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असामयिक बुढ़ापे की वजह है पराबैंगनी किरणें

पराबैंगनी किरणों के दुष्परिणामों से बचने के लिए, उपयुक्त एसपीएफ युक्त हल्के सनस्क्रीम की त्वचा पर मालिश करनी करनी चाहिए। एसपीएफ या सूर्य सुरक्षा कारक, एक पैमाना है जो त्वचा पर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव को कम करता है। यदि धूप में त्वचा लाल होने में 20 मिनट का समय लेती है तो इसके लिए एसपीएफ 15 का इस्तेमाल करने से त्वचा को लाल होने में 15 गुना ज्यादा समय लगता है, लगभग 5 घंटे। एसपीएफ 15 या उससे ज्यादा 30-50 वाले सनस्क्रीन पराबैंगनी किरणों से रक्षा करने में और भी बेहतर साबित होते हैं।समय से पहले चेहरे पर झुर्रियों के 80 प्रतिशत मामले शुरूआत के 20 सालों में होते हैं। इसकी मुख्य वजह विकिरण है। पराबैंगनी-ए और पराबैंगनी-बी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे समय से पहले चेहरे पर झुर्रियां आती हैं।

पारा चढ़ते ही, सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें त्वचा को प्रभावित करना शुरू कर देती है। पराबैंगनी किरणें झुर्रियों के माध्यम से त्वचा को दो गुना पुराना बना देती हैं। ये किरणें त्वचा में मौजूद एंजाइमों की संख्या बढ़ा देती है, जो मज्जा ततुंओं (कोलेजन फाइबर) को नष्ट कर झुर्रियों को बढ़ाती हैं।

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पीटल के वरिष्ठ कंसलटेंट कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. अनूप धीर कहते हैं – ”चिकित्सकीय अध्ययन में पाया गया है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में समय से पहले बुढ़ापा शुरूआत के 20 वर्ष में देखने को मिलता है। पराबैंगनी-ए विकिरण का इसमें सबसे ज्यादा योगदान होता है। जहां तक पराबैंगनी-बी की बात है, यह पराबैंगनी-ए से 1 हजार से 10 हजार गुना खतरनाक होता है। यह समय से पहले बुढ़ापे के साथ चेहरे का कालापन और ननमेलेनोमा त्वचा कैंसर का सबसे बड़ा कारक होता है।

पराबैंगनी-ए लंबी तरंगें होती है जो त्वचा को नुकसान पहुंचा कर असमय बुढ़ापा लाती हैं। जबकि पराबैंगनी – बी, छोटी तरंगें होती हंै, जो चेहरे की कालिमा, त्वचा को नुकसान और त्वचा कैंसर का कारण होती हैं।

पराबैंगनी ए और बी, मेलेनोसाइट्स के डीएनए को नुकसान पहुंचाती है। यह त्वचा में पायी जाने वाली कोशिकाएं होती हैं, जो मेलेनिन नामक भूरे रंग के द्रव्य का उत्पादन करती है। मेलेनिन मेलेनसाइटिस को बड़ा करती है और गुच्छे में पिरोती है।

डॉ. धीर कहते हैं – ”चिकित्सकीय अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि त्वचा में संरचनात्मक परिवर्तन के कारण समय से पहले झुर्रियां आती हैं। इन चिकित्सकीय संकेतों में रूखापन, झुर्रियां, त्वचा में

गड्ढ़े, त्वचा का लटकना, धब्बेदार रंजकता और इलास्टिन एवं कोलेजन में गिरावट शामिल है। अपक्षीय परिवर्तन समय के साथ बड़े पैमाने पर होने लगते हैं, जो कि अपरिवर्तनीय होते हैं।

पराबैंगनी किरणों के दुष्परिणामों से बचने के लिए, उपयुक्त एसपीएफ युक्त हल्के सनस्क्रीम की त्वचा पर मालिश करनी करनी चाहिए। एसपीएफ या सूर्य सुरक्षा कारक, एक पैमाना है जो त्वचा पर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव को कम करता है। यदि धूप में त्वचा लाल होने में 20 मिनट का समय लेती है, तो इसके लिए एसपीएफ 15 का इस्तेमाल करने से त्वचा को लाल होने में 15 गुना ज्यादा समय लगता है, लगभग 5 घंटे। एसपीएफ 15 या उससे ज्यादा 30-50 वाले सनस्क्रीन पराबैंगनी किरणों से रक्षा करने में और भी बेहतर साबित होते हैं।

उदय इंडिया ब्यूरो

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