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लव-जिहाद के कारनामे

लव-जिहाद में लड़की को हमेशा एक टारगेट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी कीमत पर हासिल करना। प्यार में फंसाकर, ब्लैकमेल कर या फिर डरा धमका कर। दिल्ली जैसे महानगरों में इन बातों को जानने, सोचने और समझने की जरुरत नहीं पड़ती। कई बार करियर को दरकिनार कर परिस्थितिवश समझौता करना इन लड़कियों की मजबूरी बन जाती है।

लव-जिहाद के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसी सख्ती से इन्हें दबाने की कोशिश जारी है। लव-जिहाद दक्षिण भारत से निकलकर पूरे भारत को अपनी आगोश में ले चुका है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल इसकी चपेट में है। उत्तर प्रदेश का मेरठ, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, आगरा जिलों से औसतन दो खबरें रोज आती हैं। बिहार के जिले मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सहरसा, अररिया और किशनगंज में लव-जिहाद के मामले उजागर हो रहे हैं, तो हरियाणा और राजस्थान के मेवात क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं आम हो चली हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल की कहानी उत्तर प्रदेश जैसी ही है।

14 जुलाई 2013 को एक खौफनाक मामला सामने आया, जिसमें एक युवक ने गलत नाम से अपनी पहचान छुपाकर सोशल नेटवर्किंग साईट पर एक 21 वर्षीया युवती को झांसे में लेकर निकाह कर लिया। लेकिन बज्जू उजमान अकबर बादशाह उर्फ पाशा नाम का यह युवक सरिता (बदला हुआ नाम) पर धर्मांतरण करने का दबाव बनाने लगा। इंकार करने पर पाशा ने न सिर्फ सरिता की धार्मिक भावनाओं को रौंदा, बल्कि बंधकर बनाकर महिनों जुल्म किया। पाशा ने 9 दिनों में सरिता के शरीर पर ब्लेड से 100 से ज्यादा वार कर जख्मी कर दिया। किसी तरह सरिता भागने में सफल हो गई और मुलुंड थाने में मामला दर्ज कराया। 9वीं फेल और 16 आपराधिक मामलों का आरोपी पाशा का पिता 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट का आरोपी है।

कोर्ट के कुछ फैसले
अगस्त 2010 को इलाहाबाद के नैनी की रहने वाली खुशबू जयसवाल से दिलबर हबीब सिद्दीकी ने शादी की। शादीशुदा और तीन बच्चों का बाप दिलाबर ने नाबालिग खुशबू को अपनी पहली शादी की बात नहीं बताई थी। मामला कोर्ट में आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुशबू को नारी निकेतन भेज दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई 2009 को एक मामले में फैयाज को बरी कर दिया था। फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि हिंदू लड़की अगर इस्लाम कबुल कर निकाह कर लेती है तो उसे परेशान नहीं किया जा सकता। जम्मू और कश्मीर के फैयाज अहमद अहंगर ने मेघा का धर्मांतरण कर निकाह कर 2007 में निकाह कर लिया था। धर्मांतरण के बाद मेघा ने महविश अंजुम नाम रख लिया था। बाद में मेघा की मां ने उसकी शादी कहीं और कर दी। लेकिन मेघा घर से भागकर अपने पहले पति फैयाज के पास लौट आयी थी।

11 नवंबर 2010 को चतुर्थवर्गीय कर्मचारी और तीन बच्चों का बाप असलम खान ने लॉ प्रथम वर्ष की छात्रा 19 वर्षीया प्रियंका पंडोह से धर्मांतरण कर निकाह कर लिया था। धर्मांतरण के बाद प्रियंका ने अपना नाम शाहिन रख लिया। अपहरण के इस मामले में 11 नवंबर 2010 को जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने असलम को इस आधार पर जमानत दे दिया, क्योंकि लड़की शादी से पहले मुसलमान बन गयी थी।

