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नमो के सारथी

नरेन्द्र मोदी को जब गुजरात में दायित्व मिला था तो चुनौतियां कम नहीं थी। संघ और भाजपा के कई नेता उनकी आलोचना में गुजरात में पार्टी कार्यकताओं के हितों का रोना रोते हैं। जितने संघ और भाजपा से जुड़े बड़े नेता गुजरात में नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से दु:खी हैं, उतने गुजराती नमो के साथ उनके कार्यकत्र्ता बनकर खड़े है।

पूर्व प्रधामंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की उम्र का खयाल करते हुए उन्हें खूंटी पर टांग दिया है। वह अब अपने अनुभव का लाभ देकर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ भविष्य की भाजपा के लिए मोहरें बिछाएंगे और पार्टी ने अगले चुनाव की कमान न केवल नरेन्द्र मोदी को सौंप दी है बल्कि नमो(मोदी का बचपन का नाम) के नेतृत्व में 20 टीमों की घोषणा भी कर दी है। संघ, भाजपा और मोदी की रणनीतिक कुशलता में गठित टीमों की घोषणा ने पार्टी के भीतर और बाहर मौजूद गुजरात के मुख्यमंत्री के आलोचकों के होठ भी सिल दिये हैं।

मोदी की इस टीम में भाजपा के शीर्ष नेताओं को उनके कद, क्षमता के आधार पर स्थान दिया गया है। विद्बता, योग्यता, जमीनी पकड़, लोगों को लुभाने की क्षमता, रणनीति बनाने के कौशल को वरीयता दी गई है। राज्य, क्षेत्र को वरीयता देकर समन्वय बिठाने का प्रयास हुआ है। पार्टी के सभी धड़ों में एकजुटता की संभावना टटोली गई है। जहां भाजपा की सरकार है वहां उसे मजबूत करने और जहां नहीं है वहां स्थिति सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है। संघ के प्रतिनिधि के तौर पर राम लाल, संघ के विश्वसनीय डा. मुरली मनोहर जोशी और मोहन भागवत के करीबी नितिन गडकरी जहां इस टीम का हिस्सा हैं, वहीं भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गडकरी की भूमिका निखारते हुए उन्हें दिल्ली का प्रभार सौंपा हैं ।

आडवाणी के करीबी एम वेंकैया नायडू, अनंत कुमार, सुषमा स्वराज को अहमियत के हिसाब से जगह मिली है। अरूण जेटली, मोदी, आडवाणी दोनों के करीबी हैं। वह राजनाथ सिंह के भी कभी काफी करीबी थे। इस समय भी रिश्ता ठीक है। नरेन्द्र मोदी के करीबी अमित शाह, बलबीर पुंज, स्मृति ईरानी, पुरुषोत्तम रूपाला हैं। राजनाथ सिंह के करीबी सुधांशु त्रिवेदी भी टीम का अहम हिस्सा हैं। केन्द्रीय चुनाव अभियान समिति में वाजपेयी, आडवाणी, राजनाथ, मोदी के अलावा 11 सदस्य हैं। इनमें मुरली मनोहर जोशी, एम वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली, अनंत कुमार, थावर चंद गहलोत, रामलाल, म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, गोवा के मनोहर पार्रिकर शामिल हैं। कहा जा सकता है कि यह अब तक भाजपा की सबसे संतुलित टीम है।

सुषमा स्वराज जहां महिला नेत्रियों में भाजपा का सबसे लुभावना चेहरा हैं, वहीं कर्नाटक से लेकर उत्तर भारत तक उनका लोगों के बीच अच्छा खासा प्रभाव है। प्रत्याशी भी चुनाव के दौरान सुषमा का राजनीतिक दौरा चाहते हैं। क्योंकि वह आम आदमी की इच्छा, अकांक्षा और राजनीति से लगाव का कारण समझती हैं।

