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प्यार के नाम पर साजिश है लव जिहाद

सदियों से मुस्लिम देशों की कोशिश भारत जैसे काफिर (दार-उल-हर्ब) देश को सैन्य विजय के जरिए मुस्लिम देश में बदलने की रही है। हिंदू शासकों ने इन चुनौतियों का सामना किया और इसका अंत देश के खूनी बंटवारे में हुआ। आज भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र ने इस्लाम फैलाने की राहें और आसान कर दी हैं। मुसलमान अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं। इस जन सांख्यिकीय युद्ध में मुस्लिम कोख सबसे ताकतवर हथियार के रूप में सामने आयी है। एक गैर-मुस्लिम स्त्री के इस्लाम स्वीकार करने का सीधा मतलब है एक गैर मुस्लिम कोख का मुस्लिम कोख में बदलना और ज्यादा जिहादी पैदा करना। इसलिए संक्षेप में ‘लव जिहाद’ एक ऐसी योजना है, जिससे हिंदू एवं गैर-मुस्लिम लड़कियों को झूठे प्रेम में फंसाने, फिर इस्लाम स्वीकार करने को मजबूर करने और मुस्लिम बच्चा पैदा करने का जरिया बनाने का काम किया जा रहा है।

सदियों से हिंदू जैन, बौद्ध, सिख, आदि इस्लाम और ईसाई धर्म स्वीकार करते आए हैं। ज्यादातर मामलों में ये धर्मांतरण जबरिया हुए। कुछ ने दृढ़ विश्वास की वजह से अपना धर्म बदला तो कुछ ने हिंदू जातिवादी व्यवस्था के उत्पीडऩ से तंग आकर उससे बचने के लिए या सत्ताधारी वर्ग के धर्म को अपनाकर फायदा लेने के लिए ऐसा किया। यह माना हुआ तथ्य है कि भारत में तलवार के बूते इस्लाम फैला।

सदियों से मुस्लिम देशों की कोशिश भारत जैसे काफिर (दार-उल हर्ब) देश को सैन्य विजय के जरिए मुस्लिम देश (दार-उल-इस्लाम) में बदलने की रही है। हिंदू शासकों ने इन चुनौतियों का सामना किया और इसका अंत देश के खूनी बंटवारे में हुआ। आज भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र ने इस्लाम फैलाने की राहें और आसान कर दी है। मुसलमान अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं। इस जन सांख्यिकीय युद्ध में मुस्लिम कोख सबसे ताकतवर हथियार के रूप में सामने आयी है। एक गैर-मुस्लिम स्त्री के इस्लाम स्वीकार करने का सीधा मतलब है एक गैर मुस्लिम कोख का मुस्लिम कोख में बदलना और ज्यादा जिहादी पैदा करना। इसलिए संक्षेप में ‘लव जिहाद’ एक ऐसी योजना है जिससे हिंदू एवं गैर-मुस्लिम लड़कियों को झूठे प्रेम में फंसाने, फिर इस्लाम स्वीकार करने को मजबूर करने और मुस्लिम बच्चा पैदा करने का जरिया बनाने का काम किया जा रहा है।

इस्लाम का अंतिम लक्ष्य है पूरी दुनिया को दार-उल-इस्लाम में बदलना और इस लक्ष्य की पूर्ति हर दार-उल-हर्ब का धर्म परिवर्तन करना है। यह काम जन सांख्यिकीय प्रतिरूप को बदल कर या मूल आबादी से मुस्लिम आबादी को बढ़ा कर ही किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दो फायदे हैं। इससे मुस्लिम आबादी के तेजी से बढऩे में मदद मिलती है और, यह गैर-मुस्लिम मूल आबादी की वृद्धि को कुंद कर देती है।

एक संगठित अभियान के तहत युवा मुसलमान जानबूझ कर विभिन्न धर्मों की महिलाओं को शादी करने के लिए पहले सम्मोहित कर इस्लाम में उनका धर्मांतरण कर देते हैं। इस कथित योजना को ही ‘लव (मुहब्बत) जिहाद’ का नाम दिया गया है। वर्ष 2008 में सबसे पहले यह दक्षिणी भारत के राज्य केरल में सामने आया। उसके बाद पड़ोसी राज्यों में फैला। अब यह पूरे देश में हो रहा है।