लव-जिहाद में लड़की को हमेशा एक टारगेट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी कीमत पर हासिल करना। प्यार में फंसाकर, ब्लैकमेल कर या फिर डरा धमका कर। दिल्ली जैसे महानगरों की स्थिति और भी बदतर है। जहां ब्वॉयफ्रेंड रखना एक फैशन में तब्दील हो गया है, वहां इन बातों को जानने, सोचने और समझने की जरुरत नहीं पड़ती। कई बार करियर को दरकिनार कर परिस्थितिवश समझौता करना इन लड़कियों की मजबूरी बन जाती है।
दक्षिणी दिल्ली के एक मीडिया संस्थान से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली एक लड़की मोहब्बत में इस कदर फंसी कि उसे दूसरी बीवी बनने पर भी कोई ऐतराज नहीं हुआ। अपने इंटर्नशिप के दौरान, सपना (बदला हुआ नाम) की दोस्ती चैनल के ही ऐंकर फरहान (बदला हुआ नाम) से हो गई। तकरीबन दो साल तक दोनों के लिव-इन-रिलेशनशिप के बावजूद, उस ऐंकर ने दिसंबर 2012 में परिवार के दबाव में अरेंज मैरिज कर ली। कानपुर से दिल्ली आकर, खबरों की दुनिया में बड़ा नाम बनने की ख्वाहिश को ब्रेक तब लग गया, जब सपना को फरवरी 2013 में मजबूरी में आकर धर्मांतरण कर अपने शादीशुदा प्रेमी से निकाह करना पड़ा। आधुनिक जीवन शैली की अभ्यस्त यह लड़की पारंपरिक मुस्लिम कपड़े पहनने लगी। लेकिन कुछ दिन बाद ही वह अपने शौहर के घर से भाग गई। लेकिन ना ही परिवारजनों ने उसका साथ दिया और ना ही सगे संबंधियों ने। अंधकारमय भविष्य देखकर मजबूरन, वह वापस उस ऐंकर के घर आने को मजबूर हो गई। जलालत की जिंदगी और उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का सिलसिला जारी रहा। अंत में एक बार फिर शौहर को छोड़कर को विवश हो गई।
‘स्टॉकहोम सिंड्रोम’ की शिकार लड़कियां
लव जिहाद में अक्सर देखा जाता है कि लड़कियां ही धर्म परिवर्तन करती हैं, जबकि लड़के नहीं। चाहे अमेरिका के बोस्टन ब्लास्ट के आरोपी तमरलान जारनाएव की पे्रमिका कैथरीन रसेल हो या लश्कर-ए-तोय्यबा के लिए काम करने वाली दीपा ऊर्फ शाहीन हो। नौशाद से निकाह करने के बाद दीपा ने धर्म परिवर्तन कर शाहीन नाम अपना लिया था। जब दो अलग-अलग धर्मों के लोग प्रेम के वश में होकर शादी करने का फैसला करते हैं, तब हमेशा लड़की ही टारगेट बनती है। लड़का कभी अपना धर्म नहीं बलदता। ऐसे मामलों में लड़का और लड़की द्वारा किसी तीसरे धर्म को भी स्वीकरते हुए नहीं देखा गया है। विश्व के जानेमाने बुद्धिजीवी और विचारक नीरद चौधरी के अनुसार जिहाद तीन विकल्प देता है। पहला, इस्लाम धर्म अपना लो और हमारे साथ शामिल हो जाओ। दूसरा विकल्प देता है कि खुद को मुसलानमानों के बंधुआ के रुप में आत्मसमर्पण कर जजिया कर दो या फिर तीसरे विकल्प के रुप में लडऩे के लिए हमेशा तैयार रहो।

लव जिहाद के मामले में स्टॉकहोम सिंड्रोम का जबरदस्त प्रभाव होता है। अक्सर देखने में आता है कि लड़की को अगवा होने के तीन-चार महीने, कभी-कभी साल भर बाद सामने लाया जाता है। इस दौरान लड़की में हर तरह का बदलाव आ जाता है। उसके पहनावे से लेकर उसके व्यवहार तक में।