मुरली मनोहर जोशी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे हैं। वह विद्बान और पढ़े लिखे लोगों में अच्छी छाप छोड़ लेते हैं। रणनीति बनाने में निपुण हैं। आडवाणी जी को नहीं सुहाते और ऐसे में मोदी को मजबूत बनाने में काम आएंगे। वह पार्टी का हिन्दुत्व के वैचारिक धरातल पर पहचाना जाने वाला चेहरा हैं। वेंकैया नायडू मुद्दों को समझने के पारखी हैं तो अनंत कुमार अच्छी योजना बनाने के लिए जाने जाते हैं। अरूण जेटली स्पष्ट वक्ता हैं। बारीकियों को समझते हैं। वह पार्टी के मुद्दों को ठोस तरीके से दलील देकर रखने की कला में निपुण हैं। राम लाल के पास संगठन की सोच है। वह संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं को बांधे रखने की कला जानते हैं। थावर चंद गहलोत अच्छी समझ के लिए जाने जाते हैं।

पारंपरिक अभियान का महत्व आज भी है
यह भारतीय जनता पार्टी की परंपरा रही है कि भारत की पारंपरिक जीवन शैली एवं प्रथाओं को समाज से जोड़े रखे। ऐसी अनेक किंवदंतिया आज हमारे सामने हैं। भारत में केवल पाठ्य पुस्तक नहीं परंतु कविता, नाटक, लोक नृत्य एवं अन्य कई तरह की विधाओं द्वारा महत्वपूर्ण संदेश समाज को दिए जाते हैं। एक जनतांत्रिक राजनैतिक दल होने के नाते भारतीय जनता पार्टी का यह प्रमुख कत्र्तव्य है कि भाजपा के नेता अपनी नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाए।

मैं समझती हूं कि नृत्य कला एवं नाटक के द्वारा हम इस देश के हर नागरिक को जागृत करेंगे एवं यूपीए सरकार की रावण रूपी भ्रष्ट छवि को समाज के सामने पेश करेंगे। आज भारत में किसान से लेकर सैनिक तक परेशान हैं। आम लोगों को मंहगाई की मार पड़ी है । भारत के गांवों में आज गरीब छात्र-छात्राएं मध्याह्न भोजन से मर रहें हैं। हम पारंपरिक प्रचार के माध्यम से हर भारतीय को बताएंगे कि कांग्रेस का हाथ अब गरीबों के गले तक पहुंच गया है। केवल दूरदर्शन में ‘भारत-निर्माण’ का सपना दिखा कर आज कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने इस देश को बुरी तरह से लूट लिया है। हम हर गांव, हर शहर में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को बताएंगे कि यूपीए सरकार का असली चेहरा क्या है। आज गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव अभियान समिति के नायक हैं और भाजपा ने एक विशिष्ट शासन देने का संकल्प लिया है। इस मुहिम में हम लोग पूरी तरह सक्रिय और सजग रहेंगे।
दिब्याश्री सतपथ

डा. मुरली मनोहर जोशी को चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ जसवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, प्रेम कुमार धूमल, सुशील कुमार मोदी, विजय कुमार मल्होत्रा, लक्ष्मीकांत चावला, बंडारु दत्तात्रेय, सत्य नारायण जटिया, शहनवाज हुसैन, महेश चंद्र शर्मा, षडमुख नाथन शामिल हैं। जोशी जी की इस टीम को कहीं से कम नहीं आंका जा सकता। उनके साथ मोदी के विरोध की कमान संभाले यशवंत सिन्हा भी हैं और यशवंत सिंह भी। ऐसे में घोषणा पत्र में जमीनी नब्ज से लेकर वैचारिक घुट्टी पिलाए जाने के पूरे आसार हैं।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी विजन दस्तावेज तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष हैं। पार्टी इसके माध्यम से उनके अनुभवों को जमकर भुनाने के मूड में है। रैली और जनसभा आयोजित करने के लिए रैली समिति गठित हुई है। इसका जिम्मा अनंत कुमार के पास है। भाजपा के युवा नेता वरुण गांधी इसके सदस्य हैं। हर संसदीय क्षेत्र में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने के लिए बूथ समिति का गठन किया गया है। नए मतदाताओं पर भी पार्टी की निगाह है। इसके लिए नव मतदाता अभियान समिति है। इसे अमित शाह, नवजोत सिंह सिद्धू, स्व. प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन, त्रिवेन्द्र रावत नई धार देंगे।

