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विपक्ष की न कोई नीति है, न कोई सिद्धांत: गहलोत

चार दशक से अधिक अर्से के सार्वजनिक जीवन में पार्टी संगठन की सीढिय़ां चढते हुए दूसरी मर्तबा शासन सत्ता की मंजिल तक पंहुचने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पुन: नई पारी खेलने की तैयारी में है। इन दिनों वह कांग्रेस की संदेश यात्रा के रूप में सत्ता और संगठन के बेहतर तालमेल से राज्य सरकार की उपलब्धियों से जन-जन को अवगत कराने, व्यापक लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों एव परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में जी जान से जुटे हुए हैं। दिन-रात की भारी व्यस्तता के बावजूद मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा से उदय इंडिया के लिए कुछ समय निकाला। उनसे किए गये सवाल-जवाब यहां प्रस्तुत है।

कांग्रेस की संदेश-यात्रा को आप किस नजरिए से देखते है?
कांग्रेस पार्टी की यह संदेश यात्रा बहुत कामयाब है और अभी यह विभिन्न चरणों में चलायी जा रही है। राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ फ्लैगशिप कार्यक्रमों की जानकारी से इस यात्रा के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थको एवं आम लोगो को अवगत कराया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जनता इसका लाभ उठा सके। कांग्रेस पार्टी देश और दुनिया की सबसे पुरानी पॉलिटिकल पार्टी है जिसने स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी, पं0 जवाहर लाल नेहरू सरीखे नेताओं की रहनुमाई में देश को आजाद कराया और आधुनिक भारत का निर्माण किया। इस बारे में भी आम-जन को जानकारी दी जा रही है।

भाजपा की सुराज सकंल्प यात्रा की तुलना में कांग्रेस की संदेश यात्रा चयनित विधानसभा क्षेत्रों में ले जाने के प्रति क्या सोच और रणनीति है?
भाजपा नेता अपनी सुराज संकल्प यात्रा के जरिए सरकार को बदनाम करने के लिए झूठे, तथ्यहीन और मनगढंत आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों का कोई सिर पैर नहीं है। उदाहरण के तौर पर भाजपा की यात्रा में यह दावा किया गया कि उनके राज में दस लाख लोगों को नौकरी दी गई, हकीकत यह है कि प्रदेश में राज्य कर्मचारियों की कुल संख्या साढे सात लाख के आसपास है। केन्द्रीय श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगारी में राजस्थान का स्थान नीचे से छतीसगढ़, गुजरात के बाद तीसरे नम्बर पर है। इसी तरह मासिक 500 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग की दरे बढाने पर यह ढिढोंरा पीटा गया कि इससे अकेले जयपुर में दस लाख लोग प्रभावित होगें, जबकि इन उपभोक्ताओं की संख्या कुल साढे छ: लाख है। मुख्यमंत्री वृद्ध सम्मान पेंशन की शुरूआत की गई है। भाजपा नेता इसे खैरात बता रहे है, वही उनके कार्यकर्ता पेंशन फार्म भरवाने के लिए कांग्रेस जनों से जद्दोजहद कर रहे हैं। हर राज्य में गांवों में डाक्टरों, शिक्षकों की कमी और सड़कों की समस्या रहती है, लेकिन भाजपा नेता इस मामले में भी जनता को गुमराह कर रहे है।

