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गली-गली में भटकल

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फिलहाल भटकल बंधुओं सहित कुल 12 आतंकियों पर 10-10 लाख रूपये का इनाम घोषित कर रखा है। इनामी सूची में छह नाम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले युवकों के भी हैं। एनआईए की सूची में ये सभी भगोड़े इंडियन मुजाहिद्दीन के सदस्य हैं। इनमें एक रियाज भटकल के तो पाकिस्तान में होने का संदेह है।

अपनी बीवी को ईदी भेजने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी होगी, यासीन भटकल को इसका एहसास भी नहीं था। पहचान छुपाने में माहिर और काफी सतर्क माना जाने वाला यासीन भटकल 29 अगस्त को आखिरकार भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ ही गया। हैदराबाद ब्लास्ट, जयपुर ब्लास्ट, अहमदाबाद ब्लास्ट, दिल्ली ब्लास्ट, बैंगलोर ब्लास्ट, पूणे के जर्मन बेकरी ब्लास्ट सहित 40 से मामलों का वांछित यासीन नेपाल के पोखरा गांव में अपना ठिकाना बनाया था। अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों के खिलाफ लडऩे की हसरत रखने वाले यासीन पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर थी। खुफिया विभाग के चक्रव्यूह में फंसने से बचने रहने के लिए मोबाईल से दूर रहने वाला यह शख्स बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, मधुबनी और पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में अपने रिश्तेदारों से बातचीत करने के कारण, वह खुफिया एजेंसियों के रडार में आ गया। ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ के संस्थापक सदस्यों में से एक यासीन भटकल और असदुल्लाह अख्तर उर्फ हड्डी को अंतत: बिहार पुलिस के सहयोग से एनआईए ने नेपाल सीमा पर दबोच लिया। इसके पहले अब्दुल करीम टुंडा को भी कुछ हफ्ते पहले नेपाल सीमा से ही गिरफ्तार किया गया था। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से सटे होने के कारण नेपाल आतंकवादियों का बड़े ठिकाने के तौर पर उभरा है। भारतीय एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहते हुए भी भारत में अपनी गतिविधियां संचालित करना नेपाल से काफी आसान है। साथ ही यहां पाकिस्तान भी खुलकर आतंकवादियों की मदद पहुंचाता रहता है। यासीन भटकल को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे भले ही बड़ी मछली मानें, लेकिन यह सच्चाई बन चुकी है कि ऐसी कई मछलियां भारत में काम कर रही हैं। केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्य आतंकवादी गतिविधियों के केन्द्र बन गए हैं। सिमी, इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों ने भारत में आतंकवाद फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) की स्थापना तो अप्रैल 1977 में हुई थी, लेकिन वह सबसे ज्यादा चर्चा में तब आया जब 2001 में तत्कालीन एनडीए सरकार ने उसे आतंकी संगठन बताकर उस पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में 2007 में उसका असली चेहरा उस समय सामने आया, जब मध्य प्रदेश पुलिस ने इंदौर शहर से उसके सरगना सफदर नागौरी को उसके 10 साथियों के साथ गिरफ्तार किया।

सफदर नागौरी के साथ जो युवक पकड़े गए थे, उनमें कर्नाटक के युवक भी शामिल थे। इन सभी से पूछताछ के दौरान जो जानकारी सामने आयी थी, वह बेहद चौंकाने वाली थी। उस समय यह पता चला कि मुसलमानों को पाश्चात्य प्रभाव से अलग रखने तथा उन्हें हदीस के बताए रास्ते पर चलने के लिए बनाए गए इस कथित छात्र संगठन का असली उद्देश्य क्या है। और कैसे यह संगठन देश के 20 से ज्यादा राज्यों में अपनी जड़े जमा चुका है।

उसी वक्त यह बात सामने आयी थी कि केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और बंगाल में देशद्रोही ताकतों का एक मजबूत गठजोड़ बन गया है। सिमी के नेता न केवल पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हुजी जैसे संगठनों के संपर्क में थे, बल्कि उनकी आतंकी गतिविधियों में भी पूरी तरह मदद कर रहे थे।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए सिमी कैडरों ने दक्षिणी राज्यों में सक्रिय कई अल्पसंख्यक संगठनों का छाते की तरह इस्तेमाल किया। बाद में वह आतंकी संगठन के रुप में ही सामने आए।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद सिमी का नाम कई बार बदला। पहले स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट (सिम) नाम दिया गया। इंडिया तक हटा दिया गया। लेकिन गुजरात व राजस्थान में आतंकी घटनाओं के बाद यह नाम इंडियन मुजाहिद्दीन हो गया। सिमी के पहले और आखिरी अक्षर को हटाकर इंडियन मुजाहिद्दीन बना दिया गया। इंडियन मुजाहिद्दीन पर भी भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है।

इंडियन मुजाहिद्दीन के गठन के साथ ही कर्नाटक का भटकल कस्बा चर्चा में आया था। उसी समय यह पता चला कि इंडियन मुजाहिद्दीन की कमान कर्नाटक के उत्तर कन्नडा जिले के भटकल कस्बे के रियाज भटकल और इकबाल भटकल नाम के दो सगे भाइयों के हाथ में है। जबकि इसी कस्बे का रहने वाला यासीन भटकल भी संगठन में अहम भूमिका में है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फिलहाल भटकल बंधुओं सहित कुल 12 आतंकियों पर 10-10 लाख रूपये का इनाम घोषित कर रखा है। इनामी सूची में छह नाम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले युवकों के भी हैं। एनआईए की सूची में ये सभी भगोड़े इंडियन मुजाहिद्दीन के सदस्य हैं। इनमें एक रियाज भटकल के तो पाकिस्तान में होने का संदेह है। वह लश्कर-ए-तैयबा के सरगनाओं की पनाह में है। वही से वह भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहा है।

