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आंकड़ों के आईने में हरियाणा

देश के दस शीर्ष विकसित राज्यों में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में हरियाणा ने चौतरफा विकास किया है। योजना आयोग आंकड़ों के मुताबिक 2012-13 के वित्तीय वर्ष में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 1,09,227 रही, जबकि 10,446 रुपये प्रतिव्यक्ति योजना बजट के साथ हरियाणा सर्वोच्च स्थान पर रहा।
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी शुरू हो चुकी है। कोई विकास पुरूष की कश्ती में सवार होकर प्रधानमंत्री पद का दावा ठोक रहा है, तो कोई एक बीमारु राज्य को सर्वोच्च विकासशील राज्य में शुमार करने के नाम पर खुद को योग्य उम्मीदवार साबित कर रहा है। देश के दस शीर्ष विकासित राज्यों की तुलना की जाय तो आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयान करते हैं। ऐसे में गुजरात, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अलावा एक ऐसा राज्य भी है जो अर्थव्यवस्था के कई पैमानों और आधारभूत संरचना के विकास में इन राज्यों से कई कदम आगे है। यह राज्य है, हरियाणा। कृषि, शिक्षा सहित सामाजिक सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में हरियाणा ने चौतरफा विकास की इबारत लिखी है। औद्योगिक विकास में नई ऊंचाईयों को छुआ है। देश के सबसे तेजी से विकास करने वाले 10 राज्यों बिहार, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, ओडिशा, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल में हरियाणा की स्थिति सबसे ज्यादा सुद़ृढ़ दिखती है।

आंकड़े बताते हैं कि एक तरफ राष्ट्रीय विकास दर में गिरावट आ रही थी, तो दूसरी तरफ बीमारू राज्यों सहित देश का लगभग हर राज्य विकास की सीढिय़ां चढ़ रहा था। एक दशक पहले तक गुजरात की अपेक्षा हरियाणा काफी पिछड़ा राज्य था। लेकिन 2005 में कांग्रेस की सरकार ने विकास के हर क्षेत्र में बुलंदियों को छुआ। नई कृषि नीति, भूमि अधिग्रहण कानून से लेकर सामाजिक सुरक्षा के लिए तमाम उपाय किए। योजना आयोग आंकड़ों के मुताबिक 2011-12 के दौरान हरियाणा प्रतिव्यक्ति आय के मामले में इन दस राज्यों में सर्वोच्च रहा। 2012-13 के वित्तीय वर्ष में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 1,09,227 रही, जबकि 10,446 रुपये प्रतिव्यक्ति योजना बजट के साथ हरियाणा सर्वोच्च स्थान पर रहा। 2007-2012 के दौरान राजस्व जुटाने में भी हरियाणा सर्वोच्च स्थान पर रहा। इस दौरान हरियाणा ने राजस्व संग्रहण में 192 प्रतिशत का इजाफा किया।

प्रति व्यक्ति आय
वित्तीय वर्ष 2011-12 को दौरान प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा इन दस राज्यों में सर्वोच्च स्थान पर रहा। भूपेन्द्र सिंह हूड्डा के मुख्यमंत्रित्व में हरियाणा का प्रतिव्यक्ति आय 94,680 रुपये से बढ़कर 1,09,227 रुपये हो गई। वित्तीय वर्ष 2012-13 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,23,554 रुपये तक पहुंच चुका है। 2011-12 के दौरान दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र रहा। 2011-12 में महाराष्ट्र की प्रतिव्यक्ति आय में 21.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 1,01,314 रुपये हो गया। पूरे भारत में 1,92,652 रुपये के साथ गोवा सर्वोच्च स्थान पर रहा, जबकि 1,75,812 रुपये के साथ दिल्ली दूसरे स्थान पर रहा।

