ब्रेकिंग न्यूज़ 

राजनीति में ईमानदारी और विकास को लेकर चलना पड़ेगा: प्रभात झा

राजनीति में ईमानदारी और विकास को लेकर चलना पड़ेगा: प्रभात झा

हमारा तो ये आधारभूत सिद्धांत रहा है कि आज का विरोधी कल का समर्थक है। आज जो विरोधी हैं उन्हें हम अपना समर्थक बनाने में लगे हुए हैं।’’ भाजपा के दिल्ली प्रदेश के प्रभारी प्रभात झा ने उदय इंडिया के साथ हुई एक बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। प्रस्तुत हैं उस वार्ता के कुछ प्रमुख अंश:-

अंतिम क्षणों में किरण बेदी को चुनकर भाजपा ने अपने कैडर को किस तरह का संदेश दिया है?
हमारा कैडर राजनीतिक तौर पर बहुत शार्प है। वह शार्प ही नहीं है, रिजल्ट ऑरिएंटेड भी है। आज जरूरत है दिल्ली में सरकार बनाने की। मोदीजी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बहुत बड़ी बात उभरकर सामने आई है कि कौन मैक्सिमम ईमानदार है और कौन मिनिमम ईमानदार है। यहां तक चर्चा सुनी है। दिल्ली को आज एक ईमानदार चेहरा की जरूरत है। राजनीतिक चेहरे के सिवाय भी एक ईमानदार चेहरा होना चाहिए और किरण बेदी एक वल्र्ड फेमस चेहरा हंै। वह देश की पहली महिला आईपीएस हैं। इसलिए पार्टी ने जनता का पल्स देखा। 5 साल तक आईआरएस रहे केजरीवाल के खिलाफ पार्टी के लिए एक रणनीति के तहत किरण बेदीजी को तैयार किया गया। वो मैंटली प्रिपेयर हुईं और फिर उन्हे पार्टी में लाया गया। उसके बाद वैसा उत्साह आया, जैसा कि जनता चाहती थी।

दिल्ली भाजपा का गढ़ रही है। पार्टी के पास प्रदेश में वरिष्ठ नेता भी हैं। फिर भाजपा को मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा चुनने में परेशानी क्यों हुई?
अगर गढ़ है तो इतने साल सरकार क्यों नहीं आई? कभी-कभी ठहराव आ जाता है। देश में भी हम 10 साल से नहीं आ रहे थे। अटल जी ने बहुत अच्छा काम किया था। इसलिए परिस्थितियों का राजनीतिक आंकलन सदैव करते रहना चाहिए। राजनीति में अपने दल की हैसियत और अपनेे दल की मजबूती कभी भी इस तरह इग्नोर नहीं करनी चाहिए और हमेशा ध्यान देना चाहिए कि हमारी ताकत कैसी है। उसे देखकर ही निर्णय लेना चाहिए। इसलिए मैं मानता हूं कि दिल्ली के सभी नेताओं से चर्चा करने के बाद ही ये निर्णय लिया गया है। हमारी पार्टी ही ऐसा प्रयोग कर सकती है। हमारी पार्टी में भारतीय सेना के जर्नल आए, मुंबई के पुलिस कमिश्नर आए। ऐसे ईमानदारी लोगों को पब्लिक प्लेटफॉर्म देना चाहिए।

07-02-2015

क्या इससे ये संदेश नहीं जायेगा कि दिल्ली में मौजूद भाजपा नेताओं में ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जो केजरीवाल के सामने खड़ा हो सके?
ऐसा नहीं है। क्या हर्षवद्र्धन मंत्री नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो क्यों उनको सांसद का चुनाव लड़वाते? ये तो नैसर्गिक नेतृत्व की लड़ाई है। विजय गोयल राज्यसभा में हैं। उनकी महत्ता को समझते हुए पार्टी ने उन्हे राजस्थान से लाकर जोड़ा। विजेद्र गुप्ता चुनाव लड़ रहे हैं, जगदीश मुखी चुनाव लड़ रहे हैं। हर चीज के साथ एक परेशानी रहती है। उस परेशानी से निपटने की पार्टी की कोशिश रहती है। दिल्ली एक यूटी है। यहां पर ऐसे स्वभाव का व्यक्ति चाहिए, जोकि डीजीपी रहा है, दिल्ली के गली कूंचे को समझता हो। इसलिए ऐसा कहा गया। एक जाना-पहचाना चेहरा है बेदी का। पिछले 40 सालों तक पुलिस में रही हंै वो। ईमानदार छवि की महिला हैं। अगर कोई लंबे समय तक कोयले में रहे और फिर भी उसके ऊपर कोयले की कालिख ना लगे तो इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है!

