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मधुमेह – स्वस्थ रहें जटिलताओं से बचें

जीवन-शैली में आक्रामक परिर्वतन कर हम औषधियों के सेवन तथा उनकी मात्रा में कमी कर सकते हैं तथा मधुमेह रोग की तुरंत पहचान कर शीघ्र उपचार द्वारा इस रोग से उत्पन्न जटिलताओं को टाला जा सकता है।

मधुमेह एक दीर्घकालीन जीवन-शैली रोग है। आज मधुमेह से उत्पन्न जटिलताओं का उपचार सहज ही संभव है। फिर भी लगभग 80 प्रतिशत मधुमेह के रोगी, हृदय रोग (दिल के दौरे) के कारण मौत का शिकार हो जाते हैं। अधिकतर मधुमेह के रोगियों को इस प्राणघातक दिल के दौरे की जानकारी होते हुए भी वे सावधनी नहीं बरतते। जीवन-शैली में आक्रामक परिर्वतन कर हम औषधियों के सेवन तथा उनकी मात्रा में कमी कर सकते हैं तथा मधुमेह रोग की तुरंत पहचान कर शीघ्र उपचार द्वारा इस रोग से उत्पन्न जटिलताओं को टाला जा सकता है, अर्थात् अतिशीघ्र कदम उठाकर रोग पर पूर्ण निंयत्रण संभव है। इसमें ग्लूकोज की मात्रा सामान्य रखने पर नेत्र, गुर्दे, तंत्रिका, स्नायु तंत्र की जटिलताओं पर नियंत्रण रखा जा सकता है, किंतु हृदय रोग एवं पक्षाघात की जटिलताओं से नहीं बच पाते। यदि हम रक्तचाप एवं कोलेस्ट्राल पर नियंत्रण रख लें, तो दिल के दौरे एवं पक्षाघात से रक्षा हो सकती है।
मधुमेह के रोगीयों को हृदय रोग से बचाव के लिए तीन मुख्य सावधानी बरतनी चाहिए-
1. एचबी, एसी नियंत्रण
2. रक्तचाप नियंत्रण
3. कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण

उपरोक्त तीनों लक्ष्य जीवन-शैली, आचार-विचार, आहार-विहार (शारीरिक परिश्रम) तथा उपयुक्त औषधियों के सेवन से संभव है, किंतु विडंबना तो यह है की केवल 7 प्रतिशत मधुमेह के रोगी ही तीन लक्ष्यों तक नियंत्रण कर पाते हैं, अर्थात उच्च रक्तचाप 130/68 mm Hb, (1) L 100 मिगफ, एचबी एसी 6.5 से कम। मधुमेह के रोगियों को अपने डॉक्टर से परामर्श कर उपरोक्त लक्ष्य को हासिल करना चाहिए। इस प्रकार हृदय रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं –

हृदय रोग प्राथमिक बचाव एस्प्रिन एवं अन्य दवाएं
• 1 प्रतिशत एचबी एसी घटने से मधुमेह जटिलताओं में कमी
• 2 प्रतिशत मधुमेह जटिलताओं में कमी
• 21 प्रतिशत मधुमेह से होने वाली मृत्युदर की कमी
• 14 प्रतिशत दिल के दौरे में कमी
• 24 प्रतिशत हृदय रोग की जटिलताओं में कमी (पुरूषों में)
• 28 प्रतिशत हृदय रोग की जटिलताओं में कमी (महिलाओं में)
• 37 प्रतिशत नेत्र, गुर्दे स्नायु की जटिलताओं में कमी

प्रभावी उच्च रक्तचाप नियंत्रण
मधुमेह के लगभग 60 प्रतिशत तक रोगियों को उच्च रक्तचाप भी रहता है तथा उन रोगियों में हृदय रोग एवं दिल के दौरे की संभावना दुगनी हो जाती है। मधुमेह के रोगियों में रक्तचाप 120/80 से कम होना चाहिए, जिससे पक्षाघात तथा मधुमेह से उत्पन्न मृत्युदर कम हो जाती है। मधुमेह के रोगियो को रक्तचाप पर नियंत्रण के लिए कम से कम दो या अधिक प्रभावी रक्तचाप औषधियों का सेवन करना पड़ता है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण
कोलेस्ट्रॉल की सामान्य मात्रा होने पर भी मधुमेह के रोगियों को हृदय रोग का खतरा तीन-चार गुना रहता है। अत: मधुमेह के रोगियों को हृदय रोग से बचने के लिए कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। अत: मधुमेह के रोगियों को आक्रामक एवं प्रभावी रूप से औषधियों एवं जीवन-शैली द्वारा –
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 70 से कम
एचडीएल रहित कोलेस्ट्रॉल 100 से कम
ट्राईग्लसराइड्स 130 से कम
एचडीएल कोलेस्ट्रॉल 60 से अधिक

एस्प्रिन औषधि का सेवन
यदि मधुमेह के रोगियों को एक से अधिक खतरे के कारक उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान पर नियंत्रण है तो उन्हें एस्प्रिन का सेवन अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद नियमित रूप से करना चाहिए, किंतु मधुमेह के हृदय रोग से ग्रस्त एक तिहाई रोगी तथा दो तिहाई रोगी, जिन्हें हृदय रोग की संभावना अधिक रहती है, क्योंकि उनमें खतरे के कारक हैं, फिर भी एस्प्रिन नहीं लेते।

प्रबल इच्छा शक्ति, दृढ़ संकल्प तथा जीवन-शैली में नियंत्रण परिर्वतन कर अपने डॉक्टर के परामर्श अनुसार औषधियों का सेवन कर मधुमेह का रोगी सामान्य जीवन व्यतीत कर स्वस्थ, सुखी एवं निरोग रह सकता है। चिकित्सक आपको दिशा-निर्देश दे सकता है। अपनी दशा रोगी स्वयं ही अपने आचरण, आचार-विचार, आहार एवं विहार से बदल सकता है।

 

डॉ. अनिल चतुर्वेदी

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