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चौथी बारी, कांग्रेस भारी- डॉ. ए. के. वालिया

चुनावों के राजनीतिक परिदृश्य पर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अशोक कुमार वालिया से उदय इंडिया के कार्यकारी संपादक श्रीकान्त शर्मा की बेबाक बातचीत के अंश :

दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, आपको चुनावी परिदृश्य क्या लग रहा है?
दिल्ली में कांग्रेस लगातार तीन बार चुनावों में विजयी रही है। कांग्रेस चौथी बार भी विजयी रहेगी। इसका मुख्य कारण दिल्ली में जो मुख्यरूप से विकास हुआ है और दिल्लीवासियों को जो सुविधाएं मिली हैं, वह कांग्रेस के राज में मिली हैं।

इन चुनावों में कांग्रेस किन मुद्दों को लेकर दिल्ली की जनता के सामने जा रही है?
मुख्य मुद्दा तो विकास है। उसके साथ-साथ बिजली, पेयजल, बेहतर सुविधाएं, अन्नश्री योजना और भोजन के अधिकार का जो बिल दिल्ली सरकार ने पारित किया है, ये सब दिल्ली के गरीब तबके के हितों के लिए है। ंभोजन के अधिकार के तहत गरीब आदमी को तीन रुपए प्रति किलोग्राम चावल, दो रुपए प्रति किलोग्राम गेहूं, एक रुपए प्रति किलोग्राम मोटा अनाज दिया जा रहा है। कुल मिला कर 70-80 रुपयों में उसे पूरे परिवार का एक महीने का अनाज मिल जाता है। स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क पुस्तकें और सभी सुविधाएं नि:शुल्क हैं। वृद्धों, हैंडीकैप लोगों और विधवाओं को 1500 रुपए महीना पेंशन दी जा रही है। बेसहारा लोगों को भी दिल्ली सरकार की ओर से पेंशन मिल रही है। यदि किसी व्यक्ति को कार्डियक सर्जरी, रीनल सर्जरी या लीवर सर्जरी की जरूरत हो तो सरकार उसके इलाज का खर्च उठाती है।

आप दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं, आप की अपनी उपलब्धियों क्या हैं?
मैं 1998 से 2003 तक भी स्वास्थ्य मंत्री था। उस वक्त 12 अस्पताल, जो प्रात: 9 से दोपहर एक बजे तक चलते थे, उन्हें 24 घंटे काम करने वाला बनाया। उनमें इमरजेंसी सुविधाएं शुरू कराई गईं। इनके अतिरिक्त अन्य 12 अस्पतालों के निर्माण कार्य शुरू कराए गए। उस वक्त भी अनेक अन्य चिकित्सा सुविधाएं जनता को दी गईं। चिकित्सा में सुधार हुआ। अब जब पुन: यह जिम्मेदारी दी गई, तो बचे हुए कामों को करना शुरू किया गया। राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में निदेशकों की नियुक्ति की गई और अब कोशिश यह है कि निकट भविष्य में ये अस्पताल पूर्ण रूप से काम करने लगें। अनेक अस्पतालों के काम पाइपलाइन में हैं, जिनमें द्वारका, सरिता विहार, मादीपुर के अस्पताल हैं। आंबेडकर अस्पताल का काम भी शुरू किया गया है। पेंटावेलेंट टीके शुरू किए गए हैं। दिल्ली में 150 एम्बुलेंस दी गई हैं। डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई है। गरीबों को यह सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध है, जबकि आम आदमी को मात्र 1073 रुपए ही देने पड़ते हैं।

डायबिटिज और हाइपरटेंशन के मामले बढ़ रहे हैं, जिनसे लोगों की किडनी खराब हो रही है। उन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। ब्लड ट्रांस्फ्यूजन के लिए नई तकनीक के इस्तेमाल की जाएगी। एचआईवी, हैपिटाइटिस-बी जल्दी से डायग्नोज करने के लिए भी नई तकनीक लाई गई है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन से होने वाली बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

