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ओबामा– नमो नम:

ओबामा– नमो नम:

By रंजना

‘मित्रों दुनिया के तमाम देशों में भारत का डंका बज रहा है।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस वक्तव्य को अब किसी की विश्वसनीयता की जरूरत नहीं है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि अमेरिका का कोई राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र दिवस में न केवल मेहमान है, बल्कि राष्ट्रपति के लिए तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) की परवाह किए बिना अमेरिका के बाहर किसी देश के कार्यक्रम में दो घंटे से अधिक समय तक खुले आसमान के नीचे बैठने के लिए तैयार हुआ है। इससे पहले जब मोदी अमेरिका में थे तो राष्ट्रपति ओबामा और प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार में सफर किया था। वाशिंगटन पोस्ट में ऑप-एड पेज पर दोनों शिखर नेताओं का संयुक्त लेख प्रकाशित हुआ था और इसकी पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो से दोनों नेता संयुक्त रूप से अपने ‘मन की बात’ कहेंगे।

विदेश नीति के जानकार इसे भारत-अमेरिका के बीच रिश्तों में गर्मजोशी से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि यूपीए सरकार के आखिरी दो साल में जिस तरीके से भारत-अमेरिका संबंधों में ठहराव आया था, वह दौर खत्म हो चुका है। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद विदेश नीति को काफी गंभीरता से लिया। प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में जहां सार्क देशों के शिखर नेताओं ने शिरकत की, वहीं चीन के राष्ट्रपति, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की यात्रा बड़ा संकेत दे रही है। इसे सिर्फ भारत और अमेरिका के रिश्तों तक समेटकर देखना छोटी बात होगी। वास्तव में इसका परिदृश्य व्यापक है। अपनी भारत यात्रा से पहले अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में सख्त संदेश दिया है। भारत विरोधी आतंकी संगठनों, लश्करे-तैय्यबा समेत अन्य को अमेरिका के खिलाफ आतंक की बंदूक उठाए हक्कानी समूह की श्रेणी में रखते हुए इनके विरुद्ध सख्त कदम उठाने का दबाव बनाया। मुंबई के आतंकी हमलों के गुनहगारों के खिलाफ कार्रवाही पर पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए अमेरिका ने भारत के साथ मित्रता, सहयोग और सामंजस्य का स्पष्ट संकेत दिया। कूटनीति के जानकारों का मानना है कि इसका क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक असर पडऩा तय है।

आज अमेरिका भारत के साथ संबंधों को उस स्तर पर लेकर जाने के लिए तैयार है जिसकी कभी कल्पना नहीं की जा सकती थी। सामरिक साझेदार देश होने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार विश्वसनीय स्वरूप ले रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इसे पांच गुणा तक बढ़ाने के पक्ष में हैं। वह विदेश नीति और संबंधों की बारीकी को समझते हैं। विदेशी निवेश की अहमियत भी पता है। इसे ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और आधारभूत संसाधनों को गति देने की कोशिश की है। इन कार्यक्रमों पर अमेरिका की कंपनियों की भी निगाह है। जानकार इन सबको एक अवसर के रूप में देख रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय में चल रही हलचल से इसके साफ संकेत हैं कि ओबामा की यात्रा के दौरान अमेरिका भारत के साथ साझा सहयोग को बढ़ावा देते हुए संयुक्त उद्यम के जरिए रक्षा क्षेत्र में साजो-सामान के निर्माण का कदम उठा सकता है। अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर के निर्माण अथवा विमान वाहक पोत के निर्माण को दिशा मिल सकती है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को अगले दस सालों के लिए बढ़ाने पर सहमति भी तय मानी जा रही है। मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ में रुचि लेते हुए राष्ट्रपति ओबामा इसकी तारीफ कर सकते हैं और अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश को बढ़ावा दे सकती हैं, खासकर वैकल्पिक उर्जा, सौर उर्जा के क्षेत्र में। अमेरिकी कंपनियां इस क्षेत्र में 100 अरब डॉलर के निवेश की इच्छुक हैं। देश में ऊर्जा के उत्पादन के क्षेत्र में और शिक्षा के क्षेत्र में भी संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। जलवायु परिवर्तन के मामले में अमेरिका भारत के साथ इस साल के अंत में पेरिस में होने वाली बैठक में सहयोगात्मक रुख अपनाने का संकेत दे चुका है। ऐसे में देश में इस चुनौती से निबटने के लिए तकनीक के आदान-प्रदान में सहयोग कर सकता है। इलाहाबाद, अजमेर और विशाखापत्तनम को स्मार्ट सिटी में बदलने के लिए अमेरिकी विशेषज्ञ पहल कर सकते हैं।

