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बॉलिवुड में भी अब बजेगा साउथ का डंका

हाल की कई बॉलीवुड फिल्मों की दक्षिण के बाजार में धूम से हिन्दी सिनेमा के लिए नया क्षेत्र खुल गया है। दक्षिण के सितारों के दीवाने हिन्दी पट्टी में भी बढ़ रहे हंै और हिन्दी के सितारों का जलवा दक्षिण में भी पैदा हो रहा है।

पिछले साठ साल में ऐसा पहली बार हुआ जब हिंदी में बनी दो फिल्में उसी दिन दक्षिण के लगभग सभी बड़े सेंटरों में रिलीज हुई, जिस दिन इन फिल्मों को शेष भारत में रिलीज किया गया। ऐसा नहीं, दक्षिण में हिंदी फिल्में रिलीज नहीं होती जवाब है, होती तो है लेकिन इक्का-दुक्का थिएटरों और शहरों में या फिर नॉर्थ, वेस्ट ईस्ट में रिलीज होने के महीनों बाद यहां हिंदी फिल्मों को रिलीज किया जाती है। दूसरी ओर ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के बाद जॉन अब्राहम की थ्रिलर मूवी ‘मद्रास कैफे’ को दक्षिण के अधिकतर सेंटरों धमाकेदार रिलीज किया गया, इतना ही नहीं इन दोनों फिल्मों की प्रोडक्शन कंपनियों ने अपनी इन मेगा बजट फिल्मों को दक्षिण के लगभग सभी सेंटरों पर जबर्दस्त प्रमोट करने में मोटा बजट खर्च किया गया। हम बात कर रहे हैं शाहरुख खान की करीब 80 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट में बनी चेन्नई एक्सप्रेस और जॉन अब्राहम की मद्रास कैफे की। पहली बार इन फिल्मों की प्रोडक्शन कंपनियों ने दक्षिण में प्रमोट करने में अच्छा खासा बजट रखा। फिलहाल, हैदराबाद, बेंगलुरू, कोयंबतूर, तिरुवनंतपुरम सहित चेन्नई और इससे सटे छोटे शहरों में रिलीज इन फिल्मों ने अब बॉलिवुड निर्माताओं को ज्यादा कमाई का नया रास्ता दिखाया है।

इन फिल्मों से पहले बॉलीवुड फिल्में हैदराबाद, बेंगलुरू से जुड़े सेंटरों में तो रिलीज हुआ करतीं, लेकिन इस बार चेन्नई और आसपास के छोटे सेटरों पर चेन्नई एक्सप्रेस औसतन 400 से ज्यादा शो में रिलीज हुई। दरअसल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में पहले से बॉलीवुड फिल्मों का औसत बाजार है, वहीं लंबे अर्से से हिंदी विरोधी माहौल के चलते तमिलनाडु के कई शहरों के सिनेमा मालिक बॉलीवुड फिल्म को रिलीज करने का जोखिम न उठाने में ही समझदारी समझते है। यही वजह रही कि तमिलनाडु के बी और सी सेंटरों के सिनेमाघरों में अगर कभी-कभार हिंदी फिल्म एक दो शो में रिलीज होती तो इन फिल्मों की कलेक्शन बस नाममात्र की होती थी, मुंबई में नई फिल्मों के वितरण अधिकार हासिल करने वाली एक बड़ी नामी कॉरपोरेट कंपनी के नेशनल हेड गिरीश के जौहर कहते हैं कि मैं नहीं मानता कि दक्षिण के बाजार में बॉलीवुड फिल्मों का अलग मार्केट या दर्शकों का वर्ग नहीं है। गिरीश कहते हैं कि हैदराबाद, बेंगलुरू और इससे सटे आसपास के शहरों में हिदी फिल्मों का बड़ा बाजार है। हैदराबाद में तो लगभग सभी हिंदी फिल्मों को चार से ज्यादा शो मिलते है। सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स हॉलों में भी हिंदी फिल्मों को अच्छे खासे शो मिल जाते हैं। आंध्र प्रदेश के कई शहरों और कर्नाटक के कई शहरों में आमिर, शाहरुख, सलमान, हृतिक, अक्षय कुमार, इमरान हाशमी, रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ, प्रियंका चोपड़ा, करीना कपूर, वगैरह के फैन की अच्छी खासी तादाद है। इन्हीं के दम पर इनकी कई फिल्में दक्षिण के इन सेंटरों में भी बॉक्स ऑफिस पर हुई कुल आमदनी का दस से पंद्रह फीसदी शेयर बटोरती हैं। दक्षिणकेसबसे बड़े फिल्म बाजार तमिलनाडु के कई शहरों में अगर शाहरुख खान की चेन्नई एक्सप्रेस पहले दो हफ्तों में बारह से पंद्रह करोड़ की कलेक्शन करती है तो हमें मानना होगा दक्षिण में किंग खान की फिल्म को मिली मोटी कमाई के दम पर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई और कामयाबी का नया इतिहास रचा।

