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चुनावी बिसात पर गहलोत का ब्रह्मास्त्र

जयपुर में मोदी की विशाल रैली के जवाब में गहलोत ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जनसभाओं और शिलान्यास कार्यक्रमों के आयोजन से विकास कार्यों पर फोकस कर चुनावी राजनीति में बड़ी लाइन खींचने की कोशिश की।
लोकप्रियता के पायदान पर आमजन को राहत देने वाली योजनाओं की फेहरिस्त में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े निवेश के दावे के साथ यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के हाथों देश के अत्याधुनिक तेल-शोधक कारखाने की नींव रखकर विधानसभा चुनाव की चौसर पर ब्रह्मास्त्र चल दिया है।

भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा के समापन पर जयपुर में 10 सितंबर को चुनावी शंखनाद के रूप में भाजपा चुनाव अभियान के प्रमुख नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की विशाल रैली के जरिये गहलोत के समक्ष राजनीतिक चुनौती खड़ी की थी। लेकिन राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी गहलोत ने मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती सहित जयपुर-अजमेर संभाग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जनसभाओं के आयोजन से अपनी सरकार के विकास कार्यों पर फोकस कर चुनावी राजनीति में बड़ी लाइन खींच दी है। हालांकि गहलोत के विश्वस्त मंत्री बाबूलाल नागर तथा विधायक उदय लाल आंजना पर दुष्कर्म के आरोप कुछ किरकिरी जरूर हो रही है।

मोदी की रैली के जवाब में अगले ही दिन कांगेस के परंपरागत गढ़ मेवाड़ के सलूम्बर में आदिवासी किसान सम्मेलन में राहुल गांधी को बुलाया गया। अगले सप्ताह कोटा संभाग में सहरिया आदिवासी बहुल बारां में विशाल जनसभा को संबोधित करने से पहले राहुल ने छबड़ा, कालीसिंध विद्युत परियोजनाओं के लोकार्पण के साथ वर्षों से लंबित परवन वृहद् सिंचाई परियोजना की आधारशिला भी रखी।

गहलोत ने इसी श्रृंखला में जयपुर मेट्रो रेल के ट्रायल को हरी झंडी दिखाने की रस्म अदायगी की तो 21 सितंबर को प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह से चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक भूमिगत मेट्रो रेल के लिए शिलान्यास करवाया। प्रधानमंत्री ने जवाहरलाल नेहरू सौर ऊर्जा मिशन के तहत राजस्थान की परियोजना का लोकार्पण किया तथा अजमेर जिले में मार्बल सिटी किशनगढ़ में हवाई अड्डे की आधारशिला रखी। वर्ष 2020 तक लगभग एक सौ छोटे शहरों कस्बों को हवाई सेवा से जोडऩे की महत्वाकांक्षी योजना में किशनगढ़ पहला एयरपोर्ट होगा।

इसी तरह सोनिया गांधी ने 22 सितंबर को सीमावर्ती बाड़मेर जिले की औद्योगिक एवं टेक्सटाइल नगरी बालोतरा के समीप पचपदरा के सिजियाली में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लि. के रिफाइनरी सह पेट्रोकैमिकल इकाई का शिलान्यास किया। इसी दिन उन्होंने अजमेर संभाग के भीलवाड़ा जिले के रूपाहेली में चंबल भीलवाड़ा वृहद् पेयजल परियोजना तथा मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमू) कोच फैक्ट्री का भी शिलान्यास किया।

इन सभी समारोहों की खास बात रही कि प्रधानमंत्री सहित कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के नाम का जिक्र तक नहीं किया। अलबत्ता वह तथा भाजपा उनके निशाने पर जरूर रहे। यूपीए सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों एवं योजनाओं के साथ खाद्य सुरक्षा एवं भूमि अधिग्रहण कानून की चर्चा कर कांग्रेस के किसान हितैषी होने के दावे को दोहराया गया।

राज्य सरकार ने इन योजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोहों के प्रचार प्रसार में कोई कसर बाकी नहीं रखी। समाचार पत्रों में पूरे पृष्ठों के विज्ञापनों की बाढ़ सी लगा दी गई। रिफाइनरी के विज्ञापन में तो मुख्यमंत्री गहलोत की ओर से कहा गया, राजस्थान का सपना आज सच होने जा रहा है, हमारा थार समूचे भारत के विकास को ईंधन प्रदान करेगा।

