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भटकल: बारूद के ढेर पर ज्वालामुखी

अंजुमन हाई स्कूल के मैदान में झंडे के खंभे के शीर्ष पर एक काला झंडा फहराया गया था खंभे को काले रंग के ग्रीस से पोत दिया गया था। यह बात 26 जनवरी की भोर की है जब गणतंत्र दिवस मनाया जाने वाला था। मुस्लिम बाहुल्य वाली सुल्तान गली में दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद, भारत मुर्दाबाद’ के नारे लिखे थे। इस क्षेत्र में कोई भी हिंदू जाने की हिम्मत नहीं करता…। ”
कर्नाटक राज्य के करवार जिले में स्थित तटीय कस्बा भटकल भले ही शांत, सुरम्य और सुस्त दिखाई देता है, लेकिन यह कस्बा अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहिम के एजेंटों के पेचीदा नेटवर्क को स्पष्ट करता है। नवायात मुस्लिम बाहुल्य वाले इस कस्बे में 1992-93 में हुए सांप्रदायिक दंगे ने बाहरी ताकतों की शैतानी करतूतों और सुरक्षा के प्रति बैर रखने वाले आंतरिक तत्वों को सामने ला दिया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व जज न्यायमूर्ति केदांबदी जगन्नाथ शेट्टी ने उदय इंडिया के साथ विशेष टेली-चैट के दौरान बताया कि ”भटकल वास्तव में आतंकियों के लिए बिना किसी रोकटोक भारत में प्रवेश करने और सुरक्षित आश्रय में तब्दील हो चुका है।”

न्यायमूर्ति शेट्टी 1992-93 के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगे की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय आयोग के अध्यक्ष थे। बीस दिन चले इस दंगे में सैकड़ों लोगों की जानें गई थीं और कई सौ करोड़ रूपए की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

जांच के दौरान न्यायमूर्ति शेट्टी के सामने चौंकाने वाले कई तथ्य आए है। उदाहरण के तौर पर, कर्नाटक पुलिस की खुफिया इकाई, सीमा शुल्क और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने खुलासा किया कि ”1993 में हुए मुम्बई बम धमाके में इस्तेमाल हुए आरडीएक्स को पहली बार भटकल में पहुंचाया गया था और फिर इसे रत्नागिरि के रास्ते मुंबई भेजा गया था।”

न्यायमूर्ति शेट्टी की दलील है, ‘एक ओर तो एक मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन के मारे जाने को लेकर काफी हंगामा किया जा रहा है और तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर रात दिन अंगुली उठाई जा रही है, लेकिन यह वही सोहराबुद्दीन है, जिसने 1993 में मुंबई बम धमाके में इस्तेमाल के लिए आरडीएक्स मुम्बई पहुंचाने की साजिश रची थी।’

तत्कालीन सहायक आयुक्त सीमा शुल्क वी.जी. दिवाकर का कहना है, ”न्यायमूर्ति के. जगन्नाथ शेट्टी की रिपोर्ट के खंड 2 के पृष्ठ 364 के अनुसार आरडीएक्स की तस्करी के बारे में उन्हें सूचना दी गई थी। डीजी (सीमा शुल्क महानिदेशक) द्वारा मौखिक तौर पर मुझे सूचना दी गई थी कि हथियारों को तस्करी कर भटकल तट पर लाया जा रहा है और मैंने इस दिशा में रोक थाम संबंधी उपाय करने के लिए पुलिस को सूचित किया था।”

इस मामले में डी.सी. (जिला उपायुक्त) श्रीवास्तव ने भी आयोग के समक्ष दिए बयान में कहा कि ”राज्य की खुफिया इकाई से मुझे सूचना मिली थी कि कुछ विस्फोटक पदार्थ भटकल तट पर उतारे जाने की आशंका है। यह सूचना राज्य सरकार के जरिए राज्य की खुफिया इकाई द्वारा आई थी। लिखित में मुझे यह सूचित किया गया था कि यह सूचना डीसी और एसपी कार्यालय दोनों ही जगह उपलब्ध है। सूचना मिलने के बाद, हमने सघन गश्त बढ़ाने के कदम उठाए थे और भटकल में सीमा शुल्क विभाग को सचेत कर दिया था। हम इस खुफिया सूचना की उम्मीद कर रहे थे कि आरडीएक्स किस्म का विस्फोटक भटकल बंदरगाह पर कहां उतर रहा है। जिन सूत्रों से हमें विस्फोटकों के भटकल बंदरगाह क्षेत्र पर उतारे जाने की सूचना मिली थी, उन्होंने यह नहीं बताया कि इन विस्फोटकों के किन खास जगहों पर इस्तेमाल किए जाने के आशंका है।” (रिपोर्ट खंड 2 के पृष्ठ 367 पर)

न्यायमूर्ति केदांबदी जगन्नाथ शेट्टी द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट के सभी चार खंड उदय इंडिया के पास मौजूद हैं। इसी तरह का एक बयान भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने दिया कि ”आरडीएक्स विभिन्न रास्तों से भारत लाया गया था और इनमें से एक रास्ता भटकल था। भारत में उथल-पुथल मचाने के उद्देश्य से आरडीएक्स की तस्करी करने के पीछे आईएसआई और दाउद इब्राहिम का दिमाग था।” (रिपोर्ट के खंड 2 में पृष्ठ 368)