अगर प्रतिव्यक्ति आय में वार्षिक वृद्धि दर की बात की जाय तो बिहार और गुजरात आसपास ही रहे। वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान 19.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के साथ बिहार प्रथम स्थान पर रहा, वहीं 19.2 प्रतिशत के वार्षिक वृद्धि दर के साथ गुजरात में प्रति व्यक्ति आय दर के विकास में दूसरे पायदान पर रहा। प्रतिव्यक्ति आय के मामले में गुजरात का स्थान तीसरा रहा। गुजरात में प्रतिव्यक्ति आय 89,668 रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले में 19.4 प्रतिशत ज्यादा था। बिहार का प्रतिव्यक्ति आय वित्तीय वर्ष 2011-12 में 24,681 रुपये रहा। 84,058 रुपये के साथ चौथा स्थान मुख्यमंत्री जयललिता की नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार के नाम गयी। पंजाब और कर्नाटक क्रमश: पांचवें और छठे स्थान पर रहे। पंजाब का प्रतिव्यक्ति आय 78,171 रुपये और कर्नाटक का प्रतिव्यक्ति आय 69,493 रुपये रहा।

इस दौरान बिहार और गुजरात के प्रतिव्यक्ति आय का विकास दर लगभग आसपास रहा। वित्तीय वर्ष 2010-2011 के दौरान सबसे बुरी स्थिति पश्चिम बंगाल, राजस्थान और ओडिशा की रही है, जो 53,331 रुपये के प्रतिव्यक्ति आय के राष्ट्रीय औसत से भी नीचे रहे। पश्चिम बंगाल का प्रतिव्यक्ति आय 48,536 रुपये, राजस्थान का 42,434 रुपये और ओडिशा का 40,412 रुपये रहा।

प्रति व्यक्ति योजना बजट में हरियाणा शीर्ष पर
आधारभूत संरचना के विकास के लिए आवंटित बजट, उसके विकास के एक पैमाने के रुप में माना जा सकता है। प्रतिव्यक्ति योजना बजट में भी

हरियाणा शीर्ष स्थान पर है। हरियाणा में प्रतिव्यक्ति योजना बजट 10,446 रुपये है। 8,380 रुपये के साथ गुजरात दूसरे स्थान और 6,528 रुपये के साथ कर्नाटक तीसरे स्थान पर है। ओडिशा का प्रतिव्यक्ति योजना बजट 4,215 रुपये, पंजाब का 5,053 रुपये, महाराष्ट्र का 4,005 रुपये और तमिलनाडु का 3,881 रुपये है। जबकि बिहार का प्रतिव्यक्ति योजना बजट 2,697 रुपये, पश्चिम बंगाल का 2,559 रुपये और राजस्थान का 3,058 रुपये है।

राजस्व जुटाना
परियोजनाओं और योजनाओं के लिए वित्त किसी भी राज्य की मुख्य जरुरत होती है। संसाधनों का संग्रहण विकास के लिए जरुरी कदम होता है। संसाधनों के संग्रहण के मामले में भी हरियाणा अव्वल रहा है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान हरियाणा ने इसमें अप्रत्याशित रुप से 192 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। योजना आयोग के ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस समयावधि में हरियाणा ने 33,374 करोड़ रुपये के अपने लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 64,123 करोड़ रुपये जुटाए। इस दौरान ज्यादातर राज्य अपने अनुमानित लक्ष्य को ही हासिल करने में असफल रहे। सामूहिक रुप से इन राज्यों ने 14,12,029 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विपरीत सिर्फ 13,06,296 करोड़ रुपये जुटाए। इन दस राज्यों में हरियाणा, ओडिशा, कर्नाटक और बिहार ने अपने लक्ष्य से ज्यादा संसाधनों का सृजन किया। गुजरात अपने संसाधनों के संग्रहण में अपने लक्ष्य का 95.6 प्रतिशत और पंजाब 87.5 प्रतिशत पूरा कर पाया।

सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान
2011-12 के दौरान गुजरात के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र का सिर्फ 26 प्रतिशत योगदान रहा। जबकि महाराष्ट्र का 21 प्रतिशत और पंजाब का 18 प्रतिशत योगदान रहा। कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा और पंजाब के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 17 प्रतिशत का योगदान रहा, जो 16 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इसमें बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल पिछड़ गए। बिहार में यह प्रतिशत 6 रहा। जबकि राजस्थान का मात्र 13 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल का मात्र 10 प्रतिशत ही अपने लक्ष्य को हासिल कर पाए।

खाद्यान्न उत्पादन
11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान खाद्यान्न उत्पादन के मामले में पंजाब और पश्चिम बंगाल में मामूली बढ़त देखने को मिली। इस दौरान खाद्यान्न उत्पादन में तमिलनाडु ने 10 प्रतिशत और बिहार ने 6.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। जबकि अनाजों की उपज में ओडिशा में 5.72 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 5.11 प्रतिशत की गिरावट आयी। पिछले पांच वर्षों के दौरान राजस्थान ने खाद्यान्न उत्पादन में 4.24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। जबकि हरियाणा में यह वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत रही। इस दौरान पश्चिम बंगाल को छोड़कर इन सभी दस राज्यों में स्वस्थ वृद्धि दर देखी गयी। पिछले पांच वर्षों के दौरान गुजरात और तमिलनाडु का खाद्यान्न उत्पादन में 34 प्रतिशत का विकास दर रहा। राजस्थान का 29 प्रतिशत, कर्नाटक का 27 प्रतिशत, महाराष्ट्र का 19 प्रतिशत और हरियाणा का 22 रहा।

पावर सेक्टर
जनवरी 2013 तक भारत में बिजली की कुल स्थापित क्षमता 211.766 गीगावाट है। इस तरह भारत विश्व का पांचवां सबसे बड़ा बिजली उत्पादक देश है। पावर सेक्टर में महाराष्ट्र देश का सर्वोच्च राज्य है। महाराष्ट्र में राज्य स्तर पर 12,254.3 मेगावाट और पीपीपी मॉडल (राज्य, केन्द्र और निजी क्षेत्र के सहयोग) से स्थापित बिजली की कुल क्षमता 28,310.83 मेगावाट है। 23,887.54 मेगावाट के साथ गुजरात का दूसरा स्थान है। राज्य द्वारा स्थापित बिजली क्षमता के मामले में गुजरात का पांचवां स्थान है। जबकि कर्नाटक का दूसरा स्थान (7,279 मेगावाट), तमिलनाडु का तीसरा स्थान (6,202.95 मेगावाट) और पश्चिम बंगाल का चौथा (6,348.95 मेगावाट) स्थान है। 496.3 मेगावाट के साथ इस मामले में बिहार का स्थान सबसे नीचे है। जबकि समेकित रुप से बिहार में 1,849.93 मेगावाट की बिजली क्षमता है।

