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राज बब्बर और 12 रुपए

जब योजना आयोग ने गरीबों का मजाक करते हुए उनको परिभाषित करना चाहा तो पूरे देश में बवाल मचा। दूसरी ओर अपनी ही सरकार की लाज बचाने मैदान में उतरे कांग्रेसी प्रवक्ताओं ने देश की जनता के सामान्य ज्ञान में बढ़ोतरी करते हुए यह दिखाने की कोशिश की कि आज भी एक रुपए में तो कहीं 5 रुपए में तो कहीं 12 रुपए में भरपेट खाना मिलता है। यह बात और है कि किरकिरी होने पर उनमें से कई को अपने बयानों पर खेद भी व्यक्त करना पड़ा। हालांकि पिछले दिनों जब कुछ पत्रकारों ने राज बब्बर से पूछा कि आपने 12 रुपए में भरपेट खाने की बात कैसे कर दी तो राज बब्बर बोले कि ज्यादा उलझना नहीं चाहता था, इसलिए बयान पर खेद व्यक्त किया। लेकिन साथ ही वह यह कहना भी नहीं भूले कि आज भी अगर कोई तैयार है तो मैं उसे मुंबई में ही नहीं, बल्कि दिल्ली एनसीआर में खाना खिला सकता हूं। अपनी बात को साफ करते हुए बोले कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह की लोकसभा क्षेत्र गाजियाबाद में आज भी 12 रुपये में भरपेट भोजन करवा सकता हूं।
उम्मीदवारों का अकाल
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को दिल्ली के चुनाव की जिमेदारी थमाई गई है। गडकरी दिल्ली के आला अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं। चर्चा का मुद्दा एक ही है। शीला दीक्षित के विजय रथ को चौथी बार जीतने से कैसे रोका जाए? कोई पार्टी की युवा नेता को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ उतारने का सुझाव देता है। कोई किसी राष्ट्रीय नेता को दिल्ली से लड़ाने की बात करता है। तभी कोई यह सुझाव देता है कि क्यों न बाटला मुठभेड़ में शहीद मोहन चंद शर्मा की पत्नी को मुख्यमंत्री को चुनौती देने के लिए उतारा जाए? हालात साफ है। एक बड़ी टीम और मजबूत संगठन के बावजूद दिल्ली में पार्टी के पास कोई लोकप्रिय चेहरा नहीं है और इसीलिए शायद चौथी बार भी दिल्ली दूर अस्त।

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