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राजस्थान : चुनावी मैराथन का आखरी पड़ाव

चौदहवीं राजस्थान विधानसभा के गठन के लिए सत्तारूढ़ दल कांग्रेस तथा प्रमुख प्रतिपक्ष भारतीय जनता पार्टी की मैराथन दौड़ अब आखरी पड़ाव की ओर अग्रसर है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की प्रतीक्षा में राजनीतिक दल इस साल नवम्बर के अंतिम सप्ताह और दिसम्बर के प्रथम सप्ताह में संभावित चुनाव के लिए अपने लंगर लगोट कसने के साथ चुनावी चौखट पर अपनी बिसात बिछाने में मशगूल है। इस बीच चुनावी सर्वे और मीडिया की रिपोर्टों से प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। चुनाव के लिए संभावित प्रत्याशियों की खोज में कांग्रेस नेता जयपुर-दिल्ली के बीच दौड़ लगा रहे हैं, वही भाजपा धौलपुर में इसके अनुष्ठान में जुट गई है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में लगातार सत्ता की दूसरी पारी जीतने को आतुर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा नेता श्रीमती वसुन्धरा राजे की तर्ज पर पहली बार राजनीतिक रथ यात्रा के रूप में संदेश यात्रा (30 मार्च) के मामले में बढ़त ली थी। लेकिन यह यात्रा सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पायी और अब इसकी उम्मीद भी दिखाई नहीं देती। वहीं भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे ने 4 अप्रैल से संभागवार सुराज संकल्प यात्रा की शुरूआत कर जयपुर जिले को छोड़ 181 विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं तथा स्वागत कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं से मुखातिब होने का लक्ष्य पूरा किया। इस यात्रा के समापन के रूप में अब पार्टी जयपुर में 10 सितम्बर की विशाल रैली ‘सुराज संकल्प सम्मेलन’ को सफल बनाने में जुटी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी रैली को सम्बोधित करेंगे।

सत्तारूढ़ कांग्रेस दल ने विधानसभा चुनाव के संभावित प्रत्याशियों के चयन के लिए भी पहल की थी। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर पर्यवेक्षकों एवं वरिष्ठ नेताओं के जरिए सर्वे करके फीडबैक लिया गया और यह सिलसिला अभी भी जारी है। पिछले दिनों निगम एवं बोर्डों में हुई राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले 22 नेताओं को लोकसभा क्षेत्रानुसार सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जनवरी माह में जयपुर में कांग्रेस की चिंतन बैठक के बाद कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने राहुल गांधी ने चुनावी अभियान को गति देते हुए जमीनी हकीकत से वाकिफ ब्लॉक और जिला कांग्रेस कमेटियों से विचार विमर्श की प्रक्रिया में विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों का पैनल बनाने सम्बन्धी निर्देश दिए थे। हर ब्लॉक से 5-5 उम्मीदवारों के पैनल बनाए जाने थे। लेकिन इन निर्देशों की प्राय: अवेहलना ही की गई। प्रदेश में करीब 400 ब्लॉक कमेटियां हैं जिन्हें पैनल के साथ सभी आवेदन जिला कमेटियों को भिजवाने थे। इसी तरह जिला कमेटियों को कार्यकारिणी में विचार विमर्श कर 5 संभावित प्रत्याशियों का पैनल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भिजवाने के निर्देश थे। लेकिन कहीं बैठकों में हंगामा हुआ तो कहीं आम राय नहीं बन पाई तो ब्लॉक या जिला स्तर पर प्राप्त सभी आवेदन प्रदेश कांग्रेस को भिजवाने का तय किया गया। स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर में एक लाइन के प्रस्ताव में प्रत्याशी चुनाव का दायित्व गहलोत पर छोड़ा गया। प्रदेश कांगेस कमेटी को 200 सीटों के लिए ए.आई.सी.सी. द्वारा निर्धारित प्रपत्र में 6,000 से अधिक आवेदन मिले हैं, जिनमें लगभग 700 आवेदन सीधे प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों की विधानसभा क्षेत्रानुसार छटाई की गई है।

