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कच्चा केला

केला एक ऐसा फल है, जो पूरे भारत में सभी मौसम में मिलता है। लेकिन कच्चा केला, पके केले की अपेक्षा अधिक पौष्टिक और शक्तिशाली दवा माना जाता है। प्राचीन समय से आयुर्वेद में कच्चा केला का प्रयोग पेप्टिक अल्सर के इलाज के रुप में किया जाता रहा है। कच्चा केला को खाने से पहले पकाने की जरुरत होती है, ताकि इसे खाने में आसानी हो।

ताजा साक्ष्य यह प्रदर्शित करते हैं कि कच्चा केला के स्वास्थ्य संबंधी अनेक फायदे हैं। कच्चा केला में एक प्रकार का खाद्य तंतु होता है, जो वसा जलने की स्थिति में शरीर को संतुष्टि का एहसास दिलाता है। पोषण के लिहाज से कच्चा केला फाइबर, विटामिन, मिनरल और स्टार्च का बेहतरीन स्रोत है।

कच्चा केला के कुछ फायदे-
 कच्चा केला में विटामिन बी-6 की उच्च मात्रा होती है । एक कप उबाला हुआ कच्चा केला में, प्रतिदिन की जरुरत का 39 प्रतिशत बी-6 विटामिन होता है। बी-6, शरीर में 100 से ज्यादा होने वाले एंजाइमिक प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
 केला में पाए जाने वाला आयरन (लोहा) शरीर में हीमोग्लोबिन के उत्पादन को बढ़ाता है, जो अल्परक्तता (एनिमिया) के मरीजों के लिए लाभकारी होता है।
 केला याददाश्त बढ़ाने वाला टॉनिक के रुप में भी कार्य करता है।
 यह दिमाग को शांत करता है। साथ ही साथ दिनभर के तनाव, अवसाद और गर्मी से भी राहत देता है। हृदय के जलन को भी कम करने में मदद करता है।
 यह पथरी की समस्या से निजात दिलाने में भी सहायक होता है।
 कच्चा केला ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार होता है। डायबिटीज के मरीज, केला को कम कैलोरी कार्बोहाइड्रेड के खाद्य के रुप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस फल का फूल, अल्सर और डायबिटीज को खत्म करने में सहायक होते हैं।
 केले के पौधे की पत्ती का इस्तेमाल आयुर्वेदिक इलाज में रुप में भी किया जाता है। केले की ताजी पत्तियों को जले हुए स्थान पर लगाने से जलन को कम करता है।
 कच्चे केले में पोटाशियम की उच्च मात्रा होती है। एक कप उबाला हुआ कच्चा केला में 531 मिलीग्राम पोटैशियम की मात्रा होती है, रक्तचाप को नियंत्रति करने में सहायक होता है।
 कच्चा केला पुरूषों में होने वाले अपच और पेप्टिक अल्सर के लिए लाभकारी होता है।
 कम कार्बोहाइड्रेड इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति, चीनी की उच्च मात्रा होने के कारण केला खाने से परहेज करता है, लेकिन संतुलित मात्रा में कच्चे केले का इस्तेमाल लाभकारी होता है।
 कच्चा केले का काढ़ा गुर्दा संबंधी बिमारियों को दूर करने में सहायक होता है। इसके अलावा कच्चे केले की जड़ों का पाउडर आंत्र गति की बीमारी में लाभदायक होता है।
 कच्चे केले का रस, खून की उल्टी, दस्त और बवासीर के लिए रामबाण माना जाता है। एक गलास पानी में कच्चे केले के रस को मिलाकर उबालने के बाद 20 मिनट तक ठंडा होने दें। आधा कप उस अर्क का दिन में तीन से चार बार सेवन करने से लाभ मिलता है। उस मिश्रण में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से मूत्र संबंधी विकार दूर होते हैं।
 रस के साथ पाउडर लेने से कृमि संबंधी विकार भी दूर होते हैं।
 कच्चा केला विटामिन और खनिज का उच्च स्रोत है। पकाया हुआ एक कप कच्चा केला, रोजाना विटामिन ए और सी की 30 प्रतिशत जरूरत को पूरी करता है।
 कच्चा केला में शून्य प्रतिशत कोलेस्ट्रोल होता है। इसे तलने के बजाय तेल की कुछ मात्रा के साथ उसे काटना चाहिए।
 कच्चे केले का फूल, तना और पत्तियों का प्रयोग कई तरीके से किया जाता है। दक्षिण भारत में मेहमानों को केले की पत्ती पर खाना परोसने का रिवाज है। केले का पेड़ शुभ माना जाता है एवं त्योहारों और धार्मिक उत्सवों के दौरान इसका प्रयोग किया जाता है। केले के पौधे का तना और फूल भी खाने योग्य होते हैं और इनसे कई तरह के व्यंजन बनाये जाते है।

 

निभानपुदी सगुना

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