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हम आज भी अपने मूल मुद्दों पर कायम हैं : नितिन गडकरी

किश्तवाड़ हिंसा वोट बैंक की राजनीति का परिणाम है। देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरुरी है। उदय इंडिया के संपादक दीपक कुमार रथ से बात करते हुए भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह बात कही। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:

अभी कोयला घोटाले से संबंधित फाईलें गायब हो गईं हैं, क्या कहना है आपका?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज देश की आर्थिक हालत बहुत खराब हो चुकी है। इसका कारण सरकार ने 2जी स्पेक्ट्रम, कोलगेट में जो निर्यण लिया, उसमें पारदर्शिता नहीं थी। अगर निविदा के माध्यम से यह होता तो, आज यह मुसीबत नहीं आती। पहले आओ पहले पाओ जैसे पुराने सिद्धांत की वजह से 2जी में 1 लाख 76 करोड़ रुपये का घोटाला, कोयला आवंटन में 1 लाख 85 हजार का घोटाला हुआ और कॉमनवेल्थ गेम में 36 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। यह सब घोटाले सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक अक्षमता का नतीजा है। आज भ्रष्टाचार, गलत आर्थिक नीतियां, अक्षम नेतृत्व, दूरदर्शिता की कमी आदि कई समस्याएं हैं। इसलिए आज ऐसी स्थिति हो गई है कि कोई फाईलें चुरा रहा है, सीबीआई अपनी राज रही है, कोर्ट अपना राज चला रहा है। परिणाम यह हुआ कि हमारे देश की आर्थिक स्थिति बदतर हो गई। इस कारण हमारे उद्योग बंद पड़े हैं। देश में तीन सूची है राज्य, केन्द्र और कंकरेंट। जो केन्द्र के विषय हैं, उसमें केन्द्र सरकार यानि मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की जिम्मेदारी है। पावर सेक्टर 2 लाख 60 हजार करोड़ का उद्योग है, उसका पूरा सत्यानाश हो गया है। केन्द्र के अंतर्गत आने वाला खनन क्षेत्र आज 20 बिलियन यूएस डॉलर का कोयला आयात करता है, जबकि हमारे पास एशिया का सबसे बड़ा कोयला भंडार है। हमारी माइंस बंद पड़ी हैं। अगर खनन की स्वीकृति मंत्रालय देता है, तो सीबीआई रोक देती है। सीबीआई स्वीकृति देती है तो कोर्ट रोक देता है। कोर्ट स्वीकृति देता है तो पर्यावरण मंत्रालय रोक देता है। ऐसा ही चल रहा है, हमारे यहां। हमारे यहां 14-15 सोने की खदानें हैं, जहां से हम सोना नहीं निकाल पा रहे हैं। कनाडियन, ऑस्ट्रेलियन तकनीक लाकर सोना निकालते तो सोना आयात करने की स्थिति नहीं आती। 200 बिलियन डॉलर हम खर्च कच्चे तेल के आयात पर। जबकि हमारे यहां तकरीबन 350 ऐसी जगहें हैं, जहां से हम प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल निकाल सकते हैं। मणिपुर, आसाम सहित कई जगहों पर खनन की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ नहीं हो पा रही है। जिसके कारण हमें आयात करना पड़ रहा है। आयात और निर्यात में जो 350 बिलियन यूएस डॉलर का अंतर है, उसे हम आराम से कम कर सकते थे। उसके कारण हमारा रुपये भी मजबूत होता। आज एक डॉलर के मुकाबले रुपया 65 पर अटका हुआ है। अब लोग मजाक उड़ा रहे हैं कि एक डॉलर 65 रुपये का, एक बीयर की बोतल 70 रुपये की, एक किलो प्याज 70 रुपये का हो गया है तो धीरे-धीरे प्रेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर, प्याज 100 रुपये किलो, एक डॉलर 100 रुपये होकर शतक मारेंगे। कहां जा रहा है देश? हम ऐसे अमीर देश हैं, जहां की जनसंख्या गरीब है। और इस सबमें सरकार ने घपला किया है। मुझे लगता है कि इस सरकार को हटाकर नयी सरकार लाए बिना देश की समस्या को नहीं सुलझाया जा सकता।

