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संभावना शेष है!

हुड्डा जब 2005 में सत्ता में आए थे उनका वायदा था कि वे बिजली के बकाया बिलों को माफ कर देंगे। सत्ता में आते ही सरकार ने अपना वायदा पूरा भी किया। 1600 करोड़ रुपए के बकाया को माफ कर दिया गया। सरकार की शर्त थी कि किसान आगे से कोई बकाया नहीं रखेगा और बिलों का नियमित भुगतान करेगा। सरकार ने इस वायदे को पूरा करके अपनी पीठ जमकर थपथपाई और कहा कि हमने बकाया बिलों की वर्षों से चली आ रही समस्या को हमेशा के लिए दफन कर दिया है।
हरियाणा की भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार का नंबर वन हरियाणा का शोर धीमा पड़ गया है। अब बहुत धीमे से कहा जा रहा है – ‘सबसे आगे हरियाणा’। इसका कारण है कि 2009 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं से जो वायदे और घोषणाएं की गई थीं, वे या तो अमल में नहीं लाए गए या फ्लॉप साबित हुए। इन योजनाओं को गेम चेंजर मान कर पेश किया गया था लेकिन चुनावी नतीजे हुड्डा की उम्मीदों से काफी नीचे रहे। किसी प्रकार जोड़-तोड़ से सरकार बनी किंतु सरकार के कई मंत्रियों के कारनामों ने ऊपर से लेकर नीचे तक की सरकारी मशीनरी में शिथिलता उत्पन्न कर दी। दूसरा चुनाव जीतने के उत्साह में कई विकास योजनाओं की घोषणा करने से पूर्व उस पर होम वर्क नहीं हुआ। वहीं कुछ कामयाब होने वाली योजनाएं सरकार में इच्छाशक्ति के अभाव का शिकार हो गईं।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पहली सरकार 2005-2009 में कांग्रेस के पास जबरदस्त बहुमत था। केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का दुबारा सत्ता में लौटने की वजह से अति उत्साह से भरे हुड्डा ने मई 2010 के बजाय अक्टूबर-नवंबर 2009 में चुनाव करवा लिए। इसके लिए कांग्रेस ने बड़े जोर-शोर से मतदाताओं को बताया कि हर मामले में हरियाणा नंबर वन है। यानि देश में हरियाणा जैसा कोई दूसरा प्रदेश नहीं है। प्रिंट और इलेक्ट्रॅानिक मीडिया में सरकारी खर्च पर नंबर वन होने का इस हद तक प्रचार हुआ कि सुनने वालों के कान पक गए, पढऩे वालों की आंखों में दर्द होने लगा। ‘चुनावी नतीजे क्या होंगे’ के प्रश्र पर जींद जिले के एक साधारण किसान तेजपाल का कथन रेडियो पर सुनाई दिया था। तेजपाल ने कहा था सरकार के नंबर वन के दावों से हमारा हाजमा भी बिगड़ गया है। नतीजे आने पर तेजपाल की बात सही निकली।

हुड्डा जब 2005 में सत्ता में आए थे तब उनका वायदा था कि वे बिजली के बकाया बिलों को माफ कर देंगे। सत्ता में आते ही सरकार ने अपना वायदा पूरा भी किया। 1600 करोड़ रुपए के बकाया को माफ कर दिया गया। सरकार की शर्त थी कि किसान आगे से कोई बकाया नहीं रखेगा। बिलों का नियमित भुगतान करेगा। सरकार इस वायदे को पूरा करके अपनी पीठ जमकर थपथपाई और कहा कि हमने बकाया बिलों की वर्षों से चली आ रही समस्या को हमेशा के लिए दफन कर दिया। आज हम इस पर गहराई से नजर डाले तो तस्वीर कुछ और ही उभरती है। इंडियन नेशनल लोकदल की हरियाणा ईकाई के अध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा की मानें तो 3500 करोड़ रुपए के आसपास का बिजली का बकाया उपभोक्ताओं पर अब भी बाकी है। रोहतक के सामाजिक कार्यकर्ता सुशील कुमार का कहना है कि हुड्डा सरकार ने बिजली के बिलों को माफ करके एक गलत परंपरा की नींव डाली है। उपभोक्ताओं के मन में यह आ सकता है कि जब एक बार सरकार उनके बकाए को माफ कर
सकती है तो आगे भी करती रहेगी। इसी का नतीजा है कि आज बिजली का बकाया पहले बकाए के दो गुणा से भी ज्यादा हो गया है।