स्टॉकहोम सिंड्रोम एक मानसिक प्रक्रिया है। जिसमें अपहृत किए गए या बंधक बनाए गए व्यक्ति का अपने अपहर्ता के प्रति एक विशेष तरह का लगाव आ जाता है। यह लगाव उस पर किए गए दयाभाव की वजह से उत्पन्न होता है। इस सिंड्रोम से पीडि़त को लगता है कि अपहर्ता ने उसे जिंदा रखकर उसके साथ प्रेम का प्रदर्शन किया है। तमाम तरह के दमन, पीडऩ, शारीरिक और मानसिक शोषण के दौर से गुजरने के बाद अपहर्ता के व्यक्तित्व से अपहृत होने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग हो नहीं पाता है। अपहर्ता के साथ एक तरह का मानसिक जुड़ाव होने लगता है। अपहृत अगर महिला हो और कई महीनों तक बंधक बनाकर रखी गयी हो, तब उसे इस सिंड्रोम से ग्रसित होने की ज्यादा आशंकाएं होती हैं।

इस सिंड्रोम का नाम स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में घटी एक बैंक डकैती के बाद पड़ा। बैंक लुटेरों ने कुछ बैंक कर्मचारियों को 23 से 28 अगस्त, 1973 के बीच बंधक बनाए रखा। इस मामले में बंधक व्यक्ति डकैतों से भावनात्मक रूप से जुड़ गए। 6 दिन बाद मुक्त हो जाने के बाद बैंककर्मियों ने डकैतों को बचाने के लिए, उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया। बाद में बंधक बनी एक महिला ने उस कांड में शामिल एक डकैत से शादी कर ली।

दूसरे धर्म के प्रेमी के साथ धर्म-परिवर्तन कर निकाह करने वाली प्रेमिकाओं के केस में इस तरह के मामले ज्यादा देखने में आते हैं। जिसमें अगवा या बहला-फुसलाकर भगाई गयी युवती अदालत का दरवाजा खटखटाती है और अपने परिजनों से ही जान का खतरा होने की बात कहते हुए सुरक्षा की मांग करती है। कई बार अपहरण करने वाले व्यक्ति के खिलाफ महिला कुछ भी बोलने से मना कर देती है।

कुछ ऐसे ही मामले
• पटना के एक गैंगेस्टर ने पहले से शादीशुदा और एक बच्ची की मां कंचन मिश्रा का अपहरण कर लिया। दिसंबर 2002 को उसने कंचन मिश्रा से निकाह भी कर लिया। ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली कंचन ने पहले अपनी मां को बताया कि उसे जबरन बंधक बनाकर रखा गया है और शादी करने का दबाव बनाया जा रहा है। कंचन की मां पुलिस में मामला दर्ज कराने की कोशिश करती रही। लेकिन प्रदेश में राजद की सरकार होने और उसके बाहुबली सांसद से संबंध होने के कारण उस कुख्यात अपराधी के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज करने से परहेज करती रही। राष्ट्रीय स्तर पर मामला उठने के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की। लेकिन तब उस युवती ने न्यायालय के सामने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। अंत में उस युवती का कहना था कि उसने स्वेच्छा से सुल्तान मियां से शादी की है।

• 05 अगस्त 2010 को फतेहाबाद की सर्वेश, धर्मांतरण करने के बाद सना बन गयी। सर्वेश एक माह से घर से गायब थी। धर्म परिवर्तन के बाद उसने मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया। उसके बाद डीआईजी के समक्ष पेश होकर सर्वेश ने अपने ही घर वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए, अपनी और अपने शौहर की जान को खतरा बताया। इसके कुछ ही दिन पहले आगरा के केदारनगर की पंजाबी युवती ईशा का भी कुछ ऐसा ही मामला था। उसने भी एक मुस्लिम युवक से धर्मांतरित कर निकाह कर, पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगायी थी।
• 27 जुलाई 2011 को वराणसी की मेघा नागर ने धर्म परिवर्तन कर महजबीन नाम रखकर अपने ही मुहल्ले के एक मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया। बाद में मेघा ने अपने पिता अभयराम नागर पर शारीरिक और मानसिक शोषण का आरोप लगाते हुए थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मेघा तीन महीने पहले घर से गायब हो गयी थी। उसके बाद धर्म परिवर्तन कर सामने आयी और अपने पिता पर मामला दर्ज कराया था।
• घर से तकरीबन तीन माह पहले गायब होने के बाद 23 जून 2012 को एक युवती ने होईकोर्ट को बताया कि उसका अपहरण नहीं हुआ है। युवती ने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम अमीना रख लिया और अपने प्रेमी आमिर से निकाह भी कर लिया। 5 अप्रैल को यह किशोरी अपनी मुस्लिम सहेली के घर गयी थी। उसके बाद से वह गायब हो गयी थी।
• 17 जनवरी 2013 को फफूंदा के अपने घर से अगवा नाबालिग युवती ने महिने भर बाद पुलिस को खत लिखकर बताया कि उसने धर्मांतरण कर निकाह कर लिया है। उसने उसी व्यक्ति से निकाह करने की बात लिखी थी, जिसके उपर अपहरण का आरोप था। यह चि_ी पुलिस को 18 फरवरी 2013 को मिली।
पूरे देश भर से ऐसे सैकड़ों मामले रोजाना सामने आते हैं लेकिन ऐसे मामलों में गायब युवतियों की बरामदगी के बाद उनके स्वास्थ्य परीक्षण और मानसिक जांच की व्यवस्था न होने के कारण, इन बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जरुरत है कि बरामद की गयी लड़कियों के शारीरिक परीक्षण के साथ-साथ उनकी मानसिक जांच भी कराई जाय।

