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मरूभूमि में मोदी पर मारामारी

मोदी की बारी आने पर तो ऐसा लगा कि रैली में मौजूद लोगों पर उनका जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है। हालात यह हो गए कि लगातार नारों से विचलित मोदी बीच में थोड़ी देर के लिए हाथ जोड़कर मौन हो गए। इसी कारण अपने चिर-परिचित अंदाज और लय ताल से कुछ उखड़े मोदी ने वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा की पुण्यायी तथा गहलोत एवं केन्द्र की कांग्रेसनीत सरकार पर कड़े प्रहार भी किए।एथेन्स ओलम्पिक में निशानेबाजी में भारत को रजत पदक दिलाने वाले राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़ वर्तमान भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी को निर्णायक नेतृत्वकर्ता मानकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए हैं।भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा के समापन पर 10 सितम्बर को जयपुर में सम्पन्न विशाल रैली में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और चुनाव अभियान समिति के प्रमुख नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में जयपुर के पूर्व राजघराने की बेटी दीया कुमारी राज्यवद्र्धन राठौड़ तथा पूर्व कुलपति बी.एल. चौधरी के भाजपा में शामिल होने की घोषणा की गई। राजनाथ सिंह और मोदी ने पुष्पहार से उनका स्वागत किया। राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले में जन्मे 43 वर्षीय कर्नल राज्यवद्र्धन 23 वर्षों की सैन्य सेवा से निवृत्त होकर राजनीति की नई भूमिका (अग्निपरीक्षा) में सामने आये हैं। उनका कहना है कि देश को आज निर्णायक नेतृत्व की जरूरत है और उन्हें यह नेतृत्व क्षमता नरेन्द्र मोदी एवं वसुन्धरा राजे में दिखाई देती है। मोदी ऐसे नेता हैं जो एक नए जनरल की मानिंद मोर्चे पर नेतृत्व करते हुए राष्ट्र की गरिमा बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। वह देश को चमका सकते हैं।

इधर पिछले एक पखवाड़े से भाजपा नेता और कार्यकर्ता तथा युवाओं की टीम इस रैली को सफल बनाने में तन्मयता से जुटी हुई थी। उधर रैली की पूर्व संध्या पर राज्य के प्रमुख टी.वी. चैनल पर वरिष्ठ पत्रकार गोपाल शर्मा ने नरेन्द्र मोदी के साहस की एक घटना सुनाई। तब मोदी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा के संयोजक थे। मथुरा से चली एकता यात्रा की बस को उग्रवादियों ने जालंधर के पास निशाना बनाया। चार यात्री शहीद हो गए। जिला प्रशासन ने सभा के लिए मना किया। लेकिन नरेन्द्र मोदी नहीं डिगे और सभा में उग्रवादियों को ललकारा- जिसमें जितना दम है वह उतनी ताकत लगा ले, अब तक ऐसी कोई गोली नहीं बनी जो हमारे विचारों को छलनी कर दे। जिस किसी ने मां का दूध पिया है तो वह एकता यात्रा को रोक कर दिखा दे….. हम संपूर्ण राष्ट्र के नागरिकों के आशीर्वाद का कवच लेकर श्रीनगर जा रहे हैं। 26 जनवरी को दुनिया की कोई ताकत हमें लाल चौक पर तिरंगा फहराने से नहीं रोक पायेगी। और उन्होंने जो कहा वही कर दिखाया।

राजनीति में नरेन्द्र मोदी के बढ़ते प्रभाव और रैली से राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव पर प्रभाव के बारे में जब गोपाल शर्मा से सवाल पूछा गया तो चैनल ने उनके जवाब में केवल मोदी की अनदेखी वाले कथन पर जोर दिया। इसी तरह कुछ समाचार पत्रों में फोटो सहित ऐसी खबरे छपी कि होर्डिंग्स में मोदी को हीरो नहीं बनाया गया। गहलोत के खुले समर्थक एक अखबार में तो यह कयास लगाया गया कि शीर्ष स्तर पर पार्टी में उथल-पुथल में वसुन्धरा राजे जयपुर रैली के बाद मोदी से दूरी बनाने की तैयारी में है।

