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भारत में आतंक : पाकिस्तान सिर्फ झूठ ही बोलता है

भारतीय और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास इस बात का पूरा ब्योरा है कि किस तरह भारत और अमेरिका विरोधी साहित्य छापा और बांटा जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक युवाओं, बच्चों और महिलाओं को जिहाद से जोडऩे के लिए जिहादी साहित्य को ऊर्दू सहित तीन अन्य स्थानीय भाषाओं में छापा जाता है। इस साहित्य के वितरण के लिए प्रांतए जिला और कस्बा स्तर तक दफ्तर खोले गए हैं। हाफिज सईद के लोग खुद अपनी निगरानी में वितरण कराते हैं।

पाकिस्तान का एक और झूठ, सच बनकर दुनिया के सामने आया है। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विशेष दूत शहरयार खान ने यह साबित कर दिया है। शहरयार ने कहा कि दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान से भगा दिया गया है जबकि भारत का दुश्मन नंबर-एक, पाकिस्तान में ही रह रहा था। हालांकि शहरयार का झूठ, झूठ ही है। दाऊद इब्राहिम पहले भी पाकिस्तान में था और आज भी पाकिस्तान में ही है। खुद इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी यह नहीं मान रहे हैं कि दाऊद पाक छोड़कर कहीं चला गया है। उन्हें पता है कि वह आईएसआई के संरक्षण में है, और आराम से अपना कारोबार चला रहा है। यह बात भी उजागर हो चुकी है कि दाऊद अवैध कारोबार में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पार्टनर है। इसी वजह से वह उसकी पूरी हिफाजत करती है।

दरअसल वास्तविकता यह है कि भारत में आतंक फैलाने का कारोबार पाकिस्तान से चल रहा है। इस्लामाबाद और कराची इसके हेड-क्वार्टर हैं। पाकिस्तानी दूतावासों के जरिए नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका में ब्रांच ऑफिस खोले गए हैं। अगर नजर फैलाकर देखें तो साफ हो जाएगा कि भारत का हर पड़ोसी देश पाकिस्तान की शह पर, उसके (भारत) खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल होने दे रहा है।

भारत की खुफिया एजेंसी के पास इस बात के ढ़ेरों प्रमाण है कि किस तरह पाकिस्तान पड़ोसी देशों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। किस प्रकार वह इस्लामी आतंकवाद की आड़ लेकर इस्लाम को मानने वालों को अपने साथ खड़ा करने में सफल रहा है।

जहां तक दाऊद का सवाल है, यह सब जानते हैं कि मुम्बई से भागने के बाद उसे पाकिस्तान में ही पनाह मिली। अब उसका कारोबार पूरी दुनिया में फैल चुका है। पाकिस्तान में रिश्तेदारियां भी हो गयी हैं। जमीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तान की कोई भी सरकार कुछ भी बोले, पर आईएसआई दाऊद को कभी भी पाक के बाहर नहीं जाने देगी। क्योंकि दाऊद न केवल भारत के खिलाफ उसके अभियान में हर तरह की मदद करता है, बल्कि ड्रग्स और हथियारों के अवैध कारोबार के जरिए उसे पैसा कमाकर भी देता है। दाऊद का पाक से रिश्ता उसकी मौत के बाद ही खत्म होगा।

मुम्बई और दिल्ली की पुलिस अपनी फाइलें मजबूत करती रहें और खुफिया एजेंसियां सारे सबूत दुनिया को दिखा दें, तो भी पाकिस्तान यह मानने वाला नहीं है। इसका उदाहरण भी है। दुनिया भर में आतंक खत्म करने का दंभ भरने वाले अमरीका को भी पाक दाऊद के मुद्दे पर झूठ ही बोलता रहा है। यही नहीं, जिस आतंकी हाफिज सईद पर अमेरिका ने करोड़ों का इनाम घोषित किया हुआ है, वह खुलेआम पाकिस्तान में घूमता है। अमेरिका और भारत के खिलाफ जहर उगलता है। कौमी एकता के नाम पर पूरी दुनिया के मुसलमानों को भड़काता है। 9 अगस्त को गुजरी र्ईद के दिन पूरी दुनिया ने हाफिज सईद को देखा। लेकिन पाकिस्तान की सरकार उसे नहीं देख पायी।

