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बारूद के ढेर पर टिका दिया है हिन्दुस्तान को

सरकार का रवैया ऐसा है जैसे किसी कमजोर व्यक्ति को कोई ताकतवर थप्पड़ मार दे। कमजोर व्यक्ति कहे कि-‘अब मार कर देख.. ‘ ताकतवर व्यक्ति फिर थप्पड़ मार दे तो फिर वह कमजोर व्यक्ति कहे कि ‘अब मार कर देख…. ‘ फिर थप्पड़ खा कर कमजोर व्यक्ति अपनी बात दोहराए…’अब मार कर देख….. ‘ इस प्रकार कई थप्पड़ खा कर कमजोर व्यक्ति उससे पूछे कि ‘तुम मजाक तो नहीं कर रहे थे… ‘ थप्पड़ मारने वाला व्यक्ति जवाब दे..’नहीं, मैं सचमुच तुम्हें मार रहा था… ‘ इस पर थप्पड़ खाने वाला जवाब दे कि ‘चलो फिर ठीक है…क्योंकि मुझे मजाक पसन्द नहीं है।’
छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में मारे गए लोगों के परिजनों की आंखों से आंसू बहने अभी बंद नहीं हुए हैं और उस हमले में घायल हुए लोगों के खून की बूंदे अभी सूखी नहीं हैं कि झारखंड में नक्सलियों ने इसी सप्ताह मंगलवार को घात लगा कर एक एसपी सहित छह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले में दो जवान गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। नक्सलवाद से देश के कम से कम 22 राज्यों के 110 जिले प्रभावित हैं जहां नक्सली बेखौफ अपनी हुकुमत चला रहे हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने के लिए नक्सलियों की नजर अब देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य बड़े शहरों पर भी है।

नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में हमले के बाद अपनी दूसरी योजना को अंजाम देने के लिए डेढ़ महीने का समय लिया, लेकिन पड़ोसी मुल्क से चलाए जा रहे आतंकवादी युद्ध में तो देश के किसी न किसी कोने में लगभग रोज ही हमले हो रहे हैं। पाकिस्तान की हिम्मत भारत से सीधे युद्ध करने की नहीं हो रही, तो सालों से उसने प्राक्सी वॉर छेड़ी हुई है। आतंकवादी देश में कहीं भी कभी भी मासूमों की जानें लेने में हिचकिचाहट महसूस नहीं करते। सरकार हर आतंकवादी गतिविधि पर संकल्प लेती दिखती है कि आतंकवाद को नहीं सहा जाएगा। आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। लेकिन सरकार जिस ढंग से संकल्प लेती दिखाई देती है, उससे लगता यही है जैसे वह आतंकवादियों से चिरौरी कर रही हो-‘मत करो न ये सब…मत करो…मान जाओ… ‘ सरकार का रवैया ऐसा है जैसे किसी कमजोर व्यक्ति को कोई ताकतवर थप्पड़ मार दे। कमजोर व्यक्ति कहे-‘अब मार कर देख… ‘ ताकतवर व्यक्ति फिर थप्पड़ मार दे तो फिर वह कमजोर व्यक्ति कहे कि ‘अब मार कर देख… ‘ फिर थप्पड़ खा कर कमजोर व्यक्ति अपनी बात दोहराए…’अब मार कर देख… ‘ इस प्रकार कई थप्पड़ खा कर कमजोर व्यक्ति उससे पूछे कि ‘तुम मजाक तो नहीं कर रहे थे… ‘ थप्पड़ मारने वाला व्यक्ति जवाब दे…’नहीं, मैं सचमुच तुम्हें मार रहा था… ‘ इस पर थप्पड़ खाने वाला जवाब दे कि ‘चलो फिर ठीक है…क्योंकि मुझे मजाक पसन्द नहीं है।’

कश्मीर से लेकर देश के किसी भी हिस्से में आतंकवादियों के लिए विस्फोट करना बच्चों जैसा खेल है। ऐसा तभी संभव है जब देश की आन्तरिक सुरक्षा को हलके से लिया जाए और सब जगह यही संदेश हो कि भारत एक सॉफ्ट देश है। इसे कभी भी, कहीं भी निशाना बनाया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं होता तो क्या संसद पर इतनी आसानी से हमला हो सकता था? सीमा पार बैठे अपने आकाओं से निर्देश ले कर क्या मुम्बई पर आतंकवादी हमला कर सकते थे।

