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राजस्थान में बिछी चुनावी बिसात

देश के सबसे बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल वाले राजस्थान की सियासी राजनीति की परिछाया में सत्तारूढ़ कांग्रेस दल की संदेश यात्रा और प्रतिपक्ष भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा का फलितार्थ आगामी विधानसभा चुनाव नतीजों के रूप में सामने आएगा। इसी साल नवम्बर के अंत में और दिसम्बर के शुरूआती दिनों में होने वाले चुनावों की बिसात बिछायी जा चुकी है। इन दोनों प्रमुख दलों के अलावा अन्य राजनीतिक पार्टियां भी अपनी चुनावी रणनीति को मांजने की तैयारी में जुट गई हैं।

संभागवार रोडमेप और पूरी तैयारी के साथ निकाली जाने वाली भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा से महज चार दिन पहले कांग्रेस ने राजस्थान दिवस 30 मार्च को अपनी संदेश यात्रा का आगाज करके बढ़त ले ली। कांग्रेस ने संभाग की अपेक्षा जिलों में भी चयनित विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए संदेश यात्रा का कार्यक्रम बनाया है और सुविधानुसार उसमें फेरबदल की गुंजाइश भी रखी है। उत्तराखण्ड की प्राकृतिक आपदा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वहां जाकर सहायता कार्यों में सहयोग एवं निगरानी के कार्यक्रम के चलते सीकर बीकानेर जिले के छ: विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली संदेशयात्रा के ग्यारहवें चरण को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

हताश कांग्रेसियों में उत्साह
इस संदेश यात्रा के शुरू होने और इसी दौरान राज्य सरकार द्वारा आगामी चुनाव के मद्देनजर लोक-लुभावन घोषणाओं के क्रियान्वयन से कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान ने राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। राजनीतिक पर्यवेक्षक मानने लगे हैं कि इस यात्रा के आयोजन से कांग्रेसजनों में नया उत्साह जगा है। आठ दस माह पहले हताश कांग्रेसी यह मानकर चल रहे थे कि अगले चुनाव में पार्टी सत्ता में आने वाली नहीं है। कांग्रेस की विभिन्न स्तरों पर होने वाली बैठकों में पार्टी के बड़े पदाधिकारियों के समक्ष भी इस निराशा की अभिव्यक्ति होने लगी थी। लेकिन गहलोत ने यात्रा के बीच से कांग्रेसजनों में यह विश्वास जगा दिया है कि पार्टी फिर से सत्ता में लौट रही है। पार्टीजनों में उत्साह का संचार हुआ है।

राज्य में दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचे गहलोत संगठन प्रिय रहे हैं और राज्य सरकार की उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने के मकसद से वह बराबर सत्ता तथा संगठन में आपसी बेहतर तालमेल पर बल देते रहे हैं। इसीलिए उन्होंने पार्टी की संदेश यात्रा की शुरूआत प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से करवाई। इस यात्रा के लिए तयशुदा रोडमेप तैयार करने की अपेक्षा विभिन्न जिलों में चरण दर चरण चयनित विधानसभा क्षेत्रों को तवज्जो दी गई, जहां कांग्रेस का जनाधार अपेक्षाकृत कमजोर था। इसी तरह हर जिले तथा इलाकों में दो से तीन बार संदेश यात्रा निकालने का कार्यक्रम बनाया गया है ताकि सभी क्षेत्रों में पार्टीजनों की सक्रियता बनी रहे। परिस्थितियों के अनुसार इसमें फेरबदल भी किया जा रहा है और बीच बीच में समीक्षा कर एक पखवाड़े में यात्रा के फॉलोअप के प्रयास भी किए गए हैं।

दूसरी तरफ भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा की शुरूआत इस बार भी राजसमन्द जिले के चारभुजाजी मंदिर में दर्शन के बाद आरम्भ हुई। वर्ष 2003 में प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी नियुक्ति के बाद वसुन्धरा राजे ने चार भुजा से परिवर्तन यात्रा का आगाज किया था। प्रदेश स्तर पर राजनीतिक यात्राओं का यह नया दौर था जिसमें वसुन्धरा को सफलता मिली और भापजा अपने बलबूते पहली बार स्पष्ट बहुमत से सत्तारूढ़ हुई।

