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राशिफल 22-28 जुलाई 2013

मेष
रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। मनोकामना पूर्ण होगी। दोस्तों से मतभेद दूर होंगे। प्यार में रोमांचक स्थिति और निर्णायक मोड़ आने की संभावना है। विद्यार्थियों के लिए शुभ समय है। सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। व्यवसाय में उन्नति होगीं। शुभ अंक : 8, शुभ रंग : लाल, शुभ दिशा : पश्चिम, उपाय : लक्ष्मी मां को फल और चाबी का छल्ला चढ़ाएं।
वृषभ
पुलिस-कचहरी से दूर रहें। शीरीरिक पीड़ा से परेशानी होगी। मधुमेह के रोगी सावधानी बरतें। संपत्ति संबंधी विवाद को सावधानीपूर्वक निबटाएं। मांगलिक कार्यों के लिए उचित समय नहीं है। वरिष्ठ सहयोगियों को सम्मान दें। विद्यार्थियों के लिए शुभ अवसर आएंगे। शुभ अंक : 5, शुभ रंग : सफेद, शुभ दिशा : दक्षिण-पश्चिम, उपाय : हनुमानजी को फल और वस्त्र चढ़ाएं।
मिथुन
पारिवारिक जीवन सुखद होगा। खुशी और उल्लास का माहौल रहेगा। विवाह और अचल संपत्तियों में निवेश के लिए के लिए शुभ समय है। विदेश यात्रा में सफलता मिलेगी। पदोन्नति व नौकरी की प्राप्ति होगी। शारीरिक समस्याओं का निवारण होगा। शुभ अंक : 3, शुभ रंग : हरा, शुभ दिशा : दक्षिण, उपाय : प्रतिदिन शिव परिवार की पूजा करें और दीपक जलाएं।
कर्क
आपसी मनमुटाव से परिवार में क्लेश रहेगा। संबंधियों से मतभेद होने की आशंका रहेगी। धन की प्राप्ति होगी। विद्याथियों को लाभ होगा। नया भवन लेने में सावधानी बरतें। शारीरिक हानि हो सकती है। पुलिस-कचहरी से नुकसान होगा। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी। शुभ अंक : 9, शुभ रंग : गुलाबी, शुभ दिशा: दक्षिण-पूर्व, उपाय : गौरी मां को वस्त्र चढ़ाएं।
सिंह
रुके हुए कार्य पूरे होंगे। नौकरी और व्यवसाय में सफलता मिलेगी। विदेश संबंधी कार्यों में सफलता मिलेगी। दुश्मनों पर विजय की प्राप्ति होगी। नए मित्र बनेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अपनों की तरफ से उपहार मिलने की उम्मीद है। घर में खुशी का माहौल रहेगा। शुभ अंक : 4, शुभ रंग : पीला, शुभ दिशा : पूर्व, उपाय : गणेशजी को नारियल का लड्डू चढ़ाएं।
कन्या
व्यापार और नौकरी में नए अवसर प्राप्त होंगे। साक्षात्कार में सफलता मिलेगी। यश की प्राप्ति होगी। रोगों से मुक्ति मिलेगी। नए रिश्ते बनेंगे। सरकार की तरफ से सम्मान की प्राप्ति होगी। विद्या के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। रिश्तों में नए विश्वास पैदा होंगे। संयम बरतें। शुभ अंक : 6, शुभ रंग : भूरा, शुभ दिशा : उत्तर-पूर्व, उपाय : नारायणजी को मुकुट भेंट करें।
तुला
लाभ की प्राप्ति होगी। निवेश से लाभ होगा। अचल संपत्ति में बढ़ोत्तरी होगी। बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। प्यार के लिए निर्णायक समय है। व्यवसाय में उन्नति होगी। नजर दोष से बचने का समय है। कोर्ट-कचहरी से संबंधित कार्यों में विलंब होगा। सगे-संबंधियों से सहयोग मिलेगा। शुभ अंक :1, शुभ रंग: ग्रे, शुभ दिशा : उत्तर, उपाय : कार्तिकेय भगवान को मोर पंख चढ़ाएं।
वृश्चिक
खानपान पर ध्यान दें। शादीशुदा जिंदगी में उल्लास रहेगा। शारीरिक नुकसान होने की आशंका है। खर्च ज्यादा होंगे। विद्यार्थियों के लिए नए विकल्प खुलेंगे। धन संपत्ति की हानि हो सकती है। बड़े-बुजूर्गों को सम्मान दें। सरकारी कार्यों में बाधा होगी। शुभ अंक :2, शुभ रंग : आसमानी, शुभ दिशा : उत्तर-पश्चिम, उपाय : संतोषी मां को काला चना और गुड़ का भेंट चढ़ाएं।
धनु
