाने को मन करे, न पढऩे को। न मालिश को मन करे, न नहाने को। और इतना बड़ा झटका लगने के बाद गर्मी में एसी तो क्या पंखा चलाने का भी मन न हो। न नींद आए। न बैठा जाए। लगे जैसे अन्दर कुछ जल गया है, और जैसे किसी बिजली के तार के जलने की गंध आ रही है। बैचेन होता तो कुछ देर फ्रिज में आधा-चौथाई सिर घुसेड़ लेता, लेकिन इस प्रक्रिया में एक दिन दूध का भगौना गिर गया। उसके नीचे गुंथा हुआ आटा रखा था। गरीबी तो नहीं देखी थी, मगर उस दिन ‘गरीबी में आटा गीला’ जैसे मुहावरे का अर्थ समझ में आया और अपने उन पूर्वजों के प्रति मन कृतज्ञता से भर गया, जिन्होंने ऐसे मुहावरे गढ़े। अज्ञेय ने कहा है कि दु:ख आदमी को मांजता है। गीले आटे के यथार्थ ने मुझे मांजा तो नहीं व्याकुल जरूर कर दिया। पत्नी अच्छी है। उसने मेरे घर में कभी बेलन का प्रयोग रोटी बेलने के अलावा किसी दूसरे काम के लिए नहीं किया।

पापड़ तो वह बिले बिलाए लाती थी और लिज्जत पापड़ भंडार की महिमा बढ़ाती थी। तब तक नरेन्द्र मोदी जैसे लोगों ने तो लिज्जत पापड़ का शायद नाम भी न सुना हो। सो पिटने की तो दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं थी, अलबत्ता कई दिनों तक उसके वाक्यों के बेलन जरूर पड़ते। ऐसी स्थिति में आदमी न चाहकर भी दार्शनिक हो जाता है और जीवन की निर्रथकता के बारे में सोचने लगता है। बेकार। बिल्कुल बेकार। बुरा जीवन बुरा। बिजली हो तो बुरा न हो तो उससे भी ज्यादा बुरा। बचपन में गर्मियों की छुट्टियों में ननिहाल में बिजली नहीं लगी थी। मगर तब कभी गर्मी नहीं महसूस की। नानी दिन में पंखा झलती थी और रात को छत पर सुलाती थी जहां तारों भरे आसमान के नीचे ठंडी हवा बहती थी। बिजली के बिना वे दिन कितने प्रसन्न दिन थे। सोचने लगा कि क्या इसी दिन के लिए हरियाणा राज्य बना था। क्या इसी दिन के लिए हरियाणा के लालों ने विकास का काम अपने हाथ में लिया था। अन्याय। घोर अन्याय। बिजली नहीं होती तो कई बार पानी की भी तंगी हो जाती है। मुख्यमंत्री महोदय मुक्त हस्त से दिल्ली को पानी देते रहते हैं और हम जैसे रिटायरों के घरों में पानी की किल्लत हो जाती है। अन्याय। घोर अन्याय। अपने लोगों की जमीनें कौडिय़ों के भावों में खरीदकर दिल्ली और बाहर वालों को बेची जा रही हैं।

कई जमाई राजाओं को उपकृत किया जा रहा है और टांग अड़ाने वाले खेमकाओं की टांगें तोड़ी जा रही हैं। अन्याय। घोर अन्याय। इसी के लिए क्या बंसी बजायी गई, भजन किये गए और देवी को प्रसन्न किया गया। आदमी चड्डी बनियान के बिना रह सकता है, बिजली के बिना नहीं। ससुर के नातियों ने हरियाणा का ‘ह’ हर लिया है और इसे ‘रियाणा’ बना दिया है। ‘रियाना’। हरियाणवियों को देखकर ‘रियानवियों’ की याद आती है। पानी के लिए रिरियाना। बिजली के लिए रिरियाना। और तो और … बहुओं के लिए रिरियाना। हाए हंत। हेए हे हे हे ।

 

मधुसूदन आनंद

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