महंगाई मुद्दा नहीं बन पा रही है। विपक्ष इसे मुद्दा बनाने में कहीं न कहीं असफल रहा है…?
ये कोई मुद्दा नहीं बनता है। जिसको अंगार लगता है, वही चिल्लाता है। जो घर में गृहिणी हैं, गरीब लोग हैं, जो 70 रुपये किलो प्याज खरीद रहे हैं, उनकी आंखों से आंसू आ रहा है। यह जो महंगाई का मामला है, इसे गरीब भुगत रहे हैं। आसमान पर पहुंची महंगाई का परिणाम तो कांग्रेस को भुगतना ही पड़ेगा। सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, यूपीए सरकार और कांग्रेस के प्रति लोगों के मन में जो असंतोष है, उसका परिणाम कांग्रेस निश्चित रुप से भुगतेगी।

हरियाणा में एक भूमि घोटाले में रॉबर्ट वाड्रा के नाम पर काफी बवाल हुआ था लेकिन भाजपा कहीं न कहीं इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने में अक्षम रही। इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?
नहीं… नहीं…. प्रमुखता से उठा रहे हैं। एक समय में 50 विषय हैं लेकिन हमें सिर्फ तीन दिन मिलते हैं, तो समय पर एक विषय उठाते हैं तो दूसरा शुरू हो जाता है, दूसरा उठाते हैं कि तीसरा शुरू हो जाता है। अब मुझे लगता है कि स्वभाविक रुप से उस विषय पर जितना फॉलोअप होना चाहिए था, वो नहीं हो पाया। लेकिन जनता की अदालत में यह लड़ाई हम लड़ेंगे, विषयों को उठाएंगे और पूर्णता के साथ उठाएंगे।

आप रॉबर्ट वाड्रा के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
सारे तथ्य जनता के सामने है।

भाजपा का इस पर क्या रुख है?
भाजपा इन सब बातों को लेकर निश्चित रुप से जनता के बीच जाएगी। इन सब पर कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए, यह हमारी मांग है और इसको लेकर हम जनता के बीच आंदोलन करेंगे।

लेकिन भाजपा ने अब तक तो कोई आंदोलन नहीं किया। लोग अब भाजपा को चूका हुआ कारतूस बताने लगे हैं। अखबारों में भी ऐसा ही आ रहा है। ऐसा क्यों?
अखबारों में रोज सुर्खियां बदलती हैं। अगर मैं कहूं कि अगले दस दिनों तक एक ही सुर्खी रहे तो यह संभव नहीं है। इन्होंने इतने गड्ढ़े कर रखे हैं कि एक विषय शुरू करो तो दूसरा विषय शुरू हो जाता है। सब विषयों को उठाने की जल्दबाजी में कभी-कभी किसी विषय का फॉलोअप नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से गलतफहमी हो जाती है। पर इन सब विषयों पर भाजपा जनता के बीच जाएगी।

आप कहते हैं कि सरकार हर मोर्चे पर विफल है, लेकिन देश की प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते भाजपा भी कोई अपना नेता अभी तक देश के सामने नहीं खड़ा कर पाई है। जनता में इससे क्या संदेश जाएगा?
देखिए, भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यह मां-बेटा, पिता-पुत्र या वन-मैन आर्मी जैसी कोई पार्टी नहीं है। स्वभाविक रुप से इस पार्टी में सामूहिक नेतृत्व है। मेरा मानना है कि इस मामले में जल्द से जल्द निर्णय हो जाएगा और फिर जनता के सामने भी साफ हो जाएगा। क्या कांग्रेस बता सकती है कि प्रधानमंत्री का उसका अगला उम्मीदवार कौन होगा? क्या आप बता सकते हैं कि मनमोहन सिंह अगली बार प्रधानमंत्री बनेंगे कांग्रेस की तरफ से? उचित समय में उचित निर्णय होता है। मीडिया की यही समस्या है कि वो चाहती है कि आज ही सब कुछ साफ कर दे। हम मीडिया के हिसाब से अपना एजेंडा जाहिर करें क्या?

