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मोदी को वीजा दो

भाईसाहब वीजा न देकर आपने नरेन्द्र मोदी का क्या उखाड़ लिया? इसलिए अब भी समय है चेत जाओ। वीजा दो। तत्काल वीजा दो। कहीं बाद में पछताना न पड़े, जैसे उनका विरोध करके कुछ भाजपाइयों को पछताना पड़ा है।

भारत का कोई मुख्यमंत्री क्या, साधारण सा नेता भी हो, और अमेरिका न जा सके तो उस पर लानत है। एक नहीं, दो नहीं, ग्यारह साल हो जाएं और उसे अमेरिका का वीजा न मिले तो उससे ज्यादा उसकी बड़ी पार्टी के बड़े नेताओं पर लानत है जो खुद तो अमेरिका आते-जाते रहते हैं मगर जो प्रधानमंत्री पद का दावेदार है, वह विनय पत्रिका हाथ में लिए अपने कर्मों को रोता रहे। उस बेचारे का क्या दोष कि 2002 में गुजरात में दंगे हो गए और कुछ निर्दोष मुसलमान मारे गए? उसने तो किसी को नहीं मारा तो वह बेचारा दोषी कैसे हो गया? भारत में सरकारों का हालात पर नियंत्रण होता तो सब जगह स्वर्गिक शांति पसरी होती। कहीं कोई दंगा-फसाद, चोरी-डकैती, भ्रष्टाचार और बलात्कार न होते। सब कुछ समय से सुचारू रूप से चल रहा होता। कोई मस्जिद ढहाता, चर्चों को जलाता, कहीं कोई प्रतिक्रिया तक न होती। लोग पत्थर के हो जाते और उनकी कोई भावनाएं न होतीं। उन्हें काटो, जलाओ, फूंक डालो उनका मुंह न खुलता। चीख नहीं निकलती। भला पत्थरों में भी कोई प्रतिक्रिया होती है? मगर हालात पर सर्व शक्तिमान ईश्वर के सिवाय, किसका नियंत्रण रहा है? और ईश्वर को तो फुर्सत ही नहीं कि वह मासूमों को मरने से बचाए। जब ईश्वर के कान पर उसकी ही बनाई छोटी सी जूं तक नहीं रेंगती तो पुलिस और प्रशासन के कानों पर कैसे रेंगेगी? संसार में इतनी जुएं ही कहां बची हैं जो पुलिस और प्रशासन के कानों पर रेंगने के लिए दौड़ पड़ें? तो बताइए मुख्यमंत्री भला कैसे हालात पर काबू पा सकता था? वैसे भी उसे राज्य का विकास करना था। जनता को गरीबी, बेरोजगारी और जहालत के कठोर पंजों से निकालकर विकास की चमचमाती सड़कों पर लाना था। अमेरिका यों तो अपने आप को दुनिया का सबसे समझदार देश मानता है, मगर उसमें इतनी तमीज नहीं कि वह समझ सके कि जब दंगों को कोई गॉड, कोई अल्लाह, कोई ईश्वर नहीं रोक सकता तो एक निरीह मुख्यमंत्री कैसे रोक सकता है। उसे भारत की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों की कतई जानकारी नहीं। होती तो क्या वह मोदी सरकार को गुजरात दंगों का जिम्मेदार मानता? लानत है अमेरिका की खुफिया एजेंसियों पर, जिन्होंने इराक में सद्दाम हुसैन की सरकार द्वारा परमाणु और रासायनिक हथियार बनाने की झूठी खबर तो जुटाई, मगर जो इतनी सी बात का पता नहीं लगा सकीं कि गुजरात दंगों को रोकने में नरेन्द्र भाई ने तो जान की बाजी लगा दी थी। वे गुजरात के विकास के लिए दिन रात एक कर रहे थे। अब ईश्वर की इच्छा के आगे किसकी चलती है? चाहे मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री या संयुक्त राष्ट्र महासचिव। बेचारे मुख्यमंत्री को अमेरिका ने वीजा ही नहीं दिया। बेचारे को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए अपने समर्थकों को सम्बोधित करना पड़ता है। आखिर लोकप्रियता का भी कुछ तकाजा होता है। सारी दुनिया में उनकी धूम है। लोग समझ रहे हैं कि यह बंदा एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा, पर अमेरिकियों की बुद्धि मोटी है। वे मोदी के महत्व को समझ ही नहीं रहे हैं। पर मोदी को वीजा नहीं दिया तो भाईसाहब उनका क्या बिगड़ गया? कौन से वे देश-दुनिया में बदनाम हो गए? उनके चाहने वाले झुमरी तलैया से लेकर न्यूयार्क, कैलीफोर्निया तक फैले हुए हैं और वे बार-बार निर्वाचित हो रहे हैं। भाईसाहब वीजा न देकर आपने नरेन्द्र मोदी का क्या उखाड़ लिया? इसलिए अब भी समय है चेत जाओ। वीजा दो। तत्काल वीजा दो। कहीं बाद में पछताना न पड़े, जैसे उनका विरोध करके कुछ भाजपाइयों को पछताना पड़ा है। तुम उन्हे वीजा दो, नरेन्द्र भाई तुम्हें बिजनेस देंगे। कहा भी है तुम एक पैसा दोगे वह दस लाख देगा। जरा वीसा देकर तो देखो भाई साहब। वे अमेरिका को गुजरात बनाकर दिखा सकते हैं। वैसे हमारी पार्टी में भी जरा सी तमीज हुई होती तो यह नौबत नहीं आती। आप लोग वीजा लिए मोदी के पीछे घूमते फिरते। पर हमारे नेता तो दे दनादन दे दनादन अमेरिका की यात्रा करते रहे। त्याग की कोई भावना ही नहीं। करते बहिष्कार तो अमेरिकियों को नानी याद आ जाती। कौन आज भारत के महत्व और उसके उभरते महानायक को नजरअंदाज कर सकता है? मगर भारतीय एक स्वर में बोलें तब न। हमारे तो एक प्रधानमंत्री ने ही तब राजधर्म निभाने का फतवा जारी कर दिया था। कहीं ऐसा होता है? खैर रात गई, बात गई। अब भी मैं कह रहा हूं। मैं नई दिल्ली से चलकर यहां वाशिंगटन में गुहार लगाने आया हूं कि मोदी को वीजा दो। यह ऐतिहासिक अवसर अगर तुमने गंवा दिया तो तुम्हें ही खमियाजा भुगतना पड़ेगा। सोच लो अभी हम भैया-मुन्ना कहकर समझा रहे हैं, बाद में अपनी पर उतर आए तो फिर हमें दोष नहीं देना।

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