लेकिन रैली का नजारा अजब था। मोदी की एक झलक पाने और उन्हें सुनने को बेताब पार्टी कार्यकर्ता एवं जनता सुबह से अमरूदों का बाग में जुटने लगी थी। 38 डिग्री तापमान में मोदी पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ जब रैली मंच पर पहुंचे तो उनकी जय-जयकार से समूचा वातावरण गुंजित हो गया। केवल मोदी को देखने-सुनने के लिए उत्सुक युवा मोदी के नारे लगाते रहे। इसी माहौल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे ने औपचारिक स्वागत भाषण की रस्म अदायगी की और गहलोत सरकार पर निशाना साधा।

मौके की नजाकत को समझते हुए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने समझदारी दिखाई। वसुन्धरा के भाषण के बाद जब उनके नाम की घोषणा की गई तो उनके इशारे पर पहले मोदी माइक पर आये और भारत माता की जय के नारों के साथ युवाओं को आराम से बैठकर भाषण सुनने की गुहार की। उन्होंने मुख्य पंडाल के टेंट की पाइपों पर चढ़े युवकों को नीचे उतरने की सलाह दी ताकि किसी को चोट न लग जाये। भाषण शुरू करने से पहले राजनाथ सिंह ने अपने गले की माला मोदी को पहनाकर उनके वर्चस्व का अभिनंदन किया। वह यहीं तक नहीं रूके। उन्होंने मोदी का नाम लेकर बुलन्द आवाज में कहा कि उन्होंने जवानी का ऐसा तूफान नहीं देखा जब किसी राजनेता के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा हो। वह देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं और राजनीति के महारथी हैं। गुजरात के पुलिस अधिकारी वंजारा के पत्र की चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हताश कांग्रेस पार्टी मोदी की लोकप्रिय छवि घूमिल करने में जुटी है लेकिन पूरी पार्टी और देश का युवा उनके साथ खड़ा है। वह गुजरात मॉडल की तरह देश के विकास को नया आयाम देंगे। उन्होंने गहलोत सरकार को असफल और वसुन्धरा को भावी मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि वही राजस्थान का विकास कर सकती हैं।

मोदी की बारी आने पर तो ऐसा लगा कि रैली में मौजूद लोगों पर उनका जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है। हालात यह हो गए कि लगातार नारों से विचलित मोदी बीच में थोड़ी देर के लिए हाथ जोड़कर मौन हो गए। इसी कारण अपने चिर-परिचित अंदाज और लय ताल से कुछ उखड़े मोदी ने वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा की पुण्यायी तथा गहलोत एवं केन्द्र की कांग्रेसनीत सरकार पर कड़े प्रहार भी किए। मोदी का कहना था कि राजस्थान और देश में बदलाव की आंधी बह रही है जिससे कांग्रेसराज को चुनाव में उखाड़ा जा सकता है। नेता, नैतिकता, नीति और नीयत विहीन कांग्रेस के लिये भ्रष्टाचार नजराना है और यह उसका गहना है। अधिक भ्रष्टाचार करने वाला आगे बढ़ता है, इसलिए कांग्रेस नेता जहर से जहर को मारने की बातें कर रहे हैं। कांग्रेस मुक्त देश से ही भ्रष्टाचार मिट सकेगा। आजादी से पहले देशभक्ति में डूबी कांग्रेस अब एक परिवार तक सीमित हो गई है। गहरी सोच समझ तथा शब्दों की नाप-तोल में माहिर यह चतुर राजनेता भाषण के आखिर में अति उत्साहित युवाओं को रिझाने में सफल रहा।

देश की दुर्दशा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए मोदी ने युवाओं से कहा कि 40 फीसदी मतदाता युवा हैं जिनकी आयु तीस बरस से कम है। कांग्रेस युवाओं को महज वोटर मानती है पर भाजपा युवा को पॉवर मानती है जो राष्ट्र की शक्ति हैं। आप भारत के भाग्य विधाता हैं। उन्होंने युवाओं से हाथ उठवाकर संकल्प करवाया कि वे मतदान करने योग्य मतदाताओं के नाम रजिस्टर्ड करवाकर उन्हें मतदान बूथ तक लाने की मुहिम में पूरी निष्ठा से जुटेंगे और राजस्थान से होते हुए देश में परिवर्तन लाने की मुहिम में कामयाब होंगे। राजस्थान रंग लाएगा तो देश भी दम दिखाएगा।

