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दिल्ली में अकाली दल-बीजेपी में हो सकता है ‘तलाक’

• दिल्ली में 10 विधानसभा सीटें मांगी, 4 पर हैं भाजपा के विधायक
• अकाली दल ने 30 अगस्त तक का दिया अल्टीमेटम
• सीटों के बंटवारे को लेकर हो सकता है टकटाव

दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने अपने गठबंधन के साथी भारतीय जनता पार्टी से 10 सीटें मांगी है। साथ ही उन 10 सीटों का ब्यौरा भी दिया है, जिसमें से वर्तमान में 4 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। सीटों के बंटवारे को लेकर अकाली दल ने पहली बार संबंधित सीटों को चिन्हित करके दावा ठोंका है। साथ ही यह फैसला भी 30 अगस्त तक करने का अल्टीमेटम दिया है। बातचीत दोनों पार्टियों के बीच उच्च स्तर पर चल रही है। अगर अकाली दल की मनपसंद सीटें भारतीय जनता पार्टी दे देती है तो ठीक, अन्यथा गठबंधन के बीच ‘तलाक’ होना तय है।

भारतीय जनता पार्टी अब तक अकाली दल को वही विधानसभा सीटें देती रही है, जिस पर खुद भाजपा पराजित हुई है। यही कारण है कि शिरोमणि अकाली दल इस बार होने वाले दिगी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़े रणनीतिक तरीके से अपनी सिख बहुल सीटों का चयन किया है। जिन 10 विधानसभा सीटों पर अकाली दल ने दावा ठोंका है, उसमें से वर्तमान में 6 सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं, बाकी पर भाजपा के विधायक। इसमें पश्चिमी दिल्ली में 5 सीट है, जिसमें मोती नगर, हरीनगर, तिलकनगर, जनकपुरी और राजौरी गार्डन है। इसमें से 4 सीट पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। इसके अलावा दक्षिणी दिगी में 2 सीटों पर दावा ठोंका है, जिसमें से पहली जंगपुरा और दूसरी ओखला विधानसभा सीट है। ये दोनों सीटें कांग्रेस की झोली में है। इसके अलावा पूर्वी दिल्ली में शहादरा सीट मांगी है, जिसपर भी कांग्रेस का कब्जा है। इसी प्रकार सेंट्रल दिल्ली में राजेंद्र नगर और नार्थ दिल्ली में आदर्शनगर विधानसभा सीट को चिन्हित किया है। ये दोनों सीटें वर्तमान में कांग्रेस के पास हैं। सूत्रों के मुताबिक शिरोमणि अकाली दल ने भारतीय जनता पार्टी के समक्ष जो आंकड़ा पेश किया है, उसके अनुसार भाजपा वाली सभी सीटें सिख बहुल हैं। यहां पर 20 से 60 हजार वोट पर सिखों का दबदबा है। लिहाजा, ये सीट अकाली दल को मिलती हैं, तो यहां पार्टी अपना खाता बड़े आराम से खोल सकती है। यही कारण है कि अकाली दल ने जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा करने को कहा है। अकाली दल का तर्क है कि अब विधानसभा चुनाव में समय चूंकि बहुत कम है और काम ज्यादा, लिहाजा अगर समय पर इसकी घोषणा हो जाए तो पार्टी जमीनी स्तर पर जाकर कुछ काम कर सकती है। ऐन वक्त पर जब सीटों का बंटवारा होगा तो पार्टी एवं वर्कर दोनों के लिए बड़ी मुसीबत हो सकती है। यही कारण है कि अकाली दल ने भाजपा पर दबाव बना दिया है। सूत्रों की माने तो अगर बात बनती है तो ठीक, अन्यथा सितंबर के पहले सप्ताह में अकाली दल के मुखिया एवं पंजाब के मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल कोई चौकाने वाली घोषणा कर सकते हैं।

हालांकि, भाजपा ने अंदरखाने ने अकाली की डिमांड को खारिज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा कब्जे वाली जिन 4 सीटों को अकाली दल ने मांगा है, बीजेपी उसे कतई छोडऩे को राजी नहीं है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो अभी तक सीटों के बंटवारे पर चर्चा नहीं हुई है। समय आने पर इसपर चर्चा होगी।

अकाली दल ने मांगी सीटें
• मोतीनगर – हरीनगर
• तिलकनगर – जनकपुरी
• राजौरी गार्डन – जंगपुरा
• ओखला – शाहदरा
• राजेंद्र नगर – आदर्श नगर

‘मौत’ के कमरे में गुजारनी पड़ती है ‘नाइट’
• मंत्रियों, नेताओं की रक्षा करने वाले ही ‘असुरक्षित’
• दिल्ली में स्थित पंजाब भवन का हाल-ए-बेहाल
• मंत्रियों व नेताओं के गनमैन रूम की हालत खस्ताहाल

