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विकास के पैमाने

हुड्डा के विकास के पैमाने के चार मापदंड हो सकते हैं, लेकिन मेरे विकास के पैमाने का एक ही मापदंड है। यह मापदंड है कि राज्य के विकास का कितना लाभ राज्य के आम नागरिक को पहुंच रहा है। राज्य में संसाधन बहुतायत में हो सकते हैं, लेकिन उन संसाधनों से राज्य का नागरिक कितना लाभान्वित हो रहा है, वह मेरे विकास का पैमाना।

गोवा में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तब तक ताजपोशी नहीं हुई थी, लेकिन मोदी की ताजपोशी होने की चर्चा देश में सब ओर थी। पिछले आम चुनावों में एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ऐसे में इन सब चर्चाओं और मोदी समर्थकों के खेमे से उठ रहे शोर से कैसे गाफिल रह सकते थे। आडवाणी ने मोदी नम: के नारों के शोर के बीच एक कंकड़ फेंका और विकास के संदर्भ में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ कर दी। चौहान की तारीफ में आडवाणी के कथन का अर्थ था कि गुजरात का विकास कर मोदी ने कोई तीर नहीं मार लिया, तारीफ तो शिवराज सिंह चौहान की करनी चाहिए जिन्होंने पिछड़े हुए मध्यप्रदेश को विकास की राह पर ला खड़ा किया। आडवाणी ने चौहान की तारीफ कर एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की। इस तारीफ में उन्होंने हवा का रूख पहचानने की कोशिश तो की ही, लेकिन साथ ही मोदी खेमे की कोशिशों की ओर पत्थर भी उछाल दिया।

भारतीय जनता पार्टी में तूफान लाने की आडवाणी की इन कोशिशों का असर बेशक कुछ भी हुआ हो, लेकिन यह बात साफ है कि देश में ऐसे नेता भी हैं जो चुपचाप, बगैर शोर मचाए, कोई प्रचार किए बगैर अपने राज्य को विकास की डगर पर आगे बढ़ा रहे हैं। आडवाणी ने अपनी मजबूरियों में गुजरात में मोदी के विकास की तुलना बेशक शिवराज सिंह चौहान की कोशिशों और मध्यप्रदेश में उसके परिणामों से की हो लेकिन मेरा विश्वास है कि यदि आडवाणी की अपनी राजनीतिक मजबूरियां नहीं रही होतीं तो वह मध्यप्रदेश का नाम लेने से पहले हरियाणा में हुए विकास का नाम जरूर लेते। आडवाणी शिवराज सिंह चौहान का नाम लेने से पहले भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का नाम जरूर लेते। यह मैं इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मैं
हरियाणा का वासी हूं और हरियाणा मेरा जन्म स्थान है। कुछ समय पहले मैं ऐसा कहता भी नहीं। ऐसा मेरे जेहन में भी नहीं आता कि हरियाणा ने विकास में देश के शीर्ष दस राज्यों में शिखर पर झंडा गाड़ दिया है। हरियाणा के विकास की कहानी मैं योजना आयोग के आंकड़ों के आइने में पढ़ रहा हूं। मुझे विश्वास नहीं आता कि पंजाब से काट कर बनाए गए पिछड़े हुए छोटे से राज्य हरियाणा की हिम्मत गुजरात जैसे विकसित राज्य से टक्कर लेने की हो सकती है। गुजरात के विकास का शोर तो रोज मीडिया की सुर्खियां बनता है, लेकिन हरियाणा के विकास की चर्चा तो कोई नहीं करता। हरियाणा का नाम आते ही ऐसे राज्य की तस्वीर जेहन में उभरती है जहां रेत के टीबे हैं, धूल उड़ती है। जहां बिजली, पानी की समस्याएं मुंह बाए खड़ी होती हैं। ठेठ गांवों में सम्पर्क सड़कों का अभाव है। लोग पूछते हैं कि हरियाणा में घूमने जाएं कैसे, रहेंगे कहां।