दक्षिण भारत के राज्य केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में जब बेटियां स्कूल या कॉलेज में पढऩे के लिए घर से बाहर निकलती हैं, तो उनके माता पिता बेहद चिंतित एवं डरे रहते हैं, भले ही वे छात्रावास में रहती हों या घर से स्कूल आती जाती हों।

विकिलीक्स ने 30 अगस्त, 2011 को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसका शीर्षक था ‘दक्षिण भारत में कथित लव जिहाद की वजह से धार्मिक तनाव भड़का’। यह रिपोर्ट 26 जनवरी 2010 को चेन्नई में अमेरिकी कंसुलेट से अमेरिकी विदेश मंत्री को वाशिंगटन भेजी गई थी।

इसलिए भारत के सामने चुनौती बने मुस्लिम आतंकवाद के कठोर जिहाद और अहिंसकों के गुप्त जिहाद की कड़ी में अब लव जिहाद को जोड़ा जा सकता है। इस्लामी आक्रमण के इस सबसे ताजा किस्म का प्यार से कोई लेना देना नहीं है। इसके दूसरी किस्मों की तरह यह भी नास्तिकों और इस्लाम को नहीं मानने वालों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए ही है। लड़कियां धोखे से इस जाल में फंसती हैं और अनजाने में मुस्लिम कट्टरवादियों और आतंकवादी संगठनों के हत्थे चढ़ जाती हैं।

भारत के सामने चुनौती
यह समस्या सबसे ज्यादा केरल में है। अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार केरल से 2167 (2007), 2530 (2008), 2909 (2009), 3232 (2010), 3678 (2011) और 4310 (2012) लड़कियां लापता हुई हैं। इन लड़कियों में से 3600 के बारे में पुलिस और जांच एजेंसियों को कोई जानकारी तक नहीं है। अगर इस तथ्य को ध्यान में रखा जाए कि ये आंकड़े सिर्फ उन मामलों के हैं जो दर्ज हुए हैं, तो वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होगी। छोटे शहरों और गांवों में सामाजिक कलंक लगने के भय से कई मामले रिपोर्ट ही नहीं होते। अधिकतर हिंदू माता पिता के लिए इस बात का खुलासा करना बेहद अपमानजनक होता है कि उनकी लड़की को एक मुसलमान लड़के से प्यार हो गया है और वह उसके साथ भाग गई। माता पिता बिरले ही पुलिस में शिकायत करते हैं, क्योंकि भागने वाली वयस्क होती हैं और उनके फैसले को कानूनी रूप से चुनौती नहीं दी जा सकती है। पारिवारिक सम्मान जैसे दबाव भी माता पिता को अपनी लड़कियों को उनके भाग्य पर छोड़ देने को मजबूर करते हैं। और उस भाग्य का रास्ता सीधे नरक में खुलता है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केरल में हर दिन औसतन 8 लड़कियां के संदेहास्पद स्थितियों में गायब होने की रिपोर्ट दर्ज हो रही है और यही है लड़कियों के माता पिता की बढ़ती चिंता एवं डर का कारण। केरल में लड़कियों के लापता होने की घटनाओं में अचानक वृद्धि हो गई है। केरल कैथॉलिक बिशप काउंसिल के अनुसार केरल में 8500 लड़कियों को निशाना बनाया गया, वहीं दूसरी तरफ हिंदू जन जागृति समिति ने दावा किया है कि सिर्फ कर्नाटक में 30,000 लड़कियों का धर्मांतरण किया गया है।

जिहादी रोमियो भोली भाली लड़कियों से वादा करते हैं कि अगर उन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया, तो वे उनसे 6 महीने के भीतर शादी कर लेंगे। इसके बाद उन्हें धर्मांतरण केंद्रों में ले जाते हैं और उन्हें वहां झोंक देते हैं। इन धर्मांतरण केंद्रों में इन लड़कियों को कई सप्ताह तक कथित रूप से सताया जाता है। कोच्चि, कोझिकोड जैसे सुनसान तटीय इलाकों से ये लड़कियां पानी के जहाज से मैंगलूर, गोवा, चेन्नई और लक्षद्वीप भेज दी जाती हैं, जहां से उन्हें विदेश ले जाया जाता है। कई लड़कियां खाड़ी देशों में भेज दी जाती हैं। बहाना यह बनाया जाता है कि वहां उन्हें नौकरी मिलेगी और जैसे ही वे वहां पहुंचती हैं उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता है।

