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चमत्कारी संख्या है 108 ज्योतिष में श्रेष्ठ

आचार्य आर.एस. पंवार ने भारतीय विद्या भवन से ज्योतिष ज्ञान प्राप्त कर समाज को उसके प्रकाश से रोशन करने का संकल्प किया। वह भारतीय विद्या भवन के ज्योतिष संस्थान में ज्योतिष ज्ञान के जिज्ञासुओं को इस प्राचीन विद्या की शिक्षा दे रहे हैं।

राशि चक्र (भचक्र) ऐसा रास्ता है, जिस पर सारे ग्रह विचरण करते हैं। इस पथ को 27 भागों में विभक्त किया गया है। जिन्हें अहोरात्र नक्षत्रों के नाम से जाना जाता है। हर अहोरात्र नक्षत्र के 4 पद हैं। भारतीय ऋषियों ने इन 27 नक्षत्रों को चार से गुणा कर, गुणनफल 108 की संख्या को जाप की माला के मनकों की संख्या निर्धारित की है।

ज्योतिष विज्ञान में 9 ग्रह और 12 राशियों को मान्य किया गया है। जब 9 ग्रह इन 12 राशियों से गुजरते हैं, तो वे 108 तरह के बड़े बदलाव ला सकते हैं। इन बदलावों से होने वाले नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए किसी भी मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। इसकी वजह से जाप करने वाले व्यक्ति को खुद में दिव्य ऊर्जा का अहसास होता है, जो इन नकारात्मक प्रभावों से बचाता है।

ज्योतिष शास्त्र में एक दिन और एक रात को मिलाकर एक अहोरात्र बनता है। स्वस्थ मनुष्य 24 घंटे में 21600 बार सांस लेता है। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक दिन में कम से कम एक बार 108 मनकों वाली माला जपने से ईश्वर का नाम जपता है, तो हर सांस को उद्देश्य मिल जाता है। जाप माला से पूरे नियमानुसार जपने से सकारात्मक परिणाम सौ गुणा ज्यादा मिलते हैं, जो आसुरी शक्तियों को दूर रखने में मदद करते है। 108 को 100 से गुणा करने पर 10,800 बनता है, जो अहोरात्र के दौरान लिए गए श्वास की कुल संख्या का आधा है। यह संख्या किसी भी मनुष्य के ईश्वर की साधना में लीन होने के लिए आवश्यक है।

दूसरी तरफ, दैव भाषा संस्कृत में 54 वर्ण होते हैं। प्रत्येक शब्द में नर-नारी का बोध है। जैसे – शिव-शक्ति। यह 108 का आधा है। शास्त्रों के अनुसार परमात्मा तक पहुंचने में आत्मा को 108 चरणों से होकर गुजरना पड़ता है।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में 108 मर्म हैं, जो किसी भी जीवित शरीर को स्वस्थ कर सकते हैं या मौत के मुंह में पहुंचा सकते हैं। जब किसी भी मंत्र को 108 बार पढ़ा जाता है तो यह हर मर्म के लिए कवच का काम करता है। 108 को जोडऩे पर योग 9 बनता है, जो नव ग्रहों में से एक, केतु से संबंधित हो जाता है। केतु को उच्चस्तरीय जागरुकता, दूरदृष्टि प्रदान करने और मोक्ष दिलाने वाला ग्रह माना जाता है। 9 अंक माता दुर्गा से भी जुड़ा है। दुर्गा सप्तशती में दुर्गा के नौ नाम हैं, इसलिए उन्हें नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवी दुर्गा ही शरीर में प्राणों की रक्षा करती हैं।

अंक शास्त्र के अनुसार 1 से लेकर 9 तक के हर मूलांक का अपना महत्व है। 1 से लेकर 9 तक के अंक नवग्रहों के प्रतीक हैं, तो शून्य को ब्रह्म का प्रतीक माना जाता है। 7 प्रकृति में व्याप्त संरचनाओं का प्रतीक है, तो 8 को संपूर्ण प्रकृति माना जाता है। भूमिरापोनलोवायु: रवं मनोबुद्धि रेव च। अहंकार इतीयं से भिन्नाप्रकृतिरष्टधा।। अर्थात, पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार, यह मेरी 8 प्रकार की प्रकृति है।

इसी तरह 108 की संख्या का भी अलग महत्व है। माना जाता है कि एक वर्ष में सूर्य 2,16,000 कलाएं बदलते है। सूर्य हर छह माह में उत्तरायण और दक्षिणायण रहते है। इस तरह हर छह महीने में सूर्य 1,08,000 कलाएं बदलते हैं। इसलिए 108 अंक को सूर्य की कलाओं का प्रतीक भी माना जाता है। संतों तथा महान् पुरूषों के नाम के पूर्व 108 अंक का भी प्रयोग किया जाता है। नाम के आगे 108 का प्रयोग दर्शाता है कि वह व्यक्ति प्रकृति, ईश्वर एवं ब्रह्म का प्रत्यक्ष या परोक्ष ज्ञान वाले हैं।

 

 

आचार्य आर.एस. पंवार

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