उल्लेखनीय है कि हाफिज सईद के संगठन जमात-उल-दावा ने करीब डेढ़ साल पहले जिहाद के लिए सभी इस्लामी आतंकी संगठनों को एकजुट करने की मुहिम शुरू की थी। यह जिहाद मुख्य रूप से भारत और अफगानिस्तान में आतंक का मुकाबला कर रहे अमेरिका के खिलाफ है। इसके लिए हाफिज सईद ने पाकिस्तान की सुरक्षा की आड़ ली थी। चरमपंथी संगठनों को एक करने के लिए जो नया संगठन है उसका नाम है – दिफा-ए-इस्लाम, जमीयत उलेमा और लश्कर-ए-झांगवी के अलावा आईएसआई के पूर्व प्रमुख जनरल हमीद गुल, पूर्व राष्ट्रपति रशीद और पूर्व सैनिक तानाशाह जिया उल हक का बेटा एजाजुल हक भी शामिल है।

इस काउंसिल में अहम भूमिका हाफिज सईद के संगठन जमात-उल-दावा की ही है। वही हर मुहिम की अगुवाई कर रहा है। हाफिज फिलहाल सार्वजनिक रूप से इस काउंसिल की आड़ में अपनी आतंकी गतिविधियां चला रहा है।

जहां तक भारत का सवाल है, उसके खिलाफ तो हाफिज खुलेआम मुहिम चला रहा है। पिछले 6 महीनों से उसने लगातार भारत के खिलाफ स्थानीय लोगों को उकसाया है। उसके अपने हथियारबंद दस्ते हैं। इन्हीं दस्तों के जरिए वह सीमा पर हमले करवाता रहा है। पाकिस्तान की फौज उसकी खुलेआम मदद कर रही थी, और आज भी कर रही है।

पाकिस्तान के सरकारी प्रेस में भारत के नकली नोट तो छापे ही जाते हैं, साथ ही भारत विरोधी और जेहादी साहित्य भी खुलेआम छापा और बांटा जा रहा है। पाकिस्तान के सभी प्रमुख शहरों में भारत के खिलाफ साहित्य खुलेआम बिकता है। आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद पर कहने को प्रतिबंध है, लेकिन उसकी पत्रिका ‘शरीयत’ पाकिस्तान में खुलेआम मिलती है।

भारतीय और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास इस बात का पूरा ब्योरा है कि किस तरह भारत और अमेरिका विरोधी साहित्य छापा और बांटा जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक युवाओं, बच्चों और महिलाओं को जिहाद से जोडऩे के लिए जिहादी साहित्य को ऊर्दू सहित तीन अन्य स्थानीय भाषाओं में छापा जाता है। इस साहित्य के वितरण के लिए प्रांत, जिला और कस्बा स्तर तक दफ्तर खोले गए हैं। हाफिज सईद के लोग खुद अपनी निगरानी में वितरण कराते हैं।

इसके अलावा जुमे (शुक्रवार) के दिन पाकिस्तान के हर प्रमुख शहर की मस्जिदों में जिहादी अखबार बांटे जाते हैं। मुफ्त में बांटे जाने वाले इन अखबारों की लाखों प्रतियां मस्जिदों तक पहुंचाई जाती हैं। बिना प्रशासन की मदद के क्या यह संभव है? इन प्रकाशनों की कोई कीमत नहीं मांगी जाती, बल्कि इनके एवज में जिहाद के लिए चंदा मांगा जाता है।