रामानुजन 1914 से 1919 तक इंग्लैण्ड में रहे। उस दरम्यान उनके जीवन में काफी उतार-चढ़ाव भी आए। प्रथम विश्वयुद्ध के कारण गणित में उनके कार्य में रुकावट आई। पूर्ण शाकाहारी होने के कारण उन्हें खान-पान में तो काफी कठिनाई रही। अत्यधिक ठंड के कारण वह बीमारी आदि समस्याओं के बीच भी घिरे रहे।

उपलब्धियां, नियुक्तियां और 37 शोध
उन्होंने 37 शोध-पत्र प्रस्तुत किए। उन्हें 19 मार्च 1916 को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से स्नातक की उपाधि दी गई। 6 दिसम्बर 1917 को ”फैलो ऑॅफ लंदन मेथेमेटीकल सोसायटी” के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। फरवरी 1918 में वह केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सदस्य के रूप में नियुक्त हुए। उन्हें मई 1918 में प्रथम भारतीय के रूप में ”फैलो ऑफ रॉयल सोसायटी” बनने का सम्मान प्राप्त हुआ। 13 अक्टूबर 1918 को वह ट्रिनिटी कॉलेज के फेलो चुने गए। इस घटना से रामानुजन को अपना जीवन सार्थक लगने लगा। ट्रिनिटी कॉलेज के फेलो बन कर वह खुद को धन्य मानने लगे, क्योंकि उनके गुरू के समान, प्रो. हार्डी भी इसी पद पर ट्रिनिटी कॉलेज में ही कार्यरत थे।

छू लिया गणित का आसमां
श्रीनिवास रामानुजन ने 32 वर्ष की छोटी आयु में जीवनभर संघर्षरत रहकर गणित के क्षेत्र में सारी ऊंचाईयों को छू लिया था। उनके किए हुए शोध कार्य का पार्टिकल फिजिक्स, कम्प्यूटर साईंस, क्रायप्टोग्राफी, पोलिमर केमिस्ट्री, परमाणु भट्टी, दूरसंचार, कम्यूनिकेशन नेटवर्क, घात, न्यूकिलयर फिजिक्स, चिकित्सा विज्ञान आदि क्षेत्रों में अनुप्रयोग किए जा रहे हैं। उनकी तीन हस्तलिखित नोट बुक ‘टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फंडामेन्टल रिसर्च’ ने प्रकाशित की थीं। इंगलैंड में अन्तिम दिनों में किए गए उनके कार्यों के 140 पृष्ठ अप्रैल 1976 में अमेरिका की ‘विस्कोन्सीन यूनिवर्सिटीÓ में विजीटिंग प्रोफेसर के रूप मे कार्य करने वाले प्रो. जोर्ज एन्ड्रयुज को ट्रिनिटी कॉलेज की पुस्तकालय में से अचानक मिल गए। प्रो. एन्ड्रयूज ने वे सारे पेपर ”रामानुजन की गुम नोटबुक” (द लॉस्ट नोटबुक ऑफ रामानुजन) नाम से प्रकाशित किए, जिस पर आज भी दुनिया के महान गणितज्ञ कार्य कर रहे है। अभी कुछ दिन पूर्व अमेरिका के गणितशास्त्री ने रामानुजन के अन्तिम पत्र में भेजे फॉम्र्यूले को सिद्ध करने का दावा किया है।

हंगेरियन गणितज्ञ की दिलचस्प घटना
इसी प्रकार 1921 में प्रसिद्ध हंगेरियन गणितज्ञ ज्योर्ज पोल्या ने प्रो. हार्डी से रामानुजन की नोटबुक का अध्ययन करने के लिए अनुमति ली थी। लेकिन कुछ दिन के बाद उन्होंने प्रो. हार्डी को वह नोटबुक वापस कर दी। प्रो. हार्डी के पूछने पर उन्होंने उत्तर दिया कि-”अगर मैं इसके परिणामों को सिद्ध करने के मायाजाल में फंस गया तो मेरा समग्र जीवन इसी में बीत जाएगा और मेरे लिए स्वतंत्र शोध कार्य करना संभव ही नहीं होगा।”

