ब्रेकिंग न्यूज़ 

आर्थिक विकास का पैमाना बना हरियाणा

आर्थिक विकास का पैमाना बना हरियाणा, आज भारत के प्रगतिशील राज्यों का अगुवा बन गया है। इसका वास्तविक श्रेय मुख्यमंत्री भुपेन्द्र सिंह हुड्डा को जाता है, जिन्होंने सरकार के लिए सरल एवं दूरदर्शितापूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया। हुड्डा ने राज्य में ऐसा शासकीय तंत्र विकसित करने में सफलता पायी, जहां प्रत्येक नागरिक अपने सपनों को साकार कर सके। इसके लिए पिछले आठ सालों में सरकार ने कई कदम उठाए।
वैदिक काल से ही हरियाणा का गौरवशाली इतिहास रहा है। महाग्रंथ महाभारत में भी हरियाणा का वर्णन मिलता है। महाभारत काल में कुरूक्षेत्र के जिस मैदान में युद्ध हुआ था, वह कुरूक्षेत्र हरियाणा में स्थित है। स्वतंत्रता के लिए 1857 में हुए सिपाही विद्रोह में भी इस राज्य की वृहद भूमिका रही है। झज्जर और बहादुरगढ़ के नवाब, बल्लभगढ़ के महाराजा, रेवाड़ी के तुलाराम ब्रिटिश शासकों के लिए हमेशा से मुश्किल पैदा करते रहे। बाद में हरियाणा का पंजाब में विलय कर दिया गया। 1 नवंबर 1966 को पंजाब प्रांत के पुनर्गठन के दौरान हरियाणा को एक अलग राज्य का दर्जा मिला।हरियाणा पंजाब प्रांत के सबसे पिछड़े इलाकों में शुमार था। स्थिति ऐसी भयावह थी कि इस राज्य की स्थापना के समय, इसके स्वतंत्र स्वरुप पर शंका जाहिर की गयी थी। लेकिन आज हरियाणा की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। नेताओं की दूरदर्शिता और जनता की कड़ी मेहनत से हरियाणा लगातार विकास कर रहा है। हालांकि 1966 से 2005 के बीच हरियाणा ने बहुत कम प्रगति की, लेकिन भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद से, इस बदहाल राज्य की तस्वीर बदलनी शुरू हो गयी। इस दौरान विकास के मामले में हरियाणा ने जबरदस्त छलांग लगाई। कृषि, व्यापार, पर्यटन, सूचना तकनीक, ऑटोमोबाइल उद्योग आदि क्षेत्रों में तेजी से विकास करते हुए हरियाणा देश के प्रमुख प्रगतिशील राज्यों में शुमार हो गया। हरियाणा आज दूसरे छोटे राज्यों के लिए एक मिसाल बन चुका है।
देश की राजधानी दिल्ली से सटे होने के कारण भी हरियाणा को इसका फायदा मिला। इस कारण लाभकारी योजनाओं को लागू करने सहित उद्योग-धंधों की स्थापना और सेवा क्षेत्र की विकास में इस राज्य को फायदा मिला। हरियाणा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसके कारण हरियाणा उच्च वृद्धि दर को हासिल कर उसे लगातार बनाए रखने में भी सक्षम रहा। उच्च विकसित औद्योगिक आधार और विश्वसनीय आधारभूत संरचना के कारण व्यवसायियों के लिए हरियाणा पसंदीदा राज्य के रुप में उभरा है। नियोजित आर्थिक विकास का पैमाना बना हरियाणा, आज भारत के प्रगतिशील राज्यों का अगुवा बन गया है। इसका
वास्तविक श्रेय मुख्यमंत्री हुड्डा को जाता है, जिन्होंने सरकार के लिए सरल एवं दूरदर्शितापूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया। हुड्डा ने राज्य में ऐसा शासकीय तंत्र विकसित करने में सफलता पायी, जहां प्रत्येक नागरिक अपने सपनों को साकार कर सके। इसके लिए पिछले आठ सालों में सरकार ने कई कदम उठाए। हुड्डा ने अपने राज्य के लिए एक ऐसा सपना देखा है, जहां सबके लिए शिक्षा उपलब्ध हो, सबके लिए रोजगार हो, स्वास्थ्य सुविधाएं हो और सबके सिर पर छत हो। इसके लिए राज्य सरकार ने कई योजनाओं को लागू किया है। कृषि क्षेत्र में विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण बिजलीकरण और खेल नीतियों को बढ़ावा देकर, सरकार राज्य को विकास की बुलंदियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।प्रगतिशील कृषि नीति
प्रगतिशील कृषि नीति अपनाकर हरियाणा आज देश का दूसरा सबसे बड़ा अनाज उत्पादक राज्य बन गया है। हरियाणा गेहूं और सरसों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। राज्य के गठन के समय अनाज का कुल उत्पादन 26 लाख टन था, जो बढ़कर 183 लाख टन हो गया है। बासमती चावल के निर्यात में हरियाणा पहले स्थान पर है। इन उपलब्धियों के कारण लगातार दो सालों तक हरियाणा को ‘कृषि कर्मण’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संसाधनों के संरक्षण की तकनीक और जैविक खेती के माध्यम से राज्य में गन्ना, कपास, तिलहन, सब्जियां और फलों की खेती को सरकार की तरफ से लगातार बढ़ावा दिया जाता रहा है। राज्य सरकार किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए प्रशिक्षण देती है और कमर्शियल खेती के लिए प्रोत्साहित करती रहती है।