कांग्रेस की संदेश यात्रा के दौरान आयोजित जनसभाओं में भाजपा के इन आरोपों का हाथों हाथ जवाब भी दिया जा रहा है, ताकि भ्रम फैलाकर सत्ता हासिल करने का उनका सपना पूरा नही हो सके। विपक्षी पार्टी के पास न तो कोई नीति है, न सिद्धांत है, न कोई कार्यक्रम है। वह सिर्फ झूठ बोलकर झूठे वायदे कर और साम्प्रदायिक भावना फैला कर ही सत्ता प्राप्त करने का षडय़ंत्र करते आ रहे हैं। पिछली बार भाजपा अध्यक्ष श्रीमती वसुन्धरा राजे परिवर्तन यात्रा के नाम पर झूठे वायदे करती गईं। वह महिला थीं और लोग उनके भुलावे में आ गये। लेकिन पांच साल के अपने शासनकाल में उन्होने जिस प्रकार का प्रशासन दिया उससे उनकी पोल खुल गई। जनता उनकी असलियत को जान चुकी है और इस बार उनके बहकावे में आने वाली नहीं है। भाजपा की सुराज यात्रा नही बल्कि कुराज यात्रा है। भाजपा के पास सिवाय यात्रा निकालने के और कोई काम नहीं है। राजस्थान स्थापना दिवस 30 मार्च से आरम्भ हुई कांग्रेस की संदेश यात्रा सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में जायेगी। हम अब तक लगभग एक सौ क्षेत्रों में जा चुके है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी इसके लिए कार्यक्रम निर्धारित कर रही है। अब यात्रा का अगला चरण शुरू किया गया है।

संदेश यात्रा के दौरान श्रीमती सोनिया गांधी के हाथों दो बड़ी योजनाओं का शुभारम्भ करवाया गया। 20 जून को उन्होनें सूरतगढ़ में क्रिटिकल सुपरथर्मल पॉवर स्टेशन पर 660-660 मेगावाट क्षमता की सातवीं एवं आठवी विद्युत इकाइयों का शिलान्यास किया। इनकी अनुमानित लागत 7920 करोड़ रूपये है। इसी दिन नागौर के जायल में देश की सबसे बड़ी राजस्थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना की आधारशिला रखी गई। इस पर करीब तीन हजार करोड़ रूपये व्यय होंगे।

एक जुलाई से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर नि:शुल्क दवाओं के बाद नि:शुल्क जांच सुविधा शुरू की गई है। साढ़े तीन लाख स्कूली बच्चों को छ: हजार मूल्य के पी.सी. टेबलेट के लिए चैक वितरित किए गए हैं। बी.पी.एल. परिवारों के लिए कम्बल, साड़ी के लिए भी चैक से राशि दी जा रही है।

बजट प्रावधान, तथा व्यय के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
एक जमाना था जब राजस्थान का सालाना बजट चार हजार करोड़ रूपये के आस-पास हुआ करता था। उसी बजट को इस बार 40 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक राशि के स्तर तक पहुंचा दिया है। यही नहीं ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का जो आकार निर्धारित किया गया था। उससे कही ज्यादा बड़े आकार को मूर्त रूप दिया है। चालू बारहवीं पंचवर्षीय योजना का आकार एक लाख 92 हजार करोड़ रूपये तक पहुंचाया गया है, यह सब इसलिए संभव हुआ कि बेहतर आर्थिक प्रबन्धन के साथ हमारे पास राजस्थान के विकास की योजनाएं है। करीब 40 हजार करोड़ रूपये के निवेश से राजस्थान में तेल रिफाइनरी स्थापित होना बहुत बड़ी बात है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के बाद रिफाइनरी की स्थापना इतिहास की सबसे बड़ी परियोजना है जो राजस्थान की तस्वीर और तकदीर बदल देगी।

इसके साथ ही राजस्थान में खनिज सम्पदा का इतना विपुल भण्डार है जिसके बारे में आप अनुमान नहीं लगा सकते। दिल्ली मुम्बई फ्रेट कॉरीडोर का 40 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर जाएगा, इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। खनिज तेल के साथ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक गैस भण्डार का भी राजस्थान को लाभ मिलेगा। गैस आधारित बिजली घर बनेंगे और इसका इस्तेमाल घरेलू उपयोग में भी किया जा सकेगा। भीलवाड़ा व करौली जिले में लौह अयस्क मिला है। भीलवाड़ा में जिदंल समूह के कारखाने की मंजूरी हो चुकी है। राष्ट्रीय इस्पात प्राधिकरण को भी स्वीकृति मिल रही है। हनुमानगढ़ में पोटाश के भंडार मिले है। पोटाश की उपलब्धता वाला राजस्थान अकेला प्रदेश है। वर्तमान में इसका आयात किया जा रहा है। पोटाश के दोहन से खाद उदत्पादन और विदेशी मुद्रा की बचत में भी मदद मिलेगी।

