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साइबर स्पेस को चाहिए सुदृढ़ रक्षा कवच

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। देश की अर्थव्यवस्था भी अब इससे अछूती नहीं है। इसमें कोई शक नहीं है कि यह प्रौद्योगिकी कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ाने का एक बहुत बड़ा साधन है, लेकिन दुनिया में हैकिंग, डाटा चोरी और खुफियागिरी की बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए कंप्यूटर जगत अथवा साइबर स्पेस में विचरना आसान नहीं है। साइबर स्पेस को सुरक्षित रखना और उसका प्रयोग करने वालों का भरोसा बनाए रखना, एक कठिन काम है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर स्पेस की सुरक्षा को सुनिश्चित करना बहुत बड़ी चुनौती है। अब तक साइबर सुरक्षा से जुड़े सारे कदम सरकार और उसकी एजेंसियों तक ही सीमत थे, लेकिन देश में आईटी सेक्टर के तेजी से विकास और आईटी के विश्व बाजार में भारत की बढ़ती हुई भूमिका को देखते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति की जरूरत महसूस की जा रही थी। एक ऐसी नीति की दरकार थी, जो सरकार के अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों, गैर-सरकारी संस्थानों और आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा आवश्यकतों को पूरा कर सके। सरकार ने सभी पक्षकारों और जनता से राय लेने के बाद एक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति तैयार की है।

इस साइबर सुरक्षा नीति का दायरा काफी बड़ा और व्यापक कर दिया गया है। सभी सामरिक, सैनिक, सरकारी और व्यापारिक संसाधनों की साइबर सुरक्षा को समन्वित करने के लिए एक राष्ट्रीय नोडल एजेंसी गठित की जाएगी। इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर ऐसे तंत्र कायम करना है जो चौबीस घंटे काम करेंगे। ये तंत्र सूचना -संचार ढांचे को होने वाले खतरों के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाएंगे और संकट-प्रबंधन के अलावा, पलटवार और उचित जवाब की तैयारी करेंगे। देश के महत्वपूर्ण सूचना ढांचे की सुरक्षा बढऩे के लिए एक नेशनल क्रिटिकल इन्फार्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर स्थापित किया जाएगा। महत्वपूर्ण सूचना ढांचे में सरकार और प्राइवेट सेक्टर के सभी नेटवर्क सम्मिलित किए जाएंगे।

नई राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति में राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया है। यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि भारत में दूरसंचार सेवाओं के अलावा वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं परिवहन और विमानन तथा स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत बड़ा हिस्सा निजी हाथों में है। ये सभी सेवाएं साइबर हमलों की शिकार हो सकती हैं। कई तरह की घटनाएं साइबर स्पेस को प्रभावित कर सकती हैं चाहें वे इरादतन हों या दुर्घटनावश हों। साइबर स्पेस में डाटा के आदान-प्रदान का इस्तेमाल गलत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। कंप्यूटर वायरस या दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर छोड़ कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पैदा की जा सकती है। पहचान की चोरी, फिशिंग, साइबर आतंकवाद और डेटा लीकेज साइबर हमलों के कुछ उदाहरण हैं। इन हमलों में मोबाइल उपकरणों और स्मार्टफोनों को भी निशाना बनाया जा सकता है। बड़े पैमाने पर किए जाने वाले साइबर हमले महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियों के काम में रुकावटें उत्पन्न करके सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सेवाओं को अस्त-व्यस्त कर सकते हैं। इससे आगे चल कर अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा जरुरी है। यदि हम साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करने में असफल रहे तो देश में आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।

नई नीति में 14 लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिनमें साइबर सुरक्षा के लिए पांच साल के भीतर पांच लाख आईटी प्रोफेशनल तैयार करना शामिल है। यह एक बहुत बड़ा लक्ष्य है और साइबर सुरक्षा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, इस लक्ष्य को पूरा करना एक टेढ़ा काम है। कहने को तो भारत एक बड़ी आईटी शक्ति है, लेकिन साइबर स्पेस की सुरक्षा के लिए सिर्फ गिने-चुने ही लोग तैनात किए गए हैं। यह बात सचमुच विचलित करने वाली है कि अभी सरकारी साइबर सुरक्षा बल में सिर्फ 556 विशेषज्ञ तैनात हैं, जबकि चीन ने इस काम के लिए 1.25 लाख और अमेरिका ने 91080 विशेषज्ञ तैनात कर रखे हैं।

साइबर स्पेस की रक्षा के लिए सुदृढ़ कवच तभी बन सकता है जब हम अपने उपकरणों और सिस्टमों में भारत निर्मित चिपों का इस्तेमाल करें। यहां हम अभी लाचार हैं। भारत में अधिकांश मोबाइल उपकरण आयात किए जाते हैं। इन उपकरणों में प्रयुक्त होने वाली चिपें विदेश में निर्मित की जाती हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगे सॉफ्टवेयर के कोड भी विदेशियों के हाथ में हैं। चिपों का स्वदेशीकरण एक बहुत ही कठिन लक्ष्य है। इलेक्ट्रॉनिक्स में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे कर ही सरकार साइबर सुरक्षा के बुनियादी आधार को मजबूत कर सकती है। यह अच्छी बात है कि सरकार ने नई नीति के जरिए अपने लक्ष्य पहचान लिए हैं। अब उसे पूरी मुस्तैदी के साथ इन लक्ष्यों को हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।

 

मुकुल व्यास

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