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दागदार हुई रमन की निर्मल छवि

नये खुलासे बताते हैं कि 53 करोड़ से अधिक के बैंक घोटाले को दबाने-सुलटाने के लिये किस कदर पैसा खाया गया! पहले बैंक के कर्णधारों ने लूटा और जब दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की बारी आई तो नेताओं से लेकर पुलिस मुखिया तक ने पैसे खा लिये। रिश्वतखोरी से जुड़ी सीडी सामने आने के बाद रमन सरकार की सत्ता में वापसी को गहरा झटका लगा है। रायपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट:

सीडी रूपी वेताल भाजपा के सिर पर फिर से सवार हो गया है। ठीक चुनाव के वक्त सामने आई, इंदिरा सहकारी बैंक घोटाले से जुड़ी एक सीडी के खुलासे ने रमन सरकार की नैतिकता पर सवालिया निशान तो खड़े किये ही हैं, मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह और उनके चार मंत्रियों का राजनीतिक कैरियर भी दांव पर लगा दिया है। इस खुलासे से चिंतित भाजपा का आलाकमान इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि यदि आरोपी मंत्री सीडी पर उचित सफाई नहीं दे सके या इसकी कोई काट नहीं ढूंढी गई तो उनके इस्तीफे लिये जा सकते हैं या टिकट काटी जा सकती है!

यदि ऐसा नहीं किया गया तो जनता का गुस्सा सभी 90 सीटों पर उतर सकता है और पार्टी का राज्य की सत्ता में तीसरी बार आने का सपना चकनाचूर हो सकता है! चिंता में तो भाजपा का मातृ संगठन, आरएसएस भी पड़ गया है। छत्तीसगढ़ से जुड़े एक रास्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी ने इस संवाददाता को बताया कि नई दिल्ली में रमनसिंह के विकल्पों पर तलाश प्रारंभ हो गई है। इसी तरह दागी मंत्रियों से भी निजात पाने की राह देखी जा रही है। दरअसल यह पहला मौका नहीं है जब भ्रस्टाचार के आरोप लगे हों। इसके पूर्व राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री पर विदेशी कंपनी ने ठेकेदारी से दो करोड़ की रिश्वत खाने का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने जांच के निर्देश भी दिये थे लेकिन मामला दब गया था।

अब ताजा खुलासे ने सारी सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। पार्टी के लोग आश्चर्यचकित हैं कि जब एक मीडिया हाउस ने एक साल पूर्व ही सीडी का खुलासा कर दिया था तो सरकार ने या पार्टी दिगगजों ने उसे ‘मैनेज’ क्यों नहीं किया! कांग्रेस भी कटघरे में है। कहा जा रहा है कि चुनावी लाभ लेने के लिये इस सीडी का इस्तेमाल किया गया। अन्यथा यदि कांग्रेस जनता का हित चाहती तो लगातार इसके लिये संघर्ष करती।

विपक्षी कांग्रेस ने लगभग आठ साल पूर्व राजधानी के इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड में हुए लगभग 53 करोड़ के आर्थिक घोटाले को पुनर्जीवित करते हुए एक सीडी जारी की थी और आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह, तत्कालीन सहकारिता मंत्री रामविचार नेताम, तत्कालीन वित्त मंत्री अमर अग्रवाल, आवास एवं पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत और लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बैंक घोटाले को दबाने के लिये एक-एक करोड़ रूपये की घूस खाई। इसके समर्थन में कांग्रेस नेताओं ने नार्को टेस्ट की उस सीडी का प्रदर्शन किया, जिसमें बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी उमेश सिन्हा ने यह खुलासा किया।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद बैचेन हुई भाजपा सरकार के प्रवक्ता और लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ‘बैंक घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई की। अधिकांश आरोपी कांग्रेस से जुड़े है, जिन्हें बकायदा जेल में डाला गया है। वैसे अग्रवाल का दावा गलत भी नहीं है। कांग्रेस खुद भी सवालों के घेरे में है। इंदिरा बैंक घोटाले के अधिकांश संचालक कांग्रेस से जुड़े हैं। चेयरमेन रीता तिवारी खुद कांग्रेसी हैं। संचालक सदस्यों में सविता शुक्ला, सरोजनी शर्मा, संगीता शर्मा, सुलोचना आडिल, अरूणिमा निगम, पुष्पा शर्मा आदि कांग्रेस की प्रमुख नेत्रियों के तौर पर पहचानी जाती हैं। रोशनी चौबे पूर्व कांग्रेस सांसद केयूर भूषण की बेटी हैं। ललिता जैन पूर्व महापौर व विधायक स्वरूपचंद जैन की पत्नी हैं। दुर्गादेवी पगारिया, पूर्व उप महापौर गजराज पगारिया की पत्नी हैं।

‘उदय इंडिया’ को मिली विशेष जानकारी के अनुसार, बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी उमेश सिन्हा कभी पगारिया के यहां लेखा कर्मचारी के तौर पर काम करता था, लेकिन जल्दी ही उसे बैंक में बिठा दिया गया। उसके बाद सिन्हा ने पगारिया को करोड़ों के चैक जारी किये जबकि उनके खाते में महज हजार रूपये ही होते थे। बैंक के दिवालिया होने के पीछे यही एक बड़ी वजह रही। इस घोटाले में अपनी जमा पूंजी गंवाने वाले एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि भाजपा सांसद और कांग्रेसी गजराज पगारिया के संबंध काफी मित्रवत हैं अत: उन्होंने पगारिया को बचाने का काम किया। बैंक घोटाले की एक अन्य संचालक बिलकिस बानो, शहर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हमीद हयात की पत्नी हैं। सुमन पाठक भी कांग्रेस की पार्षद रह चुकी हैं और उनके बेटे संजय पाठक, शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस इन सभी को पार्टी से निष्कासित करने का साहस दिखा पायेगी?