दिल्ली में ऑटो से लेकर दीवार तक, हर जगह जगदीश मुखी ने खुद को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया? क्या ये सच है?
जगदीश मुखीजी ने कभी खुद को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट नहीं किया और न ही पार्टी ने उन्हें प्रोजेक्ट किया। हां… अरविंद केजरीवाल की बदमाशी के चलते जरूर उन्हे बदनाम करने की कोशिश की गई।

क्या भाजपा विचारधारा के साथ समझौता करने की स्थिति में आ गई है, जो रातों-रात मुख्यमंत्री के चेहरे का निर्णय ले लिया?
क्या अपको लगता है कि हमारी पार्टी ने आईडियोलॉजी छोड़ दी है? ऐसा नहीं है। हमारी पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल रातों-रात आये और सुबह टिकट मिल गया। रामविलास पासवान आए, हमने उनका स्वागत किया। राजनीति में अपने दल की ताकत भी देखी जाती है।

07-02-2015

मुख्यमंत्री बनाने और टिकट देने में बहुत अंतर है। भाजपा मुख्यमंत्री उसे बनाती है जो विचारधारा से जुड़ा रहा हो। क्या ऐसा नहीं है?
किरण बेदीजी हमारी पार्टी की आईडियोलॉजी को बहुत अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने कभी ये नहीं कहा कि वे नेता हैं। उन्होंने बीजेपी के केन्द्र के काम को पिछले 6 महीनों में देखा है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के काम को देखा है और प्रभावित भी हुईं हैं। आगे आने के लिए दल और देश दोनों की जरूरत होती है। दिल्ली को एक अच्छे मुख्यमंत्री की जरूरत है, इसलिए हमने ये निर्णय लिया है।  हमारा कैडर समझदार है, इसलिए हमारे कैडर में इस निर्णय पर किसी ने भी चूं तक नहीं किया। पार्लियमेंट्री बोर्ड के इस निर्णय को इसीलिए सभी ने स्वीकारा है।

अण्णा आंदोलन में केजरीवाल और बेदी दोनों साथ थे। बेदी ने कई बार भाजपा और संघ पर निशाना भी साधा है। क्या कहना चाहेंगे आप?
मैं इस बात से सहमत हूं। उस वक्त लोगों ने क्या-क्या नहीं कहा गुजरात के चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी को। लेकिन जैसे-जैसे इंसान करीब आता जाता है, उसके विचार बदलते जाते हैं। आज क्या कहा किरण बेदी ने कि राष्ट्रवादी संगठन का नाम है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ। ये बहुत बड़ा अंतर है। हमारा संगठन कहता है कि आज का विरोधी, कल का समर्थक है। हम विरोधी को अपना  समर्थक बनाने में लगे हुए हैं।

क्या आपको लगता है कि संघ और भाजपा के कैडर इस फैसले से खुश होंगे?
हां, बिल्कुल शत-प्रतिशत लोग खुश होंगे। बीजेपी में सभी बहुत खुश हैं। सबको लग रहा है कि किरण बेदी बहुत अच्छी महिला हैं। राजनीति में ईमादारी और विकास को लेकर चलना पड़ेगा। नरेद्र मोदी जिस तरह की जिंदगी जीते हैं, उसी तरह की जिंदगी जीने वाले लोग आगे बढ़ पायेंगे। फर्जीवाड़े वाले लोग चाहे किसी भी पार्टी के हों, नहीं चल पायेंगे।