कर्नाटक और केरल में इंडियन मुजाहिद्दीन का व्यापक असर है। इन राज्यों में ज्यादातर पढ़े-लिखे मुस्लिम युवक इससे जुड़े हैं। सफदर नागौरी के साथ 2007 में इंदौर में पकड़े गए शिवली नाम के युवक ने सुरक्षा एजेंसियों को अपने मंसूबों के बारे में खुल कर जानकारी दी थी। उसने बताया था कि किस तरह कर्नाटक और केरल में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को आयोजन किया गया और किस तरह उनके संगठन को आर्थिक मदद मिलती है।

2010 में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंद ने साफ-साफ कहा था कि कुछ मुस्लिम संगठन केरल को एक अलग ‘मुस्लिम देश’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केरल में ही एक संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने एक शिक्षक के हाथ काट दिए थे। इस मामले की जांच भी एनआईए कर रही है।

दरअसल दक्षिणी राज्यों में इन फिरकापरस्त ताकतों ने अपना मजबूत आधार खड़ा कर लिया था। अलग-अलग नामों से ये संगठन खड़े होते रहे। एक संगठन ने तो बकायदा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तर्ज पर अपनी गतिविधियां शुरू की। फ्रीडम परेड के नाम पर हथियारबंद लोगों की सार्वजनिक परेड कराई। यही नहीं बाद में कई समान सोच वाले संगठनों को मिलाकर एक नया राष्ट्रीय संगठन खड़ा किया। इस संगठन को राजनैतिक रूप देकर दिल्ली में उसका कार्यालय भी खोला गया।

खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक इस संगठन का मुख्य उद्देश्य देशद्रोही ताकतों को मदद करने के साथ-साथ उनके खिलाफ चलने वाली मुहिम को रोकना तथा ताकत के साथ अपनी बात को रखना है। यही नहीं, इस संगठन ने देश के प्रमुख मीडिया घरानों को भी धमकाया। उनके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर मुहिम चलाई। मुकदमे कायम कराए तथा प्रेस काउंसिल से शिकायतें की। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर के चलते यह संगठन बहुत ज्यादा पांव नहीं पसार पाया लेकिन उसने आतंकी और देशद्रोही ताकतों का काम आसान कर दिया।

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक सिमी के पूर्व सदस्यों ने प्रतिबंध के बाद दक्षिण के करीब एक दर्जन कथित सामाजिक संगठनों में शरण ली। बाद में सबने एकजुट होकर एक संगठन बनाया। कई राज्यों में इस संगठन की इकाइयां हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह संगठन मुख्य रुप से इंडियन मुजाहिद्दीन के लिए ही काम करता है। उस तक पूरी जानकारियां पहुंचाता है। साथ ही शासन एवं प्रशासन के खिलाफ मुहिम भी चलाता है। यह संगठन कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका खुलासा इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक अपनी एक रिपोर्ट में कर चुके हैं।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद जिस तरह देश में आंतरिक आतंकवाद बढ़ा, उसने तमाम सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। 2008 के मुंबई हमले को छोड़ दें तो जितनी भी आतंकी वारदातें हुई हैं, उनमें भारतीय मूल के ही लोग शामिल रहे हैं।

आज स्थिति यह है कि करीब-करीब हर राज्य में देशद्रोही ताकतों को मदद देने वाले संगठन मौजूद हैं। इनकी सार्वजनिक गतिविधियां कुछ और हैं और वास्तविक गतिविधियां कुछ और। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद हालात और बदले हैं।

गृहमंत्रालय के सूत्र यह मान रहे हैं कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। अब तो स्थिति यह है कि देश के बहुत सारे संगठन सोशल मीडिया के जरिए जमात-उल-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के सीधे संपर्क में हैं।

छद्म नामों से चल रहे इन संगठनों से जुड़े लोग भारत के कई प्रमुख राजनैतिक दलों से भी जुड़े हुए हैं। एक ऐसा संगठन है, जिसका मुख्यालय तो पाकिस्तान में है लेकिन भारत के हर प्रमुख शहर में उसकी शाखाएं हैं। ये सीधे पाकिस्तान में बैठे लोगों के समर्थन में रहते हैं।

सुरक्षा अधिकारी यह मानते हैं कि सिमी प्रतिबंध के बाद और ज्यादा फैल गया है। अब उसमें प्रशिक्षित जेहादी शामिल हैं। उन्हें देश के अंदर से ही मदद मिलती है। साथ ही पड़ोसी देशों के रास्ते भी मदद आती रहती है। जानते सब हैं, लेकिन राजनैतिक कारणों के चलते इन पर हाथ नहीं डाला जा रहा है। वोट बैंक की राजनीति एक बड़ी मजबूरी है। यही मजबूरी देश के लिए बेहद घातक साबित होने वाली है।

 

अरुण रघुनाथ

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