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सीमा पर हैं गंभीर चुनौतियां

आज पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। इस में चीन का पाकिस्तान का पूरा सहयोग और साथ मिल रहा है। भारत के दोनों बॉर्डर, जो चीन और पाकिस्तान से मिलते हैं, काफी संवेदनशील और सक्रिय हो गए हैं।

भारत पर इस समय दोनों सीमाओं पर संकट गहरा रहा है और चुनौतियां बढ़ रही हैं। आने वाले समय में चीन और पाकिस्तान, भारत के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई कर, जमीन हथियाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि भारत का मुगल दरबार के पास इच्छाशक्ति की कमी है। भारत सरकार खुद ही आंतरिक संकटों से घिरी है। ऐसे में उसके खिलाफ की गई किसी भी कार्रवाई का शक्तिशाली प्रतिरोध नहीं होगा। चौतरफा संकटों से घिरने के बावजूद भारत सरकार ने आर्मी को कोई खास उन्नत नहीं किया है, जिससे हमले को बर्दाश्त कर सके। इस देश के रक्षामंत्री ने पिछले 9 सालों से सेना के आधुनिकीकरण को रोका हुआ है, जबकि सुरक्षा चुनौतियां, दोनों सीमाओं पर कई गुणा बढ़ी हैं।

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री ने आज तक किसी भी हादसे, चाहे वे पाक द्वारा हों या चीन द्वारा, जवाबी कार्रवाई करने से इंकार कर दिया है। इससे चीन और पाकिस्तान, दोनों अच्छी तरह जान चुके हैं कि भारत को तोडऩे का यह सही समय है। जब तक दिल्ली में एक मजबूत नेतृत्व नहीं आएगा और अपनी सेना को सपोर्ट नहीं करेगा, भारतीय सेना का मनोबल दिन पर दिन गिरता जाएगा। आज सेना के अधिकारियों में गुस्सा है। कारण है कि इस सरकार ने उसके हाथ बांध रखे हैं। युद्ध छिडऩे की स्थिति में गिरे मनोबल के कारण भारतीय फौज जीतने की स्थिति में नहीं रहेगी। आज देश को इस मुद्दे पर गहराई से चिंतन और मंथन करने की जरूरत है।

अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ रही पश्चिमी फौजों की वापसी के बाद स्थिति और भी भयावह होने वाली है। अमेरिकी सेना की वापसी के बाद, जिहाद फैक्ट्री बेरोजगार हो चुकी है। अब तक उनका काम अमरीकी फौजों को अफगानिस्तान से खदेडऩा था, जो पूरा हो चुका है। अब उन्हें रोजगार देने के लिए पाकिस्तान उनका रूख भारत की ओर मोड़ रहा है, ताकि कश्मीर सहित भारत भर में आतंकवाद को फैलाया जा सके।

इसके दो पहलू हैं। अगर इन आतंकवादियों का रूख भारत की ओर नहीं मोड़ते हैं तो पाकिस्तान खुद टूटने के कगार पर आ जाएगा। दूसरा पहलू यह है कि अफगानिस्तान से अमरीकी फौजों को निकालना उनकी प्राथमिकता थी, ताकि कट्टर तालिबानियों को बैठाया जा सके और उसकी अहमियत बनाए रखी जा सके।

अगर पिछले चार-पांच महिने की डायरी उठाकर देखी जाए तो चीन ने भी भारत में घुसपैठ बढ़ा दी है। चीन ने भारतीय सीमा के 10 किलोमीटर अंदर तक घुसकर तंबू गाड़ दिए हैं। पाकिस्तान ने आज चीन के साथ मिलकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। इस में चीन का पाकिस्तान को पूरा सहयोग और साथ मिल रहा है। भारत के दोनों बॉर्डर, जो चीन और पाकिस्तान से मिलते हैं, काफी संवेदनशील और सक्रिय हो गए हैं। आने वाले समय में दोनों तरफ से दबाव बढ़ेगा, क्योंकि अमरीकी फौजें अफगानिस्तान को जल्दी ही छोड़ेंगी। पाकिस्तान और चीन ने

भारतीय क्षेत्रों पर अपने दावे ठोके हैं, इसलिए हर कीमत पर वे भारत पर अपना दबाव बढ़ाएंगे। पाकिस्तान एक कट्टरवादी देश है, जबकि चीन साम्यवादी। दोनों के कामों और मकसद में समानता है। इसलिए दोनों का गठबंधन मेल खाता है। दोनों ही भारत को तोड़कर, उसकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं।