इधर सभी-राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। उधर सत्तारूढ़ दल आचार संहिता लागू होने से पहले विभिन्न योजनाओं के लोकार्पण या शिलान्यास समारोहों के आयोजन को युद्ध स्तर पर अंजाम दे रहा है। गहलोत ने चुनावी वर्ष को ध्यान में रखते हुए सत्ता की चौथी वर्षगांठ पर पिंकसिटी प्रेस क्लब में विकास से जुड़ी एक दर्जन योजनाओं एवं कार्यक्रमों की घोषणा करके चालू वित्तीय वर्ष के बजट को महज चुनावी बजट की आलोचना से परे कर दिया। इससे विपक्षी दलों की स्थिति अजीबोगरीब हो गई है कि वे इनका विरोध भी नहीं कर सकते।

चुनाव के लिए प्रत्याशियों को उतारने में बहुजन समाज पार्टी पहल कर चुकी है। 200 सदस्यीय विधानसभा के लिए बसपा ने अभी तक 164 प्रत्याशी घोषित किए हैं, इनमें अधिकतर चेहरे नए तथा अनजान हैं। पिछले चुनाव में बसपा के छह विधायक चुने गए थे, जिन्होंने गहलोत सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाई और कांग्रेस में शामिल हो गए। इसलिए बसपा सोच समझकर अपनी चाल चल रही है। तीसरे मोर्चे से जुड़ी माकपा ने पचास सीटों पर चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। इस पार्टी के तीन विधायकों में दो सीकर तथा एक हनुमानगढ़ जिले से है और हर मुद्दे पर विधानसभा के अंदर या बाहर उनकी सक्रिय भूमिका निभाई है। माकपा को अपनी ताकत बढऩे का भरोसा है।

पिछले चुनाव में भाजपा के बागी डा. किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी पत्नी गोलमा देवी समेत कुछ निर्दलीय विधायकों की जीत में अहम भूमिका निभाकर भाजपा की सत्ता वापसी की आशाओं पर पानी फेर दिया था। बाद में मीणा खुद दौसा से लोकसभा के लिए चुने गये और गहलोत सरकार से अपनी पत्नी गोलमा देवी का त्यागपत्र दिलवाकर कांग्रेस और भाजपा दोनों के विरोध में प्रदेशव्यापी अभियान में जुट गए हैं। वे मीणा मतदाताओं से सीधा संवाद करके उन्हें समझा रहे है कि बारी-बारी सत्ता की लूटखसोट में कांग्रेस और भाजपा के कुचक्र को इस बार तोडऩा है। मीणा का दावा है कि अगली सरकार का गठन उनके रहमोकरम पर निर्भर करेगा। नए दल के गठन की अपेक्षा उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) के साथ जुडऩा मुनासिब समझा। उनकी विधायक पत्नी गोलमा देवी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेष कोषाध्यक्ष एवं पूर्व प्रवक्ता सुनील भार्गव ने भाजपा से त्यागपत्र देकर राजपा का दामन थामा है और उन्हें प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। डा. किरोड़ी मीणा की तरह भार्गव भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षित कार्यकर्ता हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर वसुंधरा राजे के आसीन होने की जद्दोजहद में भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी को यह उम्मीद थी कि उन्हें पदोन्नति मिलेगी। लेकिन नेता प्रतिपक्ष पद का ताज वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया को मिला और तिवाड़ी की दुरियां बढ़ती गईं। तिवाड़ी ने धौलपुर के राजमहल में वसुंधरा राजे की भाजपाइयों से फीडबैक बैठकों में उन पर निशाने साधे। इस वैमनस्यता का असर तेरहवीं विधानसभा के आखरी ग्यारवें सत्र में भी देखने को मिला जब वसुंधरा राजे चार दिनों तक चले सत्र में सदन में नहीं आईं। मोदी की जयपुर रैली में भी तिवाड़ी के साथ-साथ पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रामदास अग्रवाल तथा ओम माथुर को तरजीह नहीं मिली। इन नेताओं की नाराजगी को पार्टी की चुनाव तैयारी के लिए दुखद माना गया।

शायद डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा के प्रदेश कार्यालय में जयपुर जिले की 21 सितंबर की बैठक में भाग लेने आए घनश्याम तिवाड़ी और वसुंधरा राजे की बातचीत सुर्खियां बन गईं। वसुंधरा राजे के सिपहसालार सांसद भूपेंद्र यादव और मुख्य सचेतक राजेंद्र राठौड़ की मौजूदगी में हुई वार्ता के बाद तिवाड़ी तथा वसुंधरा की मंत्रणा नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत दे गई। इसी कड़ी में वसुंधरा के निवास पर पूर्व सांसद रामदास अग्रवाल की भेंट का आपसी गिले शिकवे दूर करने तथा चुनाव में पार्टी की एकजुटता प्रदर्शित करने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