चुनाव आयोग के साथ कानूनी मसलों से निबटने के लिए सतपाल जैन और भूपेन्द्र यादव सक्रिय रहेंगे। प्रचार समिति का कार्यभार सुषमा स्वराज के पास है। अरूण जेटली, अमित शाह, डा. सुधांशु त्रिवेदी इसमें उनका सहयोग करेंगे। सूचना संचार समिति की कमान पीयूष गोयल के पास है। इसके जरिए सोशल मीडिया नेटवर्क पर वह पार्टी को मजबूती देंगे। विशेष संपर्क कल्याण समिति का भी गठन हुआ है। नितिन गडकरी, सीपी ठाकुर, डा. जयकार जैन, मृदुला सिन्हा, किरण माहेश्वरी और कलराज मिश्रा इसके माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क साधेंगे। हर लोकसभा क्षेत्र में डेढ़ से दो हजार बूथ निर्माण की योजना है। इसे थावर चंद गहलोत मजबूत बनाएंगे। बीजेपी मित्र समूह के माध्यम से राजीव प्रताप रूडी, प्रकाश जावड़ेकर तमिल ईसाई बुद्धजीवी सम्मेलन आदि की रूपरेखा तैयार करेंगे। सभी समितियां मोदी की अध्यक्षता वाली केन्द्रीय चुनाव अभियान समिति के तहत काम करेंगी। समितियां मोदी को रिपोर्ट करेंगी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन में मोदी के अध्यक्षता वाली समिति अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।

सेमीफाइनल बड़ी चुनौती
मोदी की इस टीम के लिए राजस्थान, म.प्र. छत्तीसगढ़, दिल्ली और मणिपुर का चुनाव सेमीफाइनल होगा। इनकी अधिसूचना जारी होने में करीब दो महीने का समय बचा है। इनमें से दो राज्यों में भाजपा की सरकार है। यह चुनाव मोदी के लिए भी चुनौती है। क्योंकि म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मोदी का अंक गणित कम फिट बैठता है। वहां भाजपा तीसरी बार सत्ता में आने के लिए चुनाव लड़ेगी। छत्तीस गढ़ में भी तीसरी बार सत्ता में आने के लिए चुनाव लड़ेगी। जबकि दिल्ली में शीला दीक्षित के राज को उखाडऩे के लिए संघर्ष करेगी। वहीं वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान में सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष करेंगी। वह अपने नेतृत्व में किसी का दखल बर्दाश्त नहीं करतीं। हालांकि मोदी की टीम में सभी तरह के लोगों को जगह मिली है

लेकिन इसके बावजूद यह चुनाव अग्निपरीक्षा होंगे। मोदी की टीम के लिए भले ही 2014 के आम चुनाव का महत्व हो लेकिन पांचों विधानसभा चुनावों के नतीजे निश्चित रूप से प्रभावित करेंगे।

मोदी की एक खासियत है। वह अपने आलोचकों को कभी जुबानी जंग में जीतने की कोशिश नहीं करते। बल्कि आलोचक जब मोदी की आलोचना कर रहे हैं होते हैं तो नमो कोई रणनीति बनाकर आगे बढऩे में जुट जाते हैं। अचानक नए अवतार में सामने आते हैं। इस दौरान मोदी की केवल एक ही चाल अधिक देखने को मिली है। वह किसी न किसी तरह से अपने राजनीतिक विरोधियों को उलझाने का उपाय करते हैं और उनके किसी दांव में उलझने में बमुश्किल समय गंवाते हैं। संजय जोशी, गोवद्र्धन भाई झड़पिया, प्रवीण भाई तोगडिय़ा जैसे लोग मोदी को करीब से जानते हैं उन्हें इसका एहसास है। यही वजह है कि मोदी के विरोधी उन्हें शातिर कहने से नहीं चूकते। समय इसका गवाह है कि जो भी मोदी के सामने खड़ा हुआ वह टिका नहीं। न दोस्त न दुश्मन। न संजय जोशी और न ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल। अब तो यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि आडवाणी जी भी नहीं। जब आडवाणी जी मोदी के उद्भव से नाराज थे तब नमो की पेशानी पर बल का कोई संकेत नहीं था। आरएसएस के करीबी सूत्र बताते हैं कि संघ की सलाह पर मोदी आडवाणी जी का मान रखने दिल्ली आए थे लेकिन उस समय भी उनकी निगाह चिडिय़ा की एक आंख पर थी। आलोचक इसी को आधार बनाकर कहते हैं कि मोदी का कोई लंबे समय तक दोस्त नहीं रहा है।