जयपुर में उदय इंडिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘हिन्दुस्तान मेरी जान’ में शहीदों के परिवारों को सम्मानित करते हुए ‘फेक्टर इन पाकिस्तान’ के लेखक पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारी कर्नल आर.एस.एन. सिंह ने जो खुलासा किया वह सचमुच आंखें खोल देने वाला है। श्री सिंह ने कहा कि 26/11 को अंजाम तक पहुंचाने वाले हाफिज सईद से भारत के कुछ बड़े नेता घबराते हैं। उनका कहना यहां तक था कि पाकिस्तान भारतीय जवानों के सर कलम कर उनके शव क्षत-विक्षित कर भारत भेजता है और भारत के नेता फिर भी पाकिस्तान का दौरा करते हैं। उनकी सलाह थी कि पाकिस्तान द्वारा चलाई जा रही इस प्राक्सी-वॉर में पाकिस्तान से दोस्ती करने का समय नहीं है, बल्कि यह समय पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने का है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भारत को आतंकवाद से कभी निजात नहीं मिल सकती।

श्री सिंह की यह सलाह भारतीय नेताओं और भारत में नीति निर्धारकों को बेशक पसन्द न आए, लेकिन यदि सांप को फन पकड़ कर कुचला नहीं जाए तो वह कभी बख्शता नहीं है। पर राजनीतिक पार्टियों की मजबूरी वोट बैंक है। फिर चाहे वे सत्ता में बैठी हों या विपक्ष में। राजनीतिक दलों को वोट चाहिए। बेशक वोट के लिए किसी वर्ग विशेष को विशेष सुविधाएं ही क्यों न देनी पड़ें।

वोट बैंक का ही परिणाम है कि पूरा समाज छोटे छोटे वर्गों में बंटा हुआ दिखाई देता है। वर्गों के इन टुकड़ों ने ही समाज में दरारें डाल दी हैं जिनके कारण असन्तोष की बाढ़ समाज को बहा ले जाने के लिए तैयार दिखती है। इससे एक वर्ग तो अपने भविष्य में अंधकार तक महसूस करने लगा है। समाज में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के कैंसर को भी वोट बैंक की राजनीति ने जन्म दिया है। इतना ही नहीं धर्म को भी वोट बैंक की राजनीति के फ्रेम में जड़ कर देश में बहने वाली गंगा-जमुनी धारा को उथला कर दिया है।

कुल मिला कर देश में समाज और राजनीति का जो परिदृश्य उभर कर आता है, उसमें वोट बैंक के लिए एक धर्म और समुदाय विशेष के लोगों की संतुष्टि के लिए उसे हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। आतंकवादी कभी भी स्थानीय मदद के बिना सफल नहीं हो सकते। भटकल में भी कभी गंगा जमुनी धारा बहा करती थी। लेकिन भटकल आज बारूद के ढेर पर टिका है। उसे जैसे एक चिंगारी का इंतजार है। भटकल देश में आतंक की राजधानी के तौर पर भी जाना जाता है। भटकल में गणतन्त्र दिवस समारोह के पूर्व एक समुदाय बाहुल्य के क्षेत्र में ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे’ लिखे दिखाई दिए थे। यह हालत केवल भटकल की ही नहीं है।

पिछले दिनों आंध्र प्रदेश में एक धर्म विशेष से जुड़े राजनीतिक दल के नेता भड़काऊ भाषण देने के लिए चर्चा के विषय बने थे। उन्हें पुलिस ने हिरासत में तो लिया था, लेकिन वह जल्दी ही बाहर भी आ गए थे। देश की राजधानी दिल्ली में भी बताया जाता है कि कई ऐसे इलाके हैं जहां दूसरे धर्म और विशेष समुदाय से अलग लोग जाते हुए भय खाते हैं।

इस सब का कारण वोट बैंक की राजनीति ही कहा जा सकता है जिसने पूरे देश को बारूद के ढेर पर टिका दिया है। इसी से देश की आन्तरिक सुरक्षा खतरे में पड़ी दिखाई देती है। शासन जब तक कानून के मजबूत डंडे से समान नजरों से नहीं चलेगा, तब तक आन्तरिक सुरक्षा से समझौते होते ही रहेंगे। आतंकवादी हिंसा में मासूम लोग झुलसते रहेंगे। वोट बैंक की राजनीति को तिलांजलि देकर देश हित में समाज की प्रगति के लिए जो कुछ किया जाना चाहिए, उसी ओर कदम बढ़ाए जाने चाहिए। यदि जिस शाख पर बैठ कर उसी शाख को काट दिया गया तो खुद के गिरने के खतरे का अंदेशा तो रहेगा ही, बल्कि कोई भी नहीं बचा सकेगा। वोट बैंक को ताक पर रख कर खुद से पहले परिवार, परिवार से पहले समाज, समाज से पहले देश को रख कर यदि काम नहीं किया गया तो बारूद के ढेर पर टिके देश की आन्तरिक सुरक्षा हर पल खतरे में ही रहेगी।

 

श्रीकान्त शर्मा

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