सामान्य समय है। समय के साथ चलें। वार्तालाप में समय संयम रखें। शारीरिक और आर्थिक नुकसान के कारण मन में तनाव रहेगा। नई खरीददारी और निवेश से बचें। सरकारी कार्यों में विघ्न पैदा हो सकती है। घर में मेहमानों के आगमन से परेशानी होगी। शुभ अंक : 7, शुभ रंग : रानी, शुभ दिशा : दक्षिण, उपाय : बाबा बालकनाथ जी को तेल चढ़ाएं।
मकर
घरेलू मामलों में अच्छे समाचार मिलेंगे। विद्या प्राप्ति का शुभ अवसर है। निवेश से फायदा होगा। जीवन में नए लोग मिलेंगे। यात्रा सफल होगी। सरकारी कामों में लाभ मिलेगा। परीक्षा के परिणाम मनपसंद रहेंगे। संपत्ति-विवाद हो सकता है। हड्डी-संबंधी शारीरिक परेशानी होगी। शुभ अंक : 2, शुभ रंग : काला, शुभ दिशा : पूर्व, उपाय : राम परिवार को वस्त्र भेंट करें।
कुंभ
मेहनत करने का समय है। सामाजिक बंधनों से मुक्ति मिलेगी। इरादों को मजबूत रखें। लोगों के परिहास से निराश न हों। रूके हुए कार्य पूर्ण होंगे। घर में तनाव की स्थिति रह सकती है। संबंधों में दरार आ सकती है। निवेश से बचें। नाक और गला संबंधी परेशानी होगी। शुभ अंक : 9, शुभ रंग : नीला, शुभ दिशा : उत्तर, उपाय: सरस्वती मां को प्रतिदनि फूलों का हार चढ़ाएं।
मीन
विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त समय है। विदेश संबंधी कार्यों में सफलता मिलेगी। विवाह एवं संतान संबंधी सुखद समाचार मिलेंगे। यात्रा से सफलता मिलेगी। नौकरी संबंधी सुखद समाचार प्राप्त हो सकता है। अपने वरिष्ठ लोगों का साथ मिलेगा। शुभ अंक : 4, शुभ रंग : सुनहरा, शुभ दिशा : पश्चिम, उपाय : कृष्ण भगवान को मोर मुकुट और मक्खन का भेंट चढ़ाएं।
नारायण कवच का पाठ, काल को अनुकूल कर देता है : आचार्य विशाल अरोड़ा
परिचय
बचपन में अपनी बुआ से ज्योतिष का आरम्भिक ज्ञान प्राप्त कर, आचार्य विशाल अरोड़ा ने भविष्यवाणी करना शुरू कर दिया था। अपने ज्योतिष ज्ञान को अधिक गहरा करने के लिए उन्होंने 1990 में विश्व ज्योतिष गुरू के.एन. राव के निर्देशन में भारतीय विद्या भवन ज्योतिष संस्थान से ज्योतिष की शिक्षा ग्रहण करनी शुरू की। आचार्य की उपाधि प्राप्त करने के बाद, आचार्य विशाल अरोड़ा ने ज्योतिष में शोध करना शुरू किया और सन् 2000 में वह इसी ज्योतिष संस्थान में शिक्षक हो गए। उन्होंने व्यवसाय और समृद्धि में भविष्यवाणी करने और मार्गदर्शन करने का मार्ग अपनाया। वह कीमती पत्थरों, माणिकों, मोतियों और अन्य नगों के विशेषज्ञ हैं और लोगों के जीवन की कठिनाइयों को हल करने का प्रयास करते है।
नारायण कवच का प्रतिदिन पाठ करने से मानसिक और शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है। मन और शरीर सुदृढ़ होता है। यदि कमजोर समय चल रहा हो तो हालात ठीक हो जाते हैं। यदि जातक रोगों से ग्रस्त हो तो नारायण कवच का प्रतिदिन पाठ, सभी प्रकार के रोगों का नाश करता है और कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

श्री नारायण कवच:
ऊँ श्री विष्णवे नम: (तीन बार)
ऊँ नमो नारायणाय (तीन बार)
ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय (तीन बार)
आत्मानं परमं ध्यायेद् ध्येयं षट्शक्तिभिर्युतम्।
विद्यातेजस्तपोमूर्तिमिमं मंत्रमुदाहरेत् ।।1।।
ऊँ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां नयस्ताङ्घ्रपद्म: पतगेन्द्रपृष्ठे।
दरारिचर्मासिगदेषुचाप पाशान् दधानोस्ष्टगुणोस्ष्टबाहु: ।।2।।
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्ति र्यादोगणेभ्यो वरुणस्य पाशात् ।
स्थलेषु मायावटुवामनोस्व्यात् त्रिविक्रम: खेस्वतु विश्वरुप: ।।3।।
दुर्गेष्वटव्याजिमुखआदिषु प्रभु: पायान्नृसिंहोस्सुरयूथपारि: ।
विमुश्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुन्र्यपतंश्च गर्भा: ।।4।।