प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं दार्शनिक बट्रेड रसेल ने कहा कि-”प्रो. हार्डी एवं प्रो. लिटिलवुड ने ‘एक हिन्दू क्लर्क’ में ‘दूसरे न्यूटन’ को खोज निकाला”। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रसिद्ध वैज्ञानिक ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा कि-”भारत ही नहीं पूरे विश्व के गणितज्ञों के लिए रामानुजन निरंतर प्ररेणास्त्रोत बने हुए हैं।” प्रो. हार्डी ने कहा कि-”उन्होंने मेरे जीवन को समृद्ध बनाया है, मैं उनको कभी भूलना नहीं चाहता।” प्रो. हार्डी ने भारत के इस अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन की तुलना विश्व के अन्य समकालीन विख्यात गणितज्ञों से करने के लिए गणित के तत्कालिकन विद्वानों को 100 में से अंक दिये थे, जिसमें स्वयं को 25, लिटिलवुड को 30, जर्मन गणितज्ञ हिलवर्ड को 80 और रामानुजन को 100 अंक दिए थे।

विनम्रता और सादगी
रामानुजन ने केम्ब्रिज यूनिवसिर्टी में इतने सम्मान प्राप्त किए, परन्तु उनके जीवन की सरलता, सादगी और भारतीयता को उन्होंने जीवन में यथावत बनाए रखा था। प्रो. के आनन्दराव रामानुजन के समय में ही किंग्स कॉलेज में थे। उनके अनुसार इतनी प्रसिद्धी मिलने के बाद भी रामानुजन स्वभाव से विनम्र थे। उनका रहन-सहन सादा और सुरूचिपूर्ण था। रामानुजन विदेश में भी अपने लिए स्वयं ही भोजन बनाते थे। वह कहते थे,-”यदि कोई गणितीय समीकरण अथवा सूत्र, किसी भागवत विचार से मुझे नहीं भर देता, तो वह मेरे लिए निरर्थक है।” उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। लिखते समय कागज खत्म हो जाता था तो वह लिखे हुए कागज पर लाल स्याही की मदद से सूत्र लिखने लगते थे। नौकरी के समय में पोर्ट ट्रस्ट के रास्ते से कागज इकट्ठा करके उपयोग करते थे। चैन्नई विश्वविद्यालय से जब उनकी 250 रूपए की छात्रवृति स्वीकार हुई, तब उन्होंने रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर कहा-”इसमें से मेरे घर का खर्च निकलने के बाद, जो बच जाए वह गरीब विद्यार्थियों के सहायता कोष में जमा करा दें।”

125वां जन्मदिवस साल: गणित वर्ष
सरकार ने श्रीनिवास रामानुजन के 125वें वर्ष को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया है। 22 दिसम्बर को गणित दिवस मनाया जा रहा है। लेकिनु भारत में श्रीनिवास रामानुजन के कार्य पर विशेष अनुसंधान नहीं किया जा रहा। केन्द्र एवं राज्यों की सरकारों तथा देश में गणित पर कार्य करने वाले विद्वानों एवं विश्वविद्यालयों को इस पर चिंतन करके कुछ ठोस का
यात्रा स्तर पर ही मुकाबला
इस बार सत्तारूढ़ दल-कांग्रेस तथा प्रतिपक्ष भाजपा में यात्रा स्तर पर ही मुकाबला शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे के बीच आरोप-प्रत्यारोप व्यक्तिगत लांछनों के स्तर पर जा पहुंचा है। हालात यह हैं कि वसुन्धरा के विरोधी खेमे के नेता भाजपा विधायक दल में उपनेता रहे घनश्याम तिवाड़ी को सड़कों पर गालीबाजी की इस प्रवृति की निंदा करनी पड़ी। दोनों पक्षों की सभाओं में भीड़ जमा होने तथा पब्लिक रेस्पांस का भी तुलनात्मक अध्ययन किया जाने लगा है। इस बीच सरकारी स्तर पर विभिन्न योजनाओं के लिए शिलान्यास या उद्घाटन सम्बन्धी कार्यक्रमों को लेकर भाजपा की बौखलाहट को खिसयानी बिल्ली खम्भा नोंचे वाली कहावत बताया जा रहा है।