पंजाब के मंत्रियों, नेताओं एवं अफसरों की रक्षा करने वाले ही दिल्ली में आकर ‘असुरक्षित’ हो जाते हैं। मंत्री एवं नेता तो वातानुकूलित आलीशान सूट्स में आराम फरमाते हैं, जबकि वह खुद ‘मौत’ के कमरे में रात गुजारने को मजबूर हैं। उन पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। यही कारण है कि जब एक सोता है तो दूसरा अपनों की रखवाली करता है। हम बात कर रहे हैं नई दिल्ली में स्थित पंजाब सरकार के विशालकाय पंजाब भवन का, जहां पंजाब के मंत्री, विधायक, नेता एवं अधिकारी दिल्ली आने पर ठहरते हैं। दो ब्लॉक में बने पंजाब भवन के ए ब्लाक में तो कैबिनेट स्तर के मंत्री एवं नेता रहते हैं, जबकि बी ब्लाक में विधायक, पूर्व मंत्री, अधिकारी व अन्य लोग रहते हैं। इन मंत्रियों, नेताओं व विशेष अतिथियों के साथ उनकी हर वक्त साये की तरह साथ रहने वाले गनमैन को परिसर में ही पीछे रहने के लिए डारमेट्री दिया गया है। वर्षों पहले बने इन कमरों की हालत इतनी ज्यादा खस्ताहाल हो चुकी है कि वह कब भरभरा कर गिर जाएगा, यह कहना मुश्किल है। वैसे भी आए दिन भूकंप के झटके हो रहे हैं। गममैनों के ठहरने वाले कमरे की बात करें तो वहां जानवरों भी नहीं रह सकते। कमरा नंबर-9 ही ले लीजिए। इस कमरे में 8 बिस्तर लगे हैं जिसमें फटे हुए गद्दे बिछाए गए हैं। चद्दर की बात करना तो बेमानी है। गद्दों की हालत देखकर कह सकते हैं कि जब बिल्डिंग बना होगा, उसके बाद न तो कमरे की पुताई हुई होगी और न ही गद्दा बदला गया होगा। गद्दों को उठाने पर टुकड़ों में गिर जाता है। उनमें कीड़े और मच्छर अपना आशियाना बना चुके हैं। उसी बिस्तर पर गनमैन रात गुजारता है। इस कमरे में लगी तो दो खिड़कियां हैं, लेकिन न तो जाली है और न ही उसमें दरवाजे। नतीजन गनमैनों को बड़े बीमारी का खतरा तो रहता ही है, साथ ही खुली खिड़कियों से हथियारों के ले जाने का भी खतरा बना रहता है। कमरे की दीवरों पर तो बारहों महीना सीलन कायम रहती है। कमरे के अंदर और बाहर खुले में लटकते तार और जला हुआ मेन बिजली बोर्ड आपको व्यवस्था की पोल खोलता नजर आएगा। बाथरूम व शौचालय की हालात तो भगवान भरोसे है। कमरा नंबर 12 का भी यही हाल है। बैग व अन्य सामान रखने के लिए आलमारी तो बनी है, लेकिन उसमें दरवाजा गायब है। गद्दों की हालत तो बयां करना ही बेकार है। यही हाल बगल में बने मीडिया रूम का भी है। लेकिन वह सरकारी कर्मचारी होने के नाते जुबान नहीं खोलते और खामोश रहते हैं। नीचे-उपर दो फ्लोर में बने इस भवन की हालत बाहर से ही देखकर लगाया जा सकता है। बताते हैं कि गनमैनों को 1 रुपये कीमत पर एक रात के लिए डारमेंट्री एलॉट होता है।

यह तो था मंत्रियों व नेताओं की रक्षा करने वाले जाबांजों के ठिकाने का। नेताओं के ठहरने वाले कमरों की भी हालात बहुत अच्छी नहीं है। अकाली-भाजपा गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने तो सरकार से इसकी शिकायत करने का मन बनाया है। उनकी माने तो खाना और नाश्ता सिर्फ नाम का है। इसमें पहले जैसी गुणवत्ता अब नहीं है। चूंकि, यहां सभी को ठिकाना मिल जाता है, इसलिए कोई इसका विरोध नहींकरता। लेकिन अब वह मुख्यमंत्री से इसके हालात से रूबरू करवाएंगे। इस मसले पर पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात करने की कोशिश तो की गई, लेकिन संभव नहीं हो सका है।
पंजाब भवन में नहीं ठहरते मुख्यमंत्री, राज्यपाल
पंजाब भवन की दुर्दशा के लिए ज्यादा जिम्मेदार सरकारी तंत्र और सरकार खुद है। चूंकि, पंजाब भवन में न तो मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ठहरते हैं और न ही उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल एवं पंजाब के राज्यपाल। यहीं कारण है कि पंजाब भवन पर व्यवस्था एवं साफ सफाई पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। इसमें राज्यपाल व मुख्यमंत्री तो कपूरथला हाउस में पनाह लेते हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल अपने 12 सफदरजंग एंक्लेव स्थित सरकारी कोठी में।
पड़ोस के तीनों भवन पंजाब से बेहतर
मंडी हाउस स्थित पंजाब भवन के आसपास बने हरियाणा भवन, महाराष्ट्र भवन एवं हिमाचल भवन की हालत पंजाब से कहीं ज्यादा अच्छी है। चूंकि इन भवनों में मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल आते-जाते रहते हैं, इसलिए अधिकारियों की नजर भी चौतरफा बनी रहती है। इन भवनों में खाना व नाश्ता भी पंजाब के मुकाबले ठीक है।

नील पाण्डेय

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