वित्तीय तथ्य
 2012-13 के दौरान हरियाणा का प्रतिव्यक्ति आय देश में सबसे ज्यादा रहा। इस दौरान हरियाणा का प्रतिव्यक्ति आय 1,23,554 रुपये था।
 2010-11 के दौरान 78,500 रुपये के साथ हरियाणा प्रतिव्यक्ति निवेश के मामले में भी सर्वोच्च रहा। 2004-05 के दौरान हरियाणा का 14 वां स्थान था।
 प्रतिव्यक्ति योजना बजट के मामले में भी हरियाणा एक प्रमुख राज्य है। 2013-14 के दौरान हरियाणा का प्रतिव्यक्ति योजना खर्च 10,700 रुपये रहा।
 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत वित्तीय संसाधनों के संग्रहण में हरियाणा का बेहतर प्रदर्शन रहा। 92.5 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले हरियाणा ने 192 प्रतिशत का बेहतर प्रदर्शन किया।
 नेशनल कॉन्सिल ऑफ अप्लाईड इकोनॉमिक रिसर्च के फरवरी 2011 के रिपोर्ट के अनुसार प्रतिव्यक्ति शुद्ध घरेलू उत्पाद में हरियाणा पहले स्थान पर रहा।
2009-10 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत में गुजरात में पहले स्थान (1,615 किलोवाट) पर रहा। जबकि पंजाब दूसरा (1,526.86 किलोवाट), हरियाणा तीसरा (1,222.21 किलोवाट), तमिलनाडु चौथा (1,131.58 किलोवाट) और महाराष्ट्र पांचवें (1,028.22 किलोवाट) स्थान पर रहा। बिहार का प्रतिव्यक्ति बिजली खपत 122.11 किलोवाट रहा, जो सबसे निचला पायदान है। पश्चिम बंगाल 550.16 किलोवाट प्रतिव्यक्ति बिजली उपभोग के मामले में नीचे से दूसरे स्थान पर रहा। तकरीबन एक दशक पहले बिजली संकट से जूझ रहे गुजरात ने जबरदस्त तरक्की करते हुए 2,000 मेगावाट का अतिरिक्त उत्पादन कर दूसरे राज्यों को बिजली आपूर्ति कर रहा है।

उद्योगों में हरियाणा
• हथकरघा उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक
• देश में सबसे ज्यादा फोन का निर्माण करने वाला राज्य। देश का 80 प्रतिशत मोबाईल फोन का निर्माण हरियाणा में होता है।
• देश में सबसे ज्यादा कारों का उत्पादन करने वाला राज्य। देश के कुल कार निर्माण का 52 प्रतिशत हरियाणा में होता है।
• देश में सबसे ज्यादा दुपहिया वाहनों का निर्माण करने वाला राज्य। कुल दुपहिया वाहनों के उत्पादन का 41 प्रतिशत हरियाणा में होता है।
• सैनिटरी वेयर का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य
• सबसे ज्यादा ट्रैक्टर का निर्माण करने वाला राज्य
• सबसे ज्यादा साइकिल का निर्माण करने वाला राज्य

वेतनभोगी
• दैनिक मजदूरी भुगतान के मामले में हरियाणा देश का सर्वोच्च राज्य है। मनरेगा के तहत 214 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी की भुगतान हरियाणा सरकार करती है।
• साल 2006 में हरियाणा व्यापक श्रम नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना।
• विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े पंजीकृत मजदूरों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने वाला हरियाणा, देश का पहला राज्य बना।

कृषि
• देश में सबसे ज्यादा खाद्यान्नों का उत्पादन करने वाला राज्य। 2011-12 के दौरान 5,182 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की उत्पादकता।
• सरसों का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाला राज्य। 2011-12 के दौरान 1869 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उत्पादकता रही।
• ऐग्रो मॉल चेन को स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य
• खाद्यान्न बाजार से ऑनलाइन जुडऩे वाला देश का पहला राज्य
• जानवरों के मुंह और पैरों में होने वाली बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित करने वाला देश का पहला राज्य
• प्रति भैंस दुग्ध उत्पादकता में हरियाणा देश में अव्वल
• सभी वेटनरी अस्पतालों में निदान सुविधा पहुंचाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य
• बासमती चावल के निर्यात में हरियाणा देश भर में अव्वल। देश भर से निर्यात होने वाले कुल बासमती का 60 प्रतिशत अकेला हरियाणा निर्यात करता है।
• देश का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य।

शिक्षा
• महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने वाला उत्तर भारत का पहला राज्य।
• स्वतंत्रता के बाद देश में महिला मेडिकल कॉलेज स्थापित करने वाला पहला राज्य
• विद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने वाला पहला राज्य।
• अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और गरीबी रेखा से नीचे के सभी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने वाला देश का पहला राज्य।

 

सुधीर गहलोत

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