2012 के दिसंबर में बिहार के मुजफ्फरपुर की एक लड़की की प्यार की कहानी बलात्कर में बदलकर सामने आयी। देवघर का शाहबाज किसी तरह इस लड़की का मोबाइल नंबर हासिल कर मिस्ड कॉल देने लगा। यह सिलसिला रोज बातचीत में बदल गया। शाहबाज ने लड़की को अपना नाम राहुल बताया। दो महीने में ही शाहबाज ने लड़की का इस कदर ब्रेनवॉश किया कि वह घर से भागने को तैयार हो गयी। शाहबाज लड़की को लेने मुजफ्फरपुर पहुंचा। ट्रेन में यात्रा के दौरान उसने लड़की को अपना असली नाम बताया। घर से भागी लड़की का साथ जाना मजबूरी थी। लड़की को देवघर लाने के बाद शाहबाज ने शारीरिक संबंध बनाए और अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ भी संबंध बनाने के लिए लड़की को मजबूर किया। लड़की द्वारा विरोध किए जाने पर कमरे में बंद करके उसके साथ मारपीट की गई। लड़की किसी तरह कैद से भागने में सफल हो गयी। उसने मां-बाप को फोन कर देवघर बुलाया और परिजनों के साथ थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज करायी।

गुजरात की हालत कोई अलग नहीं है। अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में ऐसे मामले रोज होते हैं। एक गाड़ी में चार संदिग्ध लोगों को देखकर, पुलिस ने तलाशी ली। दो युवक और दो युवतियां आपत्तिजनक हालत में मिले। पूछताछ करने पर युवतियों ने हंगामा कर दिया। पुलिस ने लड़कों को गिरफ्तार करने के बाद, युवतियों को उनके मां-बाप के हवाले कर दिया। लड़के मुसलमान और लड़कियां हिंदू थीं। सबसे बुरी हालत पश्चिम बंगाल की है। जनसंख्या में बांग्लादेशी मुस्लिमों की बाढ़ के कारण ऐसे मामले मीडिया में आने से पहले ही दबा दिए जाते हैं। मुर्शिदाबाद में एक मौलवी द्वारा नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर उनके घरों को जला दिया गया। जांच करने पहुंचे दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया। इसमें वहां के राजनीतिक दलों के नेताओं का हाथ बताया गया।

वोट बैंक की राजनीति इतनी हावी है कि ऐसे मामलों में प्रशासन चाहकर भी कोई कदम नहीं उठा पाता। ‘हिंदू संहति’ के अध्यक्ष तपन घोष के अनुसार मेघराना तहसील में आज से 20 साल पहले तक हिंदुओं की आबादी 87 प्रतिशत थी, जो घटकर सिर्फ 47 प्रतिशत रह गयी है। दो साल पहले मुसलमानों ने 900 धर्मांतरित महिलाओं के साथ मार्च निकाला था। घोष के अनुसार इस मार्च का मकसद यह बताना था कि इस्लाम मानने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लव-जिहाद, हिंदू लड़कियों को जबरन अगवा कर या फिर डरा-धमकाकर धर्मांतरित करना है। स्कूल जाने वाली लड़कियों को रास्ते से जबरन अगवा कर लिया जाता है। हिंदू पर्व त्योहारों पर पंडालों को तोडऩा आम बात है। राह चलती महिलाओं से छेड़छाड़ की जाती है। इससे बचने के लिए इस्लाम अपनाने की सलाह दी जाती है। इस तरह के मामलों में पुलिस प्रशासन सिर्फ मूकदर्शक की भूमिका में रहता है।