किन मुद्दों के साथ भाजपा चुनाव मैदान में है?
दिल्ली भारत की राजधानी है, न कि किसी राज्य की राजधानी है। दिल्ली का अभी तक सही विकास नहीं हो पाया है। यहां केरल भी रहता है, उड़ीसा भी रहता है, मध्यप्रदेश भी रहता है। यहां सभी राज्यों के लोग रहते हैं। दिल्ली छोटा भारत है। इसलिए दिल्ली का भौगोलिक विकास ऐसा होना चाहिए, सांस्कृतिक विकास ऐसा होना चाहिए। इसके इतिहास को समझना चाहिए, इतिहास से जुडऩा चाहिए। हम न्यूर्याक जाते हैं, टोकियो जाते हैं तो कहते हैं कि वहां ऐसा है, वैसा है। लेकिन दिल्ली के बारे में लोग ऐसा नहीं कहते। दिल्ली में आज भी लोग पानी के लिए लड़ रहे हैं, बिजली के लिए लड़ रहे हैं, सड़कों के लिए लड़ रहे हंै। आजादी के आज 67 साल बाद भी प्राथमिक जरूरतों के लिए जूझ रही है दिल्ली। इससे ज्यादा दुर्भाग्य की बात क्या होगी? इसलिए दिल्ली पर फोकस है बीजेपी का। आज दिल्ली नगर निगम में बीजेपी की सरकार है, केंद्र में बीजेपी की सरकार है और अगर राज्य में भी बीजेपी आ जाती है तो तीनों तरफ से पार्टी दिल्ली का विकास करेगी।
पिछले चुनावों में आआपा ने दिल्ली के जातिवादी समीकरण को तोड़ दिया था। इससे भाजपा का वोट भी आआपा मिला। अब यदि दलित और मुसलमान वोट कांग्रेस को जा रहा है, ऐसे में भाजपा कैसे जीत हासिल करेगी? 
मैं इस बात को लेकर बिल्कुल सामान्य हूं कि बीजेपी के सारे वोट बीजेपी को ही मिलेंगे। रही बात आंकड़ों की तो अगर नरेन्द्र मोदीजी आंकड़ों के हिसाब से चलते तो वो कभी जीतकर नहीं आते। इस वक्त दिल्ली की 90 प्रतिशत जनता कह रही है कि मोदी को लाओ, किरण बेदी को लाओ, भाजपा को लाओ। ये तो जनता की मांग है। एक चैनल ने रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर लोगों का मत जानने के लिए एक साक्षत्कार किया जिसमें ये साफ निकलकर आया है कि दिल्ली में लोग बेदी और भाजपा को चाहते हैं। उनके लिए ये किसी अवसर से कम नहीं हैं। ये चुनाव किसी जाति या समीकरण पर आधारित नहीं रह गया है, काफी आगे निकल चुका है।

आपने कहा कि किरण बेदी नरेन्द्र मोदी की कार्य-प्रणाली से प्रभावित होकर पार्टी में आईं हैं, जबकि वो पहले मोदी को कई बार कटघरे में खड़ा कर चुकी हैं…
रामविलास पासवान ने क्या-क्या नहीं कहा पार्टी के विषय में… राजनीति में हम ये क्यों कहते हैं कि हमारा आज का विरोधी कल का समर्थक बने…. किरण बेदी ने जो भी कुछ कहा एक निष्पक्ष नजरिये से कहा होगा। उस वक्त उनका मंच अलग था और उनका नजरिया भी अलग था। लेकिन, पिछले 6 महीने से वो नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को देख रही हैं। उससे जो उनका मन परिर्वतन हुआ है उसको कैसे रोक देंगे आप? वे समाज में स्वीकृत व्यक्तित्व हैं, इसलिए भाजपा ने उन्हें स्वीकार किया है।

अण्णा ने किरण बेदी पर बोलने से मना कर दिया है। क्या वजह हो सकती है?
नहीं, उन्होंने मना नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अरविंद के ऊपर तो बहुत बार बोला है, पर किरण पर नहीं बोलेंगे। सब लोग जानते हैं कि वो एक ईमानदार महिला हैं और ईमानदारी किसी में भी हो सकती है। जब समाज के सामने ये ईमानदारी आती है तो समाज उसे स्वीकार करता ही है।

купить процессор для ноутбука asuswobs.ua

Leave a Reply

Your email address will not be published.