जिस तरह से नरेन्द्र मोदी को चुनाव प्रचार अभियान का अध्यक्ष बनाया गया, उससे लोगों में यही संदेश गया कि मोदी भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के स्वभाविक उम्मीदवार हैं। ऐसे में भाजपा साफ क्यों नहीं करती है?
उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रुप में काम शुरू किया है और निश्चित रुप से उनका नाम राष्ट्रीय नेता के रुप में सबके सामने है। रही बात प्रधानमंत्री पद की घोषणा की तो पार्टी उचित समय पर उसकी घोषणा करेगी।

क्या यह सही है कि मुरली मनोहर जोशी और आप जैसे वरिष्ठ नेता, एक मुख्यमंत्री के नीचे काम करेंगे और उन्हें रिपोर्ट करेंगे?
यह गलत बात है। यह आपके मन की बात हो सकती है। हमसे कोई रिपोर्ट मांगता नहीं और हम किसी को रिपोर्ट करते नहीं। भाजपा में ना कोई बड़ा है और न कोई छोटा।

घोषणा-पत्र समिति के अध्यक्ष होने के नाते, अंतिम रिपोर्ट आप मोदी को ही सौंपेगे…….
नहीं। बिल्कुल नहीं। किसने कही यह बात आपसे। हम किसी को रिपोर्ट नहीं देने वाले। हम पार्टी की संसदीय बोर्ड के सामने अपनी रिपोर्ट रखेंगे। बेबुनियाद बात फैलाकर, कारण नहीं होने के बावजूद मीडिया में गलत चर्चा शुरू कर दिया जाता है। पहली बात, हम सब कार्यकर्ता हैं। छोटा-बड़ा कुछ नहीं। हम सभी पार्टी के लिए काम करते हैं। मैं आपको एक और बात बता देना चाहता हूं कि जो विचारों के संस्कार हमें मिलें हैं, उसमें महत्वपूर्ण विषय यह नहीं है कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, मंत्री कौन होगा, किसकी सरकार बनेगी, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि देश की सुरक्षा कैसे होगी। देश आज दीवालिया होने के कगार पर खड़ा है। फिर से सोना गिरवी रखना पड़ेगा, ऐसी स्थिति हो गई है। विदेशी निवेश आना बंद हो गया है। एक डॉलर की कीमत 65 रुपये हो गया है। खनन क्षेत्र का सत्यानाश हो गया है। आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की हालत खराब हो चुकी है। चीन हमारी सीमा में घुस गया है, पाकिस्तान लगातार खुराफातें कर रहा है। देश भर में नक्सली आतंक मचा रहे हैं। पाकिस्तान तीन बार लड़ाई हारने के बावजूद, आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर छद्मयुद्ध शुरू कर दिया है। आज देश में आतंकवादी घुम रहे हैं। अनेक शहरों में आतंकवादियों के अड्डे बन चुके हैं। ऐसी स्थिति में सवाल यह नहीं है कि देश का प्रधानमंत्री कौन बने, मंत्री कौन बने, बल्कि देश को कैसे बचाया जाय, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है।

आडवाणी ने कई बार कहा है कि शिवराज सिंह चौहान बड़े नेता हैं और उन्होंने भी अपने राज्य में बहुत काम किया है …..
मुझे लगता है कि बहुत सी बातों का गलत मतलब निकालने का काम मीडिया करती है। आडवाणीजी का बयान मैंने अच्छे से सुना है। टीवी पर भी सुना है और उसकी कैसेट भी सुनी है। आडवाणी जी के कथन के पीछे जिस तरह की भावना व्यक्त की जा रही है, वैसा नहीं है। आडवाणीजी ने मोदीजी की भी तारीफ की है और उन्हें विश्वास है कि उनमें एक प्रभावी नेतृत्व करने की क्षमता है। मैं बार-बार यह आपको बता रहा हूं कि यह मीडिया द्वारा संचालित एजेंडा है। आप क्या चाहते हैं कि आपके अनुसार हम निर्णय करें? भारतीय जनता पार्टी में नहीं होने पर भी विवाद लगा देना, एक दूसरे के खिलाफ कर देना, हमारे मुंह में शब्द डाल देना, इस तरह की बातें मीडिया के कुछ लोग करते हैं।

जब आपको पार्टी अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था, उस समय भी यही मामला उठा था कि मीडिया का एजेंडा भाजपा खुद चला रही है?
देखिए…. पिछले 6 महीने में अभी तक मेरे खिलाफ न कोई नोटिस है न कुछ है। न किसी से कुछ लेना है, न कुछ देना है। न मैं किसी कंपनी में निदेशक था और ना ही किसी कुछ था। जहां रेड मारे गए, जहां सर्वे किए गए वहां भी न रिकॉर्ड मिला, न कुछ हुआ। दुर्भाग्यवश ऐसी स्थिति है कि मीडिया वस्तुस्थिति और सत्य का विचार नहीं करती है।