1 मई 2013 को रानीगंज कोलियरी की एक लड़की को प्यार के जाल में फांसने मे नाकामयाब होने पर दो मुस्लिम लड़कों ने बलात्कार किया। स्थिति तनावपूर्ण हो गयी। प्रशासन को मजबूरन कफ्र्यू लगाना पड़ा। 5 मई 2013 को दूसरी घटना में पुलिस ने दो लड़कों को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना हावड़ा जिले के जगतबल्लभपुर के बांकुल की है। नौंवी क्लास में पढऩे वाली राजू धारा की बेटी स्नेहा (बदला हुआ नाम) को कोचिंग जाने के दौरान बगल की चाय की दुकान पर बैठे मुस्लिम लड़के परेशान करते थे। एक दिन एक मुस्लिम लड़के को स्नेहा ने डपट दिया। शादी नहीं करने पर जहर खाने की उस लड़के की धमकी का स्नेहा पर असर न होते देखकर, उसने अपने दोस्त के साथ स्नेहा को अगवा करने की कोशिश की। लेकिन किसी तरह स्नेहा भागने में सफल रही। गांव के लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया, तब जाकर पुलिस ने दोनों अपराधियों को गिरफ्तार किया।

सन 2000 के अंजू हत्याकांड को भी लव जिहाद का एक हिस्सा मानने वाले लोगों की कमी नहीं है। 1993 में रांची की रहने वाली अंजू ने एक ऐंकर-प्रोड्यूसर से निकाह किया था। लगभग साढ़े सात साल बाद 10 जनवरी 2000 को अंजू की ब्लेड से गला काटकर हत्या कर दी गयी। तब अंजू एक बेटी की मां बन चुकी थी। अंजू के मां-बाप और कनाडा में रहने वाली उसकी बड़ी बहन रश्मि ने उसके पति पर अंजू की हत्या करने का आरोप लगाया था। एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र के अनुसार रश्मि ने पुलिस को तीन डायरी दी थी, जिनमें अंजू ने अपना दर्द लिखा था। डायरी में एक जगह अंजू ने लिखा था कि उसका शौहर, उसे पैसे-पैसे के लिए मोहताज कर दिया था और वह अब उसकी केयर भी नहीं करता, उसे नौकरानी बनाकर रखना चाहता है। अंजू को कई बार अपनी बहन रश्मि से पैसे लेने पड़े।

लव-जिहाद के मामलों में ज्यादातर उच्च-शिक्षित लोग शामिल होते हैं। जिससे इसके पीछे की मंशा पर किसी को कोई शक नहीं होता। यही वजह है कि लव-जिहाद जैसा एक खतरनाक खेल पर्दे के पीछे छुपा रह जाता है। ऐसे मामले अब गांव-गांव से आने लगे हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच के न्यायधीश राकेश शर्मा की अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सरकार से धर्मांतरण कर निकाह करने वाली लड़कियों के कुल आंकड़े पेश करने को कहा था। लेकिन राज्य सरकार ने इस मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया। ये मामला सिर्फ निर्देश बनकर रह गया। सरकार की चाहे जो भी मजबूरी रही हो, लेकिन न्यायालय के इस आदेश का पालन सरकार अब तक नहीं कर पायी है।

