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दिलकश होगी दिल्ली की जंग

दिल्ली के चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होने जा रहे हैं। दिलकश नजारों की फेहरिश्त अभी से तैयार होने लगी है। हर तरफ से सितारों की झमाझम और वादों की बरसात होने जा रही है। चुनाव पूर्व सर्वे भी अनिश्चितता की भविष्यवाणी करके मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। उनके अनुसार मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के लिए चौथी बार सत्ता में काबिज होना आसान नहीं है, तो भाजपा के लिए सरकार बनाने की राह में कम मुश्किलें नहीं हैं। ऐसी आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि केजरीवाल की ‘आप’ दोनों की राह में रुकावटें पैदा कर सकती है। कांग्रेस के लिए सत्ता विरोधी रुझान के साथ अंदरूनी कलह समस्या है तो भाजपा में विजय गोयल पूरी पार्टी को साथ लेकर नहीं चल पा रहे हैं।

विभिन्न चुनावी सर्वेक्षणों के नतीजों ने नवंबर में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की उम्मीदें तो बढ़ाई हैं मगर आशंकाओं और अनिश्चितता के कयासों ने पार्टियों की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं।। हाल में एबीपी-नीलसन द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार दिल्ली में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत है। भाजपा को 32, कांग्रेस को 27, आम आदमी पार्टी को 8 और अन्य को 3 सीटें मिलने की बात कही गई है। दिल्ली के कुल 70 सीटों में से 35 पर कराए गए सर्वे में 26 प्रतिशत मतदाताओं ने विजय गोयल को बेहतर मुख्यमंत्री बताया। वहीं 24 प्रतिशत मतदाताओं ने अरविंद केजरीवाल और 22 प्रतिशत मतदाताओं ने शीला को अपना पसंदीदा बताया।

आम आदमी पार्टी के आने के साथ ही दिल्ली के चुनावी संग्राम त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि कुछ राजनीतिक पंडितों का मामना है कि अरविंद केजरीवाल चुनाव में कुछ खास जलवा नहीं दिखा पाएंगे। वहीं कुछ ‘आप’ की भूमिका वोट काटने वाले की मान रहे हैं जो कांग्रेस और भाजपा दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। भाजपा का तो आरोप ही है कि ‘आप’ को कांग्रेस ने इसलिए खड़ा किया है, ताकि विपक्ष के वोटों का बंटवारा हो सके और कांग्रेस के लिए एक बार फिर सत्ता का रास्ता साफ हो जाए। लेकिन महंगाई और भ्रष्टाचार के आरोप झेल रही शीला सरकार के प्रति लोगों में पहले ही गुस्सा है तो दूसरी तरफ 2008 के चुनाव के दौरान विज्ञापन अभियान पर सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर 19 सितंबर को न्यायालय का फैसला आना है। इस फैसले से यह तय होना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए शीला दीक्षित पर एफआईआर दर्ज हो या नहीं। इससे राष्ट्रमंडल खेल घोटाला सहित शीला दीक्षित की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर विपक्षी दलों का दबाव और बढ़ जाएगा।

ऐसे में लोगों को प्रभावित करने के लिए सितारों की महफिल जमाने और जोड़तोड़ की तैयारी हर तरफ से हो रही है। पंजाबी पॉप सिंगर दलेर मेंहदी, ओखला सीट से राजद विधायक आसिफ मोहम्मद खान और बदरपुर सीट से बसपा विधायक राम सिंह नेताजी का कांग्रेस में शामिल होना इसी रणनीति है। माना जा रहा है कि पी. चिदंबरम पर जूता फेंकने वाले के खिलाफ दलेर मेंहदी को उम्मीदवार बनाया जाएगा। शीला दीक्षित ने जाट नेता बिधुड़ी और उनके समर्थकों को भी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी, लेकिन बिधुड़ी ने भाजपा का दामन थाम लिया। हालांकि भाजपा माहौल को भुनाने और मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने में असफल साबित हो रही है। पार्टी में ही मुख्यमंत्री पद के लिए घमासान में कई धड़े एक-दूसरे की टांग खिंचने में व्यस्त हैं। इस गुटबाजी के कारण भाजपा स्थिति का सही फायदा उठाने में नाकाम हो रही है। दिल्ली भाजपा में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में न सिर्फ विजय गोयल हैं, बल्कि डॉ. हर्षवद्र्धन, विजय कुमार मल्होत्रा, विजेन्द्र गुप्ता आदि के नाम भी शामिल हैं। उम्मीदवारों के चयन को लेकर संशय की स्थिति और पार्टी के उच्च पदाधिकारियों की अनदेखी भाजपा के लिए मुश्किलें भी खड़ी करेगी।

इन दोनों राष्ट्रीय पार्टियों की गलतियों का फायदा उठाने में ‘आप’ पार्टी के अरविंद केजरीवाल जी-जान से जुटे हैं। आम आदमी पार्टी को आम लोगों की पार्टी साबित करने के लिए अरविंद केजरीवाल विद्यार्थी से लेकर ऑटो चालक तक को टिकट दे रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने बिजली बिल नहीं चुकाने की अपील कर आम लोगों को जोड़कर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की। केजरीवाल शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लडऩे की घोषणा भी कर चुके हैं। एक सर्वे की माने तो आम आदमी पार्टी को दिल्ली में 20 सीटें तक मिल सकती हैं। हालांकि इस सर्वे को कई राजनीतिक विश्लेषकों ने हास्यास्पद बताया है।

इस चुनावी माहौल में चुनाव आयोग ने भी अपने रुख को कड़ा करते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने घोषणा की है कि चुनाव प्रचार के दौरान फिल्मी सितारों को बुलाने पर होने वाला खर्च उस पार्टी या उम्मीदवार के चुनावी खर्च में शामिल किए जाएगा। अब देखना यह है कि राजनीतिक घमासान, चुनावी बिसात कौन-सी पार्टी जनता को लुभाने में सफल होती है और दिल्ली का ताज किसके सिर आता है।

 

सुधीर गहलोत

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