नरेंद्र मोदी को लेकर यूपी में कशमकश
सैयद निजाम अली रिजवी
गुजरात के मुख्यमंत्री व भाजपा की केंद्रीय चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख नरेंद्र मोदी के लखनऊ अथवा फैजाबाद से लोकसभा चुनाव लडऩे को लेकर उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में स्थिति साफ नहीं है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से चुनाव नहीं लड़ेंगे। जबकि युवा वर्ग इस उम्मीद में है कि शायद नरेंद्र मोदी लखनऊ अथवा फैजाबाद से चुनाव लड़ें। इस बारे में जब भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व लखनऊ पूर्व के विधायक कलराज मिश्र से बातचीत की गयी तो उन्होंने साफ कहा कि नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से चुनाव नहीं लड़ेंगे। लखनऊ के सांसद लालजी टंडन का कहना है कि वह ही यहां से चुनाव लड़ेंगे, मोदी जी यहां से चुनाव नहीं लड़ेंगे। पार्टी के दूसरे नेताओं का कहना है कि वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते क्योंकि इसका निर्णय खुद मोदी जी को ही लेना है। नरेंद्र मोदी ने अभी तक उत्तर प्रदेश का कोई दौरा नहीं किया है। अगस्त में भाजपा की देशभर में जो 100 रैलियां होंगी उसमें उत्तर प्रदेश में होने वाली रैलियों में नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे।

वैसे लखनऊ के भाजपा के आम कार्यकत्र्ताओं व लोगों का कहना है कि लखनऊ की गंगा जमुनी तहजीब है यहां बहुत कट्टर किस्म के आदमी को पंसद नहीं किया जाता वह चाहे मुसलमान हो अथवा हिंदू। आम मतदाता उसी को पंसद करता है जो यहां की तहजीब से वाकिफ हो। अटल बिहारी बाजपेयी लखनऊ से पांच बार इसीलिए सांसद बने कि वह हिंदुओं के साथ मुसलमानों के भी प्रिय थे।

लखनऊ के मशहूर बाजार अमीनाबाद में एक नुक्कड़ चुनावी सभा को अटलजी संबोधित कर रहे थे तभी मगरिब की नमाज की अजान पास की मस्जिद से होने लगी। अटलजी ने अपना भाषण अजान तक बंद रखा और अजान खत्म होने के बाद ही बोले। इससे मुसलमानों के दिल में उनकी इज्जत और बढ़ गयी। उधर भारतीय जनता युवा मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष राय का कहना है कि नरेंद्र मोदी युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र सिर्फ इसलिए बने हैं, क्योंकि वह देश के विकास के रोल माडल हैं। इसलिए भाजयुमों ने 18 से 35 साल के युवकों को पार्टी से जोडऩे के लिए सदस्यता अभियान चला रखा है। कुछ नेताओं ने इस शर्त के साथ बात की कि उनका नाम न छपे इन नेताओं का कहना था कि यूपी से मोदी को चुनाव नहीं लडऩा चाहिए वह दिल्ली से चुनाव लड़े तो सारे देश में सही संदेश जायेगा।