कथित जिहादी रोमियो महिला कॉलेजों और छात्रावासों के आसपास चक्कर मारते हैं। वे कीमती मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आते हैं। फैशनबल जवां मर्द जैसा उनका हुलिया होता है और वे लेटेस्ट फैशन के कपड़े पहने रहते हैं। वे छोटे शहरों की भोली-भाली लड़कियों से दोस्ती करते हैं। गिरोह के सदस्य इस मिशन के लिए उन्हें मुफ्त मोबाइल फोन, बाइक और फैशनबल ड्रेस मुहैया करते हैं। कॉलेज की छात्राएं एवं कामकाजी लड़कियां इनके निशाने पर रहती हैं। लड़कियों को फुसलाने के लिए इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग साइटों का भी प्रयोग किया जाता है।

सिनेमा में लव जेहाद
बॉलीवुड और दक्षिण भारत का फिल्म उद्योग लव जिहाद में सहयोग देता है। बॉलीवुड में मुस्लिमों का बोलबाला है। सैफ अली खान ने अमृता सिंह से शादी की और 2 बच्चे होने के बाद उसे तलाक दे दिया। फिर करीना कपूर पर डोरे डालने के बाद पिछले साल उससे शादी कर ली। आमिर खान ने वर्ष 1986 में अपने बचपन की प्रेमिका रीणा दत्त से शादी की और उसके 2 बेटों के साथ छोड़ कर 2005 में किरण राव से शादी कर ली। शाहरुख खान ने एक हिंदू लड़की गौरी छिब्बर से शादी की। सोहैल खान की शादी सीमा सचदेव से हुई है। अरबाज खान की पत्नी मलाइका अरोड़ा है। फरदीन खान ने नताशा माधवानी से शादी की है और इमरान हाशमी ने परवीन साहनी से। सलमान खान का गैर मुस्लिम हीरोइनों के साथ चक्कर चलता रहा है। सलमान खान का ऐश्वर्या राय के साथ गर्मागर्म प्यार रह चुका है।

अभी बॉलीवुड में दो ही मुस्लिम हीरोइनें हैं, कैटरीना कैफ और सोहा अली खान, जो उभर कर सामने आई है। दोनों मिश्रित खून वाली है। मुमताज, सायरा बानो, वहीदा रहमान, नरगिस, जीनत अमान, परवीन बाबी के दिल लद गए हैं। डी कंपनी, का बॉलीवुड में बड़ा दांव लगा है, उसने धर्म के नाम पर बॉलीवुड में मुस्लिम लड़कियों का प्रवेश वर्जित कर रखा है।

पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने अपनी पत्नी नौरीन को तलाक दे दिया, अभिनेत्री और पूर्व मिस इंडिया संगीता बिजलानी से शादी कर ली। मलयालम, तमिल, कन्नड और तेलुगु फिल्म उद्योग में ऐसे कई उदाहरण हैं।

