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देश के नेताओं का जागा नहीं जमीर

पाकिस्तान में भले ही नेतृत्व बदल गया हो, लेकिन पाक का चेहरा आज भी वही पुराना है। पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को मदद लगातार जारी है। इसी का एक उदाहरण है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद को करीब 630 लाख रुपए की सरकारी मदद दी है। ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है, हमेशा से ही ऐसा होता आ रहा है। पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों को दी जाने वाली आर्थिक मदद की भारत को जानकारी होते हुए भी भारत सरकार पाकिस्तान का विरोध नहीं करती है। शायद हाफिज सईद से भारत सरकार के नेता डरते हैं। ऐसा मानना है पूर्व मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारी कर्नल आर.एस.एन. सिंह का। ये रॉ के अधिकारी भी रहे हैं। सिंह ने ‘दी मिलिट्री फेक्टर इन पाकिस्तान’ नामक पुस्तक भी लिखी है। भारत सरकार की देश विरोधी नीतियों के बारे में सिंह ने उदय इंडिया से अपना विरोध और विचार साझा किए:

गुप्तचर एजेंसयों के प्रति भारत सरकार का क्या रवैया हैं?
मैं गुप्तचर एजेंसी से जुड़ा रहा हूं, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली के बारे में अच्छी तरह समझता हूं। सरकार देश की गुप्तचर एजेंसियों को आपस में लड़वाने की कोशिश कर रही है, जो देश के लिए ठीक नहीं है। इसका उदाहरण अभी हाल ही की घटना है। सीबीआई ने इशरत जहां मामले में आईबी के अधिकारी को पूछताछ के लिए बुलाया था, जबकि ऐसा पहले कभी नहीं होता था। यह सब सरकार के नेतृत्व की गलत नीतियां हैं, जिससे देश को नुकसान हो रहा है। सरकार देशहित के मामलों में लापरवाह है। उनका कहना था कि आखिर हम कैसे जनप्रतिनिधियों को चुन कर देश की सत्ता सौंप रहे हैं।

आतंकवाद के मामले में जनता और जनप्रतिनिधियों की क्या जिम्मेदारी हैं?
देश में आतंकवाद बढऩे की वजह जनता और जनप्रतिनिधि दोनों ही हैं। यदि अब भी देश की जनता नहीं जागी तो यह देश आतंकवाद की भेंट चढ़ता जाएगा और हमारे वीर सैनिक शहीद होते रहेंगे। सरबजीत के साथ जो हुआ उसे पूरा देश जानता है। उसके साथ ऐसा क्यों हुआ, क्योंकि पाकिस्तान हमसे सवाल करता है कि अजमल कसाब और अफजल गुरु को फांसी क्यों दी? इनकी फांसी के बदले में पाकिस्तान ने सरबजीत को शहीद कर दिया।

सरबजीत को बचाने के लिए आपने क्या किया?
सरबजीत को बचाने के लिए उनकी बहन दलबीर कौर ने मुझसे कई बार संपर्क किया था। मैंने अपनी ओर से उसकी भारत वापसी की कोशिशें भी कीं, लेकिन मैं एक बहुत छोटा सा अधिकारी था, जिसके हाथ में ज्यादा कुछ नहीं था। हमारी ओर से जो कोशिश की जा रही थी, उससे यह उम्मीद बंध गई थी कि सरबजीत को रिहा कर दिया जाएगा। इसके लिए एक बार तो मैंने दलबीर कौर को बधाई भी दे दी थी। पर अफसोस कि ऐसा हो नहीं सका।

क्या पाकिस्तान भारत से लड़ाई चाहता है?
पाकिस्तान से लड़ाई बंद ही कब हुई थी। लड़ाई तो आज भी जारी है। हालांकि यह लड़ाई प्रॉक्सी वार का हिस्सा है, जो आजकल हो रही है। कसाब और अफजल की फांसी के बदले सरबजीत की हत्या और हाल ही में हुआ श्रीनगर में हमला, यह सब प्रॉक्सी वार का हिस्सा है।

भारत सरकार को क्या करना चाहिए?
भारत सरकार को सख्त होना पड़ेगा। यह कैसा देश है, जिस पर दूसरे देश आतंकवादी हमले करते रहते हैं और यह कुछ नहीं करता। पाकिस्तान के पंजाबी सूबे ने 26/11 को अंजाम तक पहुंचाने वाले हाफीज सईद को 630 लाख रुपए आवंटित किए। यह आंकड़ा कोई छुपा हुआ नहीं है, यह जगजाहिर है। यह जानते हुए भी हमारे नेताओं ने इस बात का विरोध नहीं किया। विरोध करने की जगह वे पाकिस्तान के दौरे करने पहुंच जाते हैं। उनकी नजरों में हमारे शहीदों का कोई मूल्य नहीं है। हमारे देश के नेता नहीं, बल्कि पूर्व सैन्य अधिकारी ऐसे मामलों का विरोध करते हैं। मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बक्शी ने पाकिस्तान की हरकत पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि हम पड़ोसियों से शांति-शांति की बात करते रहते हैं, लेकिन उसका यह सिला दिया जाता है। इसके बावजूद देश के नेताओं का जमीर नहीं जागा। मर चुका है इनका जमीर। दूसरी ओर अमेरिका जब ओसामा बिन लादेन का खात्मा करता है तो यही नेता यहां बैठे तालियां बजाते है। लेकिन भारत ने हाफिज सईद के मामले में ऐसा कोई काम नहीं किया। हमारे यहां नेताओं का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो किसी कारण से हाफीज सईद से डरता है। यह समय पाकिस्तान के साथ मैत्री संबंध बनाने का नहीं बल्कि मुंहतोड़ जवाब देने का है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश को कभी आतंकवाद से निजात नहीं मिलेगी।

उदय इंडिया ब्यूरो, जयपुर

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