जिन्हें संघ की विचारधारा का एहसास है उन्हें एक दर्शन सहज समझ में आता है। संघ में पद का महत्व नहीं होता। वहां दायित्व की प्रधानता होती है। अर्थात कर्मयोग को परखा और जाना, पहचाना जाता है। मोदी संघ के उसी तरह के संघी हैं, जो दायित्व निभा रहे हैं। इकलौते मोदी, न परिवार, न पत्नी, न बच्चे और न ही कुनबा, कोई भी साथ नहीं है। इसलिए इतने पुराने संघ ने न तो खुद में वैचारिक धरातल पर बदलाव किया है और न ही मोदी बदले हैं। नमो के साथ संघ, उनका दर्शन, कर्तव्य और केवल आगे की ओर जाने वाला रास्ता है। इसी को ध्यान में रखकर वह अपनी टीम चुनते हैं। मिशन पर निकलते हैं और परिणाम के साथ सामने आते हैं।

इसी समीकरण को साधने के लिए पहले नरेन्द्र मोदी ने अपने करीबी अमित शाह को भाजपा का महासचिव और बाद में उ.प्र. का प्रभारी बनवाया। निशाने पर अमित शाह आए और उधर मोदी रणनीति बनाने में जुटे थे। कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार इसे बखूबी समझ रहे थे। उन दिनों वह मोदी और अमित शाह को घेरने में जुटे थे। स्थिति की गंभीरता को देखकर दिग्विजय सिंह ने भी जुगत लगाई और उ.प्र. छोड़कर आंध्र प्रदेश के प्रभारी बन गए। यह दिग्विजय सिंह की राजनीतिक गोटी थी। क्योंकि वह खुद को अमित शाह की बराबरी पर नहीं रखना चाहते थे। उ.प्र. से आंध्र में कड़ी चुनौती झेल रही कांग्रेस ने उनकी लाज बचाई।

सभी वर्गों को जोड़ेंगे भाजपा के साथ
वर्गवार सम्मेलन क्या है? इसका स्वरूप क्या होगा ?
राजनीतिक दल बैठकें और सभाएं करते रहते हैं। इन सम्मेलनों के माध्यम से हम हर वर्ग के लोगों से उनके मुद्दों और उनसे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। हम पार्टी का दृष्टिकोण और उसकी प्रतिबद्धता लोगों तक पहुंचाएंगे। महिला, किसान, जनजातीय, मछुआरे, बुनकर आदि वर्गों से सीधी मुलाकात और बैठकें कर उनके लिए नीतियों पर चर्चा करेंगे। इन वर्गों के राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। जैसे ऋण, सब्सिडी, हाउसिंग आदि समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

वर्गवार सम्मेलन के तहत क्या जातीय आधार पर बने संघों और संगठनों से भी संपर्क करेंगे?
हमारी पार्टी जातीयता को आधार नहीं मानती । हम जातीय आधार पर नहीं, पेशेगत आधार पर बात करेंगे। हमारी पार्टी किसी जाति के खिलाफ नहीं है। हम उनकी समस्याओं को भी सुनेंगे। हम सामूहिक मुद्दे की बात करेंगे।

किसान, बुनकर, मत्स्यजीवी जैसे पिछड़े वर्ग के फायदे के लिए कोई विशेष अभियान चलाएंगे?
हां, हम उनकी समस्याओं को समझने और सुलझाने के लिए ग्रामीण इलाकों की यात्राएं करेंगे। वहां के लोगों के साथ बैठकें और सभाएं कर उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर उन्हें संगठित भी करेंगे।

वर्गवार सम्मेलन में भाजपा के अतिरिक्त संघ के स्वयंसेवकों की मदद भी लेगी पार्टी?
संघ के लिए वर्ग का कोई मतलब नहीं है। संघ एक स्वतंत्र इकाई है। अगर उनके स्वयंसेवक इन लोगों के लिए काम करना, मिलना या उनकी समस्याएं सुलझाना चाहें तो इसके लिए वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
दिब्याश्री सतपथी

जद(यू) मोदी के आगे आने का मतलब समझ चुका था। नीतीश कुमार को सब अपने तरीके से समझ में आ रहा था। उन्होंने भाजपा से नाता तोडऩे में देर नहीं लगाई लेकिन अब वह असमंजस में हैं। जद (यू) के सामने बड़ी समस्या है, वह बिहार में 15-17 प्रतिशत मत पाने वाली भाजपा से अलग होकर इतने मतों को पाने का रास्ता तलाश रही है। इतना ही नहीं जद(यू) ने मोदी के खिलाफ खुलकर नकारात्मक टिप्पणी करने वाले राज्य सभा में अपने नेता शिवानंद तिवारी को भी प्रवक्ता पद से हटा दिया। जबकि भाजपा को सहयोगी के जाने का गम तो है लेकिन बिहार में वोट प्रतिशत बढऩे की पूरी आस है।