फिलहाल, इस फिल्म की जबर्दस्त कामयाबी और जॉन की फिल्म ‘मद्रास कैफे’ को मिली अच्छी कमाई के बाद पूरी बॉलीवुड के टॉप निर्माताओं की निगाहें अब दक्षिण में मिले नए बाजार पर आ टिकी है। चेन्नई एक्सप्रेस की पब्लिसिटी से जुड़े रहे हिमांशु मिस्त्री कहते हैं कि दक्षिण के सभी सेंटरों में अपनी इस फिल्म को जोरदार ढंग से रिलीज करने का फैसला बेशक चुनौती भरा था, लेकिन हमने फिल्म की कहानी और इसके कलेवर, कहानी को देखने के बाद ऐसा करने का फैसला किया, जो हमारे लि फायदेमंद रहा। अब हम अपने इस फैसले को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। सिद्धार्थ कहते हैं कि बेशक, हमने बड़ा जोखिम उठाया था, क्योंकि ऐसा करने से हमारा बजट लगभग पंद्रह से बीस करोड़ रुपए और ज्यादा बढ़ा, लेकिन कुछ नया करने के लिए जोखिम उठाना बेहद जरूरी है। तमिलनाडु के कुछ सेंटरों में इस फिल्म को तमिल सबटाइटिल के साथ रिलीज किया गया। इस बारे में सिद्धार्थ का जवाब था सभी सेंटरों में सबटाइटिल नहीं है, लेकिन ऐसे कई सेंटर है जहां बरसों बाद या पहली बार हिंदी फिल्म लगी तो हमें उन दर्शकों को भी अपनी फिल्म के साथ जोडऩा था।

फिलहाल, शाहरुख और जॉन अब्राहम द्वारा दिखाए दक्षिण के बाजार पर अब दूसरे निर्माताओं की निगाहें भी टिकी हैं। निर्माता एक्टर जॉन अब्राहम कहते हैं कि अगर दक्षिण का बड़ा बाजार बॉलीवुड फिल्मों को गले लगाता है तो यह दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा। जॉन के मुताबिक दक्षिण में बनी दर्जनों फिल्मों के हिंदी डब वर्जन ने अच्छी कमाई की है। चिरंजीवी, नागार्जुन, रजनीकांत, कमल हासन सहित दक्षिण के कई सितारों की हिंदी दर्शकों में अच्छी पहचान बन चुकी है। अब हिंदी फिल्मों में दक्षिण से आए धनुष और रामचरण अपनी जगह बना चुके है तो दक्षिण में भी हिंदी फिल्मों को अलग पहचान मिलनी चाहिए। जॉन कहते हैं कि अगर दक्षिण के लगभग सभी सेंटरों पर आने वाले दिनों में हिंदी फिल्में प्रदर्शित होने लगें तो हमारी फिल्मों के कलेक्शन का आंकडा बढ़कर तीन-चार सौ करोड़ तक आसानी से पहुंच सकता है।

राकेश रोशन ने अपनी मेगा बजट फिल्म कृष-3 और आदित्य चोपड़ा ने आमिर खान अभिनित धूम-3 के वितरण अधिकार हासिल करने वाली सभी कंपनियों को अभी से अपनी इस फिल्म को बड़े पैमाने पर दक्षिण के लगभग सभी सेंटरों में रिलीज करने की प्लानिंग शुरू करने को कहा है। इन फिल्मों को रिलीज करने वाली कंपनी से जुड़े राकेश पॉल कहते हैं कि इस बार कृष-3 और धूम-3 को दक्षिण के लगभग सभी बड़े शहरों में रिलीज किया जाएगा। दक्षिण के मार्केट से होने वाला बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कमाई के मामले में बॉलीवुड फिल्मों को हॉलीवुड फिल्मों के कलेक्शन के और नजदीक लाने का दम रखता है।

 

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