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रियल इस्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है नोएडा ऑथिरिटी : गोपाल अग्रवाल

देश के कई सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक संगठनों से जुड़े, भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गोपाल अग्रवाल से देश और गौतमबुद्धनगर के वर्तमान हालातों पर उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता से खास बातचीत के अंश :

ग्रामीण भारत के विकास के लिए क्या किया जाना चाहिए?
देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है। लेकिन हमारे देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 20 प्रतिशत से भी कम है। इसका सीधा सा अर्थ है, कृषि क्षेत्र आज हाशिए पर है। इससे उत्पन्न हो रही विषमता को पाटने के लिए देश को नई कृषि नीति की जरुरत है। देश में कृषि क्रांति के जरिए किसानों को व्यवस्था से सीधा जोडऩे की जरुरत है। मंडियों का पुनर्रुद्धार, माल गोदामों की संख्या में वृद्धि आदि शुरूआती कदम, उनके लिए लाभदायक होंगे। हमारी पूरी आर्थिक दिशा समग्र ग्राम विकास पर आधारित होनी चाहिए। इसमें कुटीर उद्योग और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की विशेष जरुरत है। ‘विकास के टापू’ पर आधारित संरचना, जिसमें संसाधनों का उपयोग किसी एक क्षेत्र के विकास के लिए किया जाता है, देश के लिए घातक है। संसाधनों को अनुकूलतम उपयोग में स्थानीयता को तरजीह दी जानी चाहिए।

बढ़ती हुई महंगाई और रुपये के अवमूल्यन के क्या कारण हैं?
रूपये का अवमूल्यन महंगाई और भ्रष्टाचार, ये तीनों आपस में सीधे जुड़े हुए हैं। आर्थिक रुप से विश्वशक्ति बनने की काबिलियत रखने वाला देश, आज गर्त में जा रहा है। रुपये का अवमूल्यन सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और भ्रष्टाचार के सामूहिक परिणाम का नतीजा है। फिर भी सरकार वित्तीय घाटे को कम करने का प्रयास नहीं कर रही है। वोट खरीदने के लिए सामाजिक सुरक्षा के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं में बड़े पैमाने पर लूट-खसोट मची है। इन योजनाओं के लिए सरकारी बजट में किसी तरह का प्रावधान नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण वित्तीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। फिर भी सरकार अधिकृत एजेंसियां जनता को मूर्ख बनाते हुए 5 रूपये और 12 रूपये में भरपेट भोजन करने की बात कह रही है।

रुपये के अवमूल्यन के कारण कच्चा तेल महंगा हो गया है। जिससे देश में अप्रत्याशित महंगाई बढ़ रही है। एफडीआई के नाम पर सरकार विदेशी कंपनयों को सहूलियतें बढ़ा रही है, लेकिन घरेलू औद्योगिक घरानों की समस्या के प्रति उदासीन बनी है, जिससे वे देश के बजाय विदेशो में निवेश कर रहे हैं। परिणामत: देश की अर्थव्यवस्था दीवालिया होने के कगार पर पहुंच गई है। यह वही स्थिति है, जब 1991 में देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था।

भाजपा की आर्थिक नीतियों के क्या आधार हैं?
आर्थिक नीति पर भाजपा की सोच समाज के हर वर्ग को समान रुप से सक्षम बनाने की रही है। पं. दीनदयाल उपाध्यायजी ने ‘अंत्योदय’ के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि समाज का विकास तभी संभव है, जब अंतिम व्यक्ति आर्थिक रुप से सक्षम हो जाए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भाजपा आधारभूत संरचनाओं के विकास पर जोर देती है। भाजपा की नीति है कि प्रशासनिक जबावदेही के साथ-साथ सरकारी कामकाजो में पारदर्शिता रहे। ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगी रहे। जनहितकारी योजनाओं में समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सीधे लाभ प्राप्त होना चाहिए। इसका उदाहरण मध्यप्रदेश में जनहित के कार्यों को एक निश्चित समयावधि तक सुनिश्चित करने की उत्तरदायित्व, पंचायतीराज बिल महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में जनवितरण प्रणाली में सुधार और गुजरात का ‘सर्वांगीण विकास मॉडल’ महत्वपूर्ण उदाहरण है। गुजरात के विकास मॉडल की जितनी चर्चा की जाए, वह कम है। भाजपा शासित प्रदेशों में लागू नीतियां आज देश में उदाहरण के रुप में प्रस्तुत की जा रही है। भाजपा कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ, औद्योगिकरण के माध्यम से रोजगार सृजन को, देश की विकास के लिए महत्वपूर्ण मानती है।