मोदी की टीम पर संघ की मुहर
नागपुर के थर्मामीटर पर पारे के उतार-चढ़ाव से वाकिफ सूत्र का कहना है कि मोदी की टीम उनकी कुशल रणनीति का चेहरा है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य की सलाह पर इसमें कुछ संशोधन हुआ है। नितिन गडकरी का मान बनाए रखने की कोशिश हुई और टीम के समीकरण को संघ प्रमुख मोहन भागवत का विश्वास हासिल है। जब पीछे संघ खड़ा हो तो फिर भाजपा में किसी भी टीम में एकजुटता आने का रास्ता खुद-ब-खुद तैयार होने लगता है।

नमो को जब गुजरात में दायित्व मिला था तो चुनौतियां कम नहीं थी। संघ और भाजपा के कई नेता उनकी आलोचना में गुजरात में पार्टी कार्यकताओं के हितों का रोना रोते हैं। जितने संघ और भाजपा से जुड़े बड़े नेता गुजरात में नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से दु:खी हैं, उतने गुजराती नमो के साथ उनके कार्यकर्ता बनकर खड़े हंै। व्यावसायिक सोच के गुजराती को भाजपा और संघ के नेताओं की दुखती रग पर हाथ रखना तकलीफ नहीं देता। उन्हें लगता है कि पार्टी की सरकार होने के बाद भी अपना असर न दिखा पाने के कारण ये नेता नाराज हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि नरेन्द्र भाई दामोदर दास मोदी भेदभाव रहित होकर सबके भले के लिए काम कर रहा है। इससे गुजराती समाज आनंदित हो रहा है, क्योंकि इससे पार्टी के नेताओं की दादागिरी ठप्प है। यह एक बड़ी वजह रही कि पिछले साल संपन्न हुए चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के विकास और गुजरातियों के स्वाभिमान को मुद्दा बनाया, सफल भी हुए। ऐसे में देखना है उनका यह नुस्खा पूरे देश में कौन सी करवट लेता है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की विवशता खत्म हो गई है। वह खुलकर नरेन्द्र मोदी को भाजपा की अगली सरकार बनने पर देश का प्रधानमंत्री बनाने में लगे हैं। जबकि पहले राजनाथ सिंह को कहना पड़ता था कि नरेन्द्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। अब राजनाथ यह नहीं कहते, चुनाव के बाद पार्टी के नेता मिलकर प्रधानमंत्री पद के नेता का चुनाव करेंगे, दरअसल यह केवल राजनाथ की भाषा नहीं है बल्कि संघ की मंशा भांपकर अब वह खुलकर बोल रहे हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए संघ और भाजपा दोनों को काफी पापड़ बेलने पड़े। मोदी के आलोचकों को इसे स्वीकार कराने के लिए मोहन भागवत को शीर्ष कतार के तमाम भाजपा नेताओं को नागपुर बुलाना पड़ा। उन्हें खुद आडवाणी से मिलने नई दिल्ली आना पड़ा। झंडेवालान में केशव कुंज को समय का रूख भांपकर आगे बढऩा पड़ा।

नमो पार्टी के भीतर ज्वार-भाटा देखकर शांत थे। वह न केवल शांत थे बल्कि चतुराई के साथ संयमित थे। अहमदाबाद से उनकी टीम के सदस्य दिल्ली से लेकर नागपुर तक नजर रख रहे थे। हरेश मलानी बताते हैं कि कई तरह के नेताओं का वर्गीकरण हो रहा था। सोशल मीडिया की टीम अपना काम कर रही थी। संघ की ताल पर राजनाथ चल रहे थे और संघ का रूख देखकर नरेन्द्र मोदी चल रहे थे। 20 टीमों का चयन इसी का हिस्सा था। जब सुधाशु मित्तल को पार्टी में प्रभावी जगह दी जा रही थी तब भी मोदी की घटनाक्रम पर नजर थी।