क्या आप भी मीडिया से पीडि़त हैं?
यह कोई भी हो सकता है। आखिर 24 घंटे चलाने के लिए कुछ न कुछ तो चाहिए ही। यह सचाई है कि मेरे खिलाफ कुछ नहीं है। अगर मैं आपसे पूछूं कि मैंने कौन सा भ्रष्टाचार किया है तो आप क्या जवाब दे सकते हैं। मैं मीडिया वालों से पूछता हूं कि मैंने क्या गलत किया, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं है। जहां तक मेरा संबंध है, 12 हजार शेयरहोल्डर हैं, किसी को मेरे नाम पर दिखा दो, कौन क्या कह पाएगा। सुनने के मूड में कोई रहता नहीं है। इससे क्या होगा कि जो आदमी ईमानदारी से काम कर रहा है, उसको इस प्रकार से ध्वस्त कर देंगे तो मुझे लगता है कि कोई काम करने वाला रहेगा ही नहीं।

आप और डॉ. जोशी घोषणा-पत्र समिति के प्रमुख हैं। 2014 के लिए पार्टी के क्या-क्या प्रमुख मुद्दे रहेंगे?
अभी तो हम अध्ययन कर रहे हैं। राज्यों से सूचना मांगा रहे हैं और उचित समय पर जाहिर भी करेंगे। जाहिर करने से पहले उसे पार्टी के पार्टी के समक्ष पेश करेंगे और उसे सबके सलाह से अंतिम रुप देकर ही घोषित किया जाएगा।

ऐसा लग रहा है कि भाजपा अपने मूल मुद्दों पर सक्रियता नहीं है। क्या अब भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी?
देखिए दो चीजें हैं। आप दोनों बाजू से डफली बजाते हैं। जब हम सकारात्मक बात करते हैं तो आप कहते हैं कि सरकार के अलावा इतने विषय हैं, आप उसे उठाते क्यों नहीं। उन विषयों को उठाकर हम नकारात्मक बातें सामने लाते हैं तो आप कहते हैं कि आप निगेटिव बोल रहे हैं, पोजिटिव क्यों नहीं बोलते। पूरी मीडिया द्वारा जो डफली बजाने का काम होता है, उससे समस्या होती है। मुझे लगता है कि हम केवल इस सरकार की गलतियां गिनाकर और चुनकर आना नहीं चाहते। हम आज भी सुशासन को कसौटी मानते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार की जीडीपी, ग्रोथ रेट, एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट, हैपी ह्यूमन इंडेक्स, प्रति व्यक्ति आय देखिए और आज की स्थिति देखिए। केन्द्र सरकार के अंतर्गत जितने विभाग आते हैं, उनकी स्थिति बुरी है। एविएशन सेक्टर में – एयरपोर्ट आज बेच दिया, एयर इंडिया घाटे में चल रही है, किंगफिशर बंद हो गया। दूरसंचार में 2जी स्पेक्ट्रम का घोटाला हुआ और सत्यानाश कर दिया गया पूरी इंडस्ट्री का। पावर सेक्टर में 2 लाख 60 हजार करोड़ का घोटाला कर पूरे पावर सेक्टर को खत्म कर दिया। माइनिंग सेक्टर- सब माइनिंग बंद कर दी। आप कोई भी सेक्टर केन्द्र सरकार का निकालिए, सब जगह सत्यानाश कर दिया गया। यह सरकार भारत की भाग्य विधाता नहीं बन सकती। यह सरकार हिंदुस्तान की करोड़ों जनता की आशा, अकांक्षा और अपेक्षा की प्रतीक नहीं बन सकती। इस सरकार को चिंता सिर्फ अपने परिवार की है। जो मुखिया है, उन्हें अपने परिवार की चिंता है। ये परिवार के आधार पर जो नेतृत्व आया हुआ है, वह देश का कभी भी कल्याण नहीं कर सकता। आज देश का भविष्य बदलने की ताकत किसी पार्टी में है तो भारतीय जनता पार्टी में है, जो देश के लिए काम रही है, समाज के लिए काम कर रही है और गरीब के लिए काम कर रही है। हम देश की तस्वीर को बदलेंगे।

