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शुभ बेला

आचार्य आर.एस. पंवार ने भारतीय विद्या भवन से ज्योतिष ज्ञान प्राप्त कर उसके प्रकाश से समाज को रोशन करने का संकल्प किया। वह भारतीय विद्या भवन के ज्योतिष संस्थान में ज्योतिष ज्ञान के जिज्ञासुओं को इस प्राचीन विद्या की शिक्षा दे रहे हैं।
दिन की सबसे ‘शुभ घड़ी’ को मुहूर्त कहा जाता है। खासकर दीवाली की रात्रि, जब पावन समय पर पूजा प्रारंभ की जाती है। समय की गणना करने का यह तरीका ‘चौघडिय़ा मुहुर्त’ कहलाता है। दिन की एक निश्चित समय सीमा को चौघडिय़ा कहा जाता है। चौघडि़य़ा 7 तरह के होते हैं। इन्हें अमृत, शुभ, लाभ, चल, उद्वेग, रोग और काल के नाम से जाना जाता है। ‘अमृत’, ‘शुभ’ और ‘लाभ’ चौघडिय़ा भाग्यशाली माने जाते हैं। ‘चल’ को मध्यवर्ती माना जाता है। ‘उद्वेग’, ‘रोग’ और ‘काल’ को प्रतिकूल माना जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच, दिन को 8 खंडों में विभक्त किया जाता है। हर खंड चौघडिय़ा के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक दिन में विभिन्न तरह के चौघडिय़ा, दो बार आते हैं। रात्रि की गणना की प्रक्रिया भी यही है।

दिन और रात के चौघडिय़ों का अनुक्रम, प्रत्येक दिन बदलता रहता है। प्रत्येक दिन का अनुक्रम वही रहता है। उदाहरण के लिए –
सूर्योदय का समय : 6.30 बजे
सूर्यास्त का समय : 5.30 बजे
पूरे दिन की लंबाई : 6.30 बजे से 5.30 बजे = 660 मिनट
चौघडिय़ा : 660/8 = 82.5 मिनट = 1 घंटा 22.5 मिनट

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