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कांग्रेस का गौरव हुड्डा?

भारत में जब भी मुख्यमंत्रियों की बात विकासपुरूष के नाम पर की जाती है, तो मीडिया में प्रथम नाम गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का आता है। पर हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने इस तथ्य को आंकड़ों की कसौटी पर झुठला दिया है। विकास के सभी मापदंडों पर हरियाणा न केवल गुजरात से, अपितु देश के दस शीर्ष विकसित राज्यों की तुलना में अग्रणी है।

आज हरियाणा की गिनती देश के अग्रणी प्रगतिशील राज्यों में होती है। किसी भी प्रदेश की प्रगति के चार मापदंड होते हैं -प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश, प्रति व्यक्ति योजना खर्च और राजस्व संसाधनों की आपूर्ति। इन चारों ही मापदंडों पर हरियाणा देश के अन्य सभी राज्यों से आगे है। 2012-13 के दौरान हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे ज्यादा रही, जो कि 1,23,554 रुपये थी। 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में हरियाणा में राजस्व संसाधनों की आपूर्ति 192 प्रतिशत हुई, जबकि राष्ट्रीय औसत 95 प्रतिशत था और गुजरात का 96.5 प्रतिशत था। यही नहीं, 2010-11 के दौरान 78,500 रुपये प्रति व्यक्ति निवेश के साथ हरियाणा सर्वोच्च स्थान पर रहा। जबकि 2004-05 में हरियाणा का स्थान 14वां था। प्रति व्यक्ति योजना बजट के मामले में भी हरियाणा का प्रमुख स्थान है। 2013-14 के दौरान प्रति व्यक्ति योजना खर्च 10,700 रुपये रहा।

इन सब उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के दूरदर्शी नेतृत्व को श्रेय देना गलत नहीं होगा। यहां यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जहां केन्द्र में कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार, एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है, वहीं हरियाणा की हुड्डा सरकार अपनी बेदाग छवि के लिए पूरे देश में एक विशिष्ठ स्थान रखती है। इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि हुड्डा, सोनिया गांधी के विश्वस्त सिपाहसलारों में शुमार हैं। सन् 2005 में बनी हुई हुड्डा सरकार ने एक के बाद एक नई कामयाबियों के झंडे गाड़े, इसलिए वह 2009 में दुबारा सत्ता में आए।

आज हरियाणा शिक्षा के क्षेत्र में उभर रहा है। प्रदेश में वर्ष 2004-05 में पांच सरकारी विश्वविद्यालय थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गयी है। सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को मिलाकर प्रदेश में कुल 30 विश्वविद्यालय हैं। आज हरियाणा में युवाशक्ति की एक बहुत बड़ी दौलत है और राज्य सरकार उन्हें शिक्षित और कुशल बनाने के लिए आधुनिक एवं तकनीकी शिक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर जोर दे रही है। आज राज्य में 650 से अधिक तकनीकी संस्थान हैं, जिनमें डेढ़ लाख सीटें हैं।

आज के समय में विकास के लिए बिजली पहली जरूरत है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हुड्डा सरकार ने राज्य में चार नए थर्मल पावर प्लांट स्थापित किए हैं। जिनकी वजह से प्रदेश की कुल उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता 9,839,43 मेगावाट हो गई है। 2004.05 में यह क्षमता मात्र 4033.060 मेगावाट थी।

यहां यह कहना जरूरी है कि किसी भी प्रदेश को प्रगति की गति तेज करने के लिए उद्योगों का विकास करना जरुरी है। इसी पृष्ठभूमि में हरियाणा में नई औद्योगिक एवं निवेश नीति-2011 बनाई गई। इसके तहत राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने, आधारभूत संरचना के विकास तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि आधारित उद्योगों को विशेष रियायतें दी जा रही हैं। कम विकसित क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार पर बल दिया जा रहा है। उद्योगों को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आज हरियाणा देश-विदेश के उद्यमियों की पहली पसंद बन गया है। राज्य में 2005 से अब तक 61 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है और 97 हजार करोड़ रुपये का निवेश पाईपलाईन में है। यह कहना तर्कसंगत होगा कि कृषि प्रधान राज्य से आज हरियाणा की पहचान एक उन्नत औद्योगिक राज्य के रुप में स्थापित हो चुकी है।

यहां यह उल्लेख कर दूं कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, जहां खुद खेलप्रेमी हैं, वहीं पिछले आठ वर्षों के दौरान उनकी सरकार ने युवाओं के चतुर्मुखी विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी उनकी प्रतिभा निखारने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिस वजह से हुड्डा सरकार के शासनकाल के दौरान ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और राष्ट्रीय खेलों में राज्य के युवा खिलाडिय़ों ने रिकॉर्ड पदक जीतकर प्रदेश का नाम रौशन किया है।

हालांकि सभी उपलब्धियों के बावजूद हुड्डा सरकार के सामने अब कुछ चुनौतियां हैं। हरियाणा में कानून-व्यवस्था की स्थितिए विशेष रुप से बलात्कार, अपहरण, हत्या, डकैती एवं दलित उत्पीडऩ अब भी जारी है। हुड्डा सरकार के दो मंत्रियों और एक मुख्य संसदीय सचिव को गंभीर आपराधिक मामलों के चलते इस्तीफे देने पड़े। उन पर सीबीआई की जांच चल रही है। राज्य में अफसरशाही सरकार पर हावी होती दिख रही है। अत: हुड्डा को इन क्षेत्रों में और सख्त फैसले लेने की जरूरत है, जिससे इन कमियों को जड़ से दूर किया जा सके और राज्य की जनता को पूरी तरह चैन से विकास के फल का रसास्वादन कर सके।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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