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व्यक्ति पूजा का महत्व

आदमी देव पूजा, पत्थर पूजा, पेड़ पूजा, नदी पूजा और पर्वत पूजा करे या न करे, उसे दो पूजाएं जरूर करनी पड़ती हैं। इनमें एक तो है पेट पूजा और दूसरी है व्यक्ति पूजा। पेट पूजा का तो इतना महात्मय बताया गया है कि उसके बिना भजन भी नहीं हो सकता। भूखे भजन न होय गोपाला, यह रखी तेरी कंठी-माला। इसलिए कलिकाल में भारत जैसे धर्म-परायण देश में यह जरूरी हो गया है कि पेट पूजा जैसे आवश्यक कार्य की पूर्ति के लिए आदमी नियमित व्यक्ति पूजा करे। यूं तो ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में कोई भी जीव किसी जीव की पूजा नहीं करता, लेकिन मनुष्य-योनि में आकर उसे मनुष्य की पूजा करनी पड़ती है। इसे ही कलियुगी पुराणों में व्यक्ति पूजा कहा गया है। जिस तरह से संतोषी माता की पूजा करने से संतोष मिलता है या लक्ष्मी की पूजा करने से वैभव मिलता है, उसी तरह व्यक्ति पूजा करने का भी तत्काल फल मिलता है। वैसे तो भारतीय जीवन के सभी क्षेत्रों में व्यक्ति पूजा की महिमा गायी जाती है, लेकिन राजनीति के क्षेत्र में तो इस पूजा के फलितार्थ का कोई सानी नहीं है। इधर पूजा, उधर फल। आदमी में कोई गुण हो या न हो, बस एक व्यक्ति पूजा का गुण हो तो उसका ही नहीं, उसकी सात पीढिय़ों का जीवन तर सकता है। आदमी पर चोरी-डकैती का आरोप हो, अपहरण और फिरौती वसूलने का आरोप हो, छेड़छाड़ या बलात्कार का आरोप हो तो भी व्यक्ति पूजा करने वाले को राजनीति में आने और आगे बढऩे से कोई माई का लाल रोक नहीं सकता। व्यक्ति पूजा करके आदमी की समाज में साख बनती है, इसलिए पूजनीय व्यक्ति का चुनाव समझदारी से करना पड़ता है। इसलिए आप आए दिन सुनते हैं कि अमुक जी, जो पहले आडवाणी जी के भक्त थे, अब मोदी जी के भक्त बन गए हैं। वे दिन रात उनकी पूजा करते हैं और उनकी महिमा का बखान करते रहते हैं। उनके रोम-रोम से उनकी आवाज निकलती है। किसी पुराने कवि ने लिखा था :
मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरी सोय।

जा तन की झाई परै, श्याम हरित दुति होय।।
मोदी की पूजा का प्रताप यह देखा गया है कि पूजा करने वाला भी छोटा-मोटा मोदी बनकर मोदीमय हो जाता है। यही नहीं, मतदाता तक मोदीत्व प्राप्त कर मोदीमय हो जाते हैं। चुनाव में खड़ा तो एक मोदी होता है, लेकिन हराना लाखों और करोड़ों मोदियों को पड़ता है। सिर्फ एक पूजा मात्र से व्यक्ति में मोदी के गुण अवतरित हो जाते हैं और वे रोजमर्रा के व्यवहार में इस तरह झड़ते रहते हैं जैसे पौधों से पुष्प झरते हैं। अहा कैसा चमत्कार होता है। कुछ ऐसे मूरख भी हैं जो सोनियाओं, मायावतियों, जयललिताओं, ममताओं और सुषमाओं आदि देवियों की पूजा करते हैं, लेकिन वे नहीं जानते कि मोदी इन सभी देवी-देवताओं के गुरू हैं। उनके स्मरण मात्र से ये सब देवी-देवता उसी तरह गायब हो जाते हैं – जस तारा परभात। यानी जिस तरह से प्रभात को देख कर तारे अदृश्य हो जाते हैं। उसी तरह मोदी का नाम लेने भर से इन सभी पूजनीयों की स्मृति हमारे मस्तिष्क से गायब हो जाती है। इसलिए भारत में कलिकाल में राजनीतिकर्मियों के लिए मोदी पूजा का महत्व बताया गया है। इस पूजा की विधि बहुत सरल है। पूजा करने वाला चाहे नहाए या न नहाए, धवल वस्त्र धारण करे या न करे, उसका अंत:करण शुद्ध हो या न हो, वह कहीं भी, कभी भी और किसी भी तरह मोदी पूजा कर सकता है। न कोई पत्र-पुष्प, न कोई धूप-दीप और न कोई अनुष्ठान। आपने देखा होगा कि आजकल क्या सुषमा, क्या जेटली, क्या राजनाथ, क्या यशवंत, क्या मुरली मनोहर और क्या वेंकैया, सभी दिन रात मोदी का गुणगान कर रहे हैं। 24 घंटे का मंत्र जाप। इस दल ने कभी व्यक्ति पूजा को महत्व नहीं दिया बल्कि व्यक्ति पूजा के लिए यह दल कांग्रेस के नेताओं की आलोचना किया करता था, लेकिन इस कलिकाल का असर देखिए कि आज पूरी पार्टी ने व्यक्ति पूजा की महिमा पहचान ली है। यह भारत के असली सत्य की पहचान है। इसी तरह सभी देशवासियों को भी इस सत्य को पहचान लेना चाहिए और वे चाहे जिस देश में हों, जिस वेष में हों, किसी भी विचार या संस्कार के हों, हर पल मोदी-मोदी शब्दों का उन्हें उच्चारण करना चाहिए। ज्यादा नहीं तो कम से कम अगले चुनावों तक। उसके बाद देश की धर्मप्राण जनता पूजा के लिए किसी नए व्यक्ति की खोज कर लेगी।

 

मधुसूदन आनंद

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