इन अखबारों और पत्रिकाओं के प्रकाशक जानते हैं कि वे गैरकानूनी काम कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि हमारा मूल मकसद लोगों को जिहाद की ओर खींचना है। उनका यह भी मानना है कि जिहाद का 70 फीसदी प्रचार इन्हीं प्रकाशनों के जरिए होता है। इसलिए यह उनकी लड़ाई के अहम हथियार हैं।

सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सरकार की सहमति के बिना यह संभव है? या फिर सरकार सिर्फ दिखाने को है। असली सरकार तो हाफिज सईद जैसे आतंकी सरगना चला रहे हैं।

इससे भी आगे बढ़कर आतंकी सरगना खुलेआम आतंकी मेले भी लगाते रहते हैं। कराची जैसे बड़े शहरों में हर साल जिहादी मेले लगते हैं। और तो और, पाकिस्तान के राष्ट्रपिता मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर भी ऐसे मेले लगते हैं। खुद हाफिज सईद इन मेलों में शिरकत करता रहा है।

इन मेलों में भारत में चल रहे आतंकी गतिविधियों में लश्कर-ए-तैय्यबा की कारगुजारियों को शान के साथ पेश किया जाता है। फिदाईन ट्रेनिंग और भारत विरोधी तरानों की सीडी और एमपी-3 इन मेलों में खुलेआम 30-30 रूपये में बिकते हैं। यही नहीं मोबाईल फोन पर जिहादी तराने और आयतें पैसे लेकर लोड की जाती हैं। मेलों में सभी आतंकी संगठनों के स्टॉल लगते हैं। इन स्टॉलों पर इन संगठनों से जुड़ी हर जानकारी उपलब्ध होती है। क्या पाकिस्तान सरकार की नजर इन पर नहीं पड़ती।

हाफिज सईद भारत के खिलाफ कोई मौका नहीं चूकता। मुरीदके में उसका मुख्यालय भारत विरोधी मुहिम का मुख्य कार्यालय है। वह भारत के खिलाफ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है।

गत 16-17 जून को जमात-उल-दावा ने इस्लामाबाद के मदरसा मरकज-अल-कुबा में जिहाद के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर एक कार्यशाला आयोजित की थी। इस कार्यशाला का विषय था – ‘प्रोडक्टिव यूज ऑफ कम्प्यूटर एण्ड सोशल मीडिया फॉर जिहाद एण्ड दावा।’

इससे पहले उसने म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में 15 जून 2013 को खुलेआम बयान देकर भारत को धमकी दी थी। बोधगया के बौद्ध मंदिर में हुए विस्फोट भी इसी धमकी का परिणाम माने गए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी आज तक इन विस्फोटों की तह तक नहीं पहुंच पायी है।

सीमा पर पिछले कुछ महीनों में जो हमले या अन्य घटनाएं हुई हैं, उनके पीछे हाफिज सईद का ही दिमाग माना जाता रहा है। खुफिया सूत्रों की मानें तो हाफिज के पास अपने सशस्त्र लड़ाकों की संख्या हजारों में हैं। कराची और इस्लामाबाद में दावा के जुलूसों में ये लड़ाके खुलेआम हथियारों के साथ शामिल होते रहे हैं।

कहा यह भी जा रहा है कि सीमा सेना के संरक्षण में जमात के कार्यकर्ता सशस्त्र संपर्क के जरिए बड़ी संख्या में जमे हुए हैं। पाक सेना की मदद से वे न केवल भारत में घुसपैठ कर रहे हैं, बल्कि सेना और सीमा सुरक्षाबल के जवानों पर हमले भी कर रहे हैं। अब तो हाफिज ने दिल्ली पर ही हमले का ऐलान कर दिया है।

भारत की जांच एजेंसी और खुफिया एजेंसियों को यह अच्छी तरह मालूम है कि देश के हर प्रमुख शहर में हाफिज सईद की विचारधारा को समर्थन देने वाले लोग मौजूद हैं। भारत में खड़े किए गए आतंकी संगठन जमात की मदद के लिए तैयार हैं। सरकार में इच्छाशक्ति की कमी होने के कारण ये एजेंसियां हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं ।

