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लक्ष्य के बिना निवेश बेमानी

सही लक्ष्य और सीधी-सरल योजनाओं में निवेश ही भविष्य की पूंजी सुरक्षित करता है। शेयर बाजार से जुड़ी योजनाओं और बाजार में बिना पुख्ता जानकारी के निवेश जोखिम भरा होता है।
अपने पैसे की बचत और निवेश की योजना बनाने में सबसे महत्वपूर्ण है कि अपनी तमाम योजनाओं को पूर्णरूप से सीधी-सादी रखें। सीधे ढंग से समझ में आने वाली बनाई गई योजनाएं बिल्कुल ठीक रहती हैं। यदि योजना उलझी हुई होती है, तो योजना बनाने वाला खुद ही उसमें उलझ जाता है। इसलिए वित्त योजनाएं बिल्कुल सीधे-सादे ढंग से बनाई जानी चाहिए, जिनका लक्ष्य स्पष्ट हो। यदि किसी ऐसे युवक की वित्त संबंधी योजना बनानी हो जिसने अभी अपना कैरियर शुरू किया है तो चार बातें ध्यान में रखनी पड़ती हैं। पहला है रिस्क कवर। इसमें टर्म प्लान लेना होता है, जो व्यक्ति के रिस्क को कवर करता है। हर साल उसका प्रीमियम दिया जाता है। जैसे कि एक युवक ने अभी अपना कैरियर शुरू किया है और उसकी सालाना आय पांच लाख रुपए है। उसे अपनी सालाना आय का बीस गुना कवर लेना चाहिए। यानी एक करोड़ रुपए का कवर लेना चाहिए।

यह टर्म इंश्योरेंस लेने का लाभ है कि व्यक्ति आरंभ से ही अपना रिस्क कवर कर रहा है। जैसे ही व्यक्ति कमाने लगता है, उसकी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं जो पहले ही दिन से शुरू हो जाती हैं। 20 गुना कवर परिवार के लिए पर्याप्त होता है, जो खुदा न खास्ता उस व्यक्ति को कुछ हो जाए तो उसके बाद परिवार को चिंता न हो कि अब क्या होगा। धीरे-धीरे 20-25 सालों में बचत कर जमा करने से वह बड़ा कैपिटल बनता जाएगा। पहले दिन से ही वह कैपिटल तो उस व्यक्ति के पास नहीं होगा, लेकिन उसे बनाने की वजहें जरूर होंगी। वे वजहें चाहे उस व्यक्ति की पत्नी हो या फिर उसके बुजुर्ग मां-बाप हों। इसके अतिरिक्त कैरियर की शुरुआत में ही अपने लिए एक आपात कोष बनाना चाहिए। इस आपात कोष का अर्थ है कि व्यक्ति के छह महीने के खर्च के बराबर पैसा उसके पास रहे। इसके लिए बैंक में रिकरिंग खाते से छह महीने के खर्च के बराबर पैसा उस खाते में जमा हो जाए। छह महीने के खर्च के बराबर पैसा जमा हो जाने के बाद ही निवेश के बारे में सोचना चाहिए।

वित्त योजना बनाने में तीसरा तत्व मेडीक्लेम पॉलिसी होनी चाहिए। मेडीक्लेम पॉलिसी से व्यक्ति को कभी भी अस्पताल में भर्ती होना हुआ तो उसे आर्थिक समस्या की चिंता नहीं हो। मेडीक्लेम कितना हो, इस बारे में निर्णय व्यक्ति की वार्षिक आय पर निर्भर करेगा। यदि किसी की सालाना आय पांच लाख रुपए है तो उस सालाना आय के बराबर यानी पांच लाख रुपए के बराबर मेडीक्लेम होना चाहिए। आजकल फैमिली फलोटर चलता है जिसमें व्यक्ति स्वयं तो कवर होता ही है, साथ ही उसकी पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं। इसका मतलब है कि एक साल में वह व्यक्ति और उसका परिवार पांच लाख रुपए के बराबर कवर प्रयोग कर सकते हैं। मेडीक्लेम पॉलिसी से व्यक्ति और उसका परिवार अपने घर के आसपास के किसी भी अस्पताल में उचित इलाज करा सकता है। इसके बाद निवेश का नंबर आता है। निवेश के लिए लक्ष्य निर्धारित योजना बनानी चाहिए। इसका मतलब है कि यह योजना संपत्ति बनाने के लिए निवेश करना चाहिए। इसके लिए किसी भी डाइवर्सिफाइड फंड में एक एसआईपी ले लें। एसआईपी से मतलब है-सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। यह एसआईपी चार-पांच साल के लिए लेना चाहिए। वैसे उचित सलाह तो यह है कि जितने दिन भी बचत की जा सकती है, उतने समय इसे जारी रखनी चाहिए।

शेयर बाजार में सीधे तब तक निवेश नहीं करना चाहिए, जब तक कि निवेशक को उसके बारे में पर्याप्त जानकारी न हो। बाजार की नब्ज पहचानना आसान नहीं होता। आमतौर पर व्यक्ति जब बाजार ऊपर होता है तो स्टॉक बेचने की बजाय उसे अधिक रुपयों में खरीदने लगता है और जब नीचे होता है तो घबरा कर खरीदने की बजाय बेचने लगता है। निवेश का सूत्र है कि अपने लालच और डर को संतुलित किया जाए।

शकील अहमद

(लेखक निवेश योजनाकार विशेषज्ञ है)

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