रैली की संख्या को लेकर तरह-तरह के दावे-प्रतिदावे किए जा रहे हैं। मोटे तौर पर यह माना जा रहा है कि इसमें दो से ढ़ाई लाख लोग शामिल हुए और यह जयपुर की अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक रैली रही है। अमरूदों का बाग तथा जनपथ पर शहीद स्मारक के सामने खुले मैदान पर टेंट शामियाना लगाया गया था। पार्टी सूत्रों के अनुसार मुख्य पण्डाल में साढ़े तीन हजार से छ: हजार लोगों के बैठने के लिए लगभग चालीस ब्लॉक बनाये गये थे। मुख्य मंच के दांयी-बांयी और दस-दस फीट की दूरी पर पार्टी नेताओं के लिए मंच बनाये गये थे। पुलिस ने भी ढ़ाई लाख की संख्या आंकी है। भाजपा ने मोदी को सुनने के लिए शहर में स्थान-स्थान पर बड़ी स्क्रीन लगाई थी। टी.वी. चैनल पर भी लाखों लोगों ने मोदी को उत्सुकता से सुना। कई इलाकों में बिजली बंद रहने की शिकायतों के चलते लोग पूरा भाषण सुनने से वंचित रहे। नरेन्द्र मोदी करीब ढ़ाई घंटे जयपुर की धरती पर रहे। मोदी के भाषण की समाप्ति के बाद अमरूदों के बाग से भीड़ का जो रैला निकला उसने गुलाबी नगर के यातायात को करीब 5 घंटे तक जाम कर दिया।

इस रैली में पाकिस्तान से लगते जैसलमेर जिले के सांकड़ा से लेकर आदिवासी डूंगरपुर, बांसवाड़ा तथा मध्यप्रदेश से लगते हुए धौलपुर जिले से कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटा। अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं ने गुलाबी दुपट्टे तथा परम्परागत टोपी धारी मुस्लिमों ने रैली में शिरकत की। पहले सुराज संकल्प यात्रा और इसकी समापन रैली में बूथ स्तर पर युवाओं सहित कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से वसुन्धरा राजे ने अपनी राजनैतिक ताकत और होर्डिंग्स आदि के माध्यम से लोकप्रियता को बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। रैली की व्यवस्था और मंच संचालन में राजे के विश्वासपात्रों को तरजीह मिली। उनके मुखर विरोधी भाजपा विधायक दल के उपनेता रहे घनश्याम तिवाड़ी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामदास अग्रवाल, सांसद ओम माथुर उपेक्षित से रहे। इन नेताओं ने मंच के पीछे विश्राम कक्ष से भाषण सुनना मुनासिब समझा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच की यह दूरी तथा यात्रा एवं रैली के बहाने विधानसभा चुनाव के टिकटार्थियों में ”एक अनार सौ बीमार’’ वाली कहावत को चरितार्थ किये जाने में आने वाली व्यावहारिक समस्या को दूर करना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती होगा। बहरहाल वसुन्धरा राजे चुनाव में पार्टी की खेवनहार होंगी।

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और चुनाव अभियान समिति के मुखिया नरेन्द्र मोदी ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने के साथ 2014 में दिल्ली पहुंचने का संकल्प और अपना पक्का इरादा व्यक्त किया। ठेठ दक्षिण में हैदराबाद और छत्तीसगढ़ में लालकिलानुमा मंच के बाद नरेन्द्र मोदी ने जयपुर रैली से हुंकार दी है। यह भी अद्भुत संयोग है कि राजस्थान से स्वामी विवेकानन्द नाम ग्रहण करने वाले नरेन्द्र ने 120 बरस पहले अमेरीका के शिकागो में वेदान्त और सनातन धर्म की ध्वजा फहराई थी। वर्ष 1991 में जयपुर अधिवेशन में राम-राज और रोटी की उद्घोषणा करके भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में केन्द्र में दस्तक देने की दिशा में पहल की थी। नरेन्द्र मोदी भी नई उम्मीद और नई सोच के साथ नये तेवर में इस अभियान में अब ”दिल्ली दूर नहीं’’ के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

 

गुलाब बत्रा

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