बिजली के बकाए का चिट्ïठा बढऩे से बिजली का उत्पादन और वितरण देखने वाली कंपनियों पर असर विपरीत प्रभाव पड़ा है। उनके पास अपनी व्यवसाय को चुस्त-दुरुस्त रखने में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली वितरण निगम के एक अधिकारी ने अपनी पहचान नहीं बताने की शर्त पर कहा कि कंपनी दिवालिया हो चुकी है। कंपनी के पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने कार्यों को सुचारू रूप से चला सके।

यमुनानगर में सर छोटूराम ताप बिजली घर की 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। इस बिजली घर में बनने वाली बिजली पूरी तरह से हरियाणा के उपभोक्ताओं के लिए है। लेकिन इस बिजली घर में उत्पादन करीब -करीब ठप पड़ा है। उत्पादन की स्थिति इसी तरह चलती रही तो 2600 करोड़ रुपए पानी में बह जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के मीडिया सलाहकार राम सिंह बराड़ा का कहना है कि इनेलोद सरकार ने इन दोनों यूनिटों को बनाने वाली कंपनियों की अलाभकारी और मनमर्जी शर्तों को अस्वीकार कर दिया था, लेकिन हुडा सरकार ने सत्ता में आते ही उन्हीं शर्तों को मान लिया। नतीजे में घटिया मशीनों के कारण प्लांट पूरी तरह बंद होने के कगार पर पहुंच गया है, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। इस प्लांट की पूरी कार्य क्षमता का इस्तेमाल नहीं होने के कारण 72 लाख यूनिट बिजली का नुकसान हो रहा है। मजे की बात तो यह है कि हरियाणा पर दोहरी मार पड़ रही है। खुले बाजार से हरियाणा 7 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद रहा है लेकिन सरप्लस बिजली होने पर 2 रूपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली बेचता है।

हुड्डïा सरकार ने नंबर वन हरियाणा के दावे के शोर में दो बिजली घर खेपड़ (हिसार) तथा झाड़ली झगार स्थापित किए गए। इसके बाद दावा किया गया था कि प्रदेश में बिजली संकट अतीत की कहानी हो जाएगी। किंतु तस्वीर कुछ ओर ही है। झाड़ली प्लांट में बनी बिजली सेंट्रल पूल को जाती है। हरियाणा को इसका सीधा लाभ नहीं मिल रहा है। खेदड़ प्लांट में मशीनों में नुक्स के कारण उत्पादन प्राय: ठप रहता है।

हरियाणा के संदर्भ में जितना महत्वपूर्ण बिजली है उतना ही जल भी है। हुड्डा सरकार हमेशा एसवाईएल का पानी लाने का दावा करती रही, लेकिन ये दावे बयानबाजी तक ही सीमित हैं। अपूर्ण एसवाईएल नहर बनाने के मामले में हरियाणा सुप्रीम कोर्ट से केस जीत चुका है, लेकिन दिल्ली और चंडीगढ़ में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमल में लाने की इच्छा न ही केंद्र और न ही राज्य सरकार दिखा रही है। एसवाईएल वैसे तो पूरे हरियाणा के लिए अनिवार्य है, किंतु प्यासे दक्षिण हरियाणा के लिए नहर का पानी अमृत के समान है। कांग्रेस से गुडग़ांव के सांसद राव इंद्रजीत ङ्क्षसह इस मुद्दे पर अपनी ही पार्टी की सरकार के विरुद्ध आवाज उठाते रहे हैं।