दुग्ध उत्पादन में भी हरियाणा का महत्वपूर्ण स्थान है। 708 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता के साथ ही हरियाणा का पूरे देश में दूसरा स्थान है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता का औसत 281 ग्राम है। दूध उत्पादन के मामले में विश्व प्रसिद्ध मुर्रा प्रजाति की भैंस हरियाणा में पाई जाती है। कृषि योग्य भूमि का आर्थिक महत्व समझते हुए सरकार ने राज्य की भूमि अधिग्रहण नीति में क्रांतिकारी बदलाव किए। इसमें फ्लोर रेट, वार्षिकी, नो लिटिगेशन इंसेन्टिव जैसी अवधारणाएं शामिल हैं।

अनुकूल वातावरण बनाने पर जोर
हरियाणा का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र है, जहां 1360 से ज्यादा बड़ी और मध्यम दर्जे की औद्योगिक ईकाईयां और 84,443 लघु ईकाईयां हैं। राज्य में औद्योगिक विकास के लिए और अधिक से अधिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए विश्वस्तरीय आधारभूत ढ़ांचा उपलब्ध कराने के साथ-साथ ‘राज्य की औद्योगिक एवं निवेश नीति 2011’ के जरिए अनुकूल वातावरण, शांतिपूर्ण कानून व्यवस्था, श्रमिकों के साथ स्वस्थ संबंध और उद्योगों की स्थापना के अनुमोदन एवं मंजूरी में तेजी लाने पर जोर दिया गया।

निवेश को प्रोत्साहन;
2005 में प्रति व्यक्ति निवेश के मामले में 14वें स्थान से उठकर आज हरियाणा दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी हरियाणा गोवा को छोड़कर अन्य राज्यों से आगे है। राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिए 1 लाख करोड़ रुपये की पूंजी पाइपलाइन में है। 9.4 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर के साथ हरियाणा पिछले आठ वर्षों में हरियाणा ने हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। हरियाणा सवारी कारों का सबसे बड़ा उत्पादक (52 प्रतिशत) राज्य है। देश में उत्पादन होने वाले 50 प्रतिशत से ज्यादा मोटरसाईकिल, 30 प्रतिशत रेफ्रिजरेटर, 25 प्रतिशत ट्रैक्टर, 25 प्रतिशत साईकिल और 25 प्रतिशत सेनिटरी सामानों का उत्पादन हरियाणा में होता है। राज्य में आधारभूत संरचना एवं विकास कार्य तेजी से हो रहा है। 2310 करोड़ रुपये की केएमपी परियोजना से उम्मीद की जा रही है कि यह राज्य में आर्थिक विकास को और तेज करेगी। कई ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ के निर्माण के लिए उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों के साथ अनुबंध किया गया है। पूरे राज्य भर में लगभग 25 हजार एकड़ में औद्योगिक आधारभूत संरचना का फैलाव है। इसमें नए औद्योगिक क्षेत्र, पार्क, आईएमटी और विकास केन्द्र का विस्तार और विकास शामिल है।

सौ फीसदी विद्युतीकरण
हरियाणा देश का पहला राज्य है जो 1970 के शुरूआत तक 100 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों का विद्युतीकरण करने में सफलता प्राप्त की। आज औद्योगिकरण और आर्थिक गतिविधियों को निर्बाध गति से संचालित करने के लिए राज्य सरकार बिजली के उत्पादन पर विशेष ध्यान देते हुए 2005 में बिजली की उत्पादन क्षमता 1587 मेगावाट से बढ़ाकर 2012 तक 5300 मेगावाट किया है। इसके लिए राज्य सरकार ने यमुनानगर, हिसार के खेदार, झज्जर के झर्ली और खानपुर में विद्युत संयंत्रों की स्थापना की। इस समय फतेहाबाद के गोरखपुर में परमाणु संयंत्र सहित तीन और परियोजनाएं पाइपलाईन में हैं। इस तरह के प्रयासों के कारण बिजली आपूर्ति 578 लाख यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 1100 लाख यूनिट प्रतिदिन हो गयी है।

