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अपराध की वजह कांग्रेस नहीं…

अखिल भारतीय राजीव गांधी सेना के दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता राजीव शर्मा से उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता सुधीर गहलोत की बातचीत के प्रमुख अंश :

अखिल भारतीय राजीव गांधी सेना का मुख्य काम क्या है?
इसकी स्थापना 1967 में राजीव गांधी ने की थी। संघ और विश्व हिंदू परिषद की तर्ज पर कांग्रेस की सांगठनिक कार्यों का काम अखिल भारतीय राजीव गांधी सेना करती है। यह कांग्रेस की ‘कोर कमिटीÓ की एक शाखा है। मुख्य रुप से इसका काम कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जगाकर रखना है। कांग्रेस की स्थिति के साथ-साथ कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों की स्थिति का जायजा लेना भी इसका उत्तरदायित्व है।

लगातार पिछले 15 वर्षों से कांग्रेस दिल्ली में सत्ता में है, फिर भी देश की राजधानी में अपराध का ग्राफ दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। ऐसा क्यों ?
जो भी पार्टी सत्ता में होती है, उसे राज्य से लेकर देश-दुनिया पर ध्यान देना होता है। अपराध कांग्रेस की वजह से नहीं बढ़ रहे हैं। जहां भाजपा सत्ता में है, वहां कांग्रेस और जहां कांग्रेस सत्ता में है, वहां उसे भाजपा बदनाम करती है। हां, कुछ असामाजिक तत्व हैं, जो अपनी कारस्तानियों से बाज नहीं आते। कुछ लोग अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए अपराध करने से भी बाज नहीं आते। इसमें किसी नेता या अफसर का कोई दोष नहीं होता।

दिल्ली में बिजली की कीमतों में साल में दो बार इजाफा किया गया है, जबकि दिल्ली में बिजली का निजीकरण इस आधार पर किया गया था कि इससे सुधार होगा, कहां कमी रह गई?
देखिए… जनसंख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। दिल्ली पर भी लोगों का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली की मांग तो बढ़ेगी ही। अब जबकि उत्पादन सीमित है और मांग बढ़ेगी तो कीमतों में बढ़ोत्तरी तो होगी ही। कई गुना खपत बढऩे से उत्पादन की लागत में वृद्धि हो रही है। झोपड़ पट्टियों में हम निश्चित दर पर बिजली दे रहे हैं। ऐसे में कंपनियां घाटे को कम करने के लिए बिजली की दर में बढ़ोत्तरी कर कर रही हैं। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। कीमतों में वृद्धि का निर्णय सरकार का नहीं होता। लेकिन शीला दीक्षित की सरकार ने कंपनी पर कीमतों मंट वृद्धि करने पर पाबंदी लगाने की बात कही है। इस पर दिसंबर तक निर्णय ले लिया जाएगा।

आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर तो शीला दीक्षित यह निर्णय नहीं ले रही हैं?
नहीं, बिजली की दर को कम करना चुनावी मुद्दा नहीं है। माना की शीला दीक्षित ने कुछ गलत बयान दिए हैं । जैसे कि जिन्हें कम दाम देना है, वे बिजली की खपत कम करें। इस पर काफी सियासी बवाल हुआ भी था। लेकिन यह मुद्दा ऐसा नहीं है।

देश में महंगाई एक बड़ी समस्या बन गई है। ऐसे में दिल्ली में रहने वाले निचले तबके विशेष रुप से प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए दिल्ली सरकार क्या कर रही है?
15 साल पहले मुश्किल से ही किसी के जेब में 500 रुपये का नोट मिलता था। आज झोपड़ी में रहने वाला व्यक्ति 10 हजार की गड्डी लेकर घूमता है। पहले जिस सरकारी विभाग में 10 हजार महीने का वेतन होता था, वहां आज 40 हजार रुपये मिल रहा है। देखिए, यह सब रुपये की कीमतों में गिरावट का प्रभाव है। इस पर नियंत्रण करने की दिल्ली सरकार सहित केन्द्र सरकार भी लगातार कोशिश कर रही है।

केन्द्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार होते हुए दिल्ली के नगर निगम के चुनाव भाजपा जीत गई, ऐसा क्यो?
हम लोगों की भावनाओं की कद्र करते हैं। जनता जो सोचती है, वो करती है। निगम पार्षद चुनाव में कांग्रेस की सक्र्रियता नहीं रहती है। राहुल गांधी और कैबिनेट स्तर के मंत्री इसमें दिलचस्पी नहीं लेते। यह पूरी तरह क्षेत्रीय मामला होता है। भाजपा ज्यादा सक्रिय रहती है, इसलिए यह सीटें उसे मिल जाती हैं।

कहीं यह आगामी विधानसभा चुनाव की झांकी तो नहीं है?
नहीं… नहीं… ऐसी बात नहीं है। जो करता है, वही बदनाम भी होता है। काम करने वालों से ही गलती होती है। इस बार भी दिल्ली और केन्द्र में कांग्रेस की ही सरकार आएगी। इसमें कोई शंका नहीं है।

शीला दीक्षित को लेकर अरविंद केजरीवाल काफी आक्रामक हैं। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के वोट बैंक पर कितना असर डालेगी?
राजनीति में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। अरविंद केजरीवाल वही कर रहे हैं। उनके आक्रामक रुख से हमारे वोट बैंक पर कोई प्रभाव नहीं पडऩे वाला है।

अगर अगली बार दिल्ली में कांग्रेस सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा?
इस बात का खुलासा अभी नहीं हुआ है। अब शीलाजी वरिष्ठ हो गई हैं, इसलिए उनका नाम केन्द्र के लिए आ सकता है। वैसे मुख्यमंत्री के कई दावेदार हैं। अगर मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी में असंतोष उत्पन्न होता है तो शीला दीक्षित को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

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