इन हालात में पाकिस्तान से कोई उम्मीद करना बेकार है। जो कदम हमारी सरकार को उठाने चाहिएं, वह नहीं उठा रही है। जब अमेरिका घर में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है, तो भारत खुलेआम सड़कों पर घूम रहे हाफिज सईद को खत्म क्यों नहीं कर सकता? क्या सरकार यह नहीं समझना चाहती कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते? बिना मारे न तो हाफिज सईद मानेगा और न ही तो आईएसआई। अगर मार नहीं सकते तो फिर इसी तरह मार खाते रहिए।

ब्लॉग
पाकिस्तान ने भारतीय जवानों पर हमला किया: संसद ने यूपीए सरकार पर
पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक गंभीर त्रासदी घटी, जिसने इस सरकार की प्रतिष्ठा को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है, विशेष रूप से रक्षा मंत्री ए.के. एंटोनी द्वारा त्रासदी के दिन गड़बड़ करने से।

मैं कहना चाहूंगा कि यदि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पर घात लगाकर हमारे पांच जवानों को मार गिराया, तो एंटोनी के वक्तव्य से व्यथित भारतीय संसद ने रक्षा मंत्री पर हमला कर उन्हें अपने पहले दिन के अस्पष्ट वक्तव्य को वापस लेने पर बाध्य किया और उसके स्थान पर दूसरा वक्तव्य आया जो पाकिस्तान के विरुद्ध राष्ट्रीय आक्रोश को पूरी तरह से प्रकट करता है।

संसद में रक्षा मंत्री के वक्तव्य के बारे में चौंका देने वाली यह बात कि उन्होंने इस घटना के बारे में सेना द्वारा जारी किए अधिकारिक बयान में जानबूझर बदलाव किए। बदलाव पाक सरकार और पाक सेना को इस हमले की जिम्मेदारी से बचाने के लिए किए गए।

सेना के बयान में बदले गए अंश का उदाहरण:
पीआईबी (रक्षा विभाग) का प्रेस वक्तव्य कहता है: ‘हमला पाक सेना के जवानों के साथ लगभग 20 भारी हथियारबंद आतंकवादियों द्वारा किया गया।’ रक्षा मंत्री एंटोनी ने कहा: ‘हमला 20 भारी हथियारबंद आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहले लोगों से साथ मिलकर किया।’

संसद का वर्तमान सत्र शुरु होने से पूर्व ही प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के हवाले से मीडिया में प्रकाशित हुआ था कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ वार्ता करने वाले हैं और वह भी 26/11 के मुंबई के आतंकवादी हमलों के अपराधियों को भारत को सौंपे जाने की शर्त को भुलाकर। इसलिए संसद को एंटोनी के 8 अगस्त के संशोधित वक्तव्य में यह देखकर प्रसन्नता हुई कि ‘पाकिस्तान की आतंकवादियों के नेटवर्क संगठन और ढांचे को नेस्तानाबूद करने में निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए और नवम्बर, 2008 में मुंबई पर आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने में संतोषजनक कदम उठाने चाहिए ताकि शीघ्र न्याय हो सके।

घटनास्थल पर सेनाध्यक्ष के दौरे और रक्षा मंत्री को पूरे तथ्यों की जानकारी देने के बाद संसद में मंत्री के संशोधित संस्करण में पाकिस्तान को निम्न शब्दों में चेतावनी दी गई

‘निश्चित तौर पर इस घटना का पाकिस्तान के साथ हमारे सम्बन्धों और नियंत्रण रेखा पर हमारे व्यवहार पर असर पड़ेगा। हमारे संयम को कमजोरी नहीं समझना चाहिए और हमारी सशस्त्र सेना की क्षमता को तथा हमारे इस दृढ़ निश्चय को कि हम नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं होने देंगे, कम करके नहीं आंका जाना चाहिए था।’

 अरूण रघुनाथ

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