उद्योग जगत को सुविधाएं
सूचना तकनीक की अहमियत को समझते हुए सरकार ने सूचना तकनीक नीति तैयार की। सूचना तकनीक और आईटीईएस एवं बीपीओ उद्योग को कई तरह से प्रोत्साहित किया। सरकार ने टेक्नोलॉजी पार्क और आईटी कॉरिडोर के लिए भी नीतियां बनाई। एक आईटी पार्क की स्थापना पंचकुला जिले में की गयी। गुडग़ांव आईटी और आईटीईएस/बीपीओ जैसी सेवा प्रदाता कंपनियों का आज हब बन चुका है। 2011-12 में हरियाणा से सॉफ्टवेयर का निर्यात बढ़कर 25,500 करोड़ रुपये का हो गया है। हरियाणा सरकार का अपना एरिया नेटवर्क है, जो 21 जिलों और प्रखंडों को जोड़कर एसडब्ल्यूएएन नेटवर्क स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

विकास की रफ्तार
हरियाणा के कुल 6841 गांवों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा गांवों में टेलिफोन की सुविधा और शहरी क्षेत्रों में उच्च रफ्तार इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध है। राज्य में 38,829 किलोमीटर से ज्यादा लंबा सड़कमार्ग है। तेज रफ्तार आवागमन के लिए दिल्ली मेट्रो गुडग़ांव तक पहुंच चुकी है और फरीदाबाद तक अपना विस्तार करने जा रही है, जो बढ़कर बहादुरगढ़ तक जाएगी। इसके अलावा राज्य के विकास की झलक देने वाली कई रेल एवं सड़क परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है।

शिक्षा क्षेत्र में क्रांति
शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने काफी प्रगति की है। राज्य में एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय और एक रक्षा विश्वविद्यालय सहित 5 विश्वविद्यालय थ,े जिनकी संख्या बढ़कर अब 30 हो चुकी है। राज्य में 2005 तक 28,000 विद्यार्थियों वाले 160 तकनीकी संस्थान थे, जो अब बढ़कर 1,42,000 विद्यार्थियों के साथ 641 हो चुके हैं। राष्ट्रीय खाद्य तकनीक एवं उद्यमशीलता प्रबंधन, केन्द्रीय प्लास्टिक इंजनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान, फुटवेयर एवं डिजाइन और विकास संस्थान, राजकीय फिल्म एवं टीवी संस्थान सहित कई नामी-गिरामी संस्थान हरियाणा में स्थित हैं। राज्य में चार नए महिला मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव भी है।

सामाजिक सुरक्षा
इसके अलावा राज्य में सामाजिक सुरक्षा के ढ़ांचे को मजबूती दी गई है, जिससे 20 लाख से ज्यादा लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं स्वास्थ्य बीमा का सीधा लाभ पहुंच रहा है। हरियाणा देश का अकेला राज्य है, जहां बाहर से आने वाले मरीजों को मुफ्त दवाएं और उचित दर पर सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। राज्य में सभी गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा दी जाती है।

खेल नीति के तहत खेलों को प्रोत्साहन
राष्ट्रमंडल खेल के दौरान देश भर में जीते गए कुल 38 पदक में से अकेले 21 स्वर्ण पदक जीतकर हरियाणा खेल जगत में अपनी धाक जमा चुका है। युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने नई खेल नीति बनायी। सरकार ने खिलाडिय़ों के स्कॉलरशिप और प्रशिक्षण की व्यवस्था की है। राज्य सरकार ने ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति के तहत विजेता खिलाडिय़ों की नौकरी भी सुनिश्चित की। राज्य सरकार ने विजेताओं की पुरस्कार राशि में वृद्धि करते हुए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 5 करोड़ रुपये, रजत पदक जीतने वाले को 3 करोड़ रूपए और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 2 करोड़ रुपये, सम्मान राशि देने के अलावा ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को 21-21 लाख रुपये देने की भी नीति बनाई है।

शिव भाटिया

взломанные игры на андроидооо полигон

Leave a Reply

Your email address will not be published.