अगले चुनाव में कौन से मुद्दे लेकर जनता के बीच जायेंगे?
देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है। इसके मूल में लोगों की जरूरतों को दरकिनार कर, प्राकृतिक संसाधनों का क्रूरतम तरीके से दोहन किया गया है। जिसकी वजह से पर्यावरण पूरी तरह असंतुलित हो चुका है। केदारनाथ धाम की त्रासदी इसी असंतुलन का परिणाम है। फिर भी सरकार सचेत नहीं हो रही है। जल संरक्षण एवं संवद्र्धन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए। हम ‘जलाधिकार’ संस्था के तहत पदयात्रा और जलअदालत के माध्यम से लोगों को जागृत करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। नोएडा स्थित 250 ‘रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन’ अधिकारों के अभाव में कॉलोनी आधारित विकास करने में अक्षम हैं। ‘नगर विकास बिल’ की तर्ज पर आरडब्ल्यूए को कानूनी दर्जा मिले, ताकि सत्ता विकेन्द्रीकरण के माध्यम से विकास के नीति-निर्धारण में उनकी भूमिका सुनिश्चित हो सके।

गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा में क्या किसी तरह के बदलाव की जरुरत है?
पिछले 25 सालों से नोएडा का निवासी होने के नाते, विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक क्षेत्रों में काम कर रहा हूं। कानून-वयवस्था, बेहतर सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ, यहां की प्रमुख समस्या भूमि अधिग्रहण है। उचित मुआवजा और पुनर्वास एक दुरूह कार्य बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रिहाइशी मकानों की उपलब्धता सीधे तौर पर भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मुद्दा है। किसानों को सिर्फ मुआवजा ही नहीं, भूमि अधिग्रहण के बाद उनके पुनर्वास की भी जरुरत है। ताकि उनकी आजीविक के लिए वैकल्पिक प्रबंध हो सके। विकास में उनकी भी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।

इस क्षेत्र में कई ऐसे ऐतिहासिक स्मारक हैं, जो खंडहर में तब्दील होने के कागार पर हैं। विकास के दौड़ में उनकी बात कोई नहीं करता?
इन मुद्दों को मैंने कई बार संबंधित अधिकारियों के समझ उठाया। लेकिन उसे हमेशा नजरअंदाज किया गया है। यहां विषरख एक गांव है, जो रावण की जन्मस्थली के रुप में जाना जाता है। यहां रावण के पिता ऋषि विशेश्रवा द्वारा स्थापित अष्टभुजाधारी शिवलिंग आज भी मौजूद है, लेकिन मंदिर की हालत जर्जर हो चुकी है। दादरी में छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित शिवमंदिर, कासना के सती निहालदे मंदिर, गुलिस्तांपुर का ऐतिहासिक 40 फुट ऊंची मीनार, गोल्फ कोर्स स्थित विजय स्तंभ की भी हालत जर्जर है। आज इन धरोहरों की अनदेखी लगातार जारी है। रियल इस्टेट कंपनी की तरह कार्य कर रही नोएडा ऑथरिटी विकास प्राधिकरण न रहकर, पैसा कमाने वाली एक मशीन बन गई है, जो अपने आकाओं का पेट भरने की लगातार कोशिश में रहती है।

चिन्मय मिशन, गायत्री परिवार, विद्या भारती जैसी शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं का नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने में किस तरह का योगदान है?
देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार, घरेलू हिंसा, बलात्कार, हत्या जैसे अपराध नैतिक मूल्यों में ह्रास के कारण ही बढ़ रहे हैं। ऐसे में सिर्फ कानून के माध्यम से इन प्रवृत्तियों पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। इसके लिए नैतिक मूल्यों पर आधारित सामाजिक संरचना ही समाज को दिशा दे सकता है। महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, छत्रसाल, ध्रुव, खुदीराम बोस, भगत सिंह जैसे लोगों की वीरता और नैतिकतायुक्त शिक्षा, समाज में देशभक्ति के साथ-साथ चरित्र में निर्माण कर सकता है। चिन्मय मिशन, गायत्री परिवार विद्या भारती जैसी शैक्षणिक संस्थाओं का नैतिक शिक्षा का बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान है।

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