मोदी की टीम और संघ
मोदी की इस टीम को राजनीति के विश्लेषक चाहे जिस नजर से देखें लेकिन बारीकी से देखने पर यह संघ की अवधारणा को साकार करती नजर आती है। संघ के दर्शन अच्छी समझ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार बलदेव भाई शर्मा इसे काफी व्यवस्थित टीम बताते हैं। बलदेव कहते हैं कि इस टीम में भाजपा के सभी धड़े के नेताओं को समुचित स्थान दिया गया है। ऐसा करने में मोदी ने भी किसी तरह का पक्षपात नहीं किया है। इसमें किसी के मान को ठेस नहीं पहुंची है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को सम्मानजनक स्थान दिया गया है। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह चूंकि दल के शीर्ष पद पर हैं इसलिए टीम के मेंटोर की भूमिका में हैं। 20 टीमों के अध्यक्ष नरेन्द्र मोदी हैं।

संघ की कोशिश 2014 में केन्द्र में भाजपा की सरकार देखने की है। इसके लिए भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और संघ प्रमुख दोनों का मानना है कि आधार वोट बैंक होना चाहिए। तभी पार्टी मजबूती से खड़ी रह सकती है। यूपीए की केन्द्र में मौजूदा सरकार की गलत नीतियां, आर्थिक मोर्चे पर विफलता, अण्णा हजारे और योग गुरू स्वामी रामदेव के अभियान में उमड़ा जन समूह लोगों की नाराजगी को परिलक्षित करता है। ऐसे में मोदी के सख्त जान चेहरे को खड़ा करके लक्ष्य पाया जा सकता है। सत्ता संधान की इस कोशिश में मोदी के नेतृत्व में 20 टीमों के अहम सदस्यों का चयन, जिम्मेदारी का बंटवारा और कामकाज का संतुलन अहम पड़ाव है।

राजनीतिक दल मोदी को चाहे जितना सिकुड़ा बताएं लेकिन हिन्दुस्तान से लेकर अमेरिका तक इसकी आहट है। अमेरिका जहां मोदी को वीजा देने में आनाकानी कर रहा है वहीं देश की राजनीतिक पार्टिंयों में हलचल है। कांग्रेस के प्रवक्ता और महासचिव शकील अहमद, दिग्विजय सिंह समेत अन्य आक्रामक हो रहे हैं। उनके बयान से पार्टी खुद को अलग कर रही है तो जनत दल (यूनाइटेड) ने अपने प्रवक्ता शिवानंद तिवारी को बदल दिया है। मोदी की हिन्दुत्व की शैली शिवसेना को रास आ रही है तो भाजपा के तमाम नेताओं की सांस में काफी गति आ गई है।

शतरंज की बिसात पर मोदी की शह
नरेन्द्र मोदी नब्ज पहचानते हैं। उन्होंने चुनाव अभियान समिति की टीमों के ऐलान से पहले इसी इरादे से शतरंज की बिसात पर शह दी है। उन्होंने 2002 में गुजरात में हुए दंगे पर फिर बयान दिया और एक समाचार एजेंसी रायटर को दिए साक्षात्कार में 2002 के दंगे पर अफसोस के बारे में पूछे जाने पर कहा -अगर हम कार चला रहे हैं तो हम ड्राइवर हैं। अगर कोई अन्य कार चला रहा है तो हम पीछे बैठे हैं। उस समय यदि कोई पिल्ला गाड़ी के नीचे आ जाए तो दु:ख होगा या नहीं। निश्चित रूप से यह दु:खद होगा। मैं मुख्यमंत्री हूं लेकिन उससे पहले इंसान हूं। अगर कहीं कुछ भी गलत होगा तो दु:खी होना स्वाभाविक है। बाद में मोदी ने सफाई दी और ट्वीट किया-हमारी संस्कृति में जीवन का हर रूप पूजनीय और अनमोल माना जाता है।

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