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राजस्थान में सरकार बनाने के दावे

गुजरात राजस्थान का पड़ोसी प्रांत है और वहां के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक कद बढ़ाकर भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति की दिशा निर्धारित कर ली है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा के दौरान अजमेर की सभा में राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता अरूण जेटली विधानसभा चुनाव में 150 सीटें जीतने का दावा जता चुके हैं।

राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस और प्रमुख विपक्ष भारतीय जनता पार्टी इस साल की आखिरी तिमाही में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने ही दल की सरकार बनाने का दावा कर रही है। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुरूदास कामत ने एक चैनल से बातचीत में 200 सदस्यीय विधानसभा में 150 सीटें जीतने का दावा किया है। गौरतलब है कि वर्ष 1998 में 156 सीटों की रिकॉर्ड जीत के बहुमत से अशोक गहलोत की सरकार बनी थी और 2008 में कांग्रेस ने 96 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में बसपा से निर्वाचित सभी छ: विधायकों सहित निर्दलियों के सहयोग से सरकार बनाई उधर भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली 150 सीटें जीतने का दावा कर चुके हैं।

30 मार्च राजस्थान दिवस से आरम्भ हुई कांग्रेस की संदेश यात्रा और राजस्थान का प्रभार संभालने वाले महासचिव गुरूदास कामत ने अपनी कार्यशैली से पार्टीजनों में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने का भरोसा जगा दिया है। जनवरी के आरम्भ में जयपुर में कांग्रेस की चिंतन बैठक में राहुल गांधी को कांग्रेस उपाध्यक्ष के रूप में अगले चुनाव की जिम्मेदारी तथा राजस्थान पर फोकस से भी इस धारणा को बल मिला है। इस बात का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है कि येन केन प्रकारेण पार्टी फिर से सत्ता में आ जाए। इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आनन-फानन में पन्द्रह लोगों को विभिन्न आयोगों तथा बोर्डों आदि में राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए लाल बत्ती देने की मशक्कत करनी पड़ी। स्वाभाविक रूप से इनमें जातिगत संतुलन का ध्यान रखा गया लेकिन क्षेत्रीय असंतुलन बरकरार रहा।

केन्द्र सरकार और कांग्रेस संगठन के स्तर पर भी राजस्थान को सर्वाधिक तरजीह दी गई है। सत्रह साल पुराने भाजपा जनता दल (यू.) गठबंधन की टूटन वाले दिन राहुल गांधी के पार्टी संगठन में अपने पसंदीदा लोगों को शामिल करते हुए राजस्थान के भीलवाड़ा से निर्वाचित सांसद और केन्द्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी को महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई। इसके अगले दिन यू.पी.ए-2 सरकार के सातवें मंत्रिमण्डल विस्तार में जिन आठ चेहरों को शामिल किया गया उनमें राजस्थान से दो केबिनेट मंत्री लिए गए।

झुंझूनूं संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित खांटी नेता शीषराम ओला को पहले स्वास्थ्य कारणों से मंत्रिमण्डल से हटाया गया और अब विस्तार में केबीनेट मंत्री बनाकर श्रम एवं रोजगार विभाग दिया गया। इसके पीछे का गणित साफ दिखाई देता है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल मदेरणा के ए.एन.एम. भंवरी देवी हत्याकांड में कथित लिप्तता के आरोपों के चलते मंत्री पद से बर्खास्तगी के मद्देनजर कांग्रेस से नाराज जाट समर्थकों को मनाने की गरज से यह कदम उठाया गया है। एक राज्यमंत्री लालचंद कटारिया जाट समुदाय से हैं।