पिछली बार की तुलना में इस बार सत्ता संचालन के बारे में आपके क्या अनुभव है?
पहली बार शासन में कार्य करने का जो अनुभव प्राप्त हुआ उसका लाभ इस बार मिलना स्वभाविक है। इसी के फलस्वरूप गुड गवर्नेन्स देने का प्रयास किया गया है और यह दावा किया जा सकता है कि संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन का जो वायदा हमने किया था उस पर हम खरे उतरे है।

आप वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को बेहतर क्यों मानते है ?
इस बार कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने और गठबंधन सरकार होने के बावजूद हमने राज्य के सर्वागींण विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर बसपा से आए छ: साथी विधायकों तथा निर्दलियों के सहयोग से बेहतर शासन देने का प्रयास किया है। यह उनके सहयोग के बिना सम्भव नहीं था। यह अपने आप में स्पष्ट है कि अनुभव का जो लाभ इस बार के शासन प्रशासन में मिला है, उसी के फलस्वरूप जनकल्याण की जितनी योजनाएं हमने दी है उससे गरीब ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश को उनका लाभ मिला है। इस कारण इस शासन काल को आप बेहतर मान सकते है।

वर्तमान और पिछली सरकार की उपलब्धियों की तुलना करें तो…
विभिन्न क्षेत्रों में रिकार्ड तोड़ उपलब्धियां अर्जित की गई हैं जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। पक्के और स्थायी कामों पर गौर किया गया है तथा राज्य के लिए सम्पदा अर्जित की गई है जिसका दूरगामी लाभ मिलने वाला है।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राजस्थान को विशेष दर्जा दिलानें में क्या कठिनाई आ रही है?
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कोई नयी नही है। हमने पेयजल के लिए योजना आयोग के समक्ष विशेष पैकेज की मांग की है। पेयजल राजस्थान की सबसे बड़ी समस्या है। वर्षा की कमी से भूजल नीचे चला गया है यह भविष्य के लिए अच्छा संकेत नही है। पानी की समस्या उसके सदुपयोग एंव बचत के बारे में हमे गम्भीरता से सोचना होगा इसीलिए हमने पिछले शासनकाल में बिजली बचाओ, पानी बचाओ, सबको पढ़ाओ के नारे के साथ इस बार पेड़ लगाओ तथा बेटी बचाओं का भी आह्नान किया है।

चुनावों में अपनी भूमिका के बारे में आप क्या कहेंगे?
जहां तक टिकट वितरण का सवाल है यह कार्य कांग्रेस हाई कमान का है। आलाकमान ने चुनाव के लिए प्रभारी महासचिव नियुक्त किए हैं। इसी प्रक्रिया में चुनाव समिति, स्क्रीनिंग कमेटी गठित की जानी है। पर्यवेक्षक पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर अपनी रिपोर्ट दे रहे हैं। सही समय पर इस बाबत निर्णय लिया जाएगा।

चुनावों में आप किस दल मुकाबला मानते है ?
राजस्थान में विशेष रूप से कांग्रेस तथा भाजपा ही दो ऐसे मुख्य राजनीतिक दल हंै जिनके बीच चुनौती रहेगी। यहां तीसरे मोर्चे की गुंजाइश नहीं है। लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार सभी को है चाहे तीसरा मोर्चा या अन्य राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतरे उस पर कोई रोक नहीं है। जनता सोच समझ कर राज्य के दूरगामी हित में निर्णय लेती है।

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