आश्चर्य कि जिस पुलिस पर पीडि़तों को न्याय और दोषियों को सजा दिलवाने की जिम्मेदारी थी, उसका मुखिया यानी तत्कालीन पुलिस महानिदेशक स्व. ओमप्रकाश राठौर को भी एक करोड़ की रिश्वत देने की बात आरोपी ने स्वीकार की है। इसके बाद यह संदेह बिल्कुल सच साबित होता दिख रहा है कि पुलिस ने सीडी को जानबूझकर दबाए रखा और उसे न्यायालय में पेश नहीं किया, जबकि नार्को टेस्ट की इजाजत खुद पुलिस ने न्यायालय से मांगी थी। सीडी जारी कर सनसनी फैलाने वाले कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है कि पुलिस विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री व चार मंत्रियों को ब्लेकमेल कर रहे हैं।

बघेल का दावा है कि नक्सली हमले के दोषी पुलिस अधिकारी, जिन पर निलंबन की तलवार लटक रही है या उन्हें पद से हटाने की मांग हो रही, नार्को टेस्ट की असली सीडी अपने पास रखे हुए हैं, ताकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सके। जबकि इस सीडी को तत्काल न्यायालय में दिया जाना चाहिये अन्यथा वास्तविक सीडी को गायब करने या उसके साक्ष्य मिटाने की साजिश हो सकती है। कांग्रेस का साथ देते हुए नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा ने इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले और इस मामले में नार्को टेस्ट की सीडी के खुलासे समेत पूरे प्रकरण की केन्द्रीय जांच व्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने की मांग की है। संगमा की पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में तीसरे मोर्चे के तौर पर उतर सकती है।

पैसा खोया और न्याय की आस भी
राजधानी रायपुर से संचालित इंदिरा प्रियदर्शिनी सहकारी बैंक घोटाले में अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा चुके 25 हजार से ज्यादा लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं कि क्या उन्होंने सहकारी बैंक पर भरोसा करके गलती की! उन्हें सात साल बाद भी उनकी जमा रकम वापस नहीं मिल सकी है। आश्चर्य कि पीडि़तों ने जब अपने विधायक तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत से संपर्क किया तो उनका जवाब था ”बैंक में पैसा क्या मुझसे पूछकर जमा किया था! ”

इसी तरह पुरानी बस्ती निवासी रवि विक्रम अग्रवाल जो कि छोटा सा व्यवसाय करते हैं, ने एक मुलाकात में बताया कि उन्होंने बैंक में करीब सात लाख रुपए जमा किए थे। सोचा था,कि जब यह पैसे और बढ़ जाएंगे तो कोई बड़ा कारोबार करेंगे लेकिन सारा सपना ही बिखर गया। रवि के मुताबिक बैंक घोटाले में इतने बड़े-बड़े लोग शामिल है, उनसे पैसे मिल पाना मुश्किल ही है।

टिकरापारा निवासी अरविंद सोनकर ने बताया कि खेतों में कड़ी मशक्कत से जुटाए पैसों को परिवार के सदस्यों ने उनके नाम से बैंक में जमा किया था। यह इसलिए किया कि परिवार में वे ही सबसे बड़े थे। यह राशि तीन लाख रुपए थी। इस पैसे से आगे कारोबार करने की सोच रहा था, लेकिन सारा सपना कुछ ही महीनों में बिखर गया। वैसे उम्मीद है कि बाकी पैसा मिलेगा।

‘उदय इंडिया’ ने जब मामले की जांच पड़ताल की तो एक और खुलासा हुआ वह यह कि बैंक घोटाले की जांच में एक सहकारिता अफसर को दोषी पाया गया था और उस पर कार्रवाई करने संबंधी फाइल मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह को भेजी गई थी मगर उन्होंने लिखित टिप्पणी करते हुए फाइल लौटा दी कि बैंक घोटाले में कई संचालक शामिल हैं इसलिए एक व्यक्ति पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।

ऐसा लगता है कि भाजपा सीडी-शापित हो चली है। सन 2003 के विधानसभा चुनाव में भी दिलीप सिंह जूदेव की एक सीडी सामने आई थी जिसमें उन्हे रिश्वत लेते हुए दिखाया गया था। इसके बावजूद भाजपा ने बहुमत के साथ चुनाव जीत लिया था। इसी तरह भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण-जो इस समय जेल में हैं-को एक लाख की रिश्वत लेते हुए एक सीडी में दिखाया गया था। अब जबकि तीन माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, तब इस सीडी ने भाजपा की सत्ता में पुर्नवापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जाहिर है अब तक जनता की नजरों में ईमानदार रही रमन सरकार के समक्ष खुद को पाक साफ दिखाने की चुनौती आन पड़ी है।

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