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अर्थव्यवस्था को संभालने के कुछ सुझाव

अर्थव्यवस्था आईसीयू में पड़ी है और अगर फौरन जीवन रक्षक उपाय नहीं किए गए तो देश को भयावह संकट से बचाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि तत्काल नई आर्थिक सुधार नीति पर अमल करके देश को बचाया जाए। संकट के कुछ मोटे उदाहरण ऐसे समझे जा सकते हैं।

अल्पकालिक विदेशी कर्ज के अनुपात में विदेशी मुद्रा भंडार सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और 1990 के दौर में पहुंच गया है। 1990 के बाद पहली बार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में चालू खाते का घाटा सबसे अधिक 4 प्रतिशत पर पहुंच गया है। केंद्र और राज्यों के बजट में सकल राजकोषीय घाटा जीडीपी के 12 प्रतिशत पर खतरे का निशान छू रहा है। यह 2005 में पारित वित्तीय प्रबंधन कानून के तहत एक अपराध है। पार्टिसिपेटरी नोट्स के भुगतान के साथ पूंजी का बाहर पलायन शुरू हो गया है। इसके साथ हवाला कारोबार और सिंगापुर तथा दुबई में रुपए की बिकवाली से रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। देश में घरेलू बचत दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है जो 2004 में विश्व में सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया था। इसके अलावा गैर-वित्तीय क्षेत्रों में पैसा लगाने की प्रवृत्ति बढऩे से निवेश घट रहा है और बेरोजगारी बढ़ रही है। इससे जीडीपी की दर में भारी गिरावट दिख रही है।

अर्थव्यवस्था में इन प्रवृत्तियों के बढऩे का कारण सरकार में भारी भ्रष्टाचार और मनरेगा तथा खाद्य सुरक्षा कानून जैसी योजनाओं में भारी सरकारी खर्च में इजाफा है। इन तमाम वजहों से आज भारतीय अर्थव्यवस्था आईसीयू में पहुंच गई है। अगर नई सुधार नीति नहीं अपनाई गई तो देश के लोग कर्ज के भुगतान से भारी संकट का सामना करने को बाध्य होंगे। अभी हाल में आरबीआई के नए गवर्नर रघुराम राजन ने रेपो दरें बढ़ाकर पश्चिमी नजरिए का ही परिचय दिया है। इससे संकट और भीषण होने वाला है। यह वही नीति है जिससे अमेरिका में मंदी आई थी। जब निवेश वातावरण और पूंजी बाजार को ऑक्सीजन की दरकार थी, डॉक्टर राजन ने उसे बेहोशी की दवा दे दी। इस तरह 2014 के मध्य तक केंद्र सरकार कर्ज के जाल में डूब जाएगी।

आम चुनावों के बाद एनडीए सरकार को इस कर्ज जाल को तोडऩे के लिए कई कठोर नीतियां अपनानी पड़ेंगी, ताकि देश की अर्थव्यवस्था फिर सेहतमंद होकर 10 प्रतिशत के विकास दर की ओर बढ़े। ऐसे में मेरा सुझाव है कि अगली एनडीए सरकार को ये उपाय करने चाहिए:

आयकर में सभी तरह की बचत पर रियायत दी जाए। इससे बचत की दर में इजाफा होगा (अगर प्रत्यक्ष आय कर खत्म कर दिया जाए तो लोगों को कम से कम कागजी कार्रवाई करनी होगी)।
सभी वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क और सीमा कर को नए सिरे से व्याख्यायित करके सिर्फ बड़े 25 वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगाया जाए। -70 देशों में, जहां गुप्त खाते रखे जाते हैं, सभी भारतीयों के खातों की रकम का राष्ट्रीयकरण किया जाए। इससे 100,000 करोड़ रुपए सरकार खजाने में आ जाएंगे।
पार्टिसिपेटरी नोट को जब्त किया जाए और उसे खत्म किया जाए, सभी हवाला कारोबारियों को गिरफ्तार किया जाए। यूएई, सिंगापुर ओर मकाऊ जैसे देशों में यात्रा के लिए विशेष पासपोर्ट मंजूरी जरूरी की जाए।
इसके अलावा सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी जाए। इसके लिए सिर्फ देश की सुरक्षा और हित की पुख्ता समीक्षा की जाए।
कृषि उत्पादों के लिए इंफ्रास्टक्चर पर विशेष जोर दिया जाए।
सभी नदियों को जोड़कर सिंचाई के साधन पैदा किए जाएं और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार पैदा करने के उपाय किए जाएं।

इससे एफडीआई आएगी, स्थानीय निवेशकों का उत्साह बढ़ेगा और निर्यात में नई तेजी आएगी।

सुब्रह्मण्यम स्वामी

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