यात्रा को ‘मोदी टच’

राष्ट्रपति ओबामा के स्वागत में भारत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। अमेरिका की सीक्रेट सर्विस और सुरक्षा मामलों की राष्ट्रपति की एडवांस टीम की चिंताओं को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए। पहली बार भारत ने राजपथ पर गणतंत्र दिवस के लिए बनी परंपरा से हटकर अमेरिका के साथ रिश्ता निभाया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और ओबामा एक वाहन में राजपथ पर आने की बजाय अलग-अलग वाहन में आए। मेहमान राष्ट्रपति अपनी बीस्ट कार से राजपथ पर आए। सुरक्षा के अंदरूनी घेरे में भी अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी के लोग भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बनाकर सक्रिय रहे। इतना ही नहीं ओबामा और मोदी ने ऑल इंडिया रेडियो पर देश की जनता को संबोधित भी किया (मन की बात)। द्विपक्षीय वार्ता में भी गर्मजोशी के साफ संकेत दिखे।

बदल रही है दुनिया

दुनिया बदल रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 45 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यूरोपीय देशों के आर्थिक प्रतिबंध, कच्चे तेल की कीमत गिरने से रूस की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। चीन, यूरोप और जापान की आर्थिक रफ्तार सुस्त चल रही है, जबकि अमेरिका आर्थिक मंदी से उबरने के दौर में है। कच्चे तेल की घट रही कीमतों के पीछे भी अमेरिका की सोच बताई जा रही है, जबकि इसे भारत के लिए सुनहरा अवसर माना जा रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों की माने तो भारत अपनी वृद्धि दर में दो प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी कर सकता है। खपत आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सकता है। समझा जा रहा है कि यह आर्थिक परिदृश्य दुनिया का भी चेहरा बदलेगा।

क्षेत्रीय, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बात

भारत आतंकवाद से पीडि़त देश है। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आतंकवाद तेजी से अपना पैर पसार रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति ओबामा के साथ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी तय है। अमेरिका अगले साल तक अफगानिस्तान से अपनी फौज को वापस बुलाने की प्रक्रिया में है। अफगानिस्तान के निर्माण में भारत ने अमेरिका की पहल पर अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में भारत की भी कुछ गंभीर चिंताएं हैं। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के जरिए जारी ‘छद्म युद्ध’ की भारत को कीमत चुकानी पड़ रही है। समझा जा रहा है कि राष्ट्रपति ओबामा इसके बाबत सख्त संदेश दे सकते हैं।

एस. जयशंकर का बढ़ा कद

अमेरिका में भारत के राजदूत एस. जयशंकर ने फिर बड़ी कामयाबी पाई। एस. जयशंकर भारत अमेरिका के बीच परमाणु करार को अमली जामा पहनाने वाले शिल्पकारों में रहे हैं। बताते हैं पिछले साल जैसे ही उन्हें प्रधानमंत्री की ओबामा को गणतंत्र दिवस का मेहमान बनाने की इच्छा का पता चला वह प्रयासों में जुट गए। गणतंत्र दिवस, इसका महत्व और इसमें ओबामा की मौजूदगी से अमेरिकी अधिकारी को अवगत कराया और सफल हो गए। सूत्र बताते हैं कि जयशंकर के इन प्रयासों की पीएमओ में भी सराहना हो रही है।

सुरक्षा एजेंसियों ने खूब बेले पापड़

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक राष्ट्रपति ओबामा अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं। इराक में सक्रिय आईएसआईएस, अल-कायदा, तालिबान, पाकिस्तान का तहरीके तालिबान पाकिस्तान, लश्करे तैय्यबा, जैश-ए- मोहम्मद, अंतर्राष्ट्रीय संगठन हमास समेत अन्य उनकी सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ये संगठन नई दिल्ली से लेकर आगरा तक ओबामा को निशाने पर ले सकते हैं। इसके लिए ‘लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट, छोटी मिसाइल या फिर आस-पास की इमारत’ से हमला हो सकता है। आत्मघाती दस्ता दहशतगर्दी मचा सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के साथ मिलकर सुरक्षा के मानक तैयार किए। करीब आधी दिल्ली और आगरा में ताज के पास के इलाके को अभेद्य किले में तब्दील करने का खाका तैयार हुआ। राजपथ को 150 से अधिक सीसीटीवी तथा लुटियन जोन, इंडिया गेट, सरदार पटेल मार्ग, तिलक मार्ग, लाल किला और आस-पास के इलाके को करीब 15,000 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के 1500 लोगों ने भी जिम्मा संभाला और मौर्या शेरटन (ओबामा के ठहरने का स्थान) को भी सुरक्षा कवच में तब्दील कर दिया।

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