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‘यह भ्रम है कि गैर-सरकारी अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच सांठ-गांठ होती है’

देश में सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों कि कमी और इलाज में हो रहे विलंब की वजह से आम आदमी को गैर-सरकारी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ता है, परंतु मन में यह आशंका व डर रहता है कि गैर-सरकारी अस्पतालों मे अनाप-शनाप बिल वसूल किया जाएगा। उनकी सारी आमदनी निचोड़ लेगें। इस संबंध में पुष्पांजलि क्रोसले के प्रमुख डॉ. विनय अग्रवाल ने उदय इंडिया की संवाददाता दिब्याश्री सतपथी को एक विशेष भेंट में कहा–

”यह बिलकुल गलत है। इलाज के नाम पर यहां अनाप-शनाप खर्चा नहीं लिया जाता। अभी देश में परिवर्तन का दौर चल रहा है। जब भी पैसे की बात आती है तो लोग 10 साल पीछे चले जाते हैं और सेवा की बात आती है, तो 10 साल आगे की बात करने लगते हैं। अगर कोई प्राइमरी केयर सुविधा एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लेने आएगा तो स्पष्ट है कि यह उसे काफी मंहगा पड़ेगा। गैर-सरकारी अस्पतालों में भी एडमिशन के समय अनुमानित खर्चा बता दिया जाया है। ये अफवाहें हैं कि गैरसरकारी अस्पतालों में मरीजों को लूटा जाता है।’’

लेकिन आरोप यह भी है कि बीमा कंपनी के साथ गैर-सरकारी अस्पतालों की सांठ-गांठ रहती है, और कमीशन के लिए बिल अधिक बना लिए जाते है।

यह केवल भ्रम है। बीमा सबको कराना चाहिए पर इलाज के वक्त बीमा कंपनी सिर्फ उतनी ही राशि देती है, जितनी राशि का बीमा कराया होता है। लोग कम राशि का बीमा कराते हैं, और सोचते हैं कि बीमा कंपनी उनका इलाज मुफ्त करा देगी। बीमा कंपनी पेमेंट के मामले में बहुत सख्त होती है। इसे चाहे कोई अज्ञानता कहे, या चालाकी, परंतु लोग बीमा कराकर अपना इलाज मुफ्त कराना चाहते हैं। यह केवल भ्रम है कि गैर-सरकारी अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच सांठ-गांठ होती है।

दिल्ली में बहुत सारे अस्पताल हैं, मरीज पुष्पांजलि अस्पताल में ही क्यों आएं?
दिल्ली में लगभग 2000 से भी ज्यादा अस्पताल हैं और पुष्पांजलि क्रोसले दिल्ली के 10 जाने-माने अस्पतालों में से एक है। यहां सुपर स्पेशियलिटी इलाज होता है। इस अस्पताल को नेश्नल एक्रेडीशन बोर्ड फॉर होसपिटल (एन. ए. बी. एच.) की मान्यता प्राप्त है। यहां सिर्फ गुणवत्ता सेवा ही नहीं, नैतिक सेवा भी प्रदान होती है। पुष्पांजलि की विश्वसनीयता का अंदाजा आप यहां बड़े पैमाने पर आने वाले मरीजों से लगा सकते हैं। मरीज यहां सिर्फ दिल्ली से ही नहीं, बल्कि दिल्ली के बाहर से भी आते हैं। यहां विदेशी मरीज भी अपना उपचार कराने आते हैं। इस अस्पताल में अब तक 6000 से भी ज्यादा विदेशी मरीजों की चिकित्सा की जा चुकी है। यहां एक ही छत के नीचे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

पुष्पांजलि अस्पताल में किन आधुनिक तकनीकों का प्रयोग होता है?
पुष्पांजलि में बहुत सारी नई टैकनोलाजी हैं जिनमें मुख्य रुप से किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर, कार्डियाक सर्जरी एवं आईवीएफ आदि के ईलाज की तकनीक शामिल हैं। यहां बहुत सारी अद्भुत सर्जरी भी हुई हैं, जो अब तक देश में कहीं नहीं हुई। यहां जटिल से जटिल कार्डियाक सर्जरी, जैसे वॉल्व बदलना, बाईपास सर्जरी आदि की गई हैं। अगर लकवाग्रस्त व्यक्ति को अटैक पडऩे के एक घंटे के अंदर यहां ले आया जाए तो उसे ‘थ्रोमबोलिसिस’ के द्वारा पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