इस यात्रा को लेकर भाजपा नेतृत्व के समक्ष एक गम्भीर समस्या भी उत्पन्न हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह सोलंकी और राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्योदान सिंह ने संभाग प्रभारियों के साथ सुराज संकल्प यात्रा की अब तक की समीक्षा में इस मसले पर चर्चा की है। दोनों नेताओं ने प्रमुख पदाधिकारियों को इस बात के लिए चेता दिया है कि यात्रा के दौरान उमड़ी हुई भीड़ को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं पालना चाहिए। यह माना जाना चाहिए कि भीड़ विधानसभा चुनाव के टिकट दावेदारों और उनके समर्थकों द्वारा जुटाई गई और कुछ प्रचार-प्रसार तथा उत्सुकतावश इक_ी हुई होगी। लेकिन ध्यान इस बात पर भी दिया जाना चाहिए कि यात्रा के दौरान जिले तथा सम्भाग में पार्टी के प्रति जो माहौल बना है उसे कैसे बनाया रखा जाए। इसके लिए भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने के निर्देश भी पदाधिकारियों को दिए गए हैं क्योंकि चुनाव में अभी चार-पांच माह का अंतराल है। पार्टी नेतृत्व को यह भी चिंता है कि यात्रा की तैयारियों तथा यात्रा के दौरान कई जिलों में गुटबाजी तथा टिकटों की दावेदारी को लेकर मनमुटाव का भौंडा प्रदर्शन भी हुआ है। स्थानीय स्तर पर संगठन की मजबूती के लिए राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्योदानसिंह ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। यात्रा संभाग प्रभारी उनके साथ संगठन के कामकाज में सहयोग देंगे।

अगस्त में विशाल रैली
भाजपा ने जयपुर और जोधपुर सम्भाग में सुराज संकल्प यात्रा की समाप्ति के कुछ अंतराल के बाद जयपुर में 11 अगस्त को विशाल रैली आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसमें गुजरात के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव अभियान के मुखिया नरेन्द्र मोदी मुख्य वक्ता होंगे। भाजपा ने सत्ता पाने की होड़ में राजनीतिक यात्रा निकाली है तो सत्तारूढ़ कांग्रेस पुन: सत्ता में बने रहने की जुगत में है। स्वाभाविक तौर पर दोनों पक्ष विधानसभा चुनाव के लिए सक्षम उम्मीदवारों की तलाश में लगे हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यात्रा की तैयारी भीड़ जुटाने तथा सभा को प्रभावी बनाने के साथ ही टिकट के दावेदारों की भूमिका का आकलन विभिन्न स्तरों पर किया जा रहा है। फीडबैक का सिलसिला भी जारी है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जुलाई माह में टिकट बांटने का पासा फेंक कर कांग्रेसजनों में उत्साह जगाया है। वहीं भाजपा प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह सोलंकी इसे व्यावहारिक नहीं मानते।

बहरहाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो. ललित किशोर चतुर्वेदी का यह आकलन है कि अभी कांग्रेस भाजपा फिफ्टी-फिफ्टी है। अब आने वाला वक्त बताएगा कि कौन-सा पक्ष इस गणित की सीमा रेखा पार कर सत्ता के शिखर पर आसीन होता है। र्य करने के बारे में विचार करना चाहिए। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने देशभर में गणित वर्ष के निमित्त विभिन्न गतिविधियां चलाने की योजना बनाई है। उन्हें आगे भी जारी रखने का निश्चय किया गया है। रामानुजन के जीवन पर एक किताब भी प्रकाशित होने जा रही है।

श्रीनिवास रामानुजन का जीवन एवं कार्य मात्र भारत के ही नहीं, बल्कि विश्व के गणितज्ञों, शिक्षकों एवं छात्रों के लिए प्रेरणादायी है। आईए, श्रीनिवास रामानुजन के जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर, उनके कार्यों को आगे बढ़ाने एवं छात्रों को गणित के भय से मुक्त करने का संकल्प करें। यही श्रीनिवास रामानुजन को सच्ची श्रद्धांजली होगी।

 

जयपुर से, गुलाब बत्रा

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