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सरकार की कमजोरी से हुई मेरे भाई की हत्या: दलबीर कौर

पिछले दो दशक से अपने भाई सरबजीत सिंह की पाकिस्तान जेल से वापसी के लिए संघर्ष करने वाली बहन दलबीर कौर ने अपने भाई की जिंदा वापसी की दुआएं मांगी थी, न कि भाई को मुखाग्नि देने की। अपनी जान से भी ज्यादा प्यारे भाई को मुखाग्नि देने के लिए दलबीर कौर ने स्वयं को किस तरह हिमत दी होगी, इसकी तो केवल कल्पना ही की जा सकती है। बचपन से ही दिलेर रही दलबीर कौर अपने भाई की हत्यारी सरकारों पर आरोप लगाते नहीं डरती हैं। आज भी चमत्कार की उम्मीद करती हैं कि भीड़ में से किसी दिन उनका भाई आकर उनके सामने खड़ा हो जाएगा। पर यह तो सभी जानते हैं कि ऐसे चमत्कार केवल टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में ही हो सकते हैं, हकीकत इससे जुदा है। इस बात को वे भी बखूबी जानती हैं और इसीलिए वे अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं ताकि सरबजीत जैसे अनेक भारतीय कैदियों को बचाया जा सके जो पाकिस्तान की जेलों में झूठे आरोपों में बंद हैं। इसी सिलसिले में उदय इंडिया की जयपुर में विशेष संवाददाता प्रीति जोशी से दलबीर कौर की बातचीत के अंश प्रस्तुत हैं:सरबजीत सिंह पाकिस्तान कैसे पहुंचा?
28 अगस्त, 1990 का ही वह मनहूस दिन था, जिस दिन ने मेरे भाई को मुझसे अलग किया। उस रात वह पंजाब के तरनतारण जिले के भिखीविंड गांव के अपने खेत में काम कर रहा था। उस समय पाकिस्तान और भारत की सीमा पर तार के बाड़े नहीं होते थे। काम करते हुए रात को जब वह घर की ओर आने लगा तो उसे यह पता नहीं चल सका कि वह पाकिस्तान की ओर जा रहा है। बस फिर क्या था, पाकिस्तान की सीमा पार करते ही उसे पाकिस्तानी सैनिकों ने पकड़ लिया। उसके सुबह तक घर नहीं आने पर उसकी तलाश हर जगह की गई। नौ महीनों तक हमें उसके बारे में पता नहीं चल सका। हमें संदेह हुआ कि उसे आतंकवादी पकड़ कर ले गए हैं।

आपको अपने भाई का पता कैसे चला?
नौ महीने बाद एक दिन पाकिस्तान जेल से हमारे घर पर एक चिट्ठी आई। उस चिट्ठी को देखकर हम सभी ने यही सोचा कि पाकिस्तान में तो हमारा कोई रिश्तेदार या जानने वाला नहीं रहता फिर वहां से यह चिट्ठी किसकी आई है? पहले तो हमने वह चिट्ठी लेने से इनकार कर दिया पर फिर सोचा कि देखा तो जाए कि यह किसने भेजी है? जब उस चिट्ठी को खोलकर देखा गया तो हम सभी की आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ी, जो आज तक बह रही है। वह चिट्ठी मेरे ही भाई सरबजीत सिंह की थी, उसने पाकिस्तान जेल से हमें भेजी थी। उस चिट्ठी के जरिए ही हमें पता चला कि सरबजीत पाकिस्तान में मनजीत सिंह नाम के व्यक्ति के आरोप में सजा काट रहा है। उसके खिलाफ मनजीत सिंह के नाम से केस दर्ज कराया गया था। इस व्यक्ति पर पाकिस्तान में 4 बम विस्फोट करने के खिलाफ केस दर्ज था। सरबजीत की हकीकत सुनने वाला वहां कोई नहीं था। उसने चिट्ठी में लिखा भी था कि जेल में उसे बहुत प्रताडि़त किया जाता है और अपराध को कबूल करने का दबाव बनाया जाता है।

भाई की मदद के लिए आपने क्या किया?
मैंने ऐसी कोई जगह या कोई व्यक्ति या कोई संगठन कोई सरकार नहीं छोड़ी, जिस तक गुहार नहीं लगाई हो। राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक मैंने मिन्नतें की और अपने भाई को छुड़ाने की गुहार लगाई, पर नतीजा सिफर रहा। मेरा भाई वापिस आ सकता था, लेकिन सरकारों की लापरवाही की वजह से मेरा भाई आज इस दुनिया में नहीं है। भारतीय नेताओं से लेकर पाकिस्तानी नेताओं तक के पास मैं जा-जाकर गुहार करती थी। पाकिस्तान से हर आने-जाने वाले जत्थे, सभी से अपने भाई की घर वापसी की मांग करती थी। कोई मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा नहीं छोड़ा जहां अपने भाई की वापसी की दुआ नहीं की। पर मेरी यह सारी मेहनत कुछ काम न आ सकी, मैं अपने भाई को बचा न सकी।

आप किसे जिम्मेदार या दोषी मानती हैं?
मेरे भाई को बचाने के लिए भारत सरकार को कोशिश करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई। जबकि सरबजीत का हर पक्ष मजबूत था पर सरकार उस पक्ष को सही ढंग से रख नहीं पाई। सरकार के पास मौके भी बहुत आए कि वह सरबजीत के लिए कुछ कर सकती थी। सरकारों ने सिर्फ आश्वासन दिए काम कुछ नहीं किया। मैं अपने भाई की मौत की जिम्मेदार सरकार को मानती हूं।

अब आप क्या करना चाहती हैं?
मैंने अपना भाई खोया है, जिसकी भरपाई अब कोई सरकार नहीं कर सकेगी। अब सरकार कुछ भी करती रहे, मुझे मेरा भाई तो मिल नहीं सकता। सरकार जो हमारे लिए कर रही है, वह तो सरकार की मजबूरी है, वरना तो यह भी नहीं करे सरकार। सरकार की कमजोरी मुझे याद रहेगी। सरबजीत सिंह की हत्या के मामले को हम अंतरराष्ट्रीय अदालत में लेकर जाएंगे। मैं पूरे देश की जेलों का दौरा करूंगी। मैं एक ट्रस्ट बना रही हूं जिसके जरिए मैं जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों की स्थिति के बारे में जानकारी लूंगी कि कहीं पाकिस्तान की तरह यहां की जेलों में भी तो वैसा सलूक नहीं हो रहा जैसा मेरे भाई के साथ हुआ। इसके अलावा मैं प्रयास करूंगी कि पाकिस्तानी कैदियों को रिहा करा कर भारतीय कैदियों को स्वदेश वापस लाया जाए।

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