दावों की खेल सिर्फ बिजली-पानी तक ही सीमित नहीं है। सरकार ने निर्धन लोगों को महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना व प्रियदर्शनी आवास योजना का ढ़ोल पीट-पीट कर कहा था कि गरीबों, खासकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को 100-100 गज के नि:शुल्क प्लॉट और उस पर मकान बनाने के लिए 80 हजार रुपए का अनुदान देने की योजना, भारत में सिर्फ हरियाणा में लागू की गई है। वंचित परिवारों ने सरकार के इस निर्णय पर दीवाली मनाई थी। किंतु आज वही दीवानी में परिवर्तित हो गई है। हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव जैन की मानें तो 100-100 वर्ग के प्लॉट और आवास अनुदान सिर्फ सरकार के प्रचार तंत्र का हिस्सा है। फतेहाबाद के जयवीर कहते है कि गांव-समाज की जमीन में से 100-100
गज के प्लॉट दिए जाने थे, लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायतों ने अपनी जमीनें देने से इनकार कर दिया। कहीं-कहीं दबाव के चलते कुछ जमीन मिली भी तो उसकी रजिस्ट्री एलॉटी को नहीं हो सकी।

इस कथित आवास योजना पर विपक्ष या सोशल एक्टिविटी की आलोचना को छोड़ भी दें तो खुद हरियाणा कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं सरकार की आलोचना की है। केंद्रीय मंत्री शैलजा कुमारी, कांग्रेस के सांसद चौ. वीरेंद्र सिंह और ईश्वर सिंह ने तो हुड्डा सरकार द्वारा निर्धनों एवं दलितों की उपेक्षा को लेकर झंडा बुलंद कर रखा है। इसकी अनदेखी कैसे की जा सकती है। दक्षिण हरियाणा के कांग्रेस सांसद राव इंद्रजीत सिंह, दलित नेता शैलजा कुमारी, सेंट्रल हरियाणा के वीरेंद्र सिंह तथा ईश्वर सिंह ने हुड्डा सरकार को कटघरे में खड़़ा कर रखा है।

हरियाणा में कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर हो चुकी है। राज्य में बलात्कार, अपहरण, हत्या, डकैती, दलितों का उत्पीडऩ आदि की घटनाएं आम हो गयीं हैं। इसकी अकसर दिल्ली तक सुनी जाती है। गोहाना से लेकर हाल ही में कैथल के गांव में व्यापक पैमाने पर हुए दलित उत्पीडऩ इसका उदाहरण है। दलितों को उनके घरों में जिंदा इस लिए जला दिया जाता है, क्योंकि उनका कुत्ता दबंग परिवार के युवक को देख कर लगता है। दलितों के गांव से पलायन पर एक लेख नहीं वरन एक ग्रंथ बन सकता है।

हुड्डïा सरकार के चाल, चरित्र और चेहरे पर गहरा प्रश्नवाचक चिन्ह है। हाल ही में सरकार के दो मंत्रियों और एक मुख्य संसदीय सचिव को गंभीर आपराधिक मामलों के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। एक मंत्री पर अपनी हवाई कंपनी की महिला अधिकारी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप है। फिलहाल वे जेल में हैं। एक मंत्री तथा मुख्य संसदीय सचिव पर एक सरपंच से उसके रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने में असफल होने पर हत्या करने का आरोप है। इस मामले में परिवहन मंत्री रहे ओमप्रकाश जैन और जिला सीपीएस राम शर्मा जांच का सामना कर रहे हैं। हुड्डा सरकार के एक मंत्री फर्जी वोट मामले में अदालत का चक्कर काट रहे हैं। फिलहाल वे जमानत पर हैं। सरकार के ही एक मुख्य संसदीय सचिव राम किशन फौजी द्वारा कीटनाशक खाकर कथित रूप में खुदकुशी के प्रयास और डेढ़ महीने तक पीजीआई चंडीगढ़ में दाखिल रहने को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

अफसरशाही सरकार पर हावी दिखाई देती है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के एक वरिष्ठï प्रोफेसर कहते हैं कि सरकार ने एक ओल्ड एज होम खोल दिया है। जो आईएएस या आईपीएस रिटायर होता है उसे रिटायर न करके इस होम में रख दिया जाता है। अभी तक दो दर्जन से अधिक रिटायर आईएएस और आईपीएस छोटा बड़ा काम पा गए हैं इससे युवा ब्यूरोक्रेसी में असंतोष है क्योंकि उनकी पदोन्नति के चांव धूमिल हो रहे हैं।

 

रमेश गौतम

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