अस्पताल के किस- किस विभाग में उच्च तकनीक का इस्तेमाल होता है?
यहां कैंसर विभाग एक अत्याधुनिक विभाग है। अब तक लगभग 60 से भी ज्यादा कैंसर ग्रस्त व्यक्तियों को ठीक किया जा चुका है। डायग्नोसिस के लिए यहां ‘न्यूक्लियर लैब’ है। जल्दी ही यहां ‘पेट स्कैन’ भी लगाने वाले हैं। इसके अलावा यहां एमआरआई, सीटी स्कैन, फ्रोजेन सेक्शन आदि भी हैं। फ्रोजेन सेक्शन करके कैंसर के प्रकार को पहचाना जा सकता है, जिससे सर्जरी में आसानी हो है।

यहां कई विशिष्ट चिकित्सक हैं, जो पुष्पांजलि के लिए ब्रांड बन सकते हैं। डॉ.संपद कुमार देश में वॉल्व सर्जरी के जाने माने नाम हैं । भारत में ही नहीं, विदेश में भी उनकी ख्याति है । डॉ. गणेश मणि को अभी-अभी पद्मश्री मिला है। वह जाने-माने कार्डिएक सर्जन हैं। डॉ.उपेन्द्र संधू, हिप सर्जरी, मल्टीपल फैक्चर, पॉलिट्रॉमा आदि के विशेषज्ञ हैं। डॉ. एस. के. मित्तल, डॉ. अरूण कक्कड., डॉ. एन. पी. सिंह आदि यहां के बड़े नाम हैं। पुष्पांजलि पहला अस्पताल है जहां एड्स का क्लिनिक है। यहां एड्स के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ट्रेनिंग सेंटर भी है।

एशिया में आज भारत का हैल्थ टूरिजम में बहुत नाम है। पुष्पांजलि का उसमें क्या योगदान है?
विदेश से बड़ी संख्या में यहां मरीज आते है, एशियाई देश जैसे अफगानिस्तान, इराक, ईरान, बांग्लादेश आदि से बहुत मरीज आते हैं नाइजीरिया, कीनिया, कांगो, फिजी जैसे अफ्रीकी देशों से ही नहीं, बल्कि अब तो रूस से भी यहां मरीज आने लगे हैं। अफ्रीका और एशियाई देशों से लोग यहां इसलिए आते हैं, क्योंकि वहां आधुनिक टैक्नोलजी का अभाव है। रूस एवं यूरोपीय देशों से लोग यहां इसलिए आते हैं, क्योंकि वहां के मुकाबले यहां इलाज सस्ता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ यहां गुणवत्ता सेवा बहुत ही कम पैसे में मिल जाती है। अत: विकासशील एवं विकसित देशों के लोग यहां आते हैं।

भारत एक गरीब देश है और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को अच्छा इलाज कैसे मुहैया होगा?
भारत में दो समानांतर प्रणाली चलती हैं। सरकारी एवं गैरसकारी। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 25000 से 30000 बिस्तर उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है। इस में कोई संदेह नहीं है कि स्वास्थ्य की देखभाल का खर्च बढ़ गया है। सरकारी तंत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होती जा रही हैं, वहां मरीज से परोक्ष रूप से पैसा लिया जाता है। वहां टैक्स के माध्यम से पैसा काटा जाता है। यहां आपात स्थिति में कभी भी पेमेंट स्ट्रक्चर के आधार पर किसी मरीज को इलाज के लिए परेशान नहीं किया जाता। पहले उन्हें सेवा देते हैं, और फिर उनकी आर्थिक स्थिति के हिसाब से किसी और अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता है।

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