लेकिन जब हिम्मत कर हरियाणा का रूख करते हैं तो जमीन पर खड़ी हकीकत उस तस्वीर से बिल्कुल भिन्न होती है जो सुनी-सुनाई बातों के रंगों से बनी होती है। आंकड़े कई बार भ्रम जाल भी फैला देते हैं। इसलिए आंकड़ों के जाल में फंसने की जरूरत नहीं, हरियाणा के किसी भी कोने की ओर चले जाएं, विकास कीर कहानी खु-ब-खुद बयान होती चली जाएगी। दिल्ली से हिसार की ओर चलें, शानदार सड़कों पर गाड़ी की रफ्तार कम ही नहीं होगी। दिल्ली से गुडग़ांव की ओर चलें तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की शानदार इमारतों का समुद्र और मॉल की बिल्डिगें किसी अनजान व्यक्ति को उसे सिंगापुर से तुलना करने को मजबूर कर सकती हैं। आधुनिक तकनीक से कार्य करने वाली इन कम्पनियों में काम करने का आकर्षण अलग ही आनन्द देता है।

हरियाणा को देश के समक्ष एक मिसाल माना जा सकता है जो एक बड़े राज्य से काट कर बनाया गया था। ऐसे ही अन्य राज्यों में झारखंड और उत्तराखंड का नाम भी लिया जा सकता है। झारखंड और उत्तराखंड को विकास के नक्शे पर कहां रखा जाए, इसका फैसला करना बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन विकास के मौन साधक भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने बंसीलाल द्वारा शुरू की गई इस छोटे राज्य के विकास की कहानी को कहां पहुंचा दिया, उसकी कहानी केन्द्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़े सुना रहे हैं।

मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को मैं अनेक वर्षों से जानता हूं। तब भी जब वह दिल्ली में संसद में थे और आज भी जब वह हरियाणा के मुख्यमंत्री हैं। उनसे मैं अभी मिला और हरियाणा के विकास पर चर्चा की तो उन्होंने किसी भी राज्य के विकास के चार पैमाने मुझे बताए-प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश, प्रति व्यक्ति योजना खर्च और राजस्व संसाधनों की आपूर्ति। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय के आंकड़ों के आधार पर उन्होंने दावा किया कि ”इन चारों मापदंडों में हरियाणा देश के अन्य सभी राज्यों से आगे है। इन चारों मापदंडों के पैमाने पर गुजरात हरियाणा के मुकाबले काफी पीछे है। 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में हरियाणा में राजस्व संसाधनों की आपूर्ति 192 प्रतिशत हुई, जबकि राष्ट्रीय औसत 95 प्रतिशत थी और गुजरात की 96.5 प्रतिशत थी।”

हुड्डा के विकास के पैमाने के चार मापदंड हो सकते हैं, लेकिन मेरे विकास के पैमाने का एक ही मापदंड है। यह मापदंड है कि राज्य के विकास का कितना लाभ राज्य के आम नागरिक को पहुंच रहा है। राज्य में संसाधन बहुतायत में हो सकते हैं, लेकिन उन संसाधनों से राज्य का नागरिक कितना लाभान्वित हो रहा है, वह मेरे विकास का पैमाना। उसी पैमाने के आधार पर हरियाणा के विकास का मापा जाए तो शरूआत युवाओं को रोजगार दिए जाने से की जानी चाहिए। युवाओं को यदि राज्य में रोजगार नहीं, वे इस लायक नहीं कि बाहर जा कर अपने सपनों में रंग भर सकें तो राज्य के विकास का कितना लाभ मिल रहा है, उसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं। बेरोजगार युवक राज्य में बढ़ते अपराधों की जड़ और विकास को पीछे खींचने का मुख्य जरिया होता है। हरियाणा का दौरा करने के बाद किसी की इसमें दो राय नहीं हो सकती कि हरियाणा में औद्योगिकीकरण ने राज्य की तस्वीर बदल दी है। लेकिन उन कम्पनियों में कार्यरत युवाओं की जानकारी लेने के बाद ही पता लगेगा कि उसमें काम करने वाले युवाओं का कितना प्रतिशत हरियाणा के युवा वर्ग का है। एनसीआर का हिस्सा होने और देश की राजधानी से सटा होने के कारण इस राज्य को शहरीकरण का लाभ मिला है, लेकिन हरियाणा के युवा वर्ग का बड़ा हिस्सा इस लायक नहीं है कि वह राज्य में लगी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की आधुनिक तकनीक पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सके। हरियाणा को शिक्षा का हब बनाए जाने की योजनाएं चल रही हैं लेकिन तब तक तो लक्ष्य दुरस्थ ही कहा जाएगा।

हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी हैए प्रति व्यक्ति निवेश बढ़ा है, औद्योगिकीकरण हुआ है, विकास की गति तेज हुई है, लेकिन गंदगी के निकास की समुचित व्यवस्था का अभाव गांवों में नरक के दृश्य उपस्थित करते हैं। बिजली के उत्पादन में वृद्धि के कितने भी दावे सरकार कर लेए किसान अब भी बिजली की कटौती की शिकायत करता है। भ्रूण हत्याओं के मामलों की तस्वीर हाल ही में टीवी पर फिल्म अभिनेता आमिर खान ने पूरे देश को दिखाई थी। गांवों में सरेआम शराबखोरी और जुआ अपराधों का जनक है। बेरोजगार युवक व्यसनों के गुलाम हैं। भ्रष्टाचार वह कैंसर है, जो प्रथम चरण में ही इलाज से ठीक हो सकता है। प्रथम चरण में कैंसर के इलाज में कोताही उसे कभी ठीक नहीं होने देती। हुड्डा उसी पार्टी के नेता हैं, जिस पार्टी से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से भेजे गए एक रूपए में से गांव में 15 पैसे ही पहुंचता है। जब तक हुड्डा अपने नेता के उस मार्गदर्शन के अनुसार चंडीगढ़ से भेजा गया एक रूपया पूरा का पूरा हर गांव में नहीं पहुंचा देते तब तक विकास अधूरा ही रहेगा।

”आया राम, गया राम” हरियाणा की ही देन है जिसके बाद केन्द्र को मजबूरन इसके खिलाफ कानून बनाना पड़ा था। हरियाणा के प्रसिद्ध तीन लालों में से एक पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की यह सीख प्रसिद्ध है कि ”जब देने से काम चल सकता हो, तो बेकार में सिफारिश करवाने या अपनी प्रतिभा का उपयोग करने में क्या फायदा।” लेकिन वह किसी प्रकार से सत्ता हथियाने या सत्ता में बने रहने की राजनीति की उपज थी। हुड्डा के समक्ष ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। कांग्रेस आलाकमान उनके साथ है। जनता उनके साथ है। विपक्ष में भाजपा का कोई वजूद हरियाणा में नहीं है। इनेलो का नेतृत्व ही खुद पानी मांग रहा है। ऐसे में हुड्डा को राज्य हित में कोई भी फैसला लेने से रोकने वाला नहीं है।

सरकार के दो मंत्रियों और एक मुख्य सचिव के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। एक तो अपनी महिला अधिकारी को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप है और वह जेल में हैं। एक अन्य मंत्री और मुख्य संसदीय सचिव पर रिश्वतखोरी के आरोप हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी पार्टी इनेलो के बड़े नेता को भी सीबीआई ने अदालत के माध्यम से जेल भेजा हुआ है। एक अन्य मुख्य सचिव भी आत्महत्या करने की कोशिश में अस्पताल में दाखिल हैं। ये सब विकास के सिक्के दूसरे पहलू हैं जिन्हें मैं अपने पैमाने पर मापता हूं, आपका पता नहीं…।

 श्रीकान्त शर्मा

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