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हृदय रोग पर विशेष हृदय रोग : आधुनिकजीवन-शैली का अभिशाप

लगभग 7 करोड़ व्यक्ति हमारे देश में हृदय रोग से पीडि़त हैं। हृदय रोग से लगभग 50 लाख रोगियों की मृत्यु प्रतिवर्ष हो जाती है। लगभग 30 प्रतिशत लोग दिल के दौरे के शिकार हो जाते हैं, उनकी आयु 65 वर्ष से कम है। युवावस्था एवं कम आयु में हृदय रोग का कारण आधुनिक जीवन-शैली है। शारीरिक श्रम की कमी, आलस्य, मानसिक अशांति, चिंता, तनाव, धूम्रपान, शराब और मादक पदार्थों के सेवन से हम हृदय रोग को निमंत्रण देते हैं।

भारतीय मूल के हृदय रोगी की विशेषताएं हैं—
भारतवर्ष में हृदय रोग विदेशी मूल के रोगियों की तुलना में 10 वर्ष कम उम्र में देखा गया है। अमेरिका में हृदय रोग के 60 प्रतिशत रोगियों की आयु 65 वर्ष से अधिक, यूरोप में 60 वर्ष लेकिन भारत में 50 वर्ष की आयु में ही दिल का दौरा देखा गया है।
रोग की तीव्रता तथा दो या तीन मुख्य धमनियों में 70 प्रतिशत से अधिक अवरोध देखा गया है।
भारत में हृदय रोग आनुवंशिक कारणों से अधिक होता है। हृदय रोग की तीव्रता एवं उग्रता का मुख्य कारण है—
मधुमेह
hdl की कमी
कोलेस्ट्रॉल की अधिकता
लाइपो प्रोटीन-ए की अधिक मात्रा

हृदय रोग के प्रारंभिक लक्षण की अनदेखी करने पर रोग तीव्र एवं उग्र हो जाता है और अचानक ही दिल का दौरा प्राणघातक हो सकता है। धमनी में लचीलापन कम होना या धमनी अवरुद्ध होने से रक्त का प्रवाह अचानक थम जाता है। रोग की तीव्रता के कारण हृदय की मांसपेशी निर्जीव हो जाती है। फलस्वरूप हृदय के रक्त को पंप करने की क्षमता घटकर 25 प्रतिशत रह जाती है। एंजियोग्राफी, बाईपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार काफी खर्चीले हैं। केवल 5 प्रतिशत भारतीय ही अपने स्वास्थ्य का बीमा करवाते हैं। पिछले बीस वर्षों में भारतीय नागरिकों में 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में दिल के दौरे की वृद्धि दर 20 गुना अधिक है। 1971 में कालीकट में दिल के दौरे के शिकार 80 लोगों में एक ही 40 वर्ष से कम आयु वाला होता था, लेकिन अब यह अनुपात 4 का हो गया है।

हृदय रोग से बचाव के कारक
नियमित शारीरिक श्रम से दिल के दौरे की संभावना 12 प्रतिशत कम हो सकती है। इसी प्रकार 5-6 बार दिन में फल तथा सब्जियों के सेवन से 14 प्रतिशत की कमी होती है। यदि मदिरा का सेवन संतुलित हो तो 7 प्रतिशत की कमी दिल के दौरे के रोगियों में होती है।

मधुमेह, एवं दिल का दौरा
मधुमेह के 25 से 50 प्रतिशत रोगियों को दिल का दौरा अचानक बिना लक्षण के होता है।
कम आयु के मधुमेह रोगियों में दिल के दौरे की संभावना अधिक होती है।
45 वर्ष से कम आयु के मधुमेह रोगी में दिल का दौरा का खतरा 14 गुना अधिक होता है।
45 वर्ष से 64 वर्ष की आयु के मधुमेह रोगियों में तीन गुना अधिक दिल का दौरा पड़ता है।
65 वर्ष से अधिक आयु के मधुमेह रोगियों में दो गुना अधिक दिल का दौरा।

यदि एक से अधिक खतरे के कारण हैं तो उतनी अधिक दिल के दौरे की संभावना बढ़ जाती है। यदि मधुमेह का रोगी धूम्रपान करता है तथा उच्च रक्तचाप भी रहता है तो दिल के दौरे की संभावना 16 गुना अधिक होती है। यदि ldl कोलेस्ट्रॉल अधिक है तथा hdl कोलेस्ट्रॉल (लाभदायक) कम है तो दिल के दौरे की संभावना 32 गुना बढ़ जाती है। यदि रोगी मोटापे से ग्रस्त है तो दिल के दौरे की संभावना 64 गुना बढ़ जाती है। अब यह अनुसंधान द्वारा सिद्ध हो चुका है कि जीवन-शैली की अनियमितता ही दिल के दौरे का मुख्य कारण है। जीवन-शैली में समय रहते यदि आवश्यक परिवर्तन कर लिया जाए तो हृदय रोग की संभावना 95 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

आधुनिक जीवन-शैली का अभिशाप हृदय रोग (दिल के दौरे) महामारी का रूप लेता जा रहा है। अपने आचार-विचार, विहार, आहार एवं जीवन-शैली में परिवर्तन कर 96 प्रतिशत से अधिक प्रतिशत लोग दिल के दौरे से अपना बचाव कर सकते हैं। रोग निवारण उपचार से उत्तम है को चरितार्थ कर तनाव रहित सद्भाव, सहज जीवन व्ययतीत कर हम स्वस्थ, सुखी, निरोग रह सकते हैं।

 

डॉ. अनिल चतुर्वेदी

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