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मेरी गली का छोटा-सा मंदिर

कटक में अवैध निर्माण गिराने का अभियान चल रहा था। इससे मैं भारत में अपने हिन्दू होने के कारण दुखी हूँ। हम हिन्दुओं का दोहरा चरित्र और पाखंड जग जाहिर है, जो रूस में भगवद् गीता पर प्रतिबंध लगाने, इस्कॉन का मंदिर ढहाने, बांग्लादेश और पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाने का विरोध करते हैं, लेकिन जब स्वयं हमारी सरकार वर्षों पुराने मंदिरों को ध्वस्त करती है तो मूक दर्शक बने रहते हैं।

भारत की आत्मा ग्रामों, कस्बों, नगरों, पर्वतों और नदियों के रक्षक देवों में निवास करती है। ये मंदिर हमारे आत्मारहित कस्बों और नगरों को पवित्र करते हैं। सड़कों के कोनों पर, पेड़ों के नीचे,नदियों के किनारे छोटे-छोटे मंदिर ग्राम देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, ये भक्तों की रक्षा करते हैं।

गलियों में बने छोटे-छोटे मंदिर भारत के शहरी जीवन की परिघटना है, जो देश के हिन्दू चेहरे को उजागर
ही नहीं करती, बल्कि एक महत्वपूर्ण मुद्दे को भी उठाती है कि हिन्दू धार्मिक व्यक्ति है, और इस धार्मिक व्यक्ति के जीवन का मुख्य बिन्दु वह मंदिर है, जिसे वह अपना समझता है। ये मंदिर गरीब हिन्दुओं के पसीने और पैसे से बनाये गये हैं। यह राष्ट्र की अर्थ व्यवस्था का असंगठित क्षेत्र है। आटो रिक्शा चालक, गलियों में फेरी लगाने वाले, दूकानदार, सड़कों के ढाबे वाले, बिजली ठीक करने वाले, बढ़ई, राज मिस्तरी, भिखारी और अन्य दैनिक दिहाड़ी पर काम करने वाले अपने निवास या कार्य स्थल के पास छोटे-छोटे मंदिर बनाते हैं। वे अपनी झुग्गी झोपडिय़ों के निकट सड़क पर चबूतरा सा बना कर मंदिर बना लेते हैं, वे अपने गांव और गांव के मंदिर से जुड़े रहने के लिए ऐसा करते हैं और प्रवास के कारण उत्पन्न शून्य को भरने के लिए सड़क के किनारे मंदिर बनाते हैं।
साधारण हिन्दू सड़क के किनारे मंदिर बनाता है, वह अनधिकृत, गैरकानूनी और अवैध है, वह अपने इष्ट देवता या देवी को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए ऐसा करता है। उसका पक्का विश्वास है कि ऐसा करने से उसका काम काज अच्छा चलेगा और यदि वह श्रद्धा के साथ इन मंदिरों में पूजा करेगा, तो उसके कष्टमय जीवन में सुधार होगा। ये लोग सुबह अपना धंधा शुरू करने से पहले सड़क के इन मंदिरों में पूजा करते हैं, और काम खत्म करने या दूकान बंद करके रात में घर लौटते समय यहां पूजा करते हैं।

ओडिशा की हिन्दू आस्था पर हमला हो रहा है, वहां आत्माविहीन, सेक्यूलर, हिन्दू विरोधी राजनैतिक दल का शासन है। ओडिशा के हिन्दू आज क्रूर विडंबना का सामना कर रहे हैं, जो राजनीतिक दल और नेता हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते है, उनका हिन्दू विश्वासों और संवेदना से कुछ भी लेना देना नहीं है। प्रदेश के शताब्दियों पुराने मंदिरों की घनघोर उपेक्षा, कोणार्क के सूर्य मंदिर

की भारी उपेक्षा, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या आदि कुछ उदाहरण है, राज्य की हिन्दू विरोधी मानसिकता के। मेरा विनम्र निवेदन है कि ओडिशा में हिन्दू समुदाय को आज एकजुट होने की जरूरत है।

सरकार का कहना है कि वह अनधिकृ त धार्मिक स्थलों को हटाने का अभियान हाईकोर्ट के निर्देश पर चला रही है, जिसका पालन उसके लिए अनिवार्य है। मैं कोर्ट के निर्देश के खिलाफ कुछ नहीं लिख सकता, लेकिन यह पूछना चाहूंगा कि जब कटक में और उसके आसपास ये मंदिर बन रहे थे, तब सरकार कहां सो रही थी? पिछले 35 वर्षो में कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई? आश्चर्य है कि गिराये गये कुछ मंदिरों को सांसदों और विधायकों के कोष से धन राशि भी दी जाती थी। अपने संपादकीय के द्वारा में सारे हिन्दुओं को कठघरे में खड़ा कर रहा हूं। हिन्दू राजनीतिज्ञों के पास हिन्दू राष्ट्र की कोई अवधारणा नहीं है, वे राजनीतिक ताकत का सक्रिय प्रयोग हिन्दुओं के विरूद्ध करते हैं, ऐसा करने के लिए वे किस अंजीर की पत्ती से अपने को ढकते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, हिन्दू संगठन जो देश की जनता और संस्थानों के गैर हिन्दूकरण की तेज रफ्तार की तरफ से लगातार आंखे मूंदे रहते हैं, वे गलत व्यक्तियों को महत्वपूर्ण हिन्दू संगठनों पर नियंत्रण और मनमानी करने देते हैं, ये गलत व्यक्ति हिन्दुओं के हितों की बजाय इन्हे अपनी निजी जायदाद की तरह चलाते हैं, पुलिस,मीडिया , वकालत और न्याय पालिका में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हिन्दू स्त्री-पुरूष मूर्खतावश या बदनीयती से सेक्यूलरिज्म, बहुलतावाद, सहनशीलता और संवैधानिकता के गुण अपने हिन्दू विरोधी रूख को छिपाने के लिए गाते हैं। इन सब से बढ़ कर वे सारे साधारण खाते-पीते घरों के हिन्दू हैं, जो ऐसे मामलों की अनदेखी करते हैं, उन्होंने अपनी हिन्दू आत्मा बेच दी है।

ओडिशा ने ऐसे अनेक आक्रमणकारियों का सामना किया है, जिन्होंने अनेक मंदिरों को ध्वस्त किया। पुरी के जगन्नाथ मंदिर पर पांच शताब्दियों में पंद्रह बार आक्रमण हुए । तब देवी-देवताओं को मंदिर से हटा कर अलग-अलग स्थानों पर छिपाया गया। राज्य में बहुत कम संपूर्ण और क्षतिहीन मंदिर हैं। देवी-देवताओं के लिए एक बार फिर छिपने का समय आ गया है।

 

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार र

 

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