गहलोत सरकार की लोक-लुभावन एवं जन हितैषी योजनाओं की सीधी आलोचना के उलट वसुंधरा राजे सरकार को सभी मोर्चे पर नाकाम बताती रही हैं। उन्होंने दस लाख लोगों को रोजगार देने का वायदा करते हुए नया चुनावी पासा फेंका है। गौरतलब है कि इस चुनाव में नए मतदाता सरकार की तकदीर का फैसला करने वाले हैं। स्वाभाविक रूप से पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाता उत्साह से भरे हुए हैं। वरिष्ठ चुनाव विश्लेषक जीवी एल नरसिंह राव का यह मानना है कि मंहगाई, शिक्षा और काम के अवसर इत्यादि मुद्दे युवाओं से सीधे जुड़े हैं जबकि भ्रष्ट और अनिर्णय वाली सरकारें इन्हें नाराज करती हैं।

एक विश्लेषण के अनुसार राजस्थान में लगभग 4.29 करोड़ मतदाताओं में से 34 फीसदी से अधिक मतदाता (1.47 करोड़) ऐसे हैं जिनकी आयु 28 वर्ष से कम है। मतदाताओं में बीस फीसदी या 85.96 लाख की आयु 18 से 23 साल के बीच आंकी गई है और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की अनुमानित संख्या करीब पौने पच्चीस लाख होगी। अब इन मतदाताओं का झुकाव किस ओर रहता है इस पर चुनावी हार जीत निर्भर करेगी। वर्ष 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले 2.35 फीसदी वोटों का इजाफा कर 40 सीटें और जोड़ ली। इन्हीं युवा मतदाताओं को पार्टी से जोडऩे के लिए भाजपा ने नव मतदाता सम्पर्क अभियान आरम्भ किया है। 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान का शुभारम्भ करते हुए प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे ने नए मतदाताओं को सम्मानित करते हुए उन्हें वोट की अहमियत बताई और नया नारा दिया, जागो तुम 18 के हो गए हो। उठो तुम वोटर हो, खड़े हो तुम नागरिक हो, जाओ यह वोट करने का समय है। ध्यान देने की बात है कि यह नारा स्वामी विवेकानंद के ‘प्रतिष्ठित जागृत….. के उद्घोष के अनुरूप है। इस वर्ष स्वामी जी की 150 वी जंयती मनाई जा रही है और उन्हें विवेकानन्द नाम भी राजस्थान से मिला था। उधर राज्य सरकार द्वारा गठित राजस्थान युवा बोर्ड ने भी युवाओं से अपने गांव के विकास के लिए आगे आने का आह्वान करते हुए राजीव गांधी यूथ क्लबों के उपनियमों के तहत राजीव गांधी यूथ क्लब बनाने की अपील की है। श्रेष्ठ कार्य करने वाले क्लबों को पांच हजार रुपए का अनुदान दिया जायेगा।

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में तेजी आएगी। राहुल गांधी ने अगस्त माह में ही पार्टी प्रत्याशियों के चयन की संभावना जताई थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पहले प्रदेश और संभाग स्तर पर फिर जिलों में कांग्रेस पर्यवेक्षक भेजे गए जिन्होंने पार्टी संगठन तथा सरकार के कामकाज की पड़ताल के साथ संभावित प्रत्याशियों के बारे में फीडबैक लिया। प्रदेश चुनाव समिति की तीन बैठकों तथा उपसमितियों के माध्यम से पैनलों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।

अब 24 और 25 सितंबर को इंटरव्यू की प्रक्रिया अपनाई गई है। मजे की बात यह है कि उपसमितियों में शामिल कांग्रेसजनों में भी अधिकतर टिकटार्थी है तब भला पैनल तैयार करने का क्या हश्र होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है। दरअसल प्रत्याशी चयन प्रक्रिया की तुलना क्रिकेट मैदान की फील्ंिडग से की जा रही है। लब्बोलुवाब यह है कि प्रत्याशी चयन पर आखिरी मोहर पार्टी आलाकमान की लगनी है। अभी तक साफ होना है कि इसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पसंद और उन्हें किस हद तक फ्री हैण्ड मिलना है। बीच में पार्टी ने सिफारिश करने वाले बड़े नेताओं को यह ताकीद कर दिया था कि वह सिफारिश करने के साथ प्रत्याशी की जीत की गारंटी भी लें।

बहरहाल, अब युवा मतदाताओं के विवेक पर निर्भर है कि वे सत्ता की होड़ में स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों की अनदेखी करने वाले राजनीतिक दलों तथा कथित मजबूरी या पर्दे के पीछे छुपी साजिश को भांपकर किस तरह सुयोग्य उम्मीदवारों के चयन का मार्ग प्रशस्त कर संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती में अहम भूमिका निभा पाते हैं।

 

गुलाब बत्रा

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