लव-जिहाद के कुछ मामले, जिन्हें प्रेम-प्रसंग का मामला मानकर नजरअंदाज कर दिया गया।
• 2010 में पथानमथिट्टा में दो लड़कियों ने अपनी क्लास के दो सहपाठियों के साथ धर्मांतरण कर शादी की।
• आसाम की एक विधायक ने इस्लाम धर्म अपनाकर 13 मई 2012 को अपने से 6 साल छोटे फेसबुक मित्र जैकी जाकिर से निकाह किया। जैकी करीमगंज में एक सरकारी क्लर्क है। महिला विधायक पहले से ही शादीशुदा थी और तीन साल की एक बेटी की मां है। आसाम के एक मुस्लिम मंत्री ने इस शादी की सारी व्यवस्था की थी।
• 20 मार्च 2012 को मुजफ्फरनगर में पकड़ी गयी दो लड़कियों से पूछताछ के बाद, पुलिस ने खुलासा किया कि दिल्ली के मंडावली और बुलंदशहर (यूपी) की रहने वाली ये दोनों लड़कियां इस्लाम अपना कर निकाह करने के लिए वहां आयीं थीं। दोनों लड़कियों का मुसलमान लड़कों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। काफी पूछताछ के बाद भी दोनों ने अपने प्रेमियों के नाम नहीं बताए। दोनों की संबंधित थाना क्षेत्रों में गुमशुदगी दर्ज है। जिस स्कॉर्पियों में प्रेमालाप चल रहा था, उस गाड़ी का नं. दिल्ली का था और राष्ट्रीय स्तर की राजनैतिक दल का झंडा लगा हुआ था।
• 13 जुलाई 2012 को पंजाब के मलेरकोटला में एक नाबालिग लड़की को भगाने के बाद जबरन धर्मांतरण करने का मामला सामने आया था। नानक कालोनी निवासी शालिनी पत्नी अमृतपाल सिंह ने एस.एस.पी. संगरूर को शिकायत कर बताया कि मलेरकोटला निवासी एक मुस्लिम व्यक्ति उसकी नाबालिग लड़की कल्पना (काल्पनिक नाम) को बहला-फुसलाकर भगा ले गया और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कर निकाह कर लिया।
• 15 दिसंबर 2012 को मेरठ में बहराइच की एक युवती का जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई थी। दो दिनों से युवती को बंधक बनाकर एक घर में रखा गया था। किसी तरह वहां से भागकर युवती पुलिस चौकी पहुंचकर, इसकी सूचना पुलिस और अपने परिजनों को दी। 10 दिसंबर को युवती नौकरी की तलाश में मेरठ आई थी। हापुड़ अड्डे पर मजीदनगर की एक महिला से युवती की मुलाकात हुई। युवती को नौकरी दिलाने का झांसा देकर वह महिला अपने साथ ले आई। महिला ने युवती पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया। इनकार करने पर युवती को एक कमरे में बंद कर दिया।
• 28 नवंबर 2012 को हाथरस में आए एक मामले में शालिनी ने धर्म बदलकर बबलू नाम के एक मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया। मिस्ड कॉल के माध्यम से दोनों की पहचान बढ़ी और रोजाना घंटों बातें होने लगी। 21 जुलाई 2012 को बबलू ने शालिनी को हाथरस आने को कहा। हाथरस पहुंचने पर बबलू ने उसका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कर लिया। स्कूली दस्तावेजों के अनुसार शालिनी अभी बालिग नहीं हुई थी। पांच माह बाद नवंबर में उन दोनों ने कोर्ट में सरेंडर किया था।
• उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में 12 जनवरी 2013 को एक मामले में बाहल गांव में कुंती देवी उर्फ सकीना का शौहर उसे छोड़कर भाग गया था। चंडीगढ़ में एक निजी कंपनी में काम करने के दौरान कुंती शफी मोहम्मद के संपर्क में आई थी। 10 अगस्त 2012 को कुंती ने धर्म बदलकर अपना नाम शकीना रख, शफी से निकाह कर लिया था।
• 22 अप्रैल 2013 को बड़ौत के छपरौली थाना क्षेत्र के सिनौली गांव में एक युवती को अगवा कर धर्म परिवर्तन कराया गया। पीडि़त परिवार के अनुसार उसकी बेटी को करीब दो माह पहले उसे गांव का एक मुसलमान लड़का अगवा कर ले गया था। ग्रामीणों के पूछताछ में उसने बताया कि युवती का धर्म परिवर्तन कराकर उसने निकाह कर आगरा में रह रहे हैं।
