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शहीदों की याद दिलाता अनूठा कलैण्डर

आजादी हर किसी को प्यारी होती है। हम तो वैसे भी स्वतंत्रता के संवाहक रहे हैं। चाहे वो धार्मिक स्वतंत्रता हो, आर्थिक हो, सामाजिक हो या राजनैतिक, बेडिय़ों की जकडऩ हमें कभी नहीं भाई। भारत ने 66 वर्ष पहले 300 साल पुरानी गुलामी की जंजीरों को तोड़ डाला था।

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के मीडिया सलाहकार शिव भाटिया के अनुसार—”भारत अपने समय के सबसे बड़े औपनिवेशिक साम्राज्य के सामने अपनी स्वतंत्रता खो दी थी, लेकिन भारतीयों ने अपनी हिम्मत और सपनों को नहीं खोया। अनगिनत कुर्बानियां देकर हमने आजादी को पाया है और आज हम एक स्वतंत्र गणराज्य में सांस ले रहे हैं। हम विश्व के सबसे बड़े ऐतिहासिक बदलाव की खुशबू को महसूस कर सकते हैं।”

आजादी की कीमत का भारतीयों के दिलों में अहसास जगाने के लिए शिव भाटिया ने कार्डों पर आजादी के इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को उकेर कर उसे पूरे साल के कलैंडर का रूप दे दिया है। उन्होंने उदय इंडिया को बताया कि ”मैं सोचा करता था कि हमारे दिलों में बहती देशभक्ति की धारा यदि हमारी आंखों के समक्ष भी रहे, तो हम आजादी की कीमत को भूल नहीं सकेंगे। आजादी के दीवानों की मूर्ति हमें सदा याद दिलाती रहेगी कि स्वतंत्रता के लिए हमने कितनी कुर्बानियां दी हैं। इसके लिए मुझे यही रास्ता सबसे उपयुक्त लगा कि काम करने की मेज पर इतिहास के क्षणों को उकेरे कार्ड नजरों के सामने रहें। मैंने 2013 का ऐसा ही कलैंडर बनाया और हर कार्ड पर मैंने आजादी के लिए इतिहास रचने वाले शहीदों से जुड़े क्षणों को जीवित करने की कोशिश की। अब इसी तर्ज पर कॉफी टेबल बनाने की तैयारी चल रही है।”

शिव भाटिया ने अपने इस अनोखे और देशभक्ति से सराबोर कैलेंडर को देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में रहने वालों को भी स्वतन्त्रता दिवस का यह नायाब तोहफा भेजा है, जिससे वे विदेश में रह कर देश की आजादी के शहीदों को न भूल जाएं।

शिव भाटिया ने अपने इस अनूठे कलैंडर के 16 कार्डों पर आजादी की पूरी गाथा को उकेरा है। मेज पर गत्ते के स्टैंड में रखे कैलेंडर के कार्डों पर महीनेवार तिथि के चित्रों को इस ढंग से बनाया है कि देखने वाला आजादी की लड़ाई के उन पलों में खो जाता है, जिसने आज हमें स्वतन्त्रता से सांस लेने का मौका दिया है। शिव भाटिया के ये कार्ड देखने वाले को अहसास दिलाते हैं कि देश की आजादी के लिए हमने क्या कीमत दी है।

आइए एक नजर इन कार्डों पर डालें:
जनवरी 2013—इस कार्ड पर 1757 में अंग्रेजों और सिराज-उद-दौला के बीच हुई प्लासी की लड़ाई को दिखाया गया है। सिराज-उद-दौला को यदि उसके विश्वस्त मीर जाफर ने धोखा नहीं दिया होता तो देश की आजादी संभवत: 1757 में ही मिल जाती।

फरवरी 2013—इसमें भारतीय इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी महत्वपूर्ण घटना 1789 के मैसूर के नवाब टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के बीच हुए युद्ध का जिक्र किया गया है। इस युद्ध में पहली बार टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ तोप का इस्तेमाल किया था। वीर योद्धा और शेर दिल टीपू सुुल्तान से अंग्रेज थर्र-थर्र कांपते थे। उन्होंने अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेजों से युद्ध किया।

मार्च 2013—अंग्रेजों के बढ़ते वर्चस्व को लेकर 1857 में पहला विद्रोह हुआ। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और मंगल पांडे ने इस विद्रोह में सशक्त भूमिका निभाई।

मई 2013—रोंगटे खड़े कर देने वाले जलियांवाला बाग नरसंहार को दिखाया गया है। 13 अपै्रल 1919 को जनरल डायर के नेतृत्व में निहत्थे लोगों पर चारों तरफ से गोलियां बरसाईं गईं थी।

जून 2013—इस कार्ड में साइमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय के विद्रोही तेवर को दिखते हैं। 1927 के इस विद्रोह में लाला लाजपत राय ने कहा था कि ”मेरे शरीर का प्रयेत्क घाव, अंग्रेजी ताबूत में कील साबित होगा।”

जुलाई 2013—महात्मा गांधी द्वारा 1930 में किए गए दांडी मार्च को इस कार्ड में देखा जा सकता है। महात्मा गांधी के इस अहिंसक अभियान को भारतीयों का अपार समर्थन मिला था।

अगस्त 2013—‘दिल से निकलेगी ना, मर कर भी उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आएगी।Ó इसी अंतिम वाक्य के साथ वीर क्रांतिकारी भगत सिंह, 1931 में फांसी की तख्ती पर झूल गए थे। इस कार्ड में भगत सिंह के बचपन से लेकर जवानी तक के चित्रों को दर्शाया गया है।

सितंबर 2013—जाति आधारित चुनाव प्रणाली लागू करने वाले संविधान के विरोध में महात्मा गांधी ने 1932 में आमरण अनशन शुरू किया था। महात्मा गांधी ने सिद्ध कर दिया था कि सच्चाई की जीत होती है, और अहिंसा द्वारा ताकतवर प्रतिद्वंद्वी को भी जीता जा सकता है।

अक्टूबर 2013—भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान विशाल जनसमर्थन का अंदाजा इस चित्र के माध्यम से लगाया जा सकता है। 1942 में अंग्रेजों से तुरंत आजादी देने की मांग को लेकर महात्मा गांधी ने भारतीयों को ‘करो या मरोÓ का नारा दिया था।

नवंबर 2013—आजादी के शंखनाद में नेताजी की भूमिका को दिखाया गया है। नेताजी ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिंद फौज की स्थापना किया। उन्होंने नारा दिया कि ”तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।”

दिसंबर 2013—इस में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरु और सरदार बल्लभभाई पटेल

को गुफ्तगू करते दिखाया गया है। 1946 में अंतरिम सरकार के गठन के दौरान इन नेताओं ने भारत के भविष्य पर चर्चा की थी।

जनवरी 2014—भारतीय इतिहास का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दिनों में एक, जब 1947 में आजादी के कुछ दिन पूर्व भारत और पाकिस्तान के लाखों लोग अपना घर-संपत्ति छोड़कर भारत और पाकिस्तान में जाने को विवश हुए।

फरवरी 2014—1947 का वह दृश्य जब आजादी के जश्न में लाखों लोगों की मौजूदगी में इंडिया गेट पर पं. जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

मार्च 2014—आजाद भारत का पहला दिन, 15 अगस्त 1947। इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लाल किले की प्राचीर से देश की जनता को संबोधित करते हुए दिखाया गया है।

प्रस्तुति: उदय इंडिया

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