सक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्प: स्वदंष्ट्रयोन्नीतधरो वराह: ।
रामोस्द्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सलक्ष्मणोस्व्याद् भरताग्रजोस्स्मान् ।।5।।
मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायण: पातु नरश्च हासात् ।
दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथ: पायाद् गुणेश: कपिल: कर्मबंधात् ।।6।।
सनत्कुमारोस्वतु कामदेवा द्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात् ।
देवर्षिवर्य: पुरुषार्चनान्तरात् कूर्मो हरिर्मा निरयादशेषात् ।
धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद् द्वन्द्वाद् भयादृषभो निर्जितात्मा ।
यज्ञश्च लोकादवताज्जनान्ताद् बलो गणात् क्र्रोधवशादहीन्द्र: ।।8।।
द्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात् प्रमादात् ।
कल्कि: कले: कालमलात् प्रपातु धर्मावनागोरुकृतावतार: ।।9।।
मां केशवो गदया प्रतरव्याद् गोविन्द आसङ्गवमात्तवेणु: ।
नारायण: प्रा उदात्तशक्तिर्मध्यन्दिने विष्णुररीन्द्रपाणि: ।।10।।
देवोस्पराह्ने मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतु माधवो माम् ।
दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोस्वतु पद्मनाभ:।।11।।
श्रीवत्सधामापररात्र ईश: प्रत्यूष ईशोस्सिधरो जनार्दन:।
दामोदरोस्व्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान् कालमूर्ति:।।12।।
चक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम् ।
दंदग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमाशु कक्षं यथा वातसखो हुताश: ।।13।।
गदेस्शनिस्पर्दशनविस्फुलिङे निष्पिण्ढि़ निष्पिण्ढि़जितप्रियासि ।
कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षो भूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन् ।।14।।
त्वं यातुधान प्रमथप्रेतमातृ पिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्।
दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो भीमस्वनोह्दयानि कम्पयन्।।15।।
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्य मीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि ।
चक्षूंषि चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषमागोनां हर पापचक्षुषाम् ।।16।।
यन्नो भयं ग्रहेभ्योस्भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च ।
सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंस्होभ्य एव वा ।।17।।
सर्वाण्येतानि भगवान्नम रुपास्त्रकीर्तनात् ।
प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये न: श्रेय:प्रतीपका: ।।18।।
गरुडो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छनदोमय: प्रभु: ।
रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेन: स्वनामभि: ।।19।।
सर्वापद्भ्यो हरेर्नामरूपचानायुधानि न: ।
बुद्धिन्द्रिमन:प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणा: ।।20।।
यथा हि भगवानेव वस्तुत: सदसच्च यत् ।
सत्येनानेन न: सर्वे यान्तु नाशमुपद्रवा: ।।21।।
यथैकात्म्यानुभावनां विकल्परहित: स्वयम् ।
भूषणायुधलिङ्गाख्या धत्ते शक्ती: स्वमायया ।।22।।
तेनैव सत्यमानेन सर्वज्ञो भगवान् हरि: ।
पातु सवैर्: स्वरूपैर्न: सदा सर्वत्र सर्वग: ।।23।।
विदिक्षु दिक्षूध्र्वमध: समन्तादन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंह: ।
प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन सवतेजसा ग्रस्तसमस्ततेजा: ।।24।।

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