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मुस्लिम चेहरा कहां से लाएं?

नीतीश बाबू ने मुसलमान वोटों के नुकसान के डर से भाजपा को झटका तो दे दिया, लेकिन लालू प्रसाद के मुस्लिम प्रेम से टक्कर लेना इतना आसान थोड़े ही है? जनता दल यूनाइटेड में ऐसे चेहरों का टोटा है, जो पूरे बिहार में एक स्वीकार्य मुस्लिम नेता की जगह ले सके। ऐसा नहीं कि नीतीश कुमार को यह कमी नहीं खल रही। तभी तो उन्होंने राजद के सबसे प्रभावी मुस्लिम नाम और बिहार के वरिष्ठ राजनेता अब्दुल बारी सिद्दीकी को तोडऩे के लिए अपनी पार्टी के नेता काम पर लगा दिए। अब्दुल बारी साहब ने तो अब तक दिल की बात जाहिर की नहीं है, मगर इसी बीच खबर है कि जदयू के लोकसभा सांसद और नीतीश के करीबी मोनाजिर हसन लालू का दामन थामने को तैयार है। कहीं नीतीश कुमार छब्बे बनने के चक्कर में दुबे न बन जाएं।
मंत्री पॉकेटमार पर भारी
महाराष्ट्र के एक मंत्री का सतारा जिले में सम्मान किया गया। उस कार्यक्रम में एक पॉकेटमार भी मौजूद था। खादी के सफेद कपड़ों और गले में सोने की मोटी चेन पहने उस पॉकेटमार ने 8-10 लोगों की जेबों पर हाथ साफ कर दिया। सतर्क मंत्री ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और कार्यकर्ताओं के हवाले कर दिया। फिर क्या था, कार्यकर्ताओं ने उसकी जमकर पिटाई की और अंत में उसे पुलिस को सौंप दिया। यह खबर छपते ही सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। अनेक लोगों ने लिखा कि चोर को पता नहीं था कि जिस स्कूल में पढ़ा है, मंत्रीजी वहां के हेडमास्टर रह चुके हैं।
कनिष्क के हाथ में स्टियरिंग बरकरार
राहुल गांधी के करीबी कनिष्क सिंह को लेकर कुछ दिनों से जबरदस्त अटकलें चल रही थीं। कहा जा रहा था कि टीम राहुल में नए चेहरों को लेने के बाद कनिष्क की अब पहले जैसी अहमियत नहीं रह गई है। शायद इन अटकलों को विराम देने के मकसद से ही हाल में अमेठी के दौरे पर राहुल गांधी ने कनिष्क को खुद से अलग नहीं होने दिया। और तो और, जब वह क्षेत्र के दौरे पर निकले तो सबकी निगाहें उनकी गाड़ी पर जा टिकीं। उनकी एसयूवी में पीछे बैठे थे राहुल गांधी, गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और राज्यमंत्री आरपीएन सिंह। गाड़ी की स्टियरिंग संभाले हुए थे कनिष्क सिंह। अब इस दृश्य के बाद भी कोई न मानें तो हम क्या कह सकते हैं?
बदले-बदले से चिदंबरम नजर आते हैं
अपने मिजाज और तल्ख टिप्पणियों के चलते पत्रकारों में ईगो नेता की छवि रखने वाले पी चिदंबरम आजकल बदले-बदले से दिख रहे हैं। अब वह हर पत्रकार की बात का मुस्कुरा कर जवाब देने लगे हैं। और हां, नपा-तुला नहीं, पूरा विस्तार से। दिल्ली की एक अदालत में बटला मुठभेड़ पर फैसले के दिन तो उन्होंने सबको आश्चर्य चकित कर दिया। चिदंबरम ने बिना ना-नुकुर किए तमाम जूनियर से जूनियर रिपोर्टरों को लंबा टीवी इंटरव्यू दिया और आश्वस्त किया कि आगे भी उन्हें पूरा वक्त देंगे। राजनीतिक पंडितों का दावा है कि यह आने वाले आम चुनावों के बाद की स्थिति की तैयारी है।
एक कमांडो का सवाल है बाबा
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सांसद पी. एस. बाजवा अपनी विदेश यात्रा समाप्त कर मास्को से भारत लौटे रहे थे। उनके दिल्ली कार्यालय का एक कर्मचारी भी शिर्डी से साईंबाबा के दर्शन कर कर्नाटक एक्सप्रेस से उसी रात दिल्ली वापस लौट रहा था। रात में डिब्बे में शोर था कि बाजवा विदेश से आ रहे हैं और उन्हें हवाई अड्डे पर रिसीव करने के लिए कमांडो नहीं मिल रहा है। कर्मचारी अपने मोबाइल से दिल्ली में अपने तमाम संपर्कों से फोन पर जोर-जोर से बात कर एक कमांडो की व्यवस्था करने का जुगाड़ लगा रहा था। अंत में सीआईएसएफ के किसी बड़े अधिकारी से काफी जद्दोजहद करने के बाद एक कमांडो का जुगाड़ हो गया। कर्मचारी ने राहत की सांस ली और साथ ही डिब्बे में सफर करने वाले सभी यात्रियों ने मन ही मन उस सीआईएसएफ अधिकारी को धन्यवाद दिया, क्योंकि उसके बाद कम से कम वे शांति से सो सके।

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