भाजपा हमेशा खुद को ‘ए पार्टी विद डिफरेंस’ कहती आयी है। चाल, चरित्र और चेहरा उसकी महत्ता है। लेकिन अभी भाजपा के चाल और चरित्र में अंतर आ गया है। ऐसा क्यों?
कोई भी नेता आसमान से नहीं टपकता। पत्रकार हो, नेता हो, ये सब इसी समाज से आते हैं। समाज में ही दोष होगा तो प्रमाण में दोष आएगा ही। एक वाइस चांसलर का भी एक मत है और एक पान-ठेला वाले का भी एक मत है। समाज में जब लोगों की संख्या बढ़ेंगी तो कहीं न कहीं दोष आते हैं। दोषों को कम करना और गुणों को बढ़ाना है। गरीब को केन्द्र बिंदु मानकर इनके लिए सामाजिक और आर्थिक विकास का काम करना चाहिए। यह भारतीय जनता पार्टी का विचार है और इसके लिए लगातार हम कोशिश कर रहे हैं। हमारी राज्य सरकारों ने इतना अच्छा काम करके भी दिखाया है।

जो हिंसा पहले कश्मीर में होती थी, वो किश्तवाड़ होते हुए पूरे जम्मू में फैल गयी। क्या आपको नहीं लगता कि अब अनुच्छेद 370 को हटाया जाना चाहिए?
हटाया जाना चाहिए, लेकिन उसके लिए हमारे पास जनसमर्थन नहीं है। इस देश में वोट बैंक की राजनीति के कारण और सेकुलरवाद का गलत अर्थ इस्तेमाल कर रहे हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सेकुलर शब्द का मतलब है पंथनिरपेक्षता और सर्वधर्म समभाव, धर्मनिरपेक्षता अर्थ नहीं है शब्दकोश में। राजा सेकुलर चाहिए। धर्मनिरपेक्ष पुलिस चाहिए, आर्मी चाहिए, मीडिया चाहिए, न्यायपालिका चाहिए, लेकिन एक व्यक्ति कभी धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता। धर्म का अर्थ जो विवेकानंद ने बताया है, सुप्रीम कोर्ट ने बताया है, उसका अर्थ कर्तव्य से जुड़ा है। जैसे आप पत्रकार हैं। आप कहते हैं कि मैं पत्रकार के धर्म का पालन कर रहा हूं, इसका मतलब आप पूजा कर रहे हैं पत्रकार का? धर्म का अर्थ है कर्तव्य का पालन करना। यह जीवन जीने का तरीका है। दुर्भाग्यवश गलत अर्थ लगाकर, देश में जातिवाद और सांप्रदायिकता का जहर घोल कर, देश में वोट बैंक की राजनीति कांग्रेस पार्टी करना चाहती है। दुर्भाग्य तो ऐसा है कि बटला हाउस केस में जब कोर्ट के निर्णय देने के बाद भी कांग्रेस के नेता कहते हैं कि यह फेक एनकाउंटर है। क्या देश में वोट बैंक की राजनीति के लिए आतंकवादियों के तुष्टीकरण का राजनीति किया जाएगा? क्या आतंकवादियों को सपोर्ट किया जाएगा और देशभक्तों को फांसी पर चढ़ाया जाएगा, पुलिस अधिकारी जो आतंकवादियों से लड़ते हैं, उन्हें जेल में भेजा जाएगा? क्या राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस हद तक राजनीति करेंगे? मुझे लगता है कि देश आर्थिक दृष्टि से, सुरक्षा की दृष्टि से, सभी दृष्टि से आज चिंतनीय स्थिति में आ गया है। हमें देश को बचाना है, देश के भविष्य को बचाना है और देश को सुखी, संपन्न, समृद्ध और शक्तिशाली बनाना है। भय, भुख, आतंक और भ्रष्टाचार से मुक्त भारत बनाना है। यही भारतीय जनता पार्टी का सपना है। देश को दुनिया में 21वीं सदी की सबसे बड़ी ताकत बनाना चाहते हैं। हम उसके लिए प्रयासरत रहें, कार्यरत रहें, यही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता से अपेक्षा है।

जम्मू-कश्मीर की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है, उसका क्या समाधान है? भाजपा को देश के सामने तो बोलना होगा कि 370 को हटाना जरुरी है…
हम कल भी थे और आज भी 370 हटाने के समर्थक हैं। प्रश्न यह है कि इसके लिए संविधान संशोधन करने के लिए जो बहुमत चाहिए, वो राजनीतिक पार्टियों में नहीं है। जमीनी हकीकत क्या है?