इधर कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन के लिए गाइडलाइन तय नहीं हो पाने तथा नये फॉर्मूले को लेकर भी असमंजस के हालात बने हुए हैं। प्रदेश चुनाव समिति भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी है। संभावित गाइडलाइन पर आखरी फैसला भी केन्द्रीय चुनाव समिति पर छोड़ा गया है। वहीं कांग्रेसी फॉर्मूले के तहत प्रस्तावित मापदंडों में पिछले चुनाव में 30 फीसदी से कम वोट और 20,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित होने अथवा लगातार दो चुनाव हारने वालों को उम्मीदवार नहीं बनाने की बात की गई है। इसकी चपेट में साढ़े पांच दर्जन से अधिक राजनेता शामिल हैं, जिनमें स्वयं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान, पूर्व मंत्री हरेन्द्र मिर्धा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ए.ए.खान, पूर्व मंत्री भरोसी लाल जाटव सहित आधा दर्जन विधायक भी सम्मिलित हैं। हालांकि पूर्व केन्द्रीय मंत्री और अब कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी इस फॉर्मूले को खारिज करते हुए यह कह चुके हैं कि पिछली बार 30 हजार वोट से हारने वाला बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में 40 हजार मतों से जीत भी सकता है। स्वयं जोशीनाथ द्वारा विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक वोट से हारे थे और बाद में भीलवाड़ा संसदीय क्षेत्र से जीत कर केन्द्रीय मंत्री बने।

उधर भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया तथा जयपुर में 10 सितम्बर को प्रस्तावित रैली की सफलता सहित पार्टी संगठन की मजबूती के लिए धौलपुर में डेरा डाला है। पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व धौलपुर राजघराने की बहू वसुन्धरा राजे ने इसी नगर से विधानसभा का चुनाव जीत कर अपना राजनीतिक सफर आरम्भ किया था। अगला चुनाव हारने के बाद वह झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुई। भाजपा के दिग्गज नेता स्व. भैरोसिंह शेखावत ने दिल्ली जाने पर वसुन्धरा को राजस्थान की भाजपा राजनीति की कमान सौंपी और उन्होंने 2003 में परिवर्तन यात्रा के जरिए स्पष्ट बहुमत जुटाकर राज्य में भाजपा की पहली सरकार गठित की।

धौलपुर 22 अगस्त से भाजपा की चुनावी राजनीति का केन्द्र बन गया है। शाही महल की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में जिलावार समीक्षा बैठकें आयोजित की गई है, इनमें जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी, मण्डल अध्यक्ष व महामंत्री वर्तमान प्रधान जिला प्रमुख, विधायक संासद नगर पालिका अध्यक्ष, इसी श्रेणी के सभी पूर्व जन प्रतिनिधि पार्टी मोर्चों के अध्यक्ष महामंत्री प्रदेश पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य पूर्व जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी. सतीश, राष्ट्रीय सचिव सांसद भूपेन्द्र यादव, पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों से फीडबैक ले रहे हैं। सुराज संकल्प यात्रा की तैयारियों में जुटने वाले जिला एवं संभाग प्रभारी भी इन बैठकों में उपस्थित हो रहे हैं।

सबसे अहम बात यह है कि हर जिले के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि जिस विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं, वहां वरीयता क्रम से 3 संभावित प्रत्याशियों का पैनल भी दे रहे हैं। इसे गोपनीय मतदान की संज्ञा भी दी जा रही है। लेकिन फीडबैक लेने वाले एक वरिष्ठ नेता के अनुसार संभावित प्रत्याशियों के बारे में जमीनी हकीकत से जुड़े पार्टी कार्यकर्ताओं की राय जानने सहित विभिन्न तरीकों की प्रक्रिया का यह एक हिस्सा है। प्रस्तावित पैनल ही अंतिम नहीं होगा प्रदेश स्तर पर 15-20 वरिष्ठ सहयोगियों की वर्किंग टीम के आपसी विचार-विमर्श विभिन्न सूत्रों के सर्वे से प्राप्त फीडबैक तथा पार्टी संसदीय बोर्ड की अनुमति के बाद ही प्रत्याशियों का चयन होगा।