इन जिहादी रोमियो को अधिक से अधिक भोली भाली लड़कियों को फंसाने की इस योजना को अंजाम देने के एवज में विशेष दर्जा मिलता है, इनाम मिलते हैं और पैसे मिलते हैं। कोझिकोड ला कॉलेज का एक पूर्व छात्र जहांगीर रजक एक ऐसा ही जिहादी रोमियो है। बताया जाता है कि वह अबतक 42 लड़कियों को अपने जाल में फंसा चुका है। लड़की को फांसने में सफल होने, उससे शादी करने, उसका धर्मांतरण कराने एवं उसे गर्भवती बनाने के एवज में लड़कों को एक-एक लाख रुपए तक दिए जाते हैं। इन लड़कों को संचालित करने वाले गिरोह के सदस्य कालेजों में दाखिला खत्म होने के बाद अक्सर लड़कियों की सूची हासिल कर लेते हैं, फिर वैसी हिंदू और ईसाई लड़कियों की पहचान की जाती है, जिन्हें आसानी से फुसलाया जा सके और जिनका मत परिवर्तन किया जा सके। तरीका वही आम होता है- उन्हें आइसक्रीम पार्लर ले जाना, पब, मॉल ले जाना, घूमने बाहर ले जाना, तोहफा देना व घुमाना, धीरे धीरे उनका भरोसा जीतते ही उनका शोषण शुरु कर देना। हर जिले का अपना क्षेत्रीय चेयरमैन होता है, जो मिशन पर नजर रखता है। ऐसी लड़कियों की टोह लेने के मिशन में अक्सर मुस्लिम महिलाओं का प्रयोग होता है।
अगर इस काम के लिए भर्ती किया गया युवक धर्मांतरण की हुई लड़की से शादी कर लेता है, तो उसे कम से कम 4 बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। धर्मांतरण के जरिए प्रतियोगी धर्म से प्रजनन क्षमता छीन ली जाती है और उसकी जगह मुस्लिम जन सांख्यिकी संरचना को बढ़ाने का काम होता है। केंद्रीय जांच एजेंसियों को सूचना मिली है कि पूरे भारत में जिन 10,000 लड़कियों का धर्म, लव-जिहाद के तहत बदला गया है, उनमें से कई को पाकिस्तान और सउदी स्थित आतंकवादी संगठनों द्वारा जिहादी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित
किया जा रहा है। उनका प्रयोग हथियारों, विस्फोटकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने एवं नकली मुद्रा के कूरियर के रूप में हो रहा है। देश के विभिन्न शहरों के रेड लाइट क्षेत्रों (वेश्यावृत्ति के इलाकों) में पुलिस छापे में जो मुस्लिम लड़कियां मिली हैं, वे मुस्लिम धर्म अपनाने वाली हिंदू लड़कियां हैं।

वर्ष 2009 में एक घटना हुई, जिसने केरल के निवासियों को स्तब्ध कर दिया। वह थी अंबलपुझा में तीन लड़कियों की आत्महत्या। इन आत्महत्याओं के पीछे लव जिहाद कारण बताया गया। उन्हें अपने दो मुस्लिम सहपाठियों की प्रताडऩा से परेशान होकर आत्महत्या करनी पड़ी। केरल के मुस्लिम अतिवादी संगठन एनडीएफ से उनके संबंध भी बताए गए।

बोस्टन बम विस्फोट
बोस्टन बम विस्फोट में मारे गए बॉम्बर टेमरलेन टसरनेव की पत्नी कैथरिन रसेल का कहना है कि अपने पति की इस योजना से भान तक नहीं था, 15 अप्रैल के बोस्टन मैराथन बम विस्फोट को लेकर वह एकदम अंधेरे में थी। यह लव जिहाद का जीवंत मामला है। उसके कट्टर धार्मिक पति ने पूरी तरह से अमेरिकी मूल की लड़की के मत को बल पूर्वक बदल दिया था। कैथरीन रसेल रोड आइलैंड के नार्थ किंग्सटाउन के ईसाई परिवार में पली बढ़ी थी और इस्लाम अपनाने तक नियमित रूप से गिरिजाघर जाती थी। आज वह इस्लाम और कुरान के सिद्धांतों को मानती है।

रसेल की मुक्केबाज टसारनेव से मित्रों के जरिए मुलाकात हुई थी। तब वह बोस्टन के सफौक यूनिवर्सिटी में पढ़ रही थी। उनकी शादी 21 जून 2010 को हुई। उसकी पूर्व सह पाठी कहती है- ‘हममें से किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इतनी कम उम्र में शादी कर लेगी, कालेज छोड़ देगी, उसे बच्चा हो जाएगा, वह अपना धर्म बदल लेगी या जो कुछ हुआ उसका हिस्सा बनेगी।

रसेल को बुरी तरह पीटने के जुर्म में टसारनेव को 2009 के जुलाई महीने में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में रसेल ने पुलिस से कहा कि वह बहुत अच्छा लड़का है। रसेल घरों में जाकर स्वास्थ्य कर्मी का काम करती थी। इस दौरान टसारनेव अपनी छोटी बिटिया की देख भाल करता था। अपने पति के दोहरे जीवन को लेकर रसेल पूरी तरह अनभिज्ञ थी। दरअसलए उसे अपने पति की मौत की जानकारी भी टेलीविजन से मिली।