राजस्थान के राजनीतिक हलकों में यह धारणा रही है कि मेवाड़ क्षेत्र से अधिक सीटें हासिल करने वाला राजनीतिक दल राज्य में सरकार बनाता है। अपने इस ग्राफ को और मजबूत बनाने की गरज से चित्तौडगढ़ की सांसद डॉ. गिरिजा व्यास को केबीनेट मंत्री का दर्जा देकर आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया है। गिरिजा को मंत्रिमण्डल में शामिल करके पार्टी हाईकमान ने क्षेत्रीय संतुलन बनाये रखने का प्रयास भी किया है। चित्तौडग़ढ़ से लगे भीलवाड़ा से निर्वाचित डॉ. सी.पी. जोशी राजनीतिक दृष्टि से गिरिजा विरोधी खेमे से ताल्लुक रखते है और दोनों ब्राह्मण समुदाय से हैं, वहीं गिरिजा से महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी बढ़ गया है। अपने मंत्रालय के हिसाब से वह शहरी मतदाताओं को रिझाने के लिए चुनाव तक क्या तानाबाना बुन पाती है, यह तो वक्त बताएगा। ध्यान देने की बात यह भी है कि मंत्रिमण्डल विस्तार में चार केबीनेट और चार राज्य मंत्रियों में राजस्थान से दो केबीनेट मंत्री बनाकर राजस्थान के दबदबे को बढ़ाया गया है। इससे पहले चन्द्रेश कुमारी (जोधपुर) केबीनेट मंत्री (सांस्कृतिक मंत्रालय) थी। राहुल गांधी के करीबी भंवर जितेन्द्र सिंह (अलवर) सचिन पायलट (अजमेर) स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री तथा नमोनारायण मीणा राज्यमंत्री है। इस तरह राजस्थान से पहली बार सात मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा राजस्थान से राज्यसभा कोटे से निर्वाचित आनंद शर्मा भी केबीनेट मंत्री है। गौरतलब है कि वर्ष 1984 में राजीव गांधी मंत्रिमण्डल में राजस्थान से बूटासिंह नवलकिशोर शर्मा, नटवरसिंह रामनिवास मिर्धा, राजेश पायलट और अशोक गहलोत शामिल थे और डॉ.बलराम जाखड़ लोकसभा अध्यक्ष पद पर आसीन थे।

राजस्थान से एक विचित्र संयोग और जुड़ गया है। अब केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में 35 वर्षीय सचिन पायलट सबसे युवा और 86 वर्षीय शीशराम ओला सबसे बुजुर्ग मंत्री के रूप में विद्यमान है। वर्ष 2009 में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह मंत्रिमण्डल की औसत आयु 57 वर्ष थी जो अब बढ़कर 62 साल हो गई है। इसी गणना में केबीनेट मंत्रियों (32) की औसतन आयु 68 साल स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों (12) की 55 साल तथा 33 राज्यमंत्रियों की औसत आयु 57 वर्ष आंकी गई है।

गुजरात राजस्थान का पड़ोसी प्रांत है और वहां के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक कद बढ़ाकर भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति की दिशा निर्धारित कर ली है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा के दौरान अजमेर की सभा में राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता अरूण जेटली विधानसभा चुनाव में 150 सीटें जीतने का दावा जता चुके हैं। यात्रा के समापन पर 8 सितम्बर को जयपुर रैली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इस सभा को यादगार बनाने के लिए भाजपा अभी से जुट गई है। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में संभाग यात्रा को दो दिन विश्राम देकर माउंट आबू में चिंतन बैठक आयोजित की गई। इसमें यह तय किया गया कि राज्य में लगभग 46 हजार मतदान बूथों के हिसाब से हर बूथ से औसतन 10 से 15 कार्यकर्ता जुटाकर रैली में साढ़े चार लाख पार्टीजनों के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन किया जाए।

उधर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी गुरूदास कामत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान ने प्रदेश कार्यकारिणी तथा संभागवार बैठकों के माध्यम से 22 व 23 जुलाई को फीडबैक लिया है। इसके खट्टे मीठे और कड़वे अनुभवों का विश्लेषण किया जाना है। बहरहाल कामत चुनाव जीतने के लिए एकजुट होने का पाठ पढ़ाने में जुटे हैं।

 

गुलाब बत्रा

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