रिपोर्ट के खंड 2 में पृष्ठ 369 में न्यायमूर्ति शेट्टी ने लिखा है कि ”इन तीन गवाहों से मुस्लिम आरोपियों के वकील बशीर अहमद द्वारा भटकल में आरडीएक्स की तस्करी को छोड़कर सभी बिंदुओं पर भारी जिरह की गई। पुलिस अधिकारियों तक ने इस पर विवाद नहीं किया, जबकि इन गवाहों से सरकारी वकील सीताराम शेट्टी ने जिरह की।”

सीमा शुल्क अधिकारी प्रसन्न कुमार द्वारा दिया गया बयान यथार्थ, असामान्य एवं वर्गीकृत प्रकृति वाला है। रिपोर्ट के द्वितीय खंड के पृष्ठ 371 में उन्होंने कहा है कि ”हमें पाकिस्तान से संचालित मुम्बई स्थित तस्करों द्वारा शस्त्र, गोला बारूद, आरडीएक्स पश्चिमी तट पर किसी जगह उतारे जाने का वायरलेस से संदेश मिला। हमें यह सूचना फरवरी, 1993 के पहले सप्ताह में मिली…. ”

दिलचस्प है कि 1993 का मुंबई धमाका उसी साल मार्च में हुआ, जो भटकल में आरडीएक्स उतारे जाने और सोहराबुद्दीन द्वारा उसे भेजे जाने के ठीक एक महीने के बाद था। भटकल कस्बे के समृद्ध नवायात मुस्लिम, हिंदुओं को भगाकर इसे केवल मुस्लिमों का इलाका बनाना चाहते थे, यह खुलासा, उपायुक्त श्रीवास्तव द्वारा किया गया। रिपोर्ट के द्वितीय खंड में पृष्ठ 319 में उन्होंने बयान दिया है कि ”……… मेरे बयान में पेज संख्या 9 पर कहा गया है कि एक समुदाय के सदस्य दूसरे समुदाय के सदस्यों को खदेड़कर भगा देना चाहते थे। इस संदर्भ में मेरा कहना है कि यहां ज्यादातर मकान मालिक मुस्लिम हैं और किरायेदार हिंदू मुस्लिम हिंदुओं को भगा देना चाहते थे…। ”

कुछ तत्वों द्वारा की जा रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर न्यायमूर्ति के.जे. शेट्टी आयोग की रिपोर्ट में विस्तार के साथ लिखा गया है।

पेज संख्या 324, 325 और 326 में गवाहों के बयान में कहा गया है कि

”अंजुमन हाई स्कूल के मैदान में झंडे के खंभे के शीर्ष पर एक काला झंडा फहराया गया था और खंभे को काले रंग के ग्रीस से पोत दिया गया था। यह बात 26 जनवरी की भोर या रात की है जब राष्ट्र गणतंत्र दिवस मनाया जाने वाला था। मुस्लिम बाहुल्य वाली सुल्तान गली में दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद, भारत मुर्दाबाद’ के नारे लिखे थे। इस क्षेत्र में कोई भी हिंदू जाने की हिम्मत नहीं करता…। ”

न्यायमूर्ति शेट्टी ने रिपोर्ट के द्वितीय खंड के पृष्ठ 328 पर में लिखा है कि ”… केंद्र द्वारा अयोध्या में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए किए गए वादे को पूरा न करने पर मुस्लिम समुदाय ने काला झंडा फहराया और खंभे को ग्रीस से पोतकर विरोध और नाराजग़ी जाहिर की। इस तरह के विरोध की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनुमति है। अंजुमन हाई स्कूल के मैदान में खंभे पर ग्रीस मलना और काला झंडा फहराना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं है… ”

एक समुदाय द्वारा कथित तौर पर सांप्रदायिक माहौल बनाने की प्रक्रिया में भाजपा विधायक डाक्टर यू. चित्तरंजन की जान चली गई। चित्तरंजन हिंदुओं और मुस्लिमों दोनों ही समुदायों के लोकप्रिय नेता थे। मिलनसार स्वभाव के और हमेशा मुस्कराते रहने वाले डॉ. चित्तरंजन ने धर्म और समुदाय से परे जाकर हजारों मरीजों का इलाज किया था। उनकी मृत्यु पर हजारों मुस्लिम महिलाओं को रोते देखा गया था। इस मामले में पुलिस ने कई सौ संदिग्धों को पकड़ा और बाद में छोड़ दिया, लेकिन डाक्टर चित्तरंजन की दिन दहाड़े की गई हत्या (सन् 1995 में) के 18 साल गुजर जाने के बाद भी उन पर गोली चलाने वाले अपराधी अब तक पकड़े नहीं गए हैं। डाक्टर चित्तरंजन के पुत्र, डाक्टर राजेश चित्तरंजन ने उदय इंडिया को बताया कि ”स्थानीय पुलिस द्वारा शुरूआती जांच में अहम सबूत नष्ट कर दिए गए। बाद में इसकी जांच सीओडी और फिर सीबीआई को सौंप दी गई। लेकिन कुछ भी सामने नहीं आया। भटकल का इस्तेमाल जेहादी आतंकियों द्वारा शैतानी इरादों के साथ अपनी गतिविधियों के लिए प्रयोग स्थल के तौर पर किया जाता है। देश तथाकथित धर्मनिरपेक्ष, वामपंथी एवं बुद्धिजीवियों की चूक एवं छूट के कृत्यों की कीमत चुका रहा है।

बंगलुरू से एस. ए. हेमंत कुमार

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