पुलिस की विशेष शाखा ने जांच शुरु की। इस तरह की सबसे ज्यादा शादियां मल्लपुरम, कोझिकोड और कासरगोडे इलाकों में होने की बात सामने आई। केरल के आलावा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, उड़ीसा और असम भी ऐसे राज्य हैं, जो इन इस्लामी फासीवादियों के निशाने पर हैं। ऐसी ही घटना के सामने आने पर भुवनेश्वर की बाहरी सीमा पर स्थित पिपली में लगभग दंगे जैसी स्थिति पैदा हो गई। तुष्टीकरण नीतियों का सहारा लेने वाली राजनीतिक पार्टियां इन सभी मामलों पर पर्दा डालने की कोशिश करती हैं।

वर्ष 2010 में केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंद ने आरोप लगाया था कि पॉप्यूलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) नामक संगठन ने पैसे और शादियों के बल पर अगले 20 साल में केरल के इस्लामीकरण की योजना बनाई है। आरोप है कि एक कालेज लेक्चरर पर तालिबान शैली के हमले के पीछे इसी संगठन का हाथ था। नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में और बाद में विधानसभा के भीतर अच्युतानंदन ने स्वीकार किया कि राज्य में कुछ ऐसे तत्व हैं, जो दूसरे धर्मों के युवाओं को प्रभावित कर और उन्हें पैसा देकर धर्म बदलवाते हैं। मुस्लिम लड़कियों से उनकी शादी करा कर मुस्लिमों की संख्या बढ़ाने की जुगत में लगे हुए हैं। एक तरह से उन्होंने केरल उच्च न्यायालय की चिंता को पुख्ता ही किया हैं। न्यायालय ने 2009 के अगस्त महीने में पुलिस को यह पता लगाने का आदेश दिया था कि क्या राज्य में प्यार और पैसे के बल पर लड़कियों को धर्मांतरण कराने के लिए फुसलाने का कोई संगठित धंधा चल रहा है।

केरल उच्च न्यायालय ने यह आदेश उन दो लड़कियों द्वारा आरोप लगाने के बाद दिया था, जिन्हें पुलिस ने मुक्त कराया था। इन लड़कियों ने स्वीकार किया था कि उन्हें मुस्लिम युवकों ने फुसला लिया था और बाद में जिहादी साहित्य पढ़ाने एवं यौन शोषण करने की कोशिश की थी। जज ने मामले की जांच करने का आदेश दिया था, जिसका मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया। विश्व हिंदू परिषद और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल, दोनों ने पाया कि इन आरोपों में दम है और उन्होंने स्थिति का अपना आकलन पेश किया। इसका मुकाबला करने के लिए दोनों ने हाथ भी मिलाए। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह संकेत मिला कि मुसलमान युवकों के प्यार की गिरफ्त में आने के बाद लड़कियों को धर्म बदलने के लिए फुसलाने की एक सुनियोजित योजना काम कर रही है। लेकिन जांच लंबी खिंचने लगी और अंत में मामला दब गया।

दीपा बनी शाहिना
भारतीय ईसाइयों ने 2012 के अक्टूबर में यह पत्र जारी किया था भोली भाली लड़कियों को मुस्लिम युवक बहका कर मुसलमान बनाते है फिर आतंकवादी गतिविधियों में उनका उपयोग करने के लिए उनसे शादी करते हैं। भारत के ईसाई इस प्रवृति की निंदा करते हैं। ऐसी घृणास्पद घटना का ताजा मामला केरल के कोच्चि की शादीशुदा ईसाई महिला का है। उस महिला ने खाड़ी के एक देश में काम करने वाले अपने पति को छोड़ दिया और मुस्लिम ड्राइवर से शादी कर ली इस तरह वह उसकी आतंकवादी गतिविधियों में भागीदर बन गई।