अलबत्ता इन समीक्षा बैठकों के माध्यम से जयपुर रैली को सफल एवं प्रभावी बनाने के उपायों पर विशेष बल दिया गया है। हर जिले में प्राथमिक एवं सक्रिय सदस्यता सम्मलेन, विधानसभा सम्मेलन, बूथ सम्मेलन, नुक्कड़ सभाओं का आयोजन, धन संग्रह अभियान की तिथि एवं लक्ष्य तथा बूथ स्तर पर 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती मनाने से संबंधित जानकारी भी एकत्रित की जा रही है। धन संग्रह सप्ताह के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 25 लाख रूपये एकत्रित करने को कहा गया है।

प्रत्याशी चयन की इस कवायद में भाजपा नेतृत्व नेे सुराज संकल्प यात्रा के दौरान विश्वस्त नेताओं के माध्यम से पार्टी के जीते और हारे प्रत्याशियों तथा नए दावेदारों के बारे में जानकारी एकत्रित की। इसी तरह संकल्प यात्रा के एक पखवाड़े बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र में टीम ने यात्रा का फीडबैक और संभावित प्रत्याशियों की सूची वसुंधरा राजे को सौंपी। इसी तरह संभाग प्रभारियों से 3-4 संभावित उम्मीदवारों की सूची के साथ पेशेवर एजेंसी सेे भी सर्वे कराया गया है और अब धौलपुर की समीक्षा बैठक के बाद प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए जिताऊ उम्मीदवार पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। स्वाभाविक तौर पर क्षेत्र में जातिगत मतदाताओं का गणित विपक्ष के सम्भावित प्रत्याशी तथा राजनीतिक हालात पर भी गौर किया जाएगा।

जयपुर जिले की बैठक 2 सितम्बर को होगी। भाजपा विधायक दल के उपनेता रहे घनश्याम तिवाड़ी के धौलपुर जाने को लेकर अटकले लगाई जा रही हैं। तिवाड़ी ने वसुन्धरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा से पहले देवदर्शन यात्रा के बहाने अपना असंतोष जाहिर कर दिया था और अब रक्षाबंधन पर्व के बहाने उन्होनें वितरित पेम्पलेटों के जरिए अपनी बात कही है। इसके विभिन्न दृष्टिकोणों से राजनीतिक मायने लगाए जा रहे हैं।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केन्द्र में सत्तारूढ़ कराने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दिलचस्पी भी बढ़ गई है। संघ का भी मानना है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए राजस्थान सहित 5 राज्यों में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को सुनिश्चित करना होगा। इसी उद्देश्य से संघ पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को भी संभाग प्रभारी बनाया गया है। उधर वसुन्धरा राजे भी अपने स्तर पर जिलों तथा विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी लगाने की तैयारी में है। बाहरी तौर पर इसे खेमेबाजी के रूप में देखा जा सकता है लेकिन अंदरखाने सभी मोर्चों पर पार्टी कार्यकर्ताओं शुभचिंतकों तथा समर्थकों को सक्रिय करने के साथ आम मतदाताओं का समर्थन जुटाने में कोई कसर नहीं छोडऩे की मंशा है।

राज्य में मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ 5 लाख 78 हजार से अधिक हो गई है। इनमें लगभग 2 करोड़ 14 लाख पुरूष और एक करोड़ 91 लाख महिला मतदाता है। प्रदेश में पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 45 लाख नये मतदाता जुड़े हैं। इस नए वोट बैंक को अपने पाले में लाने की मुहिम भी होगी। वही मतदान केन्द्रों की संख्या बढऩे से राजनीतिक दलों को अपनी अतिरिक्त मशीनरी जुटानी होगी। उधर सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपनी पार्टी के लिए उम्मीदवार जुटाने की कोशिश में है, तो बसपा उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। तीसरा मोर्चा भी चुनावी कवायद में लगा हुआ है। बहरहाल सितम्बर-अक्टूबर में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से चुनाव अभियान जोर पकड़ेगा।

गुलाब बत्रा

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