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फिर से जीतेंगे दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और दिल्ली इकाई के मुखिया विजय गोयल के नेतृत्व में दिल्ली के तालकटोरा गार्डन में भाजपा ने नवम्बर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी बिगुल बजा दिया। इस मौके पर दिल्ली चुनावों के प्रभारी नीतिन गडकरी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, पूर्व अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन सहित अनेक नेता मौजूद थे। प्रस्तुत है दिल्ली के चुनावों में भाजपा के भविष्य के बारे में डॉ. हर्षवर्धन से हुई उदय इंडिया के कार्यकारी संपादक श्रीकान्त शर्मा से हुई बातचीत के मुख्य अंश:

भाजपा ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। मोदी का दिल्ली विधानसभा के चुनावों में पार्टी को कितना लाभ मिल सकेगा?
मोदी को पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने का असर जब पूरे देश पर पड़ेगा तो दिल्ली के चुनावों पर भी निश्चित रूप से उनका बहुत अच्छा असर पडऩा है। हर वर्ग के लोग प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में उनका स्वागत कर रहे है। दिल्ली तो मिनी भारत है। दिल्ली कैसे इस सब से अछूती रह सकती है।

दिल्ली के विधानसभा चुनावों में यदि भाजपा जीत जाती है, तो कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
इस सवाल का उत्तर देने में सक्षम नहीं हूं। लेकिन व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि पार्टी जिस भी नेता को दिल्ली में मुख्यमंत्री के रूप में उचित मानती है तो उसे पब्लिक डोमेन में लाना चाहिए। जनता को पता लगना चाहिए कि चुनावों के बाद भाजपा की ओर से कौन मुख्यमंत्री बनेगा। मीडिया के डोमेन में लाना चाहिए। उसके विचार जनता को पता लगने चाहिए। जनता को इस बात का अधिकार है कि वह अपने भावी नेता के विचारों को जाने। पार्टी के जिस मंच से इस संबंध में फैसला होना है, वह पार्टी का संसदीय बोर्ड है। लेकिन मैं संसदीय बोर्ड का सदस्य भी नहीं हूं। परन्तु मेरा मानना है कि पार्टी के संसदीय बोर्ड को इस बारे में फैसला ले लेना चाहिए।

दिल्ली में जीत के लिए क्या पूरी तरह से मोदी पर ही निर्भर करेंगे?
दिल्ली में चुनाव प्रचारों में भाजपा मोदी जी का जितना भी उपयोग कर सकेगी, करेगी। लेकिन मोदी जी अपना पूरा समय दिल्ली के लिए दे पाएंगे, ऐसा नहीं लगता। उन्हें अपना प्रदेश गुजरात भी देखना है। वह प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी की ओर से उम्मीदवार हैं। उन्हें अन्य राज्यों में भी जाना होगा। जितना भी समय उनसे मिलेगा, उसका पूरा उपयोग किया जाएगा।

मुख्यमंत्री की दौड़ में कौन-कौन से नेता हैं?
इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मुझ से किसी नेता ने आकर नहीं कहा कि वह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। पार्टी को तय करना है कि कौन नेता दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की योग्यता रखता है। पार्टी को सब पता है कि किस नेता में कितनी संभावनाएं हैं। महत्वपूर्ण पद के बारे में पार्टी खुद निर्णय करेगी।

दिल्ली में जनता पिछले तीन चुनावों से भाजपा से रूठी हुई है । इस बार आप को क्या उम्मीद है?
मुझे पूरी उम्मीद है कि इस बार दिल्ली की जनता भाजपा को ही सत्ता सौंपेगी। जनता कांग्रेस के भ्रष्ट शासन से आजादी चाहती है। आपके इस कथन से मैं बिल्कुल सहमत नहीं हूं कि दिल्ली की जनता भाजपा से रूठी हुई है। या शीला दीक्षित की सरकार ने दिल्ली के लिए कुछ बेहतर किया है।

फिर दिल्ली में लगातार तीन चुनावों में शीला दीक्षित की सरकार कैसे जमी हुई है?
शीला दीक्षित की किस्मत हम से बेहतर है। शायद हमारी किस्मत में कुछ कमी है, जिस वजह से ही इस प्रकार का चुनावी फैसला होता है।

इस बार चुनाव जीतने की उम्मीदों का आधार क्या है?
कांग्रेस सरकारें विफल हो गईं। दिल्ली में भी और केन्द्र में भी उनकी विफलता अब जग जाहिर है। शिक्षा, स्वास्थ्य, जनसुविधाएं, महंगाई को नियन्त्रित करना, पानी, बिजली, सड़कें, यमुना की सफाई, कॉलोनियों की समस्याएं, मकान बनाने के लक्ष्य, जल भराव, किसी की भी बात करो, कांग्रेस की सरकारों ने जनता की परेशानियों में इजाफा ही किया है, उन्हें कम नहीं किया है। लोकायुक्त के फैसले ने तो शीला सरकार को पूरी तरह एक्सपोज ही कर दिया है। सरकार की कार्यप्रणाली से जनता में रोष है, जबर्दस्त गुस्सा है। वही गुस्सा चुनावों में मतदान के दौरान फूटेगा।

तो आप कांग्रेस की नेगेटिविटी के सहारे सत्ता में आने का स्वप्न देख रहे हैं?
खाली कांग्रेस की नेगेटिविटी की बात नहीं है। कांग्रेस सत्ता में है और जनता परेशान और दुखी हो कर उसके खिलाफ गुस्से में है तो भाजपा को उसके विकल्प के तौर पर जनता देखेगी ही। जनता को भाजपा से बहुत आशाएं हैं और भाजपा भी जनता की आशाओं को पूरा करने के लिए तैयार है। इसमें गलत क्या है? भाजपा दिल्ली की जनता को स्वच्छ और ईमानदार सुशासन देगी। अटलजी की केन्द्र में एनडीए सरकार इसका उदाहरण रही है। मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीस गढ़ की भाजपा सरकारों के स्वच्छ प्रशासन और विकास के कार्यों से पूरा देश प्रभावित है। सुशासन और विकास के मॉडल लागू किए जाने पर दिल्ली वालों का भी हक है।

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