अरविन्द केजरीवाली की पार्टी ‘आप’ इन चुनावों को कितना प्रभावित कर पाएगी?
मैं नहीं समझता कि अरविन्द केजरीवाल की पार्टी का अधिक प्रभाव दिल्ली के चुनावों पर होगा। दिल्ली विधानसभा के चुनावों में सीधी टक्कर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच ही होगी। जनता इन दोनों ही पार्टियों में से किसी न किसी को ही दिल्ली की सत्ता सौंपेगी। केजरीवाल की पार्टी अभी काफी पैसा खर्च कर रही है। किराए पर स्थान लेकर दफ्तर खोले जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं को भी काफी अच्छी पेमेंट की जा रही है। लेकिन इस सब का परिणाम कुछ खास निकलने वाला नहीं है।

भाजपा पूरी कोशिश में है कि दिल्ली की सत्ता उसे मिल जाए। आपको क्या लगता है कि टक्कर कितनी जबर्दस्त होगी? कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस इस बार सत्ता के लिए देखती रह जाए।
भाजपा से टक्कर है, परन्तु दिल्ली की जनता जानती है और शिद्दत से महसूस करती है कि दिल्ली में जितना विकास हुआ है, वह कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस अनेक विकास योजना लाई है। कांग्रेस को विकास कराने का अनुभव हैं। 1993 से 1998 तक दिल्ली में भाजपा का राज रहा, लेकिन तब दिल्ली में भाजपा ने एक मेगावाट भी बिजली नहीं बढ़ाई। एक एमजीडी पानी भी नहीं बढ़ाया गया। नए अस्पताल भी नहीं खोले गए। भाजपा ने कोई सुविधा जनता को उपलब्ध नहीं कराई। भाजपा बस घोषणा करती रहती है, जबकि कांग्रेस जनता के हितों के लिए लगातार काम करती रहती है और परिणाम देती है।

कांग्रेस लगातार तीन टर्म से दिल्ली में सत्ता में है। इतने वर्षों से सत्ता में होने के कारण इंकम्बेंसी फैक्टर भी पैदा हो गया है। इंकम्बेंसी फैक्टर इस बार कांग्रेस के खिलाफ कितना काम करेगा?
इंकम्बेंसी फैक्टर तो है। परन्तु उसके साथ-साथ विकास का फैक्टर भी है। दिल्ली की जनता चाहती है कि उसका जीवन सुविधाजनक और बेहतर बने। उसकी परेशानी कोई सुनने वाला हो। उसकी समस्याओं के हल निकाले जाएं। कांग्रेस में चाहे कोई विधायक हो, मंत्री हो, चाहे मुख्यमंत्री हो, सब जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए तत्पर रहते हैं।

कांग्रेस कितनी सीटें जीत सकेगी दिल्ली विधानसभा के चुनावों में इस बार?
कांग्रेस विजयी होगी, यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं। लेकिन कितनी सीटें कांग्रेस जीत सकेगी, उसकी गणना करना मेरे लिए कठिन है। यह मैं जरूर दावा कर सकता हूं कि इस बार भी कांग्रेस शानदार बहुमत लेकर फिर दिल्ली की जनता की सेवा के लिए तत्पर होगी।

कांग्रेस की अच्छाइयां तो गिनवा दीं, लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस के समक्ष कमियां अथवा चुनौतियां क्या हैं?
सबसे बड़ी चुनौती यमुना को साफ करना है। वाटर सप्लाई और सीवरेज सिस्टम को बेहतर बनाना है। पार्किंग सुविधा बढ़ाई जाएगी। बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूलों और कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जाएगी। नए अस्पताल, खासतौर पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खोले जाएंगे। शहरी कूड़े-कचरे का समुचित प्रबंधन किए जाने की जरूरत है। यह जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम की है। दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने की जरूरत है, जिससे वर्षा का पानी सड़कों पर खड़ा न हो।

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