लेकिन ऐसी परिस्थिति से जूझने के लिए भारत में बैठा मुगल दरबार, पूरी तरह नकाम और लकवाग्रस्त हो चुका है। जब भारत के दो जवानों का सिर काटा गया था, तब भी भारत की तरफ से कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। उल्टे पाकिस्तानी हुक्मरान को सरकार दावत दे रही थी। उसी तरह चीन भी 19 किलोमीटर तक भारत में घुस आया लेकिन कड़ा विरोध दर्ज कराने के बजाय, वहां के प्रधानमंत्री के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा था। यही मुगल दरबार की कमजोरी रही है। ऐसे में अमेरिका भी पाकिस्तान और चीन पर दबाव नहीं बनाएगा, क्योंकि अफगानिस्तान से निकलने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान की मदद की जरूरत है। अफगानिस्तान से वापसी के दौरान अमेरिकी सैनिकों, हथियारों, सुरक्षा सामग्रियों आदि से लदी हजारों गाडिय़ां कराची एयरपोर्ट के माध्यम से ही वापसी करेंगी। इसके लिए अमरीका पूरी तरह पाकिस्तानी फौज पर निर्भर रहेगा। अमेरिका अभी ऐसी स्थिति में नहीं है कि वो भारत का पक्ष ले सके, जिसके कारण पाकिस्तान और चीन के हौसले और भी बुलंद हो रहे हैं।

जब पुंछ सेक्टर में हमला हुआ, उसी समय फौज को कार्रवाई करनी चाहिए थी। हमारे सैनिकों को सिर काटने के समय जनरल वी. के. सिंह ने कहा था कि आगे से जो भी होगा, इस तरह की कार्रवाई का हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। लेकिन भारतीय सेना की तरफ से कोई मुंहतोड़ जवाब नहीं दिया गया। राजनेताओं ने आज भारतीय सेनाओं के हाथ बांध दिए हैं। रक्षामंत्री ने संसद में कहा कि यह पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किया गया हमला था। इससे यह प्रतीत होता है कि भारत सरकार में पाकिस्तानी हित की पैरोकारी करने वाले लोग बैठे हैं। रक्षामंत्री ने जो बयान दिया है, उसे पैनी नजर से अगर देखा जाए तो उसमें कोई तथ्य नहीं है। तथ्य इसलिए नहीं है, क्योंकि जब 21 बिहार रेजिमेंट के जवानों के ऊपर हमला हुआ, उस समय वहां युद्ध का वातावरण बना हुआ था। भारत का पेट्रोलिंग दस्ता उनकी जाल में फंस गया । इस दस्ते को खुद नहीं पता था कि वहां कितने पाकिस्तानी अंदर घुस आए हैं। क्योंकि युद्ध के वातावरण में लोगों की गिनती नहीं की जाती। देश को गुमराह करने के लिए यह बताया जा रहा है कि 21 बिहार रेजिमेंट के जो जवान बचकर वापस आए, उन्होंने ही बताया कि वे 20 लोग थे। कहा जा रहा है कि बचकर आए जवानों ने बताया कि उसमें पाकिस्तानी आर्मी के लोग भी थे। इसलिए रक्षामंत्री ए. के. एंटनी का बयान झूठा एवं बिना लॉजिक का है। जो आर्मी वहां मौजूद थी, उसे खुद नहीं पता था कि वहां कितने लोग थे। इसलिए दिल्ली में वोट बैंक के लिए अटकलें लगाई जा रही हैं, ताकि पाकिस्तान को राहत मिल सके और मनमोहन सिंह पाकिस्तान से वार्ता जारी रख सकें।

एक और अहम पहलू है इसमें। भारत के लोगों को समझना जरूरी है कि पाकिस्तानी सेना दो तरीकों से काम करती है। एक रेगुलर आर्मी है, जो वर्दी पहनती है और दूसरी आईएसआई के अंदर काम करने वाली बिना वर्दी की गुरिल्ला आर्मी या जेहादी आर्मी। ये जेहादी आर्मी भी पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण में है, जो छद्मयुद्ध के लिए इस्तेमाल की जाती है। पाकिस्तानी सेना सीमा पर चप्पे-चप्पे पर फैली हुई है, उनके आदेश के बिना भारत में एक भी घुसपैठ नहीं हो सकता। लेकिन भारत में वोटबैंक की राजनीति के कारण इन कुकृत्यों को नजरअंदाज किया जाता रहा है।

 

कैप्टन भरत वर्मा

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