कोच्चि पुलिस ने उस महिला को लश्कर-ए-तैयबा के जेल में बंद कथित सदस्य नाजिर को सिम कार्ड सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया। इस महिला का मूल नाम दीपा चेरियन था, लेकिन लव जिहाद के जरिए इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद, उसने अपना नाम शाहीना रख लिया। केरल के अलूवा में एक स्कूल के ड्राइवर नौशाद के साथ दीपा प्रेम करने लगी। नौशाद को पुलिस ने बेहोश करने की दवा के 3000 एम्पुल के साथ गिरफ्तार किया। नौशाद के कहने पर पहचान का कोई दस्तावेज दिए बगैर वोडाफोन के एक सेल्स एक्जक्यूटिव से शाहिना ने मोबाइल फोन के दो कनेक्शन चालू कराए। खुफिया एजेंसियों को पता चला कि इन सिम कार्ड में विदेशों से कॉल आ रहे हैं तब उन्होंने जांच शुरु की। जांच के बाद इन सिम कार्डों के तार एर्णाकुलम उप जेल से जुड़े। पुलिस ने सेल्स एक्जक्यूटिव को गिरफ्तार किया। शाहिना कहीं छिप गई। शाहीना और नौशाद कुछ समय के लिए बांग्लादेश की सीमा से सटे मुर्शीदाबाद में रहे थे। संभवत: वहां उन्हें आतंकवादी गतिविधियों की ट्रेनिंग मिली थी।

केरल में कैथोलिक चर्च ने इस समस्या को बेहद गंभीरता से लिया है। 2006 से 2009 के बीच केरल में 2868 महिलाएं लव जिहाद की शिकार बनी है।

गर्मागर्म बहस
हाल में घटी लगातार कई घटनाओं के बाद लव जिहाद पर एक बार फिर गर्मागर्म बहस शुरु हो गई है। वर्ष 2011 के 25 जून को केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने विधान सभा को जानकारी दी कि राज्य में 2006 से अब तक 2667 युवतियों का इस्लाम में धर्मांतरण हुआ है। उन्होंने सीपीए विधायक के. के. लतिका के एक गैर तारांकित प्रश्न के उत्तर में धर्मांतरण से संबंधित आंकड़े दिए थे। मुख्यमंत्री के अनुसार 2006-12 के दौरान 7713 लोगों ने इस्लाम धर्म अपनाया। इस अवधि में हिंदू धर्म में सिर्फ 2803 लोगों का धर्मांतरण हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास यह आंकड़ा नहीं है कि इस दौरान धर्म परिवर्तन के जरिए कितने लोग ईसाई बने। वर्ष 2009-2012 के बीच जो लोग मुसलमान बने, उनमें 2667 युवतियां थीं। इनमें 2195 हिंदू थीं और 992 ईसाई थीं। इस अवधि में जो मुस्लिम युवतियां ईसाई और हिंदू बनी, उनकी संख्या क्रमश: 79 और 2 थीं।

27 जून को राज्य के उच्च न्यायालय ने कोझिकोड नगर पुलिस को आदेश दिया कि वह लव जिहाद के उस कथित मामले की जांच करे, जिसमें कोच्चि के एक अस्पताल से 20 साल की एक हिंदू लड़की एक मुस्लिम लड़के के साथ भाग गई। कोर्ट ने लड़की के माता पिता द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने के बाद यह आदेश दिया।

गिरिजाघर आयोग ने सभी गिरिजाघरों और उनसे संचालित शैक्षिक संस्थानों में दिशा निर्देश दिया है कि वे छात्राओं को बचाने के लिए माता-पिता और शिक्षकों का सहयोग करें। आयोग ने माता पिता और शैक्षिक संस्थानों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। आयोग चाहता है कि माता पिता बच्चों को मोबाइल फोन का प्रयोग करने एवं लंबे समय तक नेट पर समय बिताने को हतोत्साहित करें।

पुलिस अधिकारी कहते हैं कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि कहीं ‘लव जिहादी’ किसी अंतरराष्ट्रीय गिरोह या आतंकवादी संगठन से जुड़े तो नहीं हैं। लेकिन लश्कर-ए- तैयबा ने अपने काडरों को निर्देश दिया है कि भारत में हमलों को अंजाम देने के लिए वे महिलाओं से संबंध गांठना शुरु करें।