• 3 मार्च 2012 को राजस्थान के हनुमाननगर के सलीम मोहम्मद ने कोटा की एक युवती का धर्म परिवर्तन कर, उससे निकाह कर लिया। अब वे गुडग़ांव के राजीव नगर में रहते हैं।
• 09 अप्रैल 2013 को हरियाणा के पलवल से एक मुसलमान युवक युवती को भगाकर दिल्ली लाया। दिल्ली के जामियानगर में लड़की का धर्म परिवर्तन कराने के बाद उसने निकाह कर लिया। 17 अप्रैल को दोनों ने अदालत से सुरक्षा मांगी और एस.पी. गर्ग की अदालत के निर्देश पर दोनों को सुरक्षा देने का निर्देश दी गई। इस मामले में लड़की नाबालिग थी।
• गिद्दी थाना क्षेत्र के पछाड़ी के तीन बच्चों के पिता जमरुद्दीन अंसारी ने चाईबासा की विधवा से धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कर लिया। इस दौरान सिसिलिया धर्म परिवर्तन के बाद फातिमा खातून बन गयी। बाद में अंसारी ने महिला को छोड़ दिया। 05 मई 2013 महिला गिद्दी थाना न्याय के लिए पहुंची।
• मुजफ्फरपुर में एक युवक ने अपनी सहपाठी विवेका से निकाह कर लिया था। धर्म परिवर्तन के बाद विवेका जुनेबा बन गयी। आरिफ और विवेका डीएवी कॉलेज में एमएससी में साथ पढ़ते थे। शिव सैनिकों द्वारा धर्मांतरण का मुद्दा उठाने के बाद अदालत ने छात्रा को उसकी मां के हवाले कर दिया था।
• 17 मई 2011 को जयपुर में एक मुसलमान लड़के ने एक शादीशुदा महिला को प्रेम-जाल में फंसाकर निकाह कर लिया। निकाह से पहले उसने महिला का धर्मांतरण कराया। महिला पिछले एक माह से डूंगरपुर जिला स्थित अपने ससुराल से लापता थी। जयपुर के एक हॉस्टल में रहकर एसटीसी की तैयारी कर महिला का त्रिवेणी नगर में कांच का काम करने वाले यूपी निवासी युवक से उसके प्रेम संबंध हो गए।
• 29 जनवरी 2010 को मुजफ्फरनगर में एक युवती ने आग लगाकर इसलिए आत्म हत्या कर ली, क्योंकि धर्म परिवर्तन करने के कारण उसे आत्मग्लानी होने लगी थी। मुजफ्फरनगर जिला के कैराना क्षेत्र के गांव अकबरपुर सुनहैटी की इस लड़की को एक मुस्लिम युवक ने प्रेम के जाल में फंसा रखा था। युवती निकाह के लिए अपना धर्म बदलकर हिंदू से मुसलमान बन गयी थी। धर्म बदलने की आत्मग्लानी और ससुराल वालों के व्यवहार से तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली।
• 24 नवंबर 2012 को कोटद्वार के भाबर क्षेत्र के जशोधरपुर से लापता युवती धर्म परिवर्तन करने के बाद एक मुस्लिम युवक से निकाह कर वापस लौटी। 6 नवंबर को लापता हुई युवती के परिजनों ने 7 नवंबर को कोतवाली पुलिस में बेटी की अपहरण की तहरीर दी थी। लेकिन अपहरण का मामला दर्ज करने के बजाय पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। युवती के पास से मिले दस्तावेज में 8 नवंबर को धर्म परिवर्तन और 20 नवंबर को दानिश पुत्र इरशाद के साथ निकाह की बात कही गई है। न्यायालय द्वारा युवती को नारी निकेतन, देहरादून भेज दिया।
• नासिक में 2 जुलाई 2012 को 16 वर्षीया एक किशोरी ने प्रेमी के साथ मिलकर अपनी मां की हत्या कर दी। किशोरी की विधवा मां असलम शेख से उसकी शादी करने के खिलाफ थी।
• मेरठ के बहुचर्चित प्रीति हत्याकांड में प्रीति के पिता ने ही उसकी हत्या कर दी थी। आइएएस बनने का ख्वाब देखने वाली प्रीति का शाकिब नाम के एक लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसका विरोध उसके पिता कर रहे थे।

 

सुधीर गहलोत

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