चुनाव से पहले आप देश की जनता को यह बात बताना क्यों नहीं चाहते?
भारतीय जनता पार्टी समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 370 इन सब पर कायम है। हमने अपने किसी विचार को छोड़ा नहीं है। पर एनडीए में अन्य पार्टियां हमारे विचार के मानेंगी, तभी हम उसे लागू कर सकते हैं। आज हमारी बहुमत नहीं है। जिस दिन हमें बहुमत मिलेगा, उस दिन हम अपनी बातों को लागू करेंगे।

2014 में नरेन्द्र मोदी का भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने की कितनी संभावना है?
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि इस विषय पर किसी से चर्चा नहीं की जानी चाहिए। मैं उनकी आदेशों का पालन करुंगा। हमारी पार्टी उचित समय पर उचित निर्णय करेगी।

अमेरिका मोदी को वीजा नहीं दे रहा है, इस बात को पार्टी हमेशा क्यों उठा रही है?
आप लोग इसे उठाते हैं। आप लोगों को 24 घंटे न्यूज चलानी है। हम कहां उठा रहे हैं।

अमेरिका में राजनाथ सिंह ने मुद्दा उठाया कि मोदी को वीजा मिलना चाहिए। ऐसा क्यों?
क्या नरेन्द्र मोदी कोई नक्सलवादी हैं? क्या नरेन्द्र मोदी कोई आतंकवादी हैं? नरेन्द्र मोदी कोई आईएसआई का एजेंट हैं? एक देशभक्त नागरिक हैं। विकास मॉडल विकसित करने वाले मुख्यमंत्री हैं। देश के लिए काम करते हैं। संघ के प्रचारक के तौर पर देश के लिए अपने जीवन को न्योछावर किया। क्या उन्होंने गलत किया? सिर्फ इस आधार पर उन्हें वीजा नहीं मिलनी चाहिए? अगर उनके साथ अन्याय हुआ है तो हमें अपने बात रखने का अधिकार तो है ही।

वीसा नहीं मिलने से क्या परेशानी है? यह इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना हुआ है?
कोई परेशानी नहीं है। अगर अमेरिका ने अन्याय किया है तो क्या अपनी बात रखने का हमारा अधिकार नहीं है? हमने सिर्फ अपनी बात रखी है। क्या मोदी जी के नक्सिलयों से लिंक हैं? क्या उनका आतंकवादियों से लिंक है? मोदीजी ने क्या हिंसाचार किया है? मुझे कोई बताए। गुजरात से ज्यादा दंगे तो महाराष्ट्र में हुए हैं। लेकिन वहां के मुख्यमंत्री के बारे में तो कोई कुछ नहीं कहता। वोट बैंक राजनीति के लिए भाजपा, संघ और नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने के लिए एकतरफा प्रचार चलता रहता है। क्या हमें उसका जवाब नहीं देना चाहिए?

अटल जी ने भी मोदी को राजधर्म पालने करने के लिए कहा था और अभी कुछ दिन पहले ही प्रवीण तोगडिय़ा ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति करने लगे हैं मोदी?
अब तोगडिय़ा ने क्या कहा, आप उन्हीं से पूछ लिजिए। लोकतंत्र है तो लोग अपनी प्रतिक्रिया देंगे ही।

दिल्ली में विजय गोयल को लेकर जो विवाद चल रहा है, उसके बारे में क्या कहेंगे आप?
कोई विवाद नहीं है। सामूहिक रुप से सभी काम कर रहे हैं। कांग्रेस के खिलाफ जो असंतोष है, उसे जनता के बीच ले जाएंगे और चुनाव जितेंगे। हमारा 14 साल का वनवास खत्म हो चुका है।

दिल्ली में भी किसी तरह की चुनाव समिति के गठन करने की संभावना है?
जल्दी ही चुनाव समिति और कोर कमिटी का गठन होगा जो साथ मिलकर काम करेंगे।

दिल्ली में भाजपा का मुख्यमंत्री काउम्मीदवार कौन होगा?
संसदीय दल की बैठक में इस बात पर फैसला लिया जाएगा।

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