मुकदमा
7 अप्रैल 2013 को कर्नाटक के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री के. एस. ईश्वरप्पा ने शिमोगा में एक आम सभा में कहा कि कई युवा हिंदू लड़कियां लव जिहाद की शिकार बनी हैं। मुस्लिम युवकों ने हिंदू लड़कियों को फुसलाया और उनका शोषण करने के बाद उन्हें छोड़ दिया। बैंगलूर से 280 किलोमीटर दूर श्री ईश्वरप्पा के गृह शहर शिमोगा में उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला यह आरोप लगाते हुए दर्ज किया गया है कि उनके भाषण से दो समुदायों के बीच नफरत पैदा हुई है।
इस्लाम के अनुसार मुस्लिम महिलाएं अगर हिजाब का अनुसरण करती हैं और बुर्का पहनती हैं तो पाक हैं, लेकिन दूसरे धर्मों की महिलाएं आसान शिकार हैं जिन पर आनंद के लिए या धर्म परिवर्तित करने के लिए निशाना साधा जा सकता है। फ्रांस और ब्रिटेन तक में चुप रहने की संस्कृति ने अपराधी दलाल गिरोहों के हाथों सैकड़ों लड़कियों के शोषण का रास्ता आसान किया है। इन दलाल गिरोहों में ज्यादातर मुस्लिम होते हैं। कट्टरवादी मुसलमानों पर यह आरोप लग रहा है कि वे हिंदू और सिख महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए ब्लैकमेल करते हैं।

गिरोह के सदस्य लड़कियों के परिवार वालों को यह बता देने की धमकी देते हैं कि उनका संबंध एक मुसलमान के साथ है। बताया जाता है कि कुछ लड़कियों को मादक पदार्थ खिलाकर उनके अश्लील फोटो ले लिए जाते हैं। फिर बदनाम होने के डर से लड़कियों को हर बात माननी पड़ती है। उन्हें अपने माता-पिता की बेइज्जती और समाज से बहिष्कृत होने को लेकर बेहद डरी होती हैं।

रूस से टूटे हुए मुस्लिम गणतांत्रिक देशों में वेश्यावृत्ति फूलता फलता उद्योग है, जिसमें खासी कमाई होती है। कुछ गिरोह यहां से पूरी दुनिया में लड़कियां भेजते हैं। खुद दिल्ली में उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान आदि देशों से आई 30 से अधिक लड़कियां तिहाड़ जेल में बंद हैं। हवाई जहाज के जरिए उड़ान भर कर धंधे करने वाली ऐसी वेश्याएं, ज्यादातर एचआईवी संक्रमण की शिकार होती हैं, ये सप्ताहांत के लिए चार्टर्ड फ्लाइट से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आती हैं।

धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी हलके में लव जिहाद का नाम लीजिए तो पुराने अंदाज में आपका मजाक उड़ाया जाएगा। कोई धर्मनिरपेक्षता की चाहे कितनी ही बहस चला ले, यह रुकने वाला नहीं है। अब तक यह सब गैर-शादीशुदा हिंदू महिलाओं तक ही सीमित थे, लेकिन केरल में नई घटनाएं होने लगी हैं, जिनमें विवाहित महिलाए अपने पतियों और बच्चों को छोड़ कर भाग रही हैं।

भारत रक्षा मंच के संयोजक सूर्यकांत केलकर ने कहा है कि आने वाले दिनों में लव जिहाद भारत के कई राज्यों में एक बड़ी समस्या बनने वाला है। यह मंच सभी राज्यों से आंकड़े जुटा रहा है। उसके बाद वह राज्य सरकार को इस संकट से निबटने के लिए उपयुक्त कानून बनाने एवं उन्हें लागू करने का दबाव बनाएगा।

लव जिहाद एक तरह जन सांख्यिक आक्रमण है। गुप्त जिहाद की तरह ही यह धोखाधड़ी का सहारा लेता है और दुनिया पर इस्लाम का दबदबा स्थापित करने के लिए इसे एक उपयोगी तरीके के रूप में देखा जाता है। पश्चिमी समाजों में गुप्त जिहाद इस्लामी लक्ष्य हासिल करने के लिए राजनीतिक सक्रियता का सहारा लेता है। मंच द्वारा उठाए जा रहे कदमों से उन हिन्दू महिलाओं को ज्यादा सांत्वना नहीं मिलने वाली है, जिनका कीमती जीवन नष्ट हो चुका है। इस नए तरह के धर्म युद्ध की बलि वेदी